बरेली (क्राइम एवं प्रशासनिक डेस्क): आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर छा जाने की होड़ हर किसी में है, लेकिन जब आप खाकी वर्दी (Khaki Uniform) पहनते हैं, तो आपके ऊपर कई तरह की विभागीय बंदिशें और जिम्मेदारियां लागू हो जाती हैं। उत्तर प्रदेश के बरेली (Bareilly) जिले से एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जो उन सभी पुलिसकर्मियों के लिए एक बड़ा सबक है, जो ड्यूटी से ज्यादा फेसबुक, इंस्टाग्राम या यूट्यूब (YouTube) पर सक्रिय रहते हैं।READ ALSO:-जौहर यूनिवर्सिटी पर 'सियासी महासंग्राम'! रामपुर कूच कर रहे पूर्व मंत्री ठाकुर मूलचंद चौहान को पुलिस ने किया 'हाउस अरेस्ट', धामपुर में पुलिस और सपाईयों के बीच भारी बवाल
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बरेली के तेजतर्रार वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अनुराग आर्य ने 'उत्तर प्रदेश पुलिस सोशल मीडिया पॉलिसी-2023' (UP Police Social Media Policy 2023) का कड़ाई से पालन कराते हुए एक बड़ा एक्शन लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अति-सक्रिय रहने वाले सिपाही अजय कुमार सहित कुल 7 पुलिसकर्मियों को अलग-अलग मामलों में एक ही झटके में सस्पेंड कर दिया है।
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आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर सिपाही अजय कुमार ने ऐसा क्या किया, जिसने विभागीय नियमों को तोड़ दिया और SSP को इतना सख्त कदम उठाना पड़ा।
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क्या है पूरा मामला? बीजेपी मेयर के साथ पॉडकास्ट बना गले की फांस

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जानकारी के अनुसार, बरेली के रिजर्व पुलिस लाइन (Reserve Police Line) में तैनात सिपाही अजय कुमार पिछले काफी लंबे समय से पुलिसिंग से ज्यादा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय थे। वे यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर अपनी एक अच्छी खासी फैन फॉलोइंग (Fan Following) बना चुके थे।
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हाल ही में, सिपाही अजय कुमार ने बरेली नगर निगम के बीजेपी (BJP) मेयर डॉ. उमेश गौतम के साथ एक लंबा और विस्तृत 'पॉडकास्ट' (Podcast) रिकॉर्ड किया। इस पॉडकास्ट में मेयर के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई थी। रिकॉर्डिंग पूरी होने के बाद अजय कुमार ने इस वीडियो को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर दिया।
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चूंकि वीडियो में एक सत्ताधारी दल (BJP) के बड़े नेता और एक वर्दीधारी पुलिसकर्मी शामिल थे, इसलिए यह वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। लोगों के बीच यह भारी चर्चा का विषय बन गया, लेकिन यही 'वायरल' वीडियो पुलिस विभाग के आला अधिकारियों की नजरों में भी आ गया।
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'इन्फ्लुएंसर' बन चुके थे सिपाही अजय कुमार!

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सिपाही अजय कुमार के लिए सोशल मीडिया पर वीडियो बनाना कोई नई बात नहीं थी। विभागीय सूत्रों की मानें तो:
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    वे अक्सर विभिन्न नेताओं, प्रशासनिक अधिकारियों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के इंटरव्यू और पॉडकास्ट रिकॉर्ड करते रहते थे।
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    उनके वीडियो में प्रेरणादायक चर्चाएं (Motivational Talks), सामाजिक सरोकार और बातचीत के अंश प्रमुख रूप से शामिल होते थे।
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    सोशल मीडिया पर उनकी अच्छी-खासी पहचान बन चुकी थी और उनके वीडियो पर बड़ी संख्या में लाइक, कमेंट्स और प्रतिक्रियाएं भी आती थीं।
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कहाँ हुई चूक? पुलिस विभाग का स्पष्ट नियम है कि कोई भी वर्दीधारी पुलिसकर्मी किसी भी प्रकार का ऐसा कंटेंट, विशेषकर राजनेताओं के साथ इंटरव्यू या पॉडकास्ट, 'विभागीय अनुमति' (Departmental Permission) के बिना न तो रिकॉर्ड कर सकता है और न ही उसे सार्वजनिक रूप से प्रसारित (Broadcast) कर सकता है। अजय कुमार ने इस नियम को दरकिनार किया, जो सीधे तौर पर अनुशासनहीनता (Indiscipline) की श्रेणी में आता है।
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'यूपी पुलिस सोशल मीडिया पॉलिसी-2023' का उल्लंघन

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SSP अनुराग आर्य द्वारा की गई यह कार्रवाई 'उत्तर प्रदेश पुलिस सोशल मीडिया पॉलिसी-2023' के तहत की गई है। बता दें कि पिछले साल यूपी पुलिस मुख्यालय ने पुलिसकर्मियों द्वारा रील्स (Reels) बनाने, वर्दी में डांस करने या बिना अनुमति के बयानबाजी करने पर रोक लगाने के लिए यह सख्त पॉलिसी लागू की थी।
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इस पॉलिसी के मुख्य बिंदु क्या हैं?

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    कोई भी पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान या वर्दी पहनकर व्यक्तिगत सोशल मीडिया अकाउंट के लिए वीडियो या रील नहीं बनाएगा।
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    राजनीतिक कार्यक्रमों, नेताओं या राजनीतिक व्यक्तियों के साथ किसी भी प्रकार का ऐसा इंटरव्यू या वीडियो साझा नहीं किया जाएगा, जिससे पुलिस विभाग की निष्पक्षता पर सवाल उठें।
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    विभागीय जानकारी, कार्यप्रणाली या आधिकारिक मामलों पर बिना अनुमति के कोई भी कंटेंट सोशल मीडिया पर नहीं डाला जाएगा।
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सिपाही अजय कुमार का कृत्य सीधे तौर पर इन नियमों का उल्लंघन माना गया, जिसके चलते उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Inquiry) के आदेश दे दिए गए हैं।
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6 अन्य पुलिसकर्मियों पर भी गिरी गाज, महकमे में मची खलबली

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SSP अनुराग आर्य का यह एक्शन सिर्फ अजय कुमार तक सीमित नहीं रहा। अनुशासन का हंटर चलाते हुए उन्होंने इसी आदेश में छह अन्य पुलिसकर्मियों को भी उनकी घोर लापरवाही के चलते निलंबित कर दिया है:
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    4 रिक्रूट सिपाही (Recruit Constables): इन चारों सिपाहियों ने छुट्टी (Leave) ली थी, लेकिन छुट्टी समाप्त होने के बावजूद ये ड्यूटी पर वापस नहीं लौटे। बिना पूर्व सूचना के गायब रहने पर इन्हें सस्पेंड किया गया है।
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    1 आरक्षी (Constable): रिजर्व पुलिस लाइन में तैनात एक आरक्षी को उसकी निर्धारित ड्यूटी (Duty Point) पर न पहुंचने और लापरवाही बरतने के आरोप में सस्पेंड किया गया है।
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    1 कुक (Cook): पुलिस विभाग में तैनात एक कुक (रसोइए) को अपनी ड्यूटी करने से साफ इनकार करने (Insubordination) के आरोप में निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
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SSP अनुराग आर्य का सख्त संदेश: "अनुशासन ही सर्वोपरि है"

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एक साथ 7 पुलिसकर्मियों के निलंबन से बरेली पुलिस महकमे में सन्नाटा पसरा हुआ है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अनुराग आर्य ने अपने इस कदम से एक बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश (Strict Message) दिया है।
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उन्होंने स्पष्ट किया है कि "पुलिस विभाग एक अनुशासित बल (Disciplined Force) है। यहाँ अनुशासन ही सर्वोपरि है। विभागीय नियमों और सोशल मीडिया पॉलिसी का पालन करना राज्य के प्रत्येक पुलिसकर्मी के लिए अनिवार्य है। जो कोई भी इन नियमों को ताक पर रखेगा या अपनी ड्यूटी में लापरवाही बरतेगा, उसके खिलाफ इसी तरह की सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।"
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बरेली का यह मामला उन सभी सरकारी कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों के लिए एक 'अलर्ट' (Alert) है, जो सोशल मीडिया के आकर्षण में अपनी विभागीय सीमाओं को भूल जाते हैं। 'पॉडकास्ट' की दुनिया में शोहरत पाना अलग बात है, लेकिन जब आप वर्दी में होते हैं, तो आपकी हर एक हरकत पुलिस मैन्युअल के दायरे में होनी चाहिए। फिलहाल, अब सभी की निगाहें अजय कुमार पर बैठी विभागीय जांच की रिपोर्ट पर टिकी हैं।
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