प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में दृष्टिबाधित बच्चों की शिक्षा को एक नई दिशा मिलने वाली है। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) प्रयागराज के शोधकर्ता एक ऐसा अभूतपूर्व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित टूल विकसित कर रहे हैं, जो किताबों में लिखी कहानियों और चित्रों को 'बोलकर' बच्चों तक पहुंचाएगा। यह तकनीक प्रदेश के करीब 19 लाख से अधिक दृष्टिबाधित लोगों के लिए शिक्षा को समावेशी और सुलभ बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगी।READ ALSO:-Meerut: बीमा के ₹50 करोड़ के लिए बेटे ने मां-पिता-पत्नी की बेरहमी से की हत्या, 39 करोड़ के क्लेम ने खोली तीन मौतों की साजिश की परतें
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अब सिर्फ ब्रेल नहीं, AI भी समझाएगा किताबों की दुनिया
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अभी तक दृष्टिबाधित बच्चों के लिए ब्रेल लिपि ही पढ़ने का एकमात्र साधन रही है, लेकिन किताबों में मौजूद चित्रों और ग्राफिक्स को समझना उनके लिए हमेशा एक चुनौती रहा है। IIIT प्रयागराज का यह AI टूल इस कमी को दूर करेगा। यह टूल किताबों के टेक्स्ट और चित्रों को पहले ऑल्ट-टेक्स्ट (वैकल्पिक टेक्स्ट) में बदलेगा और फिर उसे ऑडियो के रूप में बच्चों तक पहुंचाएगा।
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इस महत्वाकांक्षी परियोजना को उत्तर प्रदेश सरकार की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद ने IIIT प्रयागराज के शोधकर्ताओं को सौंपा है। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सहायक प्रोफेसर मोहम्मद जावेद, नवजोत सिंह और डॉ. अंजलि गौतम की टीम इस पर काम कर रही है।
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सिर्फ पढ़ेगा नहीं, समझाएगा भी: उम्र और समझ के अनुसार बदलेगी भाषा
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डॉ. मोहम्मद जावेद ने बताया कि परियोजना का पहला चरण, ऑल्ट-टेक्स्ट तैयार करने का काम पूरा हो चुका है। अब दूसरे चरण में इस ऑल्ट-टेक्स्ट को AI टूल की मदद से परिभाषित कराने का काम चल रहा है। इस टूल की सबसे खास बात यह होगी कि यह केवल टेक्स्ट को पढ़ेगा नहीं, बल्कि बच्चों की उम्र और समझने की क्षमता के अनुसार अपनी भाषा भी बदलेगा।
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    छोटे बच्चों के लिए: टूल सरल और आसान भाषा में कहानियों और चित्रों का अर्थ बताएगा, ताकि वे आसानी से समझ सकें।
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    बड़े छात्रों के लिए: जटिल विषयों और चित्रों की विस्तृत जानकारी प्रदान करेगा, जो उनकी अकादमिक जरूरतों को पूरा करेगी।
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यही नहीं, अगर बच्चे कोई सवाल पूछते हैं, तो यह AI टूल उनके सवालों का जवाब भी देगा, जिससे पढ़ाई एक इंटरैक्टिव अनुभव बन जाएगी।
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शिक्षा में समानता की ओर एक बड़ा कदम
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विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में 2.2 अरब लोग दृष्टिबाधित हैं। भारत में भी यह संख्या काफी अधिक है। 2018 तक, सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही 18.5 लाख से अधिक दृष्टिबाधित लोग थे, जो वैश्विक दृष्टिबाधित आबादी का लगभग चार प्रतिशत है। ऐसे में, यह AI टूल शिक्षा को सभी के लिए समान बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
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डॉ. जावेद ने बताया कि यह टूल सिर्फ कहानी या विषय नहीं पढ़ेगा, बल्कि चित्रों का विस्तृत अर्थ भी समझाएगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी कहानी में एक चित्र है, तो AI टूल उस चित्र में क्या दिखाया गया है, उसका कहानी से क्या संबंध है, और उससे जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारी भी विस्तार से बताएगा। यह तकनीक दृष्टिबाधित बच्चों को सीखने और समझने के नए आयाम प्रदान करेगी, जिससे वे सामान्य बच्चों की तरह ही शिक्षा ग्रहण कर पाएंगे।
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