खबरीलाल न्यूज़ डेस्क: उत्तर प्रदेश के कई जिलों के लिए मानसून अब राहत की बूंदों की जगह खौफ का सैलाब लेकर आ रहा है। एक ओर जहां कुछ शहर अभी भी उमस भरी गर्मी से तप रहे हैं, वहीं तराई और पूर्वी यूपी के इलाके बाढ़ की विभीषिका का सामना कर रहे हैं। पहाड़ों (उत्तराखंड और हिमाचल) पर हो रही लगातार मूसलाधार बारिश के चलते यूपी की नदियां विकराल रूप धारण कर चुकी हैं। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने हालात को देखते हुए प्रदेश के 25 जिलों में बारिश और आकाशीय बिजली गिरने का हाई अलर्ट जारी किया है।Read also:-बागपत में खौफनाक वारदात: 'अमरूद खिलाने के बहाने खेत ले गया, फिर घोंट दिया गला', पत्नी की हत्या कर बेखौफ थाने पहुंचा पति
\r\n\r\n\r\n\r\n
1. नदियों का रौद्र रूप: बलिया और गोंडा में तबाही का मंजर (Rivers Unleash Fury)
\r\n\r\nप्रदेश से गुजरने वाली गंगा, यमुना, सरयू, घाघरा और शारदा समेत 10 प्रमुख नदियां उफान पर हैं। इनमें से घाघरा और शारदा समेत 4 नदियों ने खतरे के निशान को पार कर लिया है, जिससे किनारे बसे गांवों में दहशत का माहौल है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n बलिया में खौफनाक कटान: बलिया जिले में सरयू नदी का कटान इतना तेज और डरावना है कि एक पूरा का पूरा सरकारी स्कूल और एक पक्का मकान चंद मिनटों में नदी में समा गए। कटान के खौफ से ग्रामीण इतने डरे हुए हैं कि वे बाढ़ के पानी से बचने के लिए अपने हाथों से अपने कच्चे मकानों को तोड़कर बांस-बल्लियां और ईंटें समेट कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।\r\n \r\n
- \r\n गोंडा में फसलें जलमग्न: गोंडा जिले में घाघरा नदी ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। नदी के पानी ने किनारे के इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे 100 बीघा से अधिक तैयार फसल पूरी तरह पानी में डूब कर बर्बाद हो गई है। किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं।\r\n \r\n
\r\n\r\n
2. रिहायशी इलाकों में मगरमच्छों की दहशत (Wildlife Conflict in Floods)
\r\n\r\nसरयू और घाघरा नदियों में उफान की वजह से सीतापुर, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी और बहराइच के नदी किनारे वाले गांवों में बाढ़ का पानी घुसने लगा है। लेकिन पानी से ज्यादा खौफ मगरमच्छों का है। जलस्तर बढ़ने के कारण नदियों से बहकर मगरमच्छ रिहायशी इलाकों और लोगों के घरों तक पहुंच रहे हैं।
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
- \r\n
- \r\n बहराइच की घटना: शुक्रवार दोपहर बहराइच के खैरीघाट थाना क्षेत्र स्थित बेलामकन गांव में एक 10 फीट लंबा विशालकाय मगरमच्छ कुएं में गिर गया। ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। मौके पर पहुंची रेस्क्यू टीम ने करीब 1 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद मगरमच्छ को कुएं से बाहर निकाला और सुरक्षित स्थान पर छोड़ा।\r\n \r\n


3. शहरों का बुरा हाल: मेरठ मेडिकल कॉलेज बना तालाब, कानपुर जलमग्न (Urban Chaos)
\r\n\r\nबारिश ने यूपी के शहरों में नगर निगमों और प्राधिकरणों के 'स्मार्ट सिटी' और ड्रेनेज सिस्टम की पोल खोल कर रख दी है।
\r\n\r\n
🏪 आपके शहर के ऑफर
विज्ञापन · स्थानीय दुकानों की ताज़ा स्कीम · स्वाइप करें →
सभी ऑफर देखें →
- \r\n
- \r\n मेरठ का हाहाकार: शनिवार को हुई जोरदार बारिश के बाद मेरठ के लाला लाजपत राय (LLRM) मेडिकल कॉलेज की स्थिति बेहद दयनीय हो गई। पूरे अस्पताल परिसर में घुटनों तक पानी भर गया। टीबी वार्ड और ओपीडी (OPD) में पानी घुसने के कारण उसे बंद करना पड़ा। मरीज और उनके तीमारदार गंदे पानी के बीच से गुजरने को मजबूर दिखे। आपको बता दें कि कुछ दिन पहले ही मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में भी भारी जलभराव हुआ था, जिससे बिजली का पैनल बर्बाद हो गया था और 6 दिनों तक बिजली आपूर्ति ठप रही थी।\r\n \r\n
- \r\n कानपुर और फर्रुखाबाद: शनिवार को प्रदेश के 36 शहरों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। सबसे ज्यादा 13.8 मिमी. बारिश फर्रुखाबाद में हुई। वहीं, कानपुर में कुछ ही घंटों की बारिश से पॉश गलियां और सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं।\r\n \r\n
\r\n\r\n
4. प्राधिकरण की घोर लापरवाही: ग्रेटर नोएडा में मासूम की दर्दनाक मौत
\r\n\r\nइस बारिश ने एक परिवार को जिंदगी भर का नासूर दे दिया है। ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क क्षेत्र (कलाधाम सोसायटी के पास) में शनिवार शाम को 6 साल के मासूम अव्यान की 15 फीट गहरे पानी से भरे गड्ढे में डूबने से मौत हो गई।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n कैसे हुआ हादसा? मृतक बच्चा केंद्रीय विद्यालय के उप-प्रधानाचार्य सीवान यादव का बेटा था। शनिवार को अव्यान अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। खेलते-खेलते वह प्राधिकरण (Authority) द्वारा बोरिंग के लिए खोदे गए गहरे गड्ढे के पास पहुंच गया जो बारिश के पानी से लबालब भरा था। अचानक पैर फिसलने से वह उसमें गिर गया। साथ खेल रहे बच्चों के शोर मचाने पर जब तक लोग पहुंचे, तब तक मासूम की सांसें थम चुकी थीं। इस घटना ने प्राधिकरण की घोर लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।\r\n \r\n
\r\n\r\n
5. मौसम विभाग का ताजा अलर्ट (IMD Forecast & Alert)
\r\n\r\nभले ही रविवार को नोएडा और बिजनौर में बारिश हुई और लखनऊ-आगरा में मौसम साफ रहा हो, लेकिन राहत अभी दूर है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n 25 जिलों में बारिश: मौसम विभाग ने अगले 24 से 48 घंटों के लिए प्रदेश के 25 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है।\r\n \r\n
- \r\n बिजली गिरने की आशंका: वाराणसी, प्रयागराज समेत 8 जिलों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने (Thunderstorm) की गंभीर चेतावनी दी गई है।\r\n \r\n
- \r\n क्या कहते हैं मौसम वैज्ञानिक? लखनऊ के मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि पिछले दिनों हवाओं के राजस्थान और मध्य भारत की तरफ खिसकने से यूपी में बारिश थम गई थी। लेकिन अब बंगाल की खाड़ी और बांग्लादेश के पास हवा का कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) बन रहा है। इसके प्रभाव से मानसूनी हवाएं फिर से यूपी की तरफ लौटेंगी। 27 जुलाई से बारिश का दायरा बढ़ेगा और मानसूनी गतिविधियां तेज हो जाएंगी।\r\n \r\n
\r\n\r\n
6. अल नीनो का साया: इस साल कम बारिश के संकेत
\r\n\r\nइतनी भारी बारिश के बावजूद चौंकाने वाली बात यह है कि इस साल मानसून कमजोर रह सकता है। मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. एम. महापात्रा ने बताया कि प्रशांत महासागर में 'ला नीना' (La Nina) जैसी स्थितियां खत्म होकर अब 'अल नीनो' (El Nino) की ओर बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। इसके कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से कमजोर रहने के आसार हैं। इसके अलावा उत्तरी गोलार्ध में कम बर्फबारी भी मानसून को प्रभावित कर रही है, जिसके चलते कहीं सूखा तो कहीं अचानक भारी बारिश (Extreme Weather Events) देखने को मिल रही है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
निष्कर्ष और अपील (Conclusion): उत्तर प्रदेश का मौजूदा मौसम अप्रत्याशित और खतरनाक दौर से गुजर रहा है। एक तरफ जहां ग्रामीण इलाके बाढ़ और मगरमच्छों के खौफ में जी रहे हैं, वहीं शहरी इलाके खुले गड्ढों और जलभराव जैसी मानव-निर्मित आपदाओं का शिकार हो रहे हैं। खबरीलाल न्यूज़ अपने सभी पाठकों से अपील करता है कि बारिश के दौरान जर्जर इमारतों, बिजली के खंभों, गहरे गड्ढों और उफनती नदियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें। मौसम और प्रशासन के हर ताजा अपडेट के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।
Sabse pehle comment karne wale banein.