लखनऊ (परिवहन डेस्क - खबरीलाल विशेष): उत्तर प्रदेश की सड़कों पर स्मार्ट तरीके से सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए एक बेहद सुकून देने वाली खबर है। लंबे समय से ऐप-बेस्ड कैब सर्विस (App-based Cab Services) जैसे ओला (Ola), उबर (Uber), रैपिडो (Rapido) आदि की मनमानी से जूझ रहे लोगों की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार ने एक सख्त और पारदर्शी नियामक ढांचा तैयार कर लिया है।
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​परिवहन विभाग द्वारा 22 मई को अधिसूचित किए गए इन नए नियमों को धरातल पर उतारने के लिए सरकार ने upmyfleet.com नाम का एक विशेष वेब पोर्टल भी लॉन्च कर दिया है। पहली बार राज्य में कैब कंपनियों, ड्राइवरों और यात्रियों, तीनों के हकों और जिम्मेदारियों को कानूनी दायरे में लाया गया है।
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​आइए, खबरीलाल की इस विस्तृत रिपोर्ट में आसान भाषा में समझते हैं कि इन नए नियमों से आपके सफर, आपकी जेब और कैब ड्राइवरों की जिंदगी में क्या-क्या बड़े बदलाव आने वाले हैं।
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​1. अब नहीं लगेगा 'सर्ज प्राइसिंग' का झटका: किराये पर सरकारी ब्रेक

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​सबसे बड़ी परेशानी जो हर कैब यूजर को झेलनी पड़ती थी, वह थी 'डायनेमिक प्राइसिंग' (Dynamic Pricing) या जिसे आम भाषा में 'सर्ज प्राइसिंग' (Surge Pricing) कहा जाता है।
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    ​पहले क्या होता था? जरा सी बारिश हुई, त्योहार का दिन हुआ, या ऑफिस छूटने का पीक टाइम (Peak Time) हुआ, तो कैब कंपनियां 100 रुपये के किराये को बढ़ाकर अचानक 300 या 400 रुपये कर देती थीं। मजबूरी में यात्रियों को यह भारी-भरकम रकम चुकानी पड़ती थी।
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    ​अब क्या होगा? नए नियमों ने इस लूट पर पूरी तरह से ब्रेक लगा दिया है। अब कोई भी एग्रीगेटर कंपनी मांग बढ़ने पर मनमाना किराया नहीं वसूल सकेगी। सरकार ने नियम तय कर दिया है कि पीक ऑवर्स (High Demand) के समय भी बेस फेयर (Base Fare) से अधिकतम 50% से ज्यादा अतिरिक्त किराया किसी भी सूरत में नहीं वसूला जा सकता। यानी अब बारिश या जाम का बहाना बनाकर आपकी जेब नहीं काटी जा सकेगी।
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​2. कैंसिलेशन की टेंशन खत्म: बिना वजह राइड कैंसिल करने पर जुर्माना

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​"भइया कहां जाना है? कितना पैसा दिखा रहा है? अच्छा, आप अपनी तरफ से कैंसिल कर दो।" यह वो जुमला है जो हर कैब यात्री ने कभी न कभी जरूर सुना होगा। इस समस्या का भी अब स्थायी इलाज कर दिया गया है।
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कैंसिलेशन की स्थिति
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नियम और पेनाल्टी (जुर्माना)
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ड्राइवर द्वारा बिना कारण कैंसिलेशन
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यदि बुकिंग स्वीकार करने के बाद ड्राइवर बिना किसी वैध कारण के राइड कैंसिल करता है, तो उस पर ₹100 का जुर्माना लगाया जाएगा। यह राशि भविष्य में राइड के लिए यात्री के वॉलेट में क्रेडिट की जाएगी।
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यात्री द्वारा बेवजह कैंसिलेशन
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यात्रियों को भी अनुशासन में रहना होगा। अगर यात्री बिना किसी वजह के राइड कैंसिल करता है, तो उस पर किराये का 10% (अधिकतम ₹100 तक) पेनाल्टी लगाई जाएगी।
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यह नियम दोनों पक्षों (ड्राइवर और यात्री) के समय और पैसे की बर्बादी को रोकने में एक गेम-चेंजर साबित होगा।
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3. कैब ड्राइवरों (Gig Workers) के लिए संजीवनी बने नए नियम

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​यूपी की नई मोटरयान नियमावली सिर्फ यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि दिन-रात सड़कों पर गाड़ी दौड़ाने वाले कैब ड्राइवरों (Gig Workers) के लिए भी सुरक्षा कवच लेकर आई है। अब तक कैब कंपनियां ड्राइवरों का शोषण करती थीं, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
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    ​बीमा कवर (Insurance Security): सभी एग्रीगेटर कंपनियों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे अपने प्लेटफॉर्म से जुड़े हर ड्राइवर को कम से कम ₹5 लाख का हेल्थ इंश्योरेंस (स्वास्थ्य बीमा) और ₹10 लाख का टर्म इंश्योरेंस (जीवन बीमा) प्रदान करें। दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में इससे ड्राइवर के परिवार को बड़ी आर्थिक मदद मिलेगी।
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    ​कमाई का सही हिस्सा (Revenue Share): अब कैब कंपनियां किराये का बड़ा हिस्सा खुद नहीं रख सकेंगी। नियमों के तहत:
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      ​अपनी खुद की गाड़ी चलाने वाले ड्राइवर को कुल किराये का कम से कम 80% हिस्सा देना अनिवार्य होगा।
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      ​अगर गाड़ी एग्रीगेटर (कंपनी) की है, तो ड्राइवर को किराये का कम से कम 60% हिस्सा मिलना ही चाहिए।
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    ​एकाधिकार (Monopoly) खत्म: अब कोई भी कंपनी किसी ड्राइवर को सिर्फ अपने ही प्लेटफॉर्म पर काम करने के लिए मजबूर नहीं कर सकती। एक ड्राइवर अपनी मर्जी से कई एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म (जैसे एक ही समय में ओला और उबर दोनों) के साथ जुड़कर काम कर सकेगा।
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​4. यात्री सुरक्षा पर 'जीरो टॉलरेंस': पैनिक बटन और कंट्रोल रूम अनिवार्य

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​महिलाओं और रात में सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कंपनियों पर सख्त निर्देश लागू किए हैं:
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    ​AIS-140 ट्रैकिंग डिवाइस: हर ऐप-बेस्ड कैब में AIS-140 मानकों वाला GPS ट्रैकिंग डिवाइस और पैनिक बटन (Panic Button) लगा होना अनिवार्य है।
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    ​कंट्रोल रूम से निगरानी: इन सभी वाहनों को कंपनी के 24x7 कंट्रोल रूम और राज्य सरकार के 'कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम' (Command and Control System) से जोड़ा जाएगा, ताकि आपात स्थिति में पुलिस तुरंत एक्शन ले सके।
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    ​ड्राइवरों का कड़ा वेरिफिकेशन: अब सिर्फ ड्राइविंग लाइसेंस दिखाकर कोई भी कैब नहीं चला पाएगा। हर ड्राइवर का पुलिस वेरिफिकेशन (Police Verification), कैरेक्टर सर्टिफिकेट और साइकोलॉजिकल असेसमेंट (मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन) अनिवार्य होगा। साथ ही उन्हें यात्रियों से व्यवहार की समय-समय पर ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
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    ​शिकायत निवारण अधिकारी: हर कंपनी को यात्रियों की शिकायतें सुनने और उनका तय समय में समाधान करने के लिए एक विशेष 'शिकायत निवारण अधिकारी' (Grievance Redressal Officer) की नियुक्ति करनी होगी।
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5. कंपनियों के लिए सख्त हुए लाइसेंसिंग नियम, 1 करोड़ तक का जुर्माना

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​अब कोई भी ऐप-बेस्ड कैब या डिलीवरी कंपनी यूपी में सिर्फ एक 'डिजिटल प्लेटफॉर्म' होने का बहाना बनाकर नियमों से बच नहीं सकेगी। उन्हें बाकायदा राज्य सरकार से लाइसेंस लेना होगा और यूपी के परिवहन कानूनों का पालन करना होगा।
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    ​लाइसेंस फीस: कंपनियों को संचालन के लिए लाइसेंस लेना होगा, जिसके लिए ₹25,000 आवेदन शुल्क और ₹5 लाख लाइसेंस फीस तय की गई है।
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    ​सिक्योरिटी डिपॉजिट: कंपनी के आकार (फ्लीट साइज) के आधार पर कंपनियों को सरकार के पास 10 लाख रुपये से लेकर 50 लाख रुपये तक का सिक्योरिटी डिपॉजिट रखना होगा।
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    ​जुर्माना और लाइसेंस रद्दीकरण: यदि कोई भी कंपनी इन नियमों का उल्लंघन करती पाई गई, तो उस पर 25,000 रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। बार-बार नियम तोड़ने या गंभीर मामलों में कंपनी का लाइसेंस निलंबित या हमेशा के लिए रद्द (Cancel) भी किया जा सकता है।
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ऐप की मर्जी' का युग समाप्त

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​उत्तर प्रदेश मोटरयान (एग्रीगेटर एवं डिलीवरी सेवा प्रदाता) नियमावली, 2026 के लागू होने का सीधा सा अर्थ यह है कि अब यूपी में कैब का कारोबार विदेशी कंपनियों के सर्वर से नहीं, बल्कि राज्य के नियमों से चलेगा। यह नई पॉलिसी एक बेहतरीन संतुलन बनाती है—जहां एक तरफ यात्रियों को मनमाने किराये और कैंसिलेशन के झंझट से मुक्ति मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ कैब ड्राइवरों को सामाजिक सुरक्षा और उनकी मेहनत का सही हक प्राप्त होगा।
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​अब देखना यह है कि ओला, उबर जैसी बड़ी कंपनियां इन नियमों को जमीनी स्तर पर कितनी जल्दी और कितनी ईमानदारी से लागू करती हैं।
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