उत्तर प्रदेश, जो एक्सप्रेसवे प्रदेश के नाम से अपनी नई पहचान गढ़ रहा है, अब एक और मील का पत्थर स्थापित करने जा रहा है। प्रदेश में दो महा-एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, को आपस में जोड़ने के लिए एक नए लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। लेकिन यह कोई आम सड़क नहीं होगी। करीब 90 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर लागत के मामले में प्रदेश के सभी मौजूदा एक्सप्रेसवे को पीछे छोड़ने वाला है। इसके निर्माण पर लगभग ₹7500 करोड़ खर्च होंगे, यानी प्रति किलोमीटर सड़क बनाने की लागत लगभग 80 करोड़ रुपये आएगी, जो इसे अब तक का सबसे महंगा एक्सप्रेसवे बनाती है।READ ALSO:-मौसम के 3 रंग: कहीं गुलाबी ठंड ने दी दस्तक, कहीं गर्मी से हाल बेहाल, गुजरात-महाराष्ट्र पर 'जल प्रलय' का खतरा
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क्यों है यह एक्सप्रेसवे 'सोने' जितना कीमती?
\r\n\r\nआखिर इस एक्सप्रेसवे में ऐसा क्या खास है कि इसकी लागत आसमान छू रही है? अधिकारियों के अनुसार, इसकी वजह साधारण नहीं है। यह एक्सप्रेसवे इंजीनियरिंग और सुरक्षा का एक नायाब नमूना होगा:
\r\n\r\nजंतर–मंतर गेम खेलें। पुलिस बनकर कॉकरोचों को पहचानो या आंदोलनकारी बनकर पहुंचो जंतर मंतर। खेलें ▶ \r\n\r\n
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- \r\n पुलों का जाल: इसके रास्ते में कई नदियां और नहरें हैं, जिन्हें पार करने के लिए 29 बड़े पुलों का निर्माण किया जाएगा, जो सिविल इंजीनियरिंग का एक जटिल और महंगा काम है।\r\n \r\n
- \r\n हाई-टेक ड्रेनेज सिस्टम: जलभराव की समस्या से निपटने और सड़क की उम्र बढ़ाने के लिए इसमें अत्याधुनिक ड्रेनेज सिस्टम लगाया जाएगा, जो मानसून के दौरान भी ट्रैफिक को सुगम बनाए रखेगा।\r\n \r\n
- \r\n अभेद्य सुरक्षा: एक्सप्रेसवे पर जानवरों के आने से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए दोनों तरफ मजबूत फेंसिंग (घेराबंदी) की जाएगी, जो इसे एक सुरक्षित यात्रा कॉरिडोर बनाएगी।\r\n \r\n
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इन महंगे सिविल कार्यों और हाई-टेक फीचर्स के कारण इसकी लागत गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे (लगभग ₹7300 करोड़) से भी अधिक हो गई है।
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क्यों कहा जा रहा है इसे नया 'आर्थिक कॉरिडोर'?
\r\n\r\nयह सिर्फ दो सड़कों को जोड़ने वाला लिंक नहीं, बल्कि विकास का एक नया 'आर्थिक कॉरिडोर' है। इसके बनने से:
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- \r\n अभूतपूर्व कनेक्टिविटी: 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का सीधा जुड़ाव 302 किलोमीटर लंबे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से हो जाएगा। इससे दिल्ली से पूर्वी यूपी और बिहार जाने वाले यात्रियों का सफर बेहद आसान, तेज और आरामदायक हो जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n फर्रुखाबाद की बदलेगी किस्मत: यह एक्सप्रेसवे फर्रुखाबाद और उसके आसपास के अब तक पिछड़े माने जाने वाले जिलों के लिए विकास की लाइफलाइन साबित होगा।\r\n \r\n
- \r\n उद्योग और कृषि को पंख: बेहतर कनेक्टिविटी से इन इलाकों में कृषि-आधारित उद्योगों, वेयरहाउसिंग और अन्य क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।\r\n \r\n
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यह एक्सप्रेसवे एक ग्रीनफील्ड परियोजना के रूप में विकसित किया जा रहा है, यानी इसे पूरी तरह से नई जमीन पर बनाया जाएगा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कॉरिडोर न केवल यात्रा के समय को कम करेगा, बल्कि अपने साथ विकास और समृद्धि की एक नई लहर लेकर आएगा, जो उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को और गति प्रदान करेगा।
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