आगरा: ताजनगरी आगरा के सिकंदरा इलाके से एक ऐसी सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जिसने समाज को झकझोर कर रख दिया है। एक पत्नी, जिसने जीवन भर साथ निभाने की कसम खाई थी, वही अब अपने ही पति की 'कातिल' बन गई। यह कहानी सिर्फ हत्या की नहीं है, बल्कि उस खौफनाक मानसिक द्वंद्व और 'दृश्यम' फिल्म जैसी शातिराना साजिश की है, जिसने एक पूरे परिवार को उजाड़ दिया। 18 मई से लापता सुरेंद्र शर्मा का कंकाल शुक्रवार को उनके ही घर के बाथरूम के फर्श के नीचे से बरामद हुआ। आइए, इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हत्याकांड की परत-दर-परत इनसाइड स्टोरी जानते हैं।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

​वह रात, जब 'घर' बन गया 'कब्रिस्तान'

\r\n\r\n
​सुरेंद्र शर्मा, एक ऐसा नाम जो अब सिर्फ फाइलों में सिमट कर रह गया है। सुरेंद्र के बारे में कहा जाता है कि वह शराब के नशे में धुत रहने वाला एक हिंसक व्यक्ति था। घर में आए दिन कलह, मारपीट और चीख-पुकार मचना एक सामान्य बात हो गई थी। उसकी पत्नी रूबी, जो बरसों से यह शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न झेल रही थी, शायद उसी रात 'टूट' गई थी।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n
​17 मई की रात जब सुरेंद्र नशे में चूर होकर घर आया और उसने खाने में खीर की जिद की, तो रूबी ने जो किया, वह मानवीय संवेदनाओं के परे था। उसने खीर में भारी मात्रा में नींद की गोलियां पीसकर मिला दीं। सुरेंद्र ने बड़े चाव से खीर खाई और गहरी नींद में सो गया—वह नींद, जिससे कोई कभी नहीं जागता। रूबी ने सुनिश्चित किया कि सुरेंद्र की धड़कनें पूरी तरह बंद हो चुकी हैं। इसके बाद शुरू हुआ एक ऐसी साजिश का ताना-बाना, जो किसी भी क्राइम थ्रिलर से ज्यादा भयावह था।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

​400 रुपये की मिट्टी और 'शातिर' प्लास्टर

\r\n\r\n
​घटना को अंजाम देने के बाद रूबी ने इतनी चतुराई दिखाई कि बड़े-बड़े अपराधी भी हैरान रह जाएं। उसने अपनी सास और बेटियों को घर से दूर भेजने के लिए एक झूठ गढ़ा—"भरतपुर पुलिस तुम्हें ढूंढ रही है, तुम लोग जेठ के घर चले जाओ।" घर खाली होते ही उसने वह काम किया जो कोई कल्पना भी नहीं कर सकता।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
​उसने घर के बाथरूम में फावड़े से गड्ढा खोदा और सुरेंद्र की लाश को उसमें दफन कर दिया। सबसे खौफनाक हिस्सा था लाश को छिपाना। उसने पड़ोस से 400 रुपये देकर मिट्टी मंगवाई और उसके ऊपर पक्का फर्श (Cement Plaster) करवा दिया। अगले 45 दिनों तक वह उसी बाथरूम में नहाती रही, उसी फर्श पर चलती रही, जिसके नीचे उसका पति दफन था।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

​बेटी का 'मासूम शक' जो बन गया कातिल के लिए मुसीबत

\r\n\r\n
​रूबी ने 26 मई को सिकंदरा थाने में पति की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। वह पुलिस के सामने पुलिस की तरह ही बेचारी पत्नी बनकर घूमती रही। लेकिन कहते हैं न कि 'सत्य छिपाने से नहीं छिपता।'
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
​जब उसकी बेटियां घर लौटीं, तो उन्हें बाथरूम का फर्श बदला हुआ लगा। बेटियों ने सवाल किया, "मम्मी, बाथरूम का फर्श इतना ऊंचा क्यों करवा दिया?" रूबी ने बहाना बनाया, लेकिन यह सवाल उसकी नींद उड़ाने के लिए काफी था। एक दिन बेटी ने गौर किया कि फर्श पर कुछ दरारें (Cracks) उभर आई हैं और एक हिस्सा असामान्य रूप से ऊंचा है।
\r\n\r\n
​उस दिन के बाद रूबी का जीवन एक नर्क बन गया। वह हर दिन नहाते समय उस फर्श को घूरती, डरती कि कहीं कोई सुराग न निकल आए। वह दरारें उसके लिए किसी खौफनाक सपने से कम नहीं थीं।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

​पुलिस की 'एक फोटो' और पति का 'भूत'

\r\n\r\n
​कहानी में क्लाइमैक्स तब आया जब पुलिस का एक सिपाही सुरेंद्र के वेरिफिकेशन के लिए उनके घर पहुँचा। उसने कागजी कार्रवाई पूरी की और रूबी की एक फोटो खींच ली। उस फोटो के क्लिक होते ही रूबी को लगा कि पुलिस को सब पता चल चुका है।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
​उसके बाद उसे रात-रात भर सुरेंद्र का 'साया' दिखने लगा। उसे महसूस होता कि सुरेंद्र बाथरूम का फर्श तोड़कर बाहर आ रहा है। यह पागलपन इतना बढ़ गया कि वह अपनी सास कमला के पास गई और रोते हुए अपना गुनाह उगल दिया। “सुरेंद्र अब कभी नहीं लौटेंगे, वह बाथरूम में दबे हैं!” यह शब्द सुनते ही घर में कोहराम मच गया और मामला सीधे पुलिस की चौखट तक पहुँच गया।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

​क्राइम एनालिसिस: क्या यह 'दृश्यम' से प्रेरित था?

\r\n\r\n
​आगरा के इस मामले में और मशहूर फिल्म 'दृश्यम' में हैरान करने वाली समानताएं हैं:
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    ​दफन करने का स्थान: घर का वह हिस्सा जिसे कोई संदेहास्पद नहीं मानता।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    ​पुलिस को भटकाना: गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराकर खुद को पीड़ित दिखाना।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    ​साक्ष्य मिटाना: पक्का फर्श बनवाकर सबूतों को हमेशा के लिए दफन कर देना।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n
​
\r\n\r\n
लेकिन रूबी के केस में 'अपनों का शक' भारी पड़ गया। एक पिता की हत्या का राज उसकी अपनी बेटियों की आँखों में पल रहा था।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

​एक अपराध, कई जिंदगियां बर्बाद

\r\n\r\n
​आज रूबी सलाखों के पीछे है। उसके खिलाफ पुलिस ने हत्या और सबूत मिटाने का केस दर्ज किया है। पूछताछ में उसने बार-बार यही कहा कि उसे पछतावा है, लेकिन वह उस घरेलू हिंसा और नशे से तंग आ चुकी थी। लेकिन सवाल यह है—क्या किसी को मारने का हक किसी के पास है?
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
​इस मामले में पुलिस अब डीएनए टेस्ट की प्रक्रिया पूरी कर रही है ताकि वैज्ञानिक रूप से शव की पहचान पुख्ता हो सके। यह हत्याकांड समाज के लिए एक बड़ी सीख है कि घर की चारदीवारी के अंदर पनपने वाली हिंसा अगर समय रहते नहीं रोकी गई, तो उसका अंत इसी तरह खौफनाक होता है। आज उस घर की बेटियां अनाथ हो चुकी हैं, और एक परिवार का अस्तित्व हमेशा के लिए मिट गया।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
​क्या यह अपराध था या हताशा का परिणाम? इसका फैसला अदालत करेगी, लेकिन आगरा के इस 'बाथरूम कब्रिस्तान' ने पूरे देश को सन्न कर दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें