उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार भू-माफियाओं और सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति अपना रही है। इसके बावजूद कुछ कॉलोनाइजर और दबंग लोग प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर सरकारी संपत्तियों को खुर्द-बुर्द करने से बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला शामली जिले के थाना भवन (Thana Bhawan) क्षेत्र से सामने आया है। यहां एक बड़े थाना भवन सरकारी तालाब कब्जा प्रकरण का भंडाफोड़ हुआ है। नगर पंचायत कार्यालय के ठीक सामने स्थित सरकारी तालाब की भूमि पर भू-माफियाओं द्वारा किए गए अवैध कब्जों की शिकायत मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन हरकत में आया और संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर सख्त कार्रवाई की शुरुआत कर दी है।READ ALSO:-PNB Scam Alert: जलालाबाद पंजाब नेशनल बैंक में महाघोटाला! बैंक मित्र ने कर्मचारियों के साथ मिलकर डकारे ग्राहकों के लाखों रुपये, ऑडियो वायरल होने पर मची खलबली
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इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि यह थाना भवन सरकारी तालाब कब्जा कैसे हुआ, प्रशासन की पैमाइश में कौन-कौन से राज खुले और आगे भू-माफियाओं पर क्या कार्रवाई होने जा रही है।
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थाना भवन सरकारी तालाब कब्जा: कैसे खुली पोल?

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जानकारी के अनुसार, थाना भवन नगर पंचायत क्षेत्र के मोहल्ला कस्यवान में नगर पंचायत कार्यालय के सामने एक कॉलोनी स्थित है। इस जगह पर सरकारी रिकॉर्ड में कई वर्षों पुराना एक तालाब दर्ज है। पिछले कुछ समय से स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ भू-माफियाओं और स्थानीय दबंगों ने इस सरकारी तालाब को मिट्टी से पाटकर उस पर अवैध निर्माण कर लिया है।
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इस गंभीर शिकायत का संज्ञान लेते हुए थाना भवन नगर पंचायत के अधिशाषी अधिकारी (EO) जितेन्द्र राणा ने सख्त रुख अपनाया। अधिशाषी अधिकारी के स्पष्ट आदेश पर सोमवार को राजस्व विभाग (Revenue Department) और नगर पंचायत कर्मियों की एक संयुक्त टीम का गठन किया गया। इस टीम ने भारी पुलिस बल और दलबल के साथ मौके पर पहुंचकर सरकारी तालाब की भूमि की पैमाइश (नाप-जोख) का काम शुरू किया।
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खसरा नंबर 19 और 1139 की हुई नाप-जोख

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राजस्व विभाग की टीम ने सरकारी नक्शे और खतौनी के आधार पर मोहल्ला कस्यवान में स्थित तालाब के खसरा नंबर 19 और खसरा नंबर 1139 की सघन पैमाइश की। पैमाइश के दौरान जो सच सामने आया, उसने प्रशासन के कान खड़े कर दिए। सरकारी तालाब की कीमती जमीन पर कई लोगों ने पक्के निर्माण कर लिए थे।
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आधा दर्जन से अधिक कब्जाधारी चिन्हित

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थाना भवन सरकारी तालाब कब्जा मामले की पैमाइश के दौरान संयुक्त टीम ने करीब आधा दर्जन (6 से अधिक) लोगों के अवैध कब्जों की पहचान की। टीम ने जिन लोगों के कब्जे सरकारी जमीन पर पाए हैं, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
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    अनीसा (पत्नी इलियास)
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    अफ़सर (पुत्र नसीर)
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    तमसिर (निवासी सोंता)
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    इसके अलावा अन्य अज्ञात लोग जिन्होंने टीन शेड या दीवार बनाकर अतिक्रमण किया है।
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राजस्व विभाग की टीम ने इन सभी अवैध कब्जों को लाल निशान लगाकर चिन्हित कर लिया है। प्रशासन का कहना है कि इन सभी लोगों को जल्द ही बेदखली का नोटिस थमाया जाएगा और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद बुलडोजर से अवैध निर्माण को ढहाने की कार्रवाई की जाएगी।
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कॉलोनाइजर का बड़ा खेल: फ्रेंड्स कॉलोनी में भी अवैध कब्जा

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इस मामले में शिकायतकर्ता यशस्वी सिंह ने प्रशासन को केवल कस्यवान मोहल्ले तक ही सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि एक और बड़े घोटाले की तरफ इशारा किया। यशस्वी सिंह ने बताया कि नगर पंचायत कार्यालय के बराबर में नौगांवा पट्टी में स्थित फ्रेंड्स कॉलोनी में भी कॉलोनाइजरों द्वारा बड़ा खेल किया गया है।
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उन्होंने जानकारी दी कि वहां भी तालाब का एक नंबर दर्ज है, जिसका खसरा नंबर 1139 है। इस तालाब का कुल रकबा (क्षेत्रफल) लगभग 720 वर्ग मीटर है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस 720 वर्ग मीटर की सरकारी तालाब की जमीन पर कॉलोनाइजर के द्वारा बकायदा एक अवैध कॉलोनी काट दी गई है और प्लॉट बेचकर करोड़ों का वारा-न्यारा किया गया है।
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सरकारी सड़क पर चारदीवारी का निर्माण

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सिर्फ तालाब ही नहीं, भू-माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि फ्रेंड्स कॉलोनी के बराबर से गुजर रही मुख्य सरकारी सड़क पर भी उन्होंने अवैध रूप से चारदीवारी (बाउंड्री वॉल) का निर्माण कर लिया है। इस अतिक्रमण की वजह से सड़क की चौड़ाई कम हो गई है, जिससे राहगीरों और स्थानीय निवासियों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शिकायतकर्ता की इस सूचना के बाद राजस्व टीम ने इस हिस्से का भी निरीक्षण किया है।
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अधिकारियों का बयान और आगे की कार्यवाही

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जब इस पूरे थाना भवन सरकारी तालाब कब्जा प्रकरण और फ्रेंड्स कॉलोनी में कॉलोनाइजरों की धांधली के संदर्भ में नगर पंचायत के अधिशाषी अधिकारी (EO) जितेन्द्र राणा से मीडिया ने बातचीत की, तो उन्होंने कड़े शब्दों में अतिक्रमणकारियों को चेतावनी दी।
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ईओ जितेन्द्र राणा ने बताया:

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"शिकायत के आधार पर संयुक्त टीम द्वारा मौके की पैमाइश कराई गई है। प्रथम दृष्टया कई लोगों के अवैध कब्जे तालाब की भूमि पर पाए गए हैं। राजस्व विभाग की टीम वर्तमान में अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही है। जैसे ही राजस्व विभाग की फाइनल रिपोर्ट कार्यालय को प्राप्त होगी, बिना किसी भेदभाव के आगे की कड़ी कानूनी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। जो भी सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाएगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।"
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पैमाइश टीम में कौन-कौन रहा मौजूद?

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इस बेहद संवेदनशील पैमाइश की प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराया गया। कार्रवाई के दौरान मौके पर राजस्व विभाग और नगर पंचायत के कई वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से:
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    राजस्व प्रभारी निरीक्षक सुनील दत्त शर्मा
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    हल्का लेखपाल (मसावी पट्टी) रोहित चौहान
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    लेखपाल विपिन
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    सचिन अग्रवाल
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    लिपिक संजय कुमार
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    वसीक अहमद
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  • \r\n
    मनीष शर्मा
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जल संरक्षण के लिए तालाबों को बचाना है जरूरी

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वर्तमान में पूरे उत्तर प्रदेश में जल संकट और गिरते भूजल स्तर (Groundwater level) की समस्या एक विकराल रूप धारण कर चुकी है। ऐसे में प्राकृतिक जल स्रोतों जैसे तालाबों, पोखरों और झीलों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। सरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी तालाब की भूमि का भू-उपयोग (Land Use) बदला नहीं जा सकता है।
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सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के भी स्पष्ट निर्देश हैं कि तालाब की जमीनों पर हुए किसी भी प्रकार के पक्के या कच्चे निर्माण को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए और तालाबों को उनके मूल स्वरूप में वापस लाया जाए। ऐसे में थाना भवन सरकारी तालाब कब्जा का यह मामला न सिर्फ कानूनी अपराध है, बल्कि पर्यावरण के साथ भी एक बड़ा खिलवाड़ है। प्रशासन की इस पैमाइश ने भू-माफियाओं में हड़कंप जरूर मचा दिया है, लेकिन जनता अब इस बात का इंतजार कर रही है कि चिन्हित किए गए इन अवैध कब्जों पर बुलडोजर कब गरजेगा।
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अंततः, थाना भवन सरकारी तालाब कब्जा का यह उजागर हुआ मामला इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि मिलीभगत और सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर भू-माफिया किस तरह सरकारी संपत्तियों को डकार रहे हैं। अधिशाषी अधिकारी जितेन्द्र राणा के निर्देश पर हुई पैमाइश एक सकारात्मक कदम है। यदि प्रशासन ईमानदारी से राजस्व रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करता है, तो न केवल करोड़ों रुपये की बेशकीमती सरकारी जमीन मुक्त होगी, बल्कि एक पुराने प्राकृतिक जल स्रोत का भी पुनरुद्धार हो सकेगा। आम जनता को भी चाहिए कि वे अपने आस-पास हो रहे इस तरह के अतिक्रमण के खिलाफ आवाज उठाएं।
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शामली जिले के थाना भवन में मोहल्ला कस्यवान और नौगांवा पट्टी स्थित फ्रेंड्स कॉलोनी में सरकारी तालाब (खसरा नंबर 19 और 1139) पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। ईओ जितेन्द्र राणा के निर्देश पर राजस्व विभाग की टीम ने पैमाइश की, जिसमें आधा दर्जन लोगों के अवैध निर्माण चिन्हित किए गए। शिकायतकर्ता के अनुसार यहां कॉलोनाइजरों ने तालाब की 720 मीटर जमीन पर कॉलोनी काट दी है और सरकारी सड़क पर दीवार बना दी है। प्रशासन ने जल्द ही रिपोर्ट के आधार पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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