खबरीलाल विशेष रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश के औद्योगिक गलियारों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब आयकर विभाग (Income Tax Department) की इन्वेस्टिगेशन विंग, गाजियाबाद (Investigation Wing, Ghaziabad) और मेरठ (Meerut) यूनिट ने एक साथ बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। आयकर विभाग की रडार पर इस बार पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख औद्योगिक समूह, बिंदल्स ग्रुप (Bindals Group) था, जो बड़े पैमाने पर कागज (Paper) और चीनी (Sugar) मिलों का संचालन करता है। विभाग ने ग्रुप के ठिकानों पर छापेमारी कर बड़े पैमाने पर कर चोरी (Tax Evasion) का खुलासा किया है, जिसके तार दिल्ली से लेकर मुजफ्फरनगर और बिजनौर तक फैले हुए हैं।READ ALSO:-LPG Gas Crisis: गैस बुकिंग पर आया नया और सख्त अपडेट, इन उपभोक्ताओं की सेवाएं की गईं बंद; सिलिंडर पाने के लिए तुरंत करें ये काम
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भारतीय आयकर अधिनियम, 1961 (Income Tax Act, 1961) की धारा 132 (Section 132) के तहत चलाए गए इस 'सर्च एंड सीज़र' (Search and Seizure) ऑपरेशन ने ग्रुप की वित्तीय अनियमितताओं को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है। यह कार्रवाई मुख्य रूप से मेसर्स बिंदल्स पेपर्स मिल्स लिमिटेड (BPML) और उससे जुड़ी कंपनियों को टारगेट करते हुए की गई। 18 मार्च, 2026 को शुरू हुए ये छापे कई दिनों तक जारी रहे और इस दौरान विभाग को करोड़ों की बेहिसाबी संपत्ति और घोटाले के पुख्ता सबूत मिले।
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आइए, इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि आखिर बिंदल्स ग्रुप ने कैसे करोड़ों की टैक्स चोरी को अंजाम दिया, विभाग ने क्या-क्या बरामद किया और आगे की जांच में क्या-क्या खुलासे होने की संभावना है।
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कार्रवाई का विवरण: दिल्ली, मुजफ्फरनगर और बिजनौर तक फैली आयकर की नजर

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आयकर विभाग की इन्वेस्टिगेशन विंग को बिंदल्स ग्रुप की वित्तीय गतिविधियों में बड़ी गड़बड़ियों की गुप्त सूचना मिली थी। इसके बाद गाजियाबाद और मेरठ की टीमों ने एक बेहद गुप्त और नियोजित तरीके से छापेमारी की रणनीति तैयार की।
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    एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी: 18 मार्च, 2026 की सुबह, जब ग्रुप के प्रमुख कार्यालय और मिलें सामान्य कामकाज की तैयारी कर रहे थे, तभी आयकर विभाग की टीमों ने एक साथ दिल्ली, मुजफ्फरनगर और बिजनौर में कई स्थानों पर दस्तक दी। यह एक व्यापक ऑपरेशन था जिसका उद्देश्य ग्रुप की सभी इकाइयों की गहन जांच करना था।
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    शामिल मिलें और इकाइयाँ: छापेमारी के दायरे में ग्रुप की कई बड़ी पेपर और शुगर मिलें शामिल थीं। मुजफ्फरनगर में ही छह प्रमुख पेपर मिलों की जांच की गई, जिनमें शामिल हैं:
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      बिंदल्स डुप्लेक्स लिमिटेड
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    3. \r\n
      अग्रवाल डुप्लेक्स बोर्ड मिल्स लिमिटेड
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    4. \r\n
    5. \r\n
      टिहरी पल्प एंड पेपर मिल्स लिमिटेड
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    6. \r\n
    7. \r\n
      शाकुंभरी पल्प एंड पेपर मिल्स लिमिटेड
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    8. \r\n
    9. \r\n
      बिंदल इंडस्ट्रीज लिमिटेड
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    10. \r\n
    11. \r\n
      बिंदल्स पेपर्स मिल्स लिमिटेड (BPML)
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    12. \r\n
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    बिजनौर शुगर यूनिट की जांच: इसके अलावा, बिजनौर के गांव चांगीपुर में स्थित ग्रुप की शुगर यूनिट की भी कड़ी जांच की गई। विभाग को संदेह था कि चीनी मिल के कामकाज में भी बड़े पैमाने पर वित्तीय हेरफेर किया जा रहा है।
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बरामदगी का विस्तृत विवरण: करोड़ों का कैश, आभूषण और संपत्ति के दस्तावेज़

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छापेमारी के दौरान आयकर विभाग के अधिकारियों को भारी मात्रा में बेहिसाबी संपत्ति और दस्तावेज मिले, जिन्होंने ग्रुप की टैक्स चोरी को साबित कर दिया।
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1. ₹3 करोड़ से अधिक नकद (Unaccounted Cash)

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जांचकर्ताओं ने ग्रुप के ठिकानों से ₹3 करोड़ से ज्यादा का बिना हिसाब-किताब वाला कैश बरामद किया। यह कैश अलग-अलग जगहों पर छिपाकर रखा गया था। विभाग को संदेह है कि यह बेहिसाबी कैश बिना बिल वाली बिक्री और अन्य वित्तीय अनियमितताओं से अर्जित किया गया था।
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2. ₹20 करोड़ से अधिक की ज्वेलरी (Unaccounted Jewelry)

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कैश के अलावा, अधिकारियों ने ₹20 करोड़ से ज्यादा कीमत की ज्वेलरी और आभूषण भी बरामद किए। इन आभूषणों का ग्रुप के खातों में कोई जिक्र नहीं था। विभाग अब इन आभूषणों की खरीद के स्रोत और मूल्यांकन की जांच कर रहा है।
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3. 50 से अधिक अचल संपत्तियों के दस्तावेज़ (Immovable Property Documents)

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छापे के दौरान, जांचकर्ताओं को 50 से अधिक अचल संपत्तियों के दस्तावेज़ मिले। इन संपत्तियों में जमीन, इमारतें और अन्य रियल एस्टेट संपत्तियां शामिल हैं। विभाग अब इन संपत्तियों के स्वामित्व, मूल्यांकन और उनकी खरीद के लिए इस्तेमाल किए गए धन के स्रोत की जांच कर रहा है। यह संदेह है कि इनमें से कई संपत्तियां बेनामी (Benami) हो सकती हैं या ग्रुप की बेहिसाबी आय का इस्तेमाल करके खरीदी गई हो सकती हैं।
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टैक्स चोरी के 'मोडस ऑपेरांडी' (टैक्स चोरी के तरीके) का सनसनीखेज खुलासा

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जांच में मिले सबूतों और दस्तावेजों ने बिंदल्स ग्रुप द्वारा टैक्स चोरी के लिए अपनाए गए कई अभिनव और व्यापक तरीकों का खुलासा किया है।
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कागज क्षेत्र में ₹50 करोड़ से अधिक की फर्जी खरीद (Fake Purchases)

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जांच में पता चला कि ग्रुप ने कागज के क्षेत्र में ₹50 करोड़ से ज्यादा की फ़र्ज़ी खरीद का दावा किया। इसका मतलब यह है कि ग्रुप ने ऐसी वस्तुओं की खरीद के बिल दिखाए जो वास्तव में कभी नहीं खरीदी गई थीं। इस फ़र्ज़ी खरीद का उद्देश्य आयकर के बोझ को कम करने के लिए खर्चों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना था।
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खोई और कच्चे माल की बिना हिसाब-किताब वाली खरीद (Unaccounted Raw Material Purchases)

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जांचकर्ताओं को खोई (गन्ने की बची हुई छाल) और दूसरे कच्चे माल की बिना हिसाब-किताब वाली खरीद के सबूत मिले। इसका मतलब यह है कि ग्रुप ने इन कच्चे माल को नकद में खरीदा और उन्हें किताबों में दर्ज नहीं किया। इस बिना हिसाब-किताब वाले कच्चे माल का इस्तेमाल बिना बिल वाली बिक्री के लिए कागज और अन्य उत्पाद बनाने में किया गया।
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चीनी मिल में कागज की बिना हिसाब-किताब वाली बिक्री और संदिग्ध नकद भुगतान

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विभाग को चीनी मिल के कामकाज में भी बड़ी वित्तीय गड़बड़ियों के सबूत मिले। जांच में पता चला कि चीनी मिल में कागज की बिना हिसाब-किताब वाली बिक्री की गई और संदिग्ध नकद भुगतान किए गए। विभाग को संदेह है कि इनका मकसद कथित तौर पर असली मुनाफ़ा छिपाना था। यह संदेह है कि चीनी मिल की आय को छिपाने के लिए कागज की बिक्री को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया या नकद भुगतान का इस्तेमाल किया गया।
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अनुपालन में गंभीर विफलताएँ और गलत टैक्स छूट का सनसनीखेज घोटाला

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जांच का एक मुख्य बिंदु ग्रुप द्वारा आयकर अधिनियम की धारा 80IA (Section 80IA) के तहत कुल ₹171.3 करोड़ की कटौती का कथित तौर पर गलत दावा था। यह धारा बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास से जुड़ी कंपनियों को टैक्स छूट प्रदान करती है।
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धारा 80IA का कथित तौर पर गलत दावा

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बिंदल्स ग्रुप ने धारा 80IA के तहत ₹171.3 करोड़ की बड़ी टैक्स कटौती का दावा किया। विभाग को संदेह है कि ग्रुप ने इस टैक्स छूट के लिए आवश्यक मानदंडों को पूरा नहीं किया और गलत तरीके से कटौती का दावा किया। यह एक बड़ा घोटाला है जिसमें करोड़ों की टैक्स चोरी शामिल है।
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धारा 132(4) के तहत दर्ज बयान (Recorded Statements)

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जांच में महत्वपूर्ण सबूत बिंदल पेपर्स मिल लिमिटेड (BPML) के आंतरिक अकाउंटेंट और पावर प्लांट के जनरल मैनेजर के धारा 132(4) के तहत दर्ज बयानों से मिले। इन बयानों ने ग्रुप की टैक्स चोरी को साबित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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गंभीर अनुपालन विफलताएँ: अलग-अलग हिसाब-किताब की किताबों की कमी

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जांचकर्ताओं को केवल समेकित किताबें और ट्रायल बैलेंस मिले। इससे पहली नज़र में ग्रुप इन कर लाभों के लिए अयोग्य हो जाता है। नतीजतन, विभाग पूरे दावे को अस्वीकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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शामिल अन्य पेपर मिलें और उनका महत्व

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बिंदल्स ग्रुप के ठिकानों पर छापेमारी में बिंदल्स पेपर्स मिल्स लिमिटेड (BPML) के अलावा और भी कई प्रमुख पेपर मिलें शामिल थीं। इनमें बिंदल्स डुप्लेक्स लिमिटेड, अग्रवाल डुप्लेक्स बोर्ड मिल्स लिमिटेड, टिहरी पल्प एंड पेपर मिल्स लिमिटेड, शाकुंभरी पल्प एंड पेपर मिल्स लिमिटेड और बिंदल इंडस्ट्रीज लिमिटेड शामिल हैं। ये सभी मिलें पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कागज उद्योग (Paper Industry) के प्रमुख खिलाड़ी हैं और ग्रुप की कुल आय में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। विभाग अब इन सभी मिलों की वित्तीय गतिविधियों की गहन जांच कर रहा है ताकि टैक्स चोरी की पूरी सीमा का पता लगाया जा सके।
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वर्तमान स्थिति और आगे की जांच: वित्तीय अनियमितताओं की सीमा का पता लगाना

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सक्रिय तलाशी का चरण आज समाप्त हो गया, लेकिन विभाग अब तलाशी के बाद की जांच (Post-Search Investigation) के चरण में चला गया है। वित्तीय अनियमितताओं की सीमा का और पता लगाने के लिए प्रमुख कर्मचारियों और निदेशकों के बयान दर्ज करने का काम जारी है। विभाग बरामद किए गए दस्तावेजों, नकद और आभूषणों की गहन जांच कर रहा है। विभाग ग्रुप की वित्तीय गतिविधियों की पूरी समीक्षा कर रहा है और टैक्स चोरी की पूरी सीमा का पता लगाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है। विभाग अब ग्रुप के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ रहा है और टैक्स चोरी के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा दिलाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है।
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टैक्स चोरी के खिलाफ विभाग की सख्त कार्रवाई

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गाजियाबाद और मेरठ आयकर विभाग की बिंदल्स ग्रुप पर छापेमारी ने टैक्स चोरी के खिलाफ विभाग की सख्त कार्रवाई को प्रदर्शित किया है। विभाग बड़े औद्योगिक समूहों और कंपनियों की वित्तीय गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रहा है और टैक्स चोरी के किसी भी रूप को बर्दाश्त नहीं करेगा। यह कार्रवाई टैक्स चोरों को एक सख्त संदेश देती है कि वे कानून से बच नहीं सकते और विभाग उन्हें बेनकाब करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगा। विभाग की यह कार्रवाई टैक्स चोरी के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और विभाग इस दिशा में अपनी कड़ी मेहनत जारी रखेगा।
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'खबरीलाल' की टीम इस खबर पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है और आपको पल-पल की अपडेट देती रहेगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, विशेष रूप से मुजफ्फरनगर और बिजनौर क्षेत्र की हर महत्वपूर्ण और ग्राउंड रिपोर्ट के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

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Q1. बिंदल्स ग्रुप पर आयकर का छापा कब और कहाँ पड़ा? Ans. आयकर विभाग की इन्वेस्टिगेशन विंग, गाजियाबाद और मेरठ की टीमों ने 18 मार्च, 2026 को बिंदल्स ग्रुप के ठिकानों पर छापेमारी शुरू की। यह कार्रवाई दिल्ली, मुजफ्फरनगर और बिजनौर में ग्रुप के कई ठिकानों पर एक साथ की गई।
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Q2. छापेमारी के दौरान क्या-क्या बरामद हुआ? Ans. छापेमारी के दौरान ₹3 करोड़ से अधिक नकद, ₹20 करोड़ से अधिक की ज्वेलरी और 50 से अधिक अचल संपत्तियों के दस्तावेज़ बरामद किए गए।
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Q3. ग्रुप ने टैक्स चोरी के लिए क्या तरीके अपनाए? Ans. ग्रुप ने कागज के क्षेत्र में ₹50 करोड़ से अधिक की फर्जी खरीद दिखाई, खोई और कच्चे माल की बिना हिसाब-किताब वाली खरीद की, चीनी मिल में कागज की बिना हिसाब-किताब वाली बिक्री की और संदिग्ध नकद भुगतान किए। इन सब का उद्देश्य असली मुनाफा छिपाना था।
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Q4. ग्रुप ने गलत टैक्स छूट का दावा कैसे किया? Ans. ग्रुप ने धारा 80IA के तहत ₹171.3 करोड़ की कटौती का कथित तौर पर गलत दावा किया। जांच में पता चला कि ग्रुप ने इस टैक्स छूट के लिए आवश्यक मानदंडों को पूरा नहीं किया और गलत तरीके से कटौती का दावा किया।
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Q5. क्या कोई गिरफ्तार हुआ है? Ans. अभी तक किसी की गिरफ्तारी की सूचना नहीं है, लेकिन विभाग प्रमुख कर्मचारियों और निदेशकों के बयान दर्ज कर रहा है और आगे की जांच जारी है। वित्तीय अनियमितताओं की सीमा का पता लगाने के लिए कड़ी मेहनत की जा रही है। 
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Q6. आगे की जांच में क्या होगा? Ans. सक्रिय तलाशी समाप्त होने के बाद, विभाग अब तलाशी के बाद की जांच के चरण में चला गया है। बरामद किए गए दस्तावेजों, नकद और आभूषणों की गहन जांच की जा रही है। विभाग ग्रुप की वित्तीय गतिविधियों की पूरी समीक्षा कर रहा है और टैक्स चोरी की पूरी सीमा का पता लगाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है। विभाग ग्रुप के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ रहा है और टैक्स चोरी के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा दिलाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है।
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