उत्तर प्रदेश के अमरोहा (Amroha) में 'एक दूल्हा-तीन दुल्हन' की वायरल शादी का सच सामने आ गया है। बाल कल्याण समिति की जांच में तीनों बहनों ने कबूला कि यह सिर्फ व्यूज और लोकप्रियता पाने के लिए बन
Published at : 27 Jul 2026, 05:29 PM
Updated at : 11 Sep 2026, 09:25 PM
Amroha One Groom Three Brides Viral Wedding Video Fake Truth Revealed
'एक दूल्हा-तीन दुल्हन' (One Groom, Three Brides) का यह वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर अपलोड हुआ, यह जंगल की आग की तरह वायरल हो गया। हर तरफ इस शादी की चर्चा होने लगी। कुछ लोग इसे अजूबा मान रहे थे, तो कुछ कानून और समाज की दुहाई दे रहे थे। लेकिन अब, ख़बरीलाल (Khabreelal) की रिपोर्ट में इस वायरल वीडियो की असलियत सामने आ गई है, और सच यह है कि यह पूरी कहानी सिर से लेकर पैर तक झूठी थी।
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बाल कल्याण समिति की जांच ने खोला राज
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इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब वायरल वीडियो को गौर से देखने पर कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं और अधिकारियों को लगा कि उन तीन 'दुल्हनों' में से एक लड़की शायद नाबालिग (Minor) है। बाल विवाह की आशंका को देखते हुए अमरोहा की बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee - CWC) तुरंत हरकत में आ गई। समिति ने मामले को गंभीरता से लेते हुए हसनपुर पुलिस को इस कथित शादी की जांच के आदेश दिए।
जब पुलिस और बाल कल्याण समिति ने वीडियो में नजर आ रही तीनों बहनों को तलब किया और उनसे सख्ती से पूछताछ शुरू की, तो उनकी फर्जी शादी का ताश का महल पल भर में ढह गया। जांच के दौरान तीनों युवतियों ने खुद ही स्वीकार कर लिया कि न तो उनकी कोई शादी हुई है और न ही वीडियो में दिखाई गई कहानी में रत्ती भर भी सच्चाई है।
पूछताछ में तीनों बहनों ने जो खुलासा किया, वह आज के 'रील कल्चर' (Reels Culture) की कड़वी सच्चाई को बयां करता है। उन्होंने समिति को बताया कि वे नियमित रूप से सोशल मीडिया के लिए वीडियो और रील्स बनाती हैं। उनका मुख्य उद्देश्य अपने अकाउंट पर फॉलोअर्स और व्यूज बढ़ाना था।
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इसी उद्देश्य से, उन्होंने 17 जुलाई को जानबूझकर एक ऐसा 'स्क्रिप्टेड वीडियो' (Scripted Video) शूट करने की योजना बनाई जो आसानी से विवाद खड़ा कर सके और वायरल हो जाए। उन्होंने एक युवक को दूल्हा बनाया, खुद दुल्हन के लिबास में सजीं और 'एक दूल्हा-तीन दुल्हन' का यह सनसनीखेज प्रैंक (Prank) शूट कर लिया। उनकी योजना सफल भी रही; वीडियो अपलोड होते ही पूरे देश में छा गया।
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@khabreelal_news उत्तर प्रदेश के अमरोहा (Amroha) में 'एक दूल्हा-तीन दुल्हन' की वायरल शादी का सच सामने आ गया है। बाल कल्याण समिति की जांच में तीनों बहनों ने कबूला कि यह सिर्फ व्यूज और लोकप्रियता पाने के लिए बनाया गया एक फर्जी प्रैंक (Prank) वीडियो था। pic.twitter.com/9afcMiplUx
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इस पूरे ड्रामे में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात इन युवतियों का रवैया रहा। जब वीडियो वायरल होने लगा और इंटरनेट यूजर्स ने उनसे सवाल पूछने शुरू किए, उन्हें ट्रोल (Troll) किया जाने लगा, तब भी उन्होंने शुरुआत में झूठ ही बोला। युवतियों ने अपनी सोशल मीडिया फॉलोइंग बढ़ाने के लिए लोगों को भ्रमित किया और दावा किया कि यह शादी 100% असली है।
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लेकिन, जब मामला पुलिस और बाल कल्याण समिति की कानूनी जांच तक पहुंच गया, तो उनका सारा आत्मविश्वास डगमगा गया। कानूनी कार्रवाई के डर से उन्होंने आखिरकार पूरी सच्चाई उगल दी और माना कि यह महज एक स्क्रिप्टेड प्रैंक था और इसका किसी वास्तविक शादी या रिश्ते से कोई लेना-देना नहीं है।
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कानूनी वैधता पर भी उठ रहे थे गंभीर सवाल
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इस फर्जी शादी के वायरल होने के बाद, कानूनी हलकों में भी लंबी बहस छिड़ गई थी। दिल्ली हाई कोर्ट के अधिवक्ता इशु जैन के अनुसार, भारतीय हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act) और अन्य धर्मनिरपेक्ष कानूनों के तहत, भारत में एक पुरुष का एक साथ तीन महिलाओं से विवाह करना (Polygamy) न केवल गैरकानूनी है, बल्कि पूरी तरह से अमान्य (Void) है। ऐसे किसी भी विवाह को कानूनी मान्यता नहीं मिल सकती।
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हालांकि, इस मामले में कानून का उल्लंघन इसलिए नहीं माना गया क्योंकि हकीकत में कोई शादी हुई ही नहीं थी।
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अब अपनी गलती पर पछतावा
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बाल कल्याण समिति के सामने सच्चाई कबूलने के बाद, तीनों बहनों ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। उनका कहना है कि उन्हें एहसास नहीं था कि यह मजाक इतना बड़ा मुद्दा बन जाएगा। उन्होंने माना कि शुरुआत में ही उन्हें लोगों को बता देना चाहिए था कि यह सिर्फ एक प्रैंक है। युवतियों ने अपनी गलती पर पछतावा व्यक्त करते हुए वादा किया है कि वे भविष्य में व्यूज के लिए ऐसा कोई भी भ्रामक या विवादित कदम नहीं उठाएंगी।
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पुलिस और बाल कल्याण समिति की विस्तृत जांच के बाद अमरोहा का यह 'एक दूल्हा-तीन दुल्हन' का मामला पूरी तरह से फर्जी और निराधार साबित हो चुका है। यह घटना सोशल मीडिया यूजर्स के लिए एक बड़ा सबक है कि इंटरनेट पर दिखने वाली हर चीज सच नहीं होती। सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए रचे गए ऐसे प्रैंक न केवल समाज में भ्रम फैलाते हैं, बल्कि पुलिस और प्रशासन का कीमती समय भी बर्बाद करते हैं।
Sabse pehle comment karne wale banein.