थानाभवन, 14 जून 2026: समाज में दिव्यांगजनों को उनका हक और सम्मान दिलाने के लिए उत्तर प्रदेश के शामली जनपद में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। रविवार को कस्बा थानाभवन स्थित वंदना गार्डन में एक विशाल थानाभवन दिव्यांगजन महा बैठक (Thanabhawan Divyangjan Meeting) का भव्य आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं था, बल्कि दिव्यांगों को उनके अधिकारों, आत्मसम्मान और समाज में उनकी समान भागीदारी के प्रति जागरूक करना था। इस महा बैठक में न केवल शामली, बल्कि आसपास के कई अन्य जनपदों—सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ और बिजनौर—से बड़ी संख्या में दिव्यांगजनों ने हिस्सा लिया और अपनी एकजुटता का परिचय दिया।READ ALSO:-मुजफ्फरनगर में खौफ का साया: शातिरों ने तोड़ा दुकान का CCTV कैमरा, किसी बड़ी वारदात की आशंका से सहमा व्यापारी; पुलिस की चुप्पी पर उठे सवाल
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यह आयोजन एक स्पष्ट संदेश है कि दिव्यांगजन अब समाज में किसी की दया के मोहताज नहीं रहना चाहते, बल्कि वे अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर आवाज उठाने को तैयार हैं। आइए, इस महा बैठक के प्रमुख बिंदुओं, उठाई गई मांगों और इसके व्यापक सामाजिक प्रभाव का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।
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Thanabhawan Divyangjan Meeting का मुख्य उद्देश्य और पृष्ठभूमि

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दिव्यांगजनों को अक्सर समाज की मुख्यधारा से कटा हुआ महसूस होता है। उनके लिए शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक स्थानों तक पहुंच आज भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसी पृष्ठभूमि में थानाभवन दिव्यांगजन महा बैठक का खाका तैयार किया गया था। इस कार्यक्रम की मुख्य आयोजक और वरिष्ठ समाजसेवी पायल कश्यप ने बताया कि यह बैठक किसी एक दिन की मेहनत का नतीजा नहीं है, बल्कि यह वर्षों के संघर्ष का एक अहम पड़ाव है।
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पायल कश्यप वर्ष 2008 से लगातार दिव्यांगजनों के हितों, उनके कानूनी अधिकारों और उनके पुनर्वास के लिए कार्य कर रही हैं। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि दिव्यांगजन हर दिन अनगिनत व्यावहारिक और प्रशासनिक समस्याओं से जूझ रहे हैं।
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पायल कश्यप का संदेश:

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"हमारे दिव्यांग भाई-बहनों की समस्याओं का स्थायी समाधान तभी संभव है जब हम सभी संगठित हों। हमें अपनी आवाज को शासन, प्रशासन और सीधे सरकार तक पहुंचाना होगा। यह महा बैठक उसी व्यापक मुहिम की शुरुआत है, जहां हम सिर्फ अपनी परेशानी नहीं बताएंगे, बल्कि उसका समाधान भी मांगेंगे।"
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सहायक उपकरणों के लिए चला महा-पंजीकरण अभियान

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इस आयोजन की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण उपलब्धि सहायक उपकरणों का पंजीकरण (Registration for Assistive Devices) रहा। कई दिव्यांग आर्थिक तंगी या जानकारी के अभाव में उन उपकरणों को प्राप्त नहीं कर पाते हैं, जो उनके जीवन को आसान बना सकते हैं।
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बैठक के दौरान एक विशेष डेस्क स्थापित की गई थी, जहां दिव्यांगजनों के लिए निम्नलिखित उपकरणों के लिए मुफ्त पंजीकरण किया गया:
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    ट्राई साइकिल (Tricycles): लंबी दूरी तय करने में असमर्थ लोगों के लिए।
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    व्हीलचेयर (Wheelchairs): गंभीर रूप से शारीरिक अक्षम व्यक्तियों के लिए।
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    बैसाखी (Crutches): चलने में आंशिक रूप से अक्षम लोगों के लिए।
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    कृत्रिम अंग (Artificial Limbs): दुर्घटनाओं या बीमारियों में अंग गंवा चुके लोगों के लिए।
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    मोटराइज्ड साइकिल (Motorized Cycles): कामकाजी दिव्यांगों के लिए बैटरी चालित आधुनिक साइकिलें।
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यह पंजीकरण अभियान सीधे तौर पर सरकार के 'एलिम्को' (ALIMCO - Artificial Limbs Manufacturing Corporation of India) और समाज कल्याण विभाग की योजनाओं से जुड़ा हुआ है, ताकि पात्र लोगों को जल्द से जल्द ये उपकरण मुहैया कराए जा सकें।
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समाजसेवियों और स्थानीय दिग्गजों का सराहनीय योगदान

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किसी भी सामाजिक आंदोलन या कार्यक्रम की सफलता के पीछे स्थानीय समाज का बड़ा हाथ होता है। थानाभवन दिव्यांगजन महा बैठक में भी यही देखने को मिला। समाजसेवी पायल कश्यप ने वंदना गार्डन के संचालक विनोद कुमार सैनी का विशेष आभार व्यक्त किया। विनोद सैनी ने इस नेक काम के लिए अपना स्थान निःशुल्क उपलब्ध कराया और उन्हें "मानवता का सच्चा सेवक" बताया गया।
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इसके अतिरिक्त, कार्यक्रम को सफल बनाने में अन्य कई प्रमुख हस्तियों ने अपना योगदान दिया:
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    मुकेश कुमार: थाना भवन देहात स्थित वृहद गौशाला के संचालक मुकेश कुमार और उनकी पूरी टीम ने कार्यक्रम के प्रबंधन और भोजन व्यवस्था में अभूतपूर्व सहयोग दिया।
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    गोविंद कश्यप: जिला पंचायत सदस्य के भावी उम्मीदवार गोविंद कश्यप ने बैठक में उपस्थित होकर दिव्यांगजनों के हितों की रक्षा के लिए अपने पूर्ण सहयोग और राजनीतिक समर्थन का ठोस आश्वासन दिया।
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मुख्य अतिथि डॉ. भवर सिंह का प्रेरणादायक संबोधन

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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए डॉ. भवर सिंह का संबोधन बेहद भावुक और प्रेरणादायक रहा। डॉ. भवर सिंह स्वयं एक दिव्यांग हैं, इसलिए उन्होंने मंच से जो भी कहा, वह उपस्थित भीड़ के सीधे दिलों तक पहुंचा।
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डॉ. सिंह ने दिव्यांगजनों की समस्याओं को करीब से सुना और कहा:

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"दिव्यांगजन इस समाज और राष्ट्र के निर्माण का एक अभिन्न हिस्सा हैं। हमें सहानुभूति (Sympathy) नहीं, बल्कि समानुभूति (Empathy) और समान अधिकार चाहिए। यह हमारा संवैधानिक अधिकार है कि हम समाज में सम्मान के साथ जिएं। मैं विश्वास दिलाता हूं कि आज इस बैठक में जो भी समस्याएं सामने आई हैं, उन्हें एक मांग-पत्र के रूप में सीधे राज्य सरकार के संबंधित मंत्रालयों तक पहुंचाया जाएगा।"
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वहीं, जाने-माने समाजसेवी सपन कुमार ने भी मंच से सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज भी दिव्यांग समाज में वह सम्मानजनक जीवन नहीं जी पा रहे हैं, जिसके वे हकदार हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों को 'बाधा रहित' (Barrier-free) बनाने के काम को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।
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उम्मीद फाउंडेशन और युवा शक्ति की भूमिका

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इस विशाल आयोजन को अनुशासित और सुचारू रूप से संपन्न कराने का श्रेय 'उम्मीद फाउंडेशन' (Ummeed Foundation) और उसके युवा कार्यकर्ताओं को जाता है। फाउंडेशन के अध्यक्ष आकाश कुमार के नेतृत्व में युवाओं की एक बड़ी टीम ने दिव्यांगजनों को बैठने, उनके दस्तावेज तैयार करने और उन्हें मंच तक लाने में मदद की।
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कार्यक्रम को सफल बनाने वाले प्रमुख नाम: सुशील कुमार, अमर कुमार चौहान, मोनू कुमार कश्यप, राधेश्याम, राहुल कश्यप, अमित कुमार, अनुराधा, भावना, रानी, सीमा, आंचल, ममतेश, अमन वर्मा, रजत, दीपक, कुलदीप, देवेंद्र, आशीष वर्मा, राजीव, प्रशांत पुंडीर, चांद सिंह पुंडीर, आशीष सिंघल, और सुधीर कुमार सहित दर्जनों स्वयंसेवकों ने अपना पूरा दिन इस पुनीत कार्य में समर्पित किया।
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जमीनी हकीकत: आज भी अधिकारों से वंचित हैं कई दिव्यांग

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थानाभवन दिव्यांगजन महा बैठक जैसे आयोजनों की आवश्यकता इसलिए पड़ती है क्योंकि कानून बनने के बावजूद जमीनी हकीकत काफी अलग है। भारत में 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' (RPwD Act 2016) लागू है, जो 21 प्रकार की डिसेबिलिटी को मान्यता देता है और सरकारी नौकरियों में 4% आरक्षण का प्रावधान करता है। लेकिन:
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    पेंशन की समस्या: कई दिव्यांगों को उनकी मासिक पेंशन समय पर नहीं मिल रही है, या फिर कागजी कार्रवाई में उलझाकर उनका आवेदन रद्द कर दिया जाता है।
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    रोजगार का अभाव: निजी क्षेत्र में आज भी दिव्यांगों को नौकरी देने से हिचकिचाहट होती है, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं बन पाते।
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    सार्वजनिक परिवहन: बस स्टैंड्स और रेलवे स्टेशनों पर आज भी रैंप (Ramps) और व्हीलचेयर की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
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भविष्य की रणनीति और संकल्प

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इस महा बैठक के समापन पर सभी दिव्यांगजनों और कार्यकर्ताओं ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया। इस प्रस्ताव के तहत यह निर्णय लिया गया कि:
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    स्थानीय स्तर पर एक 'दिव्यांग सहायता समिति' का गठन किया जाएगा, जो प्रशासनिक अधिकारियों के साथ नियमित बैठक करेगी।
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    जिन लोगों ने आज उपकरणों के लिए पंजीकरण कराया है, उन्हें अगले एक महीने के भीतर उपकरण दिलाने के लिए डीएम (District Magistrate) कार्यालय में ज्ञापन सौंपा जाएगा।
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    भविष्य में यदि किसी दिव्यांग के साथ कोई अन्याय या दुर्व्यवहार होता है, तो पूरा संगठन एकजुट होकर उसके लिए कानूनी और सामाजिक लड़ाई लड़ेगा।
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शामली के वंदना गार्डन में आयोजित थानाभवन दिव्यांगजन महा बैठक केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक मूक क्रांति की शुरुआत है। पायल कश्यप, डॉ. भवर सिंह और उम्मीद फाउंडेशन जैसे लोगों के प्रयास यह साबित करते हैं कि यदि समाज का हर वर्ग अपनी जिम्मेदारी समझे, तो दिव्यांगजनों के जीवन में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। सरकार और प्रशासन को भी चाहिए कि वे इस बैठक से उठी आवाजों को गंभीरता से सुनें और दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए धरातल पर ठोस योजनाएं लागू करें। एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण तभी हो सकता है जब उसके सभी नागरिक—विशेषकर दिव्यांगजन—समान रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर हों।
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संक्षिप्त सारांश: 14 जून 2026 को शामली के थानाभवन स्थित वंदना गार्डन में एक विशाल 'थानाभवन दिव्यांगजन महा बैठक' का आयोजन किया गया, जिसमें मेरठ, बिजनौर, सहारनपुर सहित कई जिलों के दिव्यांगों ने हिस्सा लिया। समाजसेवी पायल कश्यप द्वारा आयोजित इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और ट्राई साइकिल, व्हीलचेयर व कृत्रिम अंगों के लिए पंजीकरण कराना था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. भवर सिंह और सपन कुमार ने सरकार से दिव्यांगों की समस्याओं को प्राथमिकता से हल करने की मांग की, और उम्मीद फाउंडेशन के युवाओं ने इस आयोजन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।
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