मानसून की बारिश जहां एक तरफ लोगों को भीषण गर्मी से राहत देती है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक और ढांचागत लापरवाही (Infrastructure Negligence) के कारण यह कई बार निर्दोष लोगों के लिए काल बन जाती है। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद (Moradabad) से एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहां के मझोला थाना क्षेत्र में जरा सी बारिश के बाद सड़कों पर हुए जलभराव और एक खुले ट्रांसफार्मर ने दो परिवारों के चिराग बुझा दिए। यह हादसा न केवल सिस्टम की नाकामी को उजागर करता है, बल्कि एक आम आदमी की उस बेबसी को भी दर्शाता है जहां रोजी-रोटी कमाने निकला इंसान मौत के मुंह में समा जाता है।READ ALSO:-आयुष्मान योजना पर सरकार की बड़ी सफाई: क्या परिवार में 6 से कम सदस्य होने पर नहीं बनेगा आयुष्मान कार्ड? जानिए संसद में दी गई पूरी सच्चाई
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ख़बरीलाल की इस विस्तृत रिपोर्ट में आइए जानते हैं कि आखिर यह पूरा हादसा कैसे हुआ, कौन थे वे दो बदनसीब लोग, और इस दर्दनाक मौत के पीछे किसकी घोर लापरवाही जिम्मेदार है।
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क्या है पूरा मामला और कैसे घटा यह खौफनाक हादसा?

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यह हृदयविदारक घटना शनिवार शाम की है। मुरादाबाद जिले के मझोला थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जयंतीपुर (शिव नगर) इलाके में बारिश के कारण हालात बेहद खराब थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, लगातार हुई बारिश के कारण सड़क पर घुटनों तक पानी भरा हुआ था और जल निकासी की कोई उचित व्यवस्था नहीं थी।
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इसी दौरान, अपनी रोजी-रोटी के लिए ई-रिक्शा चलाने वाले ओमप्रकाश अपना रिक्शा लेकर उस जलभराव वाली सड़क से गुजर रहे थे। सड़क पर पानी भरा होने के कारण गड्ढों का अंदाजा लगाना मुश्किल था। तभी सामने से एक अन्य वाहन आ गया। चश्मदीदों का कहना है कि ओमप्रकाश ने सामने से आ रहे वाहन को साइड देने और पानी में छिपे एक गड्ढे से बचने की कोशिश की। इसी जद्दोजहद में उनका ई-रिक्शा सड़क के किनारे खुले में लगे एक बिजली के ट्रांसफार्मर (Transformer) के बेहद करीब पहुंच गया।
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मौत बनकर पानी में उतरा था करंट

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दुर्भाग्यवश, उस ट्रांसफार्मर या उसके सपोर्ट सिस्टम (खंभे/तार) में पहले से ही भारी करंट उतरा हुआ था। चूंकि सड़क पर पानी भरा था और ई-रिक्शे की बॉडी लोहे की होती है, इसलिए ट्रांसफार्मर के संपर्क में आते ही या उसके बेहद करीब पहुंचते ही पूरे ई-रिक्शे और पानी में तेज करंट फैल गया। ओमप्रकाश कुछ समझ पाते, इससे पहले ही वह इस हाई-वोल्टेज करंट की चपेट में आ गए और अपनी सीट पर ही तड़पने लगे।
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इंसानियत की मिसाल और एक दर्दनाक अंत

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इसी दौरान पास ही मौजूद एक अन्य ई-रिक्शा चालक राममोहन की नजर ओमप्रकाश पर पड़ी। एक साथी को मौत के मुंह में तड़पता देख राममोहन से रहा नहीं गया। उसने अपनी जान की बिल्कुल परवाह नहीं की और बिना यह सोचे कि पानी में भी करंट हो सकता है, वह ओमप्रकाश को बचाने के लिए तेजी से दौड़ पड़ा।
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लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जैसे ही राममोहन ने ओमप्रकाश या उसके रिक्शे को छूने का प्रयास किया, वह भी उस जानलेवा करंट की भयानक गिरफ्त में आ गया। देखते ही देखते चंद सेकंड के भीतर दोनों ई-रिक्शा चालक वहीं पानी में गिर पड़े और बुरी तरह से झुलस गए। यह पूरा मंजर इतना खौफनाक था कि आसपास खड़े लोगों की रूह कांप गई।
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कौन थे मृतक? (गरीबी और संघर्ष की कहानी)

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इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाले दोनों ही व्यक्ति बेहद साधारण और गरीब परिवारों से ताल्लुक रखते थे, जो अपना घर छोड़कर मुरादाबाद में मेहनत-मजदूरी कर रहे थे:
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    ओमप्रकाश (उम्र 40 वर्ष): मूल रूप से मुरादाबाद के ही बिलारी इलाके के रहने वाले थे।
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    राममोहन (उम्र 35 वर्ष): यह बदायूं जिले के बिसौली इलाके के मूल निवासी थे।
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ये दोनों ही व्यक्ति मुरादाबाद के मझोला क्षेत्र में किराये का कमरा लेकर रहते थे। इनका अपना कोई वाहन नहीं था, बल्कि ये दोनों किराये पर ई-रिक्शा लेकर चलाते थे और उसी से होने वाली दिनभर की मामूली कमाई से अपने-अपने परिवारों का भरण-पोषण करते थे। इनकी मौत की खबर जैसे ही इनके पैतृक गांवों और परिवारों तक पहुंची, वहां कोहराम मच गया। पत्नियों और मासूम बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिन कंधों पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी, वे सिस्टम की लापरवाही की भेंट चढ़ गए।
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हादसे के बाद मची अफरा-तफरी, अस्पताल में घोषित हुए मृत

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हादसे के तुरंत बाद मौके पर चीख-पुकार और भारी अफरा-तफरी मच गई। अपनी जान को जोखिम में डालकर स्थानीय लोगों ने सबसे पहले किसी तरह से पास के सब-स्टेशन पर फोन करके बिजली की आपूर्ति (Power Supply) को तुरंत बंद करवाया। इसके बाद पानी में पड़े दोनों चालकों को बाहर निकाला गया। आनन-फानन में एम्बुलेंस बुलाई गई और दोनों को गंभीर अवस्था में नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।
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बिजली विभाग पर लापरवाही का गंभीर आरोप: फूट पड़ा लोगों का गुस्सा

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इस घटना के बाद इलाके में सिर्फ मातम ही नहीं, बल्कि भारी आक्रोश भी है। स्थानीय नागरिकों और मृतकों के परिजनों ने सीधे तौर पर बिजली विभाग (Electricity Department) और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं:
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    अर्थिंग (Earthing) थी खराब: प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय निवासियों का साफ आरोप है कि उस जानलेवा ट्रांसफार्मर की 'अर्थिंग' लंबे समय से खराब थी।
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    पहले भी हो चुके हैं हादसे: लोगों का कहना है कि यह कोई पहला हादसा नहीं है। इसी स्थान पर पहले भी बिजली के झटके लगने की छोटी-मोटी घटनाएं हो चुकी थीं, जिसकी शिकायत बिजली विभाग से की गई थी। लेकिन विभाग ने इसे नजरअंदाज कर दिया।
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    जलभराव की अनदेखी: जल निकासी की उचित व्यवस्था न होना इस घटना का दूसरा बड़ा कारण बना। अगर सड़क पर घुटनों तक पानी नहीं होता, तो शायद करंट इतनी दूर तक नहीं फैलता और इन दो निर्दोषों की जान बच सकती थी।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ट्रांसफार्मर के चारों ओर सही सुरक्षा जाली (Fencing) होती, उसकी वायरिंग दुरुस्त होती और जलभराव की समस्या का समय रहते समाधान किया जाता, तो आज दो परिवार उजड़ने से बच जाते।
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प्रशासनिक कार्रवाई और आगे की जांच

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घटना की सूचना मिलते ही मझोला थाना पुलिस भारी बल के साथ मौके पर पहुंच गई थी। स्थिति की नजाकत और लोगों के गुस्से को देखते हुए पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाला। पुलिस ने दोनों मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पंचनामा भरा और पोस्टमार्टम (Post-mortem) के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है।
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वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गहनता से जांच शुरू कर दी गई है। बिजली विभाग के संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से भी पूछताछ की जाएगी। यदि जांच में ट्रांसफार्मर के रखरखाव में लापरवाही या अर्थिंग में खामी पाई जाती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, स्थानीय प्रशासन मृतकों के परिवारों को सरकारी मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया पर भी विचार कर रहा है।
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मुरादाबाद का यह हादसा एक बहुत बड़ा सबक और चेतावनी है। मानसून के दौरान प्रशासन को बिजली के खंभों, तारों और खुले ट्रांसफार्मरों की विशेष मरम्मत और ऑडिट करना चाहिए। जब तक इस तरह की लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय नहीं होगी और उन्हें सख्त सजा नहीं मिलेगी, तब तक गरीब और बेबस लोग ऐसे ही अकाल मौत का शिकार होते रहेंगे।
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