उत्तर प्रदेश में मानसून एक बार फिर से पूरी तरह से मेहरबान और कुछ जगहों पर खौफनाक नजर आ रहा है। पिछले कुछ दिनों की उमस और गर्मी के बाद, सोमवार से राज्य में मानसून ने फिर से अपनी रफ्तार पकड़ ली है। आलम यह है कि सुबह से ही राजधानी लखनऊ, कानपुर और धर्मनगरी अयोध्या समेत 40 से ज्यादा प्रमुख शहरों में घने काले बादल छाए हुए हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी कर दिया है। यह बारिश जहां एक तरफ लोगों को गर्मी से राहत दे रही है, वहीं दूसरी तरफ कई जिलों में यह आफत बनकर टूट रही है। आइए, विस्तार से जानते हैं यूपी के मौसम का हाल, नदियों का बढ़ता जलस्तर और इसके पीछे के वैज्ञानिक कारण।Read also:-E20 पेट्रोल से परेशान वाहन चालकों ने खोला मोर्चा: 'E20 जनता पार्टी' ने मांगा 100% शुद्ध पेट्रोल का विकल्प, गडकरी के इस्तीफे की मांग!
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लखीमपुर और बहराइच के लिए 'रेड अलर्ट', घरों में रहने की सलाह

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मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी के तराई इलाकों, विशेषकर लखीमपुर खीरी और बहराइच में बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इन जिलों में मूसलाधार बारिश के चलते जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होने का खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय प्रशासन ने इन इलाकों के नागरिकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि बहुत जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकलें। तेज हवाओं और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए किसानों और आम जनता को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सख्त हिदायत दी गई है।
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बलिया में प्रकृति का खौफनाक तांडव: 3 सेकंड में नदी में विलीन हुआ स्कूल

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पहाड़ी इलाकों में हो रही लगातार बारिश का सीधा असर उत्तर प्रदेश की नदियों पर पड़ रहा है। प्रदेश की प्रमुख नदियां इस समय पूरे उफान पर हैं। सबसे भयावह तस्वीर बलिया जिले से सामने आई है, जहां सरयू नदी का रौद्र रूप देखने को मिला। सोमवार सुबह करीब 7 बजे बलिया में एक सरकारी प्राइमरी स्कूल महज 3 सेकंड के भीतर सरयू नदी के तेज बहाव में ढह गया।
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यह घटना इतनी अचानक हुई कि देखने वालों के रोंगटे खड़े हो गए। गौरतलब है कि इस स्कूल का आधा हिस्सा रविवार को ही नदी के कटान की चपेट में आकर गिर गया था, और सोमवार को बची हुई पूरी इमारत ताश के पत्तों की तरह नदी में समा गई। गनीमत यह रही कि सुबह का समय होने और पहले से ही खतरा भांप लेने के कारण स्कूल में कोई मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
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इसी जिले के दोहरीघाट इलाके में भी किसानों पर कुदरत का कहर टूटा है। यहां नहर का तटबंध अचानक टूट जाने के कारण सैकड़ों एकड़ में लहलहाती धान की फसल पूरी तरह से पानी में डूब गई है। किसानों की महीनों की मेहनत चंद घंटों में बर्बाद हो गई, जिससे अन्नदाताओं के चेहरे पर चिंता की गहरी लकीरें खिंच गई हैं।
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गोंडा में घाघरा का धोखा: जलस्तर घटा, लेकिन कटान हुआ तेज

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बाढ़ और बारिश की विभीषिका के बीच गोंडा जिले से एक अलग ही प्रकार की समस्या सामने आ रही है। आमतौर पर माना जाता है कि नदी का जलस्तर बढ़ने से कटान होता है, लेकिन गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर घटने के बाद कटान की रफ्तार अचानक तेज हो गई है। तरबगंज और करनैलगंज तहसील क्षेत्रों में पिछले 24 घंटों से नदी का जलस्तर लगातार कम हो रहा है, लेकिन इसके साथ ही किनारे की मिट्टी तेजी से कटकर नदी में गिर रही है।
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 बलिया में सरयू नदी के उफान से बाढ़ के हालात, AI generated

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इस कटान का सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। किसानों के खेतों में लगी गन्ने और धान की बेशकीमती फसलें आंखों के सामने नदी में समा रही हैं। इसके अलावा, उपजाऊ कृषि भूमि भी कटकर घाघरा में विलीन हो रही है। पहले जहां किसान बढ़ते जलस्तर से खौफजदा थे, वहीं अब जलस्तर घटने के बाद होने वाले इस भीषण कटान ने उनकी रातों की नींद उड़ा दी है। तरबगंज और करनैलगंज का तहसील प्रशासन फिलहाल प्रभावित क्षेत्रों में हुए नुकसान का बारीकी से आकलन कर रहा है ताकि प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा दिलाने के लिए रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी जा सके।
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यातायात और बुनियादी ढांचे पर बारिश की मार

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मानसून की इस नई लहर ने सिर्फ गांवों और खेतों को ही नहीं, बल्कि शहरों के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को भी बुरी तरह प्रभावित किया है:
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    एक्सप्रेस-वे धंसा: रविवार को राजधानी लखनऊ, कानपुर, नोएडा और बिजनौर में झमाझम बारिश हुई। इस भारी बारिश के कारण उन्नाव में लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे की सड़क का एक हिस्सा अचानक धंस गया। इससे यातायात व्यवस्था कुछ देर के लिए बाधित हुई। हालांकि, गनीमत रही कि सूचना मिलते ही नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर युद्धस्तर पर काम शुरू किया और सड़क को दुरुस्त कराकर यातायात सुचारू कर दिया।
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    फ्लाइट डायवर्ट: खराब मौसम और विजिबिलिटी कम होने का असर हवाई यात्राओं पर भी पड़ा है। मौसम इतना खराब था कि नेपाल की राजधानी काठमांडू जा रही एक इंटरनेशनल फ्लाइट को सुरक्षा कारणों से लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर डायवर्ट करना पड़ा।
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क्या कहते हैं मौसम वैज्ञानिक? क्यों बदल रहा है मौसम?

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लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने इस अचानक हुए मौसम परिवर्तन के पीछे के कारणों को विस्तार से समझाया है। उन्होंने बताया कि मानसूनी रेखा (Monsoon Trough) एक बार फिर से अपनी सामान्य स्थिति से खिसक कर उत्तर प्रदेश की तरफ आ गई है। इसके साथ ही, बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) भी लगातार मजबूत हो रहा है और धीरे-धीरे उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है।
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इन दोनों मौसमी प्रणालियों के एक साथ सक्रिय होने के कारण उत्तर प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी, दोनों हिस्सों में झमाझम बारिश के मजबूत आसार बन गए हैं। मौसम विभाग के अनुसार, 30 जुलाई तक यूपी के अधिकांश जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहेगा, जबकि कुछ चिन्हित जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसके साथ ही, कई इलाकों में तेज आंधी के साथ बिजली कड़कने और आकाशीय बिजली गिरने (Lightning Strike) की भी गंभीर आशंका जताई गई है।
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दीर्घकालिक पूर्वानुमान: इस साल मानसून के कमजोर रहने के क्या हैं संकेत?

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एक तरफ जहां वर्तमान में यूपी में जोरदार बारिश हो रही है, वहीं दूसरी तरफ मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. एम. महापात्रा ने पूरे मानसूनी सीजन को लेकर एक चिंताजनक जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि भले ही अभी बारिश अच्छी हो रही हो, लेकिन कुल मिलाकर यूपी और उत्तर भारत में इस मानसून सीजन में औसत से कम बारिश होने के आसार हैं।
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इसके पीछे का मुख्य वैज्ञानिक कारण 'अल नीनो' (El Niño) का प्रभाव है। डॉ. महापात्रा के अनुसार, प्रशांत महासागर में पिछले कुछ समय से बनी हुई 'ला नीना' (La Niña - जो अच्छी बारिश का संकेत होती है) जैसी स्थितियां अब खत्म हो रही हैं। इसकी जगह अब मौसम 'अल नीनो' की ओर बढ़ने के संकेत दे रहा है। अल नीनो हमेशा भारतीय उपमहाद्वीप में कम वर्षा और सूखे जैसी स्थितियों का कारण बनता है।
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यानी, इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के कुल मिलाकर सामान्य से कमजोर रहने के प्रबल संकेत हैं। इसके अतिरिक्त, एक और बड़ा कारण यह है कि इस साल जनवरी से मार्च के बीच उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) में बर्फबारी कम हुई है। कम बर्फबारी का सीधा असर वैश्विक मौसमी चक्र पर पड़ता है, जो अंततः भारतीय मानसून की हवाओं को कमजोर कर सकता है।
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नागरिकों के लिए क्या हैं बचाव के उपाय?

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मौसम विभाग और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने आम जनता से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान पूरी सतर्कता बरतें।
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    बिजली से बचाव: जब आसमान में बादल गरज रहे हों या बिजली कड़क रही हो, तो खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचें। पक्के मकानों में ही आश्रय लें।
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    नदियों से दूरी: उफान पर चल रही नदियों, नहरों और जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से सख्त परहेज करें।
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    यातायात: बहुत आवश्यक होने पर ही घर से वाहन लेकर निकलें और जलभराव वाली सड़कों पर गाड़ी चलाने से बचें।
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यूपी में मानसून का यह सक्रिय दौर आने वाले कुछ दिनों तक लोगों की परीक्षा लेने वाला है। प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है, लेकिन नागरिकों को भी अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने की सख्त जरूरत है।
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