साइंस डेस्क (Science News): रात का आकाश एक बार फिर अपनी रहस्यमयी और खूबसूरत खगोलीय घटनाओं से दुनिया भर के लोगों को रोमांचित करने जा रहा है। 28 अगस्त 2026 की पूर्णिमा खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए बेहद खास होने वाली है। इस दिन आसमान में न केवल “स्टर्जन मून” (Sturgeon Moon) का अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा, बल्कि इसी दिन एक चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) भी लगने जा रहा है।READ ALSO:-कानपुर में आसमान से बरसी मौत: 20 मिनट की उड़ान और खेत में जा गिरा विमान; इंस्ट्रक्टर-ट्रेनी की दर्दनाक मौत
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गोरखपुर स्थित वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामंडल) के खगोलविद अमर पाल सिंह ने इस बहुप्रतीक्षित खगोलीय घटना को लेकर बेहद रोचक और विस्तृत जानकारियां साझा की हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि स्टर्जन मून क्या है, भारत में चंद्र ग्रहण का समय क्या रहेगा और विज्ञान के नजरिए से इसके क्या मायने हैं।
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क्या होता है "स्टर्जन मून" (Sturgeon Moon)? कैसे पड़ा यह नाम?
\r\n\r\nअगस्त के महीने में आसमान में दिखाई देने वाली पूर्णिमा (Full Moon) को पश्चिमी देशों और विशेषकर उत्तरी अमेरिका में "स्टर्जन मून" के नाम से जाना जाता है। खगोलविद अमर पाल सिंह बताते हैं कि इस पूर्णिमा का नाम उत्तरी अमेरिका की जनजातीय परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।
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अगस्त के महीने में उत्तरी अमेरिका की ग्रेट लेक्स (Great Lakes) और लेक चैम्पलेन जैसी विशाल झीलों में 'स्टर्जन' (Sturgeon) नाम की एक बहुत बड़ी मीठे पानी की मछली भारी संख्या में पाई जाती थी। इसी प्रचुरता के कारण वहां के मूल निवासियों ने अगस्त की पूर्णिमा का नाम इसी मछली पर रख दिया।
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चूंकि उत्तरी गोलार्ध में अगस्त का महीना फसलों की कटाई का मुख्य समय होता है, इसलिए अलग-अलग संस्कृतियों और भौगोलिक क्षेत्रों में इस पूर्णिमा को कई अन्य नामों से भी पुकारा जाता है:
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- \r\n ग्रेन मून (Grain Moon): एंग्लो-सैक्सन परंपरा में इसे अनाज का चंद्रमा कहा गया।\r\n \r\n
- \r\n फ्रूट मून (Fruit Moon) और कॉर्न मून (Corn Moon): फसलों और फलों के पकने के कारण।\r\n \r\n
- \r\n लाइटनिंग मून (Lightning Moon) और बारले मून (Barley Moon): मौसम और जौ की कटाई से जुड़े अन्य नाम।\r\n \r\n
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भारत में चंद्र ग्रहण का सटीक समय (Chandra Grahan Time in India)
\r\n\r\n28 अगस्त 2026 को होने वाला यह चंद्र ग्रहण दुनिया के कई हिस्सों में देखा जाएगा। लेकिन, खगोल विज्ञान प्रेमियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह भारत में दिखाई देगा?
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खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, यह पूर्णिमा 28 अगस्त 2026 को भारतीय समयानुसार (IST) सुबह 9:48 बजे अपने पूर्ण चरम पर होगी। ग्रहण के विभिन्न चरणों का समय इस प्रकार रहेगा:
\r\n\r\n| \r\n ग्रहण का चरण (Eclipse Phase) \r\n | \r\n \r\n भारतीय समयानुसार (IST) \r\n | \r\n
| \r\n उपच्छाया चरण (Penumbral Phase) शुरू \r\n | \r\n \r\n सुबह 6:54 बजे \r\n | \r\n
| \r\n आंशिक चरण (Partial Phase) शुरू \r\n | \r\n \r\n सुबह 8:04 बजे \r\n | \r\n
| \r\n ग्रहण का चरम (Maximum Peak) \r\n | \r\n \r\n सुबह 9:43 बजे \r\n | \r\n
| \r\n पूर्णिमा का चरम (Full Moon Peak) \r\n | \r\n \r\n सुबह 9:48 बजे \r\n | \r\n
| \r\n आंशिक चरण की समाप्ति \r\n | \r\n \r\n सुबह 11:22 बजे \r\n | \r\n
| \r\n ग्रहण पूर्णतः समाप्त \r\n | \r\n \r\n दोपहर 12:32 बजे \r\n | \r\n
भारत में दृश्यता: चूंकि यह खगोलीय घटना भारतीय समयानुसार सुबह 6:54 से दोपहर 12:32 बजे के बीच घटित होगी, उस समय भारत में तेज धूप खिली होगी और दिन का समय होगा। इस कारण सूर्य के प्रकाश में यह चंद्र ग्रहण भारत से प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देगा।
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कहां-कहां आएगा नजर? यह चंद्र ग्रहण दक्षिणी-पश्चिमी एशिया, अफ्रीका, यूरोप के ज्यादातर हिस्सों, उत्तर और दक्षिण अमेरिका, तथा हिंद व प्रशांत महासागर के विस्तृत क्षेत्रों में साफ नजर आएगा। जहां ग्रहण अपने चरम पर होगा, वहां चंद्रमा तांबे-सा लाल या गहरा नारंगी (Blood Moon) दिखाई दे सकता है।
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ग्रहण के चरण और पृथ्वी की छाया का विज्ञान
\r\n\r\nचंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा पृथ्वी की छाया से होकर गुजरता है। इस छाया को दो मुख्य भागों में बांटा जाता है — 'अम्ब्रा' (Umbra) और 'पेनुम्ब्रा' (Penumbra)। चंद्र ग्रहण के इन जटिल चरणों को नीचे दिए गए इंटरैक्टिव विज़ुअल से और अधिक गहराई से समझा जा सकता है:
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\r\n\r\n\r\nवैज्ञानिक तथ्य: खगोलविद अमर पाल सिंह बताते हैं कि 'अम्ब्रा' पृथ्वी की गहरी और मुख्य छाया है, जबकि 'पेनुम्ब्रा' (उपछाया) एक हल्की बाहरी छाया है। जब चंद्रमा पेनुम्ब्रा से गुजरता है, तो उसकी चमक सिर्फ थोड़ी सी मद्धम होती है, जिसे उपछाया चंद्र ग्रहण कहते हैं।\r\n
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खगोलीय रहस्य: हर पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण क्यों नहीं होता?
\r\n\r\nयह एक बहुत ही सामान्य सवाल है कि जब हर पूर्णिमा को सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में होते हैं, तो फिर हर पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण क्यों नहीं लगता?
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इसके पीछे का मुख्य कारण है चंद्रमा की कक्षा (Orbit) का पृथ्वी की कक्षा के तल (Orbital plane) से लगभग 5° (डिग्री) का झुकाव। चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर एक बिल्कुल समतल प्लेट की तरह चक्कर नहीं लगाता है। इस 5 डिग्री के झुकाव के कारण, अधिकांश पूर्णिमाओं के दिन चंद्रमा पृथ्वी की छाया के या तो ऊपर से निकल जाता है या फिर ठीक नीचे से।
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ग्रहण केवल तभी लगता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा अंतरिक्ष में बिल्कुल एक सीधी रेखा (180 डिग्री) में आ जाते हैं, जिसे खगोलविज्ञान की भाषा में 'सिज़ीगी' (Syzygy) या 'युति-वियुति' कहा जाता है। यदि चंद्रमा की कक्षा में यह 5 डिग्री का झुकाव न होता, तो हमें हर महीने एक सूर्य ग्रहण (अमावस्या पर) और एक चंद्र ग्रहण (पूर्णिमा पर) देखने को मिलता, यानी साल में कम से कम 24 ग्रहण लगते!
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क्या आप जानते हैं? (Astronomy Facts in Hindi)
\r\n\r\nइस खगोलीय रिपोर्ट के अंत में खगोलविद अमर पाल सिंह ने ब्रह्मांड से जुड़े कुछ ऐसे रोचक तथ्य भी साझा किए हैं जो आम लोगों के लिए बहुत रोमांचक हैं:
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- \r\n ग्रहण हमेशा जोड़े में आते हैं: कोई भी ग्रहण कभी अकेला नहीं आता। सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण हमेशा एक-दूसरे के आगे-पीछे लगभग दो सप्ताह (एक पखवाड़े) के अंतराल पर आते हैं। उदाहरण के लिए, 12 अगस्त 2026 की अमावस्या पर पूर्ण सूर्य ग्रहण की घटना के ठीक दो सप्ताह बाद 28 अगस्त को यह चंद्र ग्रहण लग रहा है।\r\n \r\n
- \r\n चंद्र लिब्रेशन (हिलता हुआ चंद्रमा): हम हमेशा चंद्रमा का एक ही हिस्सा (50%) अपनी धरती से देखते हैं। लेकिन चंद्रमा अपने अक्ष पर थोड़ा उत्तर से दक्षिण हिलता है और पूर्व से पश्चिम डगमगाता है। इस खगोलीय डगमगाहट को 'चंद्र लिब्रेशन' (Lunar Libration) कहते हैं। इसी वजह से हम समय के साथ चंद्रमा की सतह का कुल 59% हिस्सा धरती से देख पाते हैं।\r\n \r\n
- \r\n टर्मिनेटर लाइन (Terminator Line): यह खगोल विज्ञान की वह काल्पनिक रेखा है जो किसी ग्रह या उपग्रह पर दिन और रात (प्रकाश और अंधकार) वाले हिस्से को अलग करती है। चंद्र ग्रहण के दौरान, वैज्ञानिक टर्मिनेटर रेखाओं का उपयोग चंद्रमा की सतह पर पड़ने वाली छाया का अध्ययन करने के लिए करते हैं।\r\n \r\n
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भले ही 28 अगस्त 2026 को भारत के लोग दिन होने के कारण चंद्र ग्रहण का नजारा अपनी आंखों से न देख पाएं, लेकिन इंटरनेट पर दुनिया के कई ऑब्जर्वेटरी से इसका सीधा प्रसारण (Live Streaming) देखा जा सकेगा। वहीं, रात के समय भारतीय आकाश में पूर्ण 'स्टर्जन मून' की चमकीली आभा निश्चित ही मनमोहक होगी।
Sabse pehle comment karne wale banein.