उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और लू (Heatwave) के बढ़ते प्रकोप के बीच विद्यालयों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने जा रहा है। चिलचिलाती धूप और उमस भरे मौसम का सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों और स्कूली विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसी गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने विद्यार्थियों की पूर्ण सुरक्षा का एक विस्तृत और पुख्ता खाका तैयार किया है। बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रदेश भर के सभी सरकारी और मान्यता प्राप्त स्कूलों के लिए UP School Heatwave Guidelines 2026 (दिग्दर्शिका-2026) जारी की है।
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अपर मुख्य सचिव (बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा के सख्त निर्देशों पर तैयार की गई इस नई दिग्दर्शिका का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों और विद्यालय प्रशासन को हीट वेव (लू) से बचाव के लिए पूरी तरह से प्रशिक्षित करना है। इसके जरिए शिक्षकों को हीट एग्जॉशन (गर्मी से थकावट) और हीट स्ट्रोक (लू लगना) के शुरुआती लक्षणों की पहचान करने, प्राथमिक उपचार देने और बच्चों का प्रभावी बचाव करने का व्यावहारिक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया है। READ ALSO:-NASA का महा-अलर्ट: प्रशांत महासागर में जाग रहा है विनाशकारी 'सुपर अल नीनो', 1997 के 'गॉडजिला' से भी भयंकर तबाही का खौफ!
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विद्यालयों में जागरूकता के लिए 'क्या करें-क्या न करें' अभियान

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नई UP School Heatwave Guidelines 2026 के तहत स्कूलों में बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। विद्यालयों के नोटिस बोर्ड और प्रमुख स्थानों पर 'क्या करें-क्या न करें' (Do's and Don'ts) संबंधी आकर्षक पोस्टर लगाए जाएंगे। इन पोस्टरों के माध्यम से न केवल बच्चों, बल्कि उनके अभिभावकों और पूरे विद्यालय समुदाय को जागरूक किया जाएगा।
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सरकार का स्पष्ट मानना है कि भीषण गर्मी बच्चों की पढ़ाई, उनके शारीरिक स्वास्थ्य और विद्यालयी जीवन पर किसी भी तरह का प्रतिकूल प्रभाव न डाल सके। इस पूरी प्रक्रिया और हीट वेव से विद्यार्थियों की सुरक्षा में शिक्षक सबसे महत्वपूर्ण और मजबूत कड़ी साबित होंगे। शिक्षक अपनी दैनिक दिनचर्या, प्रार्थना सभा (Morning Assembly), कक्षा शिक्षण और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को गर्मी से बचाव के अचूक उपायों से अवगत कराएंगे।
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UP School Heatwave Guidelines 2026: हर स्कूल का अपना 'हीट एक्शन प्लान'

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योगी सरकार ने प्रदेश के प्रत्येक विद्यालय प्रशासन को अपना खुद का 'स्कूल हीट एक्शन प्लान' (School Heat Action Plan) तैयार करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
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    स्वास्थ्य नोडल शिक्षक की नियुक्ति: हर स्कूल में कम से कम एक 'स्वास्थ्य नोडल शिक्षक' (Health Nodal Teacher) नामित किया जाएगा। इस शिक्षक की जिम्मेदारी स्कूल में हीट वेव से जुड़ी सभी गतिविधियों का समन्वय करना और बच्चों की सेहत पर नजर रखना होगा।
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    ओरिएंटेशन और ट्रेनिंग: स्कूल खुलने से पहले सभी शिक्षकों, कर्मचारियों और यहां तक कि सीनियर विद्यार्थियों का विशेष ओरिएंटेशन (प्रशिक्षण) कराया जाएगा।
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    मेडिकल किट और एंबुलेंस: गाइडलाइंस के अनुसार, प्रत्येक विद्यालय में 'फर्स्ट एड किट' (First Aid Kit), ओआरएस (ORS) के पैकेट और डिजिटल थर्मामीटर का होना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए 108 एम्बुलेंस और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र के संपर्क नंबर स्कूल के प्रमुख स्थानों पर स्पष्ट रूप से लिखे जाएंगे।
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स्कूलों के समय में बदलाव और बाहरी गतिविधियों पर रोक

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बढ़ते तापमान को देखते हुए स्कूलों के संचालन समय को भी शासन के निर्देशों के अनुरूप ही निर्धारित किया जाएगा।
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    सुबह 10 बजे तक सीमित होंगी बाहरी गतिविधियां: स्कूलों में होने वाली प्रार्थना सभा, खेलकूद के पीरियड, शारीरिक शिक्षा (Physical Education) और अन्य सभी बाहरी गतिविधियां (Outdoor activities) अनिवार्य रूप से सुबह 10 बजे से पहले ही पूरी कर ली जाएंगी।
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    अलर्ट के दौरान खेलकूद स्थगित: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा ऑरेंज (Orange) या रेड (Red) हीट वेव अलर्ट जारी होने की स्थिति में स्कूलों में सभी प्रकार की कठिन शारीरिक और बाहरी गतिविधियां पूरी तरह से स्थगित रहेंगी। बच्चों को केवल हवादार कक्षाओं के भीतर ही रखा जाएगा।
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पानी पीने के लिए हर 20-30 मिनट में मिलेगा ब्रेक

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डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) गर्मी के मौसम में बच्चों के लिए सबसे बड़ा खतरा होता है। इसे रोकने के लिए शिक्षा विभाग ने 'वाटर ब्रेक' (Water Break) का नया नियम लागू किया है। अब कक्षाओं के दौरान प्रत्येक 20 से 30 मिनट के अंतराल पर शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों को पानी पीने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
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हर विद्यार्थी को घर से अपनी साफ पानी की बोतल साथ लाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अलावा, स्कूल प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि विद्यालय परिसर में स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की निरंतर उपलब्धता बनी रहे। स्कूलों में कार्यशील पंखे, पर्याप्त वेंटिलेशन (हवा का प्रवाह), खेलने के लिए छायादार स्थान और जहां संभव हो, वहां 'कूल रूफ' (Cool Roof) और रिफ्लेक्टिव पेंट जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं को भी बढ़ावा दिया जाएगा। 
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खान-पान और पहनावे को लेकर गाइडलाइंस

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गर्मी से लड़ने के लिए सही खान-पान और पहनावा बेहद जरूरी है। शिक्षा विभाग की दिग्दर्शिका में छात्रों को हल्के रंग के, ढीले और सूती वस्त्र (Cotton Clothes) पहनने की सलाह दी गई है। धूप में निकलते समय टोपी या छाते का उपयोग करने को कहा गया है। इसके साथ ही बच्चों को जलयुक्त मौसमी फल जैसे- तरबूज, खरबूजा, खीरा, और ककड़ी आदि खाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। कैफीनयुक्त, कार्बोनेटेड (कोल्ड ड्रिंक्स) और अत्यधिक मीठे पेयों से पूरी तरह बचने की सलाह दी गई है। स्कूलों में मिलने वाला मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) भी अब पूरी तरह से स्वच्छ और छायादार स्थान पर ही परोसा जाएगा।
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हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर तुरंत क्या करें?

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अगर स्कूल में किसी विद्यार्थी में अत्यधिक पसीना आने, तेज प्यास लगने, सिरदर्द, चक्कर, कमजोरी, मांसपेशियों में ऐंठन (Cramps), उल्टी, भ्रम या बेहोशी जैसे हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देते हैं, तो शिक्षकों को तुरंत एक्शन लेना होगा। प्रभावित बच्चे को तत्काल किसी ठंडे और छायादार स्थान पर ले जाकर प्राथमिक उपचार (First Aid) दिया जाएगा। उसके शरीर पर ठंडी पट्टी रखी जाएगी और ओआरएस का घोल पिलाया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर बिना किसी देरी के 108 एम्बुलेंस या निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। 
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बीमार और दिव्यांग बच्चों की होगी विशेष निगरानी

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गाइडलाइन में उन बच्चों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है जो अस्थमा, हृदय रोग, मधुमेह (Diabetes), मोटापा, या दिव्यांगता के शिकार हैं। हाल ही में बुखार या दस्त (Diarrhea) से पीड़ित रहे विद्यार्थियों की कक्षा में विशेष निगरानी रखी जाएगी।
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इसके साथ ही, राज्य सरकार ने अभिभावकों से भी एक विशेष अपील की है। अभिभावकों से कहा गया है कि वे बच्चों को विद्यालय भेजने से पहले पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ पिलाएं। यदि बच्चा पहले से अस्वस्थ है या उसे बुखार है, तो उसे बिल्कुल भी विद्यालय न भेजें। स्कूलों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे मौसम विभाग (IMD) के अलर्ट पर लगातार नजर रखें, हीट वेव संबंधी घटनाओं का रिकॉर्ड (अभिलेखीकरण) रखें और आपात स्थिति से निपटने के लिए समय-समय पर 'मॉकड्रिल' (Mock drill) भी आयोजित करें।
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बढ़ते वैश्विक तापमान और जलवायु परिवर्तन के इस दौर में बच्चों की सुरक्षा के लिए उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम बेहद सराहनीय है। UP School Heatwave Guidelines 2026 न केवल बच्चों को लू और गर्मी के जानलेवा असर से बचाएगी, बल्कि स्कूल प्रशासन और शिक्षकों की जवाबदेही भी तय करेगी। इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करके हम अपने नौनिहालों को एक सुरक्षित, स्वस्थ और अनुकूल शैक्षणिक वातावरण प्रदान कर सकते हैं।
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उत्तर प्रदेश सरकार ने नए शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थियों को भीषण गर्मी और लू से बचाने के लिए 'UP School Heatwave Guidelines 2026' लागू की है। इस नई दिग्दर्शिका के तहत स्कूलों में सुबह 10 बजे के बाद बाहरी गतिविधियों पर रोक रहेगी, हर 20-30 मिनट में बच्चों को पानी पीने का ब्रेक मिलेगा और हर स्कूल में मेडिकल किट के साथ एक हेल्थ नोडल टीचर नियुक्त किया जाएगा। सरकार ने शिक्षकों और अभिभावकों से समन्वय बनाकर बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा करने की विशेष अपील की है।
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