UP Monsoon Update: उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और उमस के बाद अब मानसून ने पूरी तरह से रफ्तार पकड़ ली है। शुक्रवार सुबह 5 बजे से ही राजधानी लखनऊ, वाराणसी, कानपुर, और प्रयागराज समेत प्रदेश के करीब 30 शहरों में रुक-रुक कर झमाझम बारिश हो रही है। (Internal link to related article) लगातार हो रही इस बारिश से आम जनजीवन काफी हद तक प्रभावित हुआ है, लेकिन लोगों को तपती गर्मी से बड़ी राहत मिली है। मौसम विभाग (IMD) ने प्रदेश के 49 जिलों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। आसमान में छाए घने काले बादल और ठंडी हवाओं ने मौसम को पूरी तरह से सुहावना बना दिया है।Read also:-गोल्ड-सिल्वर में बड़ी गिरावट: क्या खरीदने का है यही सही मौका? जानें आज के लेटेस्ट रेट्स और सोना-चांदी पहचानने के अचूक तरीके!
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लखनऊ का हाल: रात भर बारिश और छाए रहे काले बादल
\r\n\r\nगुरुवार दोपहर से लखनऊ में जो बारिश का सिलसिला शुरू हुआ, वह शुक्रवार सुबह तक अनवरत जारी रहा। पूरी रात रिमझिम बरसात होती रही। सुबह करीब 6.15 बजे बारिश कुछ देर के लिए थमी, लेकिन आसमान में काले बादल डेरा डाले रहे। लगभग 45 मिनट के बाद ही एक बार फिर से अंधेरा छा गया और तेज बूंदाबांदी शुरू हो गई। लगातार हो रही बारिश के कारण दफ्तर और काम पर जाने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
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प्रदेश भर में जलभराव और जनजीवन पर भारी प्रभाव
\r\n\r\nप्रदेश के कई प्रमुख शहरों में जलभराव एक गंभीर समस्या बन गया है। वाराणसी और प्रतापगढ़ के कई इलाकों में गलियों और मुख्य सड़कों पर पानी भर गया है, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। प्रयागराज में तो जलभराव के कारण एक कार नाले में जा घुसी, जिसे बाद में कड़ी मशक्कत से निकाला गया। हापुड़ के कई निचले इलाकों में 2-2 फीट तक पानी भर गया है, जिससे लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। बांदा में बारिश का पानी लोगों के घरों में घुस गया है। खराब मौसम और भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद और गाजियाबाद समेत 13 जिलों में आज 12वीं कक्षा तक के सभी सरकारी और निजी स्कूल बंद कर दिए गए हैं।
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हादसों में गई 12 लोगों की जान
\r\n\r\nबारिश जहां एक तरफ राहत लेकर आई है, वहीं दूसरी तरफ यह कई परिवारों के लिए काल भी बन गई है। पिछले 48 घंटों में पूरे उत्तर प्रदेश में बारिश, मकान ढहने, बिजली गिरने और जलभराव से जुड़ी घटनाओं में 12 लोगों की जान चली गई है।
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- \r\n बिजनौर में अत्यधिक बारिश के कारण एक सरकारी स्कूल की दीवार भरभरा कर गिर गई। गनीमत रही कि स्कूल बंद था, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।\r\n \r\n
- \r\n संभल में खराब मौसम की वजह से हुए एक भीषण सड़क हादसे में एक बुजुर्ग महिला की दर्दनाक मौत हो गई।\r\n \r\n
- \r\n बदायूं में भारी बारिश के चलते एक कच्चे मकान की दीवार ढह गई, जिसके मलबे में दबकर एक महिला की जान चली गई।\r\n \r\n
- \r\n संतकबीरनगर में बिजली गिरने (वज्रपात) से 16 साल की एक किशोरी की मृत्यु हो गई।\r\n \r\n
- \r\n गाजियाबाद में स्थिति सबसे हृदयविदारक रही, जहां 3 साल की मासूम बच्ची समेत तीन लोगों की मौत हो गई। वहीं, जलभराव के बीच करंट लगने से एक सिक्योरिटी गार्ड को भी अपनी जान गंवानी पड़ी।\r\n \r\n
- \r\n प्रयागराज में दो और अलीगढ़ में एक महिला की पानी में करंट उतरने से मौत हो गई।\r\n \r\n
- \r\n हापुड़ में मकान ढहने से एक महिला की जान चली गई और बुलंदशहर में मस्जिद की पुरानी दीवार गिरने से 2 लोगों की जान चली गई।\r\n \r\n
- \r\n मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना तहसील क्षेत्र के मंडवाड़ा गांव में भारी बारिश के कारण देर रात दो कच्चे मकान ढह गए, जिसमें एक महिला सहित दो लोग घायल हो गए। उन्हें तुरंत बुढ़ाना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां से गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।\r\n \r\n
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सीएम योगी का सख्त निर्देश: 24 घंटे में मिले मुआवजा
\r\n\r\nभारी बारिश और बिजली गिरने से हुई इन दुखद मौतों का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल संज्ञान लिया है। सीएम योगी ने सभी संबंधित जिलाधिकारियों और वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे तत्काल फील्ड में उतरें। (External link: source URL) मुख्यमंत्री ने कहा है कि नुकसान का जल्द से जल्द आकलन किया जाए और 24 घंटे के भीतर सभी पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा प्रदान किया जाए। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रभावित परिवारों तक खुद पहुंचें और उन्हें हरसंभव मदद मुहैया कराएं। सीएम ने सभी घायलों के समुचित इलाज और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की है।
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सुरक्षा और बचाव के उपाय
\r\n\r\nचूंकि 49 जिलों में भारी बारिश और वज्रपात (बिजली गिरने) का अलर्ट जारी किया गया है, इसलिए आम जनता को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। आपदा प्रबंधन विभाग ने एडवाइजरी जारी की है कि भारी बारिश के दौरान पेड़ों के नीचे शरण न लें, क्योंकि बिजली गिरने का सबसे ज्यादा खतरा वहीं होता है। इसके अलावा, बिजली के खंभों, ट्रांसफार्मर और नंगे तारों से दूर रहें, क्योंकि जलभराव के दौरान करंट फैलने (शॉर्ट सर्किट) से कई दर्दनाक हादसे हो चुके हैं। (Internal link to related article) किसानों को भी सलाह दी गई है कि मौसम खराब होने पर खेतों में न जाएं और सुरक्षित स्थानों पर ही रहें। संभावित बाढ़ और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमों को संवेदनशील इलाकों में अलर्ट पर रखा गया है।
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क्यों हो रही है इतनी भारी बारिश? जानें मौसम विभाग का UP Monsoon Update
\r\n\r\nमौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने इस मानसूनी बारिश के पीछे के कारणों को विस्तार से समझाया है। उन्होंने बताया कि बंगाल की खाड़ी से उठा बारिश का एक मजबूत सिस्टम अब मध्य प्रदेश के आसपास पहुंच गया है। इस मानसूनी सिस्टम का सीधा और व्यापक असर उत्तर प्रदेश के मौसम पर पड़ रहा है। यही मुख्य कारण है कि प्रदेश में मानसून ने अचानक इतना जोर पकड़ लिया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, अगले 5 दिनों तक उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का यह सिलसिला इसी तरह जारी रहेगा। विशेष रूप से तराई और पश्चिमी यूपी के इलाकों में अत्यधिक सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
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नजीबाबाद में टूटे बारिश के सारे रिकॉर्ड
\r\n\r\nबीते गुरुवार को प्रदेश के 69 शहरों में जमकर बारिश हुई। सबसे ज्यादा हैरान करने वाले आंकड़े बिजनौर के नजीबाबाद से सामने आए हैं, जहां रिकॉर्ड 306 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 1952 से लेकर अब तक के रिकॉर्ड में यह 24 घंटे के भीतर हुई चौथी सबसे ज्यादा बारिश है। वहीं, अगर सिर्फ जुलाई महीने की बात करें, तो यह तीसरी सबसे बड़ी बारिश का रिकॉर्ड है। लगातार भारी बारिश के कारण मेरठ मेडिकल कॉलेज में भी पानी भर गया, जिसके चलते मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए ओपीडी सेवाएं अस्थाई रूप से बंद करनी पड़ीं।
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नदियों का बढ़ता जलस्तर और प्रशासन की अपील
\r\n\r\nमैदानी और पहाड़ी दोनों ही क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का असर अब उत्तर प्रदेश की प्रमुख नदियों पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। विशेष रूप से बिजनौर से होकर गुजरने वाली गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। ताजा जानकारी के अनुसार, गंगा बैराज से डाउनस्ट्रीम में 79,922 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, और गंगा का जलस्तर 218.80 मीटर दर्ज किया गया है। नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है और नदी किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों पर पैनी नजर बनाए हुए है। भारी बारिश और जगह-जगह जलभराव के कारण मेरठ-बिजनौर मार्ग और बालावाली-मंडावर मार्ग पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। सड़क पर पानी भरने और कुछ जगहों पर सड़क के क्षतिग्रस्त होने के चलते यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। स्थानीय प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी अनावश्यक यात्रा से बचें और नदी व जलभराव वाले क्षेत्रों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
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पूरे सीजन का पूर्वानुमान: 8% कम बारिश का अनुमान
\r\n\r\nभले ही वर्तमान में प्रदेश में झमाझम बारिश हो रही हो, लेकिन पूरे मानसून सीजन को लेकर मौसम विभाग के आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। सीनियर साइंटिस्ट अतुल सिंह के अनुसार, इस साल यूपी समेत पूरे देश में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है। (External link: source URL) आमतौर पर उत्तर प्रदेश में जून से सितंबर के मानसूनी सीजन के बीच लगभग 820 से 840 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जाती है। लेकिन, मौसम विभाग के ताजा अनुमानों के मुताबिक, इस साल प्रदेश में लगभग 8% कम बारिश हो सकती है, जिसका अर्थ है कि इस सीजन में केवल 754 से 773 मिलीमीटर तक ही पानी बरसेगा। इसका असर आने वाले समय में कृषि और भूजल स्तर पर भी पड़ सकता है।
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संक्षेप में कहें तो, ताजा UP Monsoon Update यह है कि अगले पांच दिनों तक प्रदेशवासियों को बारिश से राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। जहां एक ओर बारिश ने झुलसाने वाली गर्मी से निजात दिलाई है, वहीं जलभराव, मकान ढहने और बिजली गिरने जैसी दुखद घटनाओं ने जनजीवन को खासा प्रभावित किया है। ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि लोग मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें। घर से बाहर निकलते समय पूरी सावधानी बरतें, जलभराव वाले इलाकों से दूर रहें और बिजली कड़कने के दौरान सुरक्षित स्थानों पर ही आश्रय लें। प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है, लेकिन व्यक्तिगत जागरूकता ही इस प्राकृतिक आपदा से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।
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