रियल एस्टेट डेस्क, नई दिल्ली/नोएडा: नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और लखनऊ सहित पूरे उत्तर प्रदेश में फ्लैट खरीदने वालों की सबसे बड़ी शिकायत 'मेंटेनेंस चार्ज' (Maintenance Charges) को लेकर रहती है। अक्सर देखा जाता है कि बिल्डर्स (Builders) पजेशन के समय मेंटेनेंस सिक्योरिटी के नाम पर ग्राहकों से लाखों रुपये तो जमा करा लेते हैं, लेकिन बाद में उस पैसे का कोई सही हिसाब-किताब नहीं देते। कई बार तो बिल्डर उस पैसे को अपने दूसरे प्रोजेक्ट्स या पर्सनल कामों में खर्च कर देते हैं।READ ALSO:-मेरठ के कोचिंग सेंटर में महिला टीचर की संदिग्ध मौत: पैसों के विवाद में पार्टनर पर हत्या का आरोप, थाने पर भारी हंगामा, पुलिस कस्टडी में आरोपी
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अब बिल्डरों की इसी मनमानी पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UP RERA) ने एक बहुत बड़ा और सख्त कदम उठाया है। यूपी रेरा ने 'इंटरेस्ट फ्री मेंटेनेंस सिक्योरिटी' (IFMS/IBMS) फंड के रखरखाव, उपयोग और ट्रांसफर को लेकर बिल्कुल नए और पारदर्शी नियम जारी कर दिए हैं।
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आइए विस्तार से समझते हैं कि ये नए नियम क्या हैं और एक फ्लैट बायर या RWA (Resident Welfare Association) के रूप में आपको इससे क्या फायदा होगा।
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1. अब बिल्डर के पर्सनल खाते में नहीं रहेगा आपका पैसा (FD Mandatory)

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यूपी रेरा का सबसे बड़ा प्रहार बिल्डरों के वित्तीय कुप्रबंधन पर है।
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    नया बैंक अकाउंट: नए नियमों के मुताबिक, अब फ्लैट की रजिस्ट्री या हैंडओवर के समय बिल्डर जो भी मेंटेनेंस सिक्योरिटी (IFMS) का पैसा ग्राहकों से लेगा, उसे वह अपने किसी भी पर्सनल या चालू खाते (Current Account) में बिल्कुल नहीं रख सकेगा।
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    सबसे ज्यादा ब्याज वाली FD: बिल्डर को इस पैसे के लिए एक अलग और खास बैंक अकाउंट खोलना अनिवार्य होगा। सिर्फ इतना ही नहीं, उस राशि को उस बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराना होगा जो सबसे ज्यादा ब्याज दे रही हो।
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    फायदा: इससे ग्राहकों का मूल पैसा 100% सुरक्षित रहेगा और उस पर मिलने वाले ब्याज (Interest) से फंड की राशि में भी लगातार बढ़ोतरी होती रहेगी।
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2. मनमाने चार्ज पर रोक: RERA ने तय की फिक्स दरें (Fixed Rates)

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पहले बिल्डर अपनी मर्जी से किसी भी फ्लैट के लिए मनमाना IFMS चार्ज वसूल लेते थे। लेकिन अब यूपी रेरा ने प्रॉपर्टी के साइज (Carpet Area) और कैटेगरी के हिसाब से मेंटेनेंस सिक्योरिटी की दरें भी पूरी तरह फिक्स कर दी हैं।
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    ग्रुप हाउसिंग (आवासीय फ्लैट्स): 20 रुपये से लेकर अधिकतम 100 रुपये प्रति वर्ग फुट (Per Sq. Ft.)।
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    कमर्शियल दुकानें/प्रॉपर्टी: 40 रुपये से लेकर अधिकतम 50 रुपये प्रति वर्ग फुट।
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इस नियम के लागू होने से कोई भी बिल्डर तय सीमा से अधिक मेंटेनेंस सिक्योरिटी नहीं मांग सकेगा।
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3. हैंडओवर के समय RWA को सौंपना होगा पाई-पाई का हिसाब

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जब बिल्डर प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद कॉमन एरिया (जैसे- पार्क, लिफ्ट, स्विमिंग पूल और क्लब हाउस) को निवासियों की आधिकारिक संस्था यानी RWA (Resident Welfare Association) या AOA (Apartment Owners Association) को सौंपता है, तो उसे IFMS फंड को लेकर सख्त जवाबदेही देनी होगी:
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    पूरा फंड ट्रांसफर: बिल्डर को ब्याज सहित यह पूरा फंड RWA/AOA के खाते में ट्रांसफर करना होगा।
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    लिखित हिसाब-किताब: बिल्डर को एक-एक पैसे का विस्तृत लिखित हिसाब (Written Account) देना होगा। इसमें बताना होगा कि किस फ्लैट नंबर/मालिक से कितना पैसा मिला और यदि उसमें से कुछ पैसा खर्च हुआ है, तो वह कहां और क्यों खर्च किया गया।
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4. फंड के इस्तेमाल और 'ऑडिट' के कड़े नियम (Strict Audit Norms)

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यह पैसा सिर्फ इमरजेंसी और बड़े खर्चों के लिए है, इसे रोजमर्रा के कामों में खर्च नहीं किया जा सकता।
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    कहां होगा इस्तेमाल? नए नियमों के अनुसार, इस विशेष फंड से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल केवल सोसायटी की लिफ्ट, पार्क, जेनरेटर (DG Set) और सामूहिक उपकरणों की भारी मरम्मत या उन्हें पूरी तरह बदलने (Replacement) के लिए ही किया जा सकेगा। इसे सिक्योरिटी गार्ड की सैलरी या सफाई जैसे छोटे-मोटे मेंटेनेंस खर्चों (Regular Maintenance) से बिल्कुल अलग रखना होगा।
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    CA से अनिवार्य ऑडिट: अब आरडब्ल्यूए (RWA) या एओए (AOA) की भी यह कानूनी जिम्मेदारी होगी कि वे हर वित्तीय वर्ष के अंत में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से इस पूरे IFMS फंड का अनिवार्य ऑडिट (Audit) कराएं।
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    आम सभा में रिपोर्ट: ऑडिट रिपोर्ट आने के तीन महीने के भीतर इसे सोसायटी की आम सभा (Annual General Meeting - AGM) में सभी निवासियों के सामने अनिवार्य रूप से पेश करना होगा, ताकि किसी भी स्तर पर कोई हेराफेरी (Fraud) न हो सके।
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यूपी रेरा अध्यक्ष का बयान: "पारदर्शिता आएगी, जवाबदेही तय होगी"

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इस ऐतिहासिक फैसले पर यूपी रेरा के अध्यक्ष, श्री संजय आर. भूसरेड्डी (Sanjay R. Bhoosreddy) ने कहा:
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"घर खरीदार यह पैसा अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई से देते हैं। IFMS फंड का उद्देश्य सोसायटी की लंबी अवधि की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इस नए फैसले से पूरी प्रक्रिया में 100% पारदर्शिता (Transparency) आएगी और बिल्डरों की जवाबदेही तय होगी। किसी को भी बायर्स के पैसों के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।"
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यूपी रेरा का यह ऐतिहासिक फैसला रियल एस्टेट सेक्टर (Real Estate Sector) में बिल्डरों की तानाशाही को खत्म करने और फ्लैट बायर्स के अधिकारों को सुरक्षित करने की दिशा में एक बेहद बड़ा कदम है। इस नए नियम से न केवल घर खरीदारों की गाढ़ी कमाई पूरी तरह सुरक्षित रहेगी, बल्कि आने वाले समय में सोसायटियों के रख-रखाव (Maintenance) में भी अभूतपूर्व पारदर्शिता आएगी।
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