यूपी के हापुड़ में एलपीजी गैस संकट के बीच प्रशासन की बड़ी कार्रवाई। स्थानीय नेता अब्दुल रेहान के घर से 55 भरे हुए गैस सिलेंडर बरामद। कालाबाजारी के इस बड़े खेल, पुलिस की एफआईआर और जनता के आक्र
Published at : 13 Mar 2026, 05:01 PM
Updated at : 11 Sep 2026, 09:25 PM
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55 LPG Cylinders Seized in Hapur Gas Hoarding Raid at Leader House
उत्तर प्रदेश में इन दिनों रसोई गैस (LPG) को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। पश्चिम एशिया के तनाव और सर्वर क्रैश की अफवाहों के बीच जहां एक ओर आम जनता एक-एक सिलेंडर के लिए तरस रही है, वहीं दूसरी ओर रसूखदार लोग इस आपदा को अवसर बनाने में जुटे हैं। इसी कड़ी में, पश्चिमी यूपी के हापुड़ में गैस की जमाखोरी (Hapur Gas Hoarding) का एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा मामला सामने आया है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक स्थानीय नेता अब्दुल रेहान के घर पर छापेमारी की, जहां से कुल 55 भरे हुए कमर्शियल और घरेलू एलपीजी सिलेंडर बरामद किए गए हैं। इस घटना ने पूरे सिस्टम और गैस एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।READ ALSO:-दूध के कारोबार पर FSSAI का 'सर्जिकल स्ट्राइक': अब बिना लाइसेंस दूध बेचना हुआ गैर-कानूनी, मिलावटखोरों पर कसेगा शिकंजा
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छापेमारी की इनसाइड स्टोरी: कैसे मिला 55 सिलेंडरों का जखीरा?
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पिछले कुछ हफ्तों से हापुड़, मेरठ और आसपास के जिलों में गैस की भारी किल्लत देखी जा रही है। उपभोक्ता गैस एजेंसियों के बाहर सुबह 5 बजे से लाइन में लग रहे हैं, फिर भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। इसी बीच, हापुड़ प्रशासन को एक गुप्त और पुख्ता सूचना मिली थी कि शहर के कुछ रसूखदार लोग और तथाकथित नेता गैस संकट का फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर सिलेंडरों का अवैध भंडारण कर रहे हैं ताकि उन्हें मनमाने और ऊंचे दामों (ब्लैक मार्केट) पर बेचा जा सके।
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सूचना को गंभीरता से लेते हुए, हापुड़ देहात थाना पुलिस और आपूर्ति विभाग (Supply Department) की एक विशेष जॉइंट टीम का गठन किया गया। इस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से नेता अब्दुल रेहान के आवास पर अचानक छापा मारा। जब टीम ने घर के अंदर और विशेष रूप से बनाए गए स्टोरेज एरिया की तलाशी ली, तो अधिकारियों के होश उड़ गए। वहां एक या दो नहीं, बल्कि पूरे 55 भरे हुए एलपीजी गैस सिलेंडर छिपाकर रखे गए थे। इतनी बड़ी मात्रा में अत्यधिक ज्वलनशील सिलेंडरों का रिहायशी इलाके में भंडारण न केवल एक आर्थिक अपराध है, बल्कि यह आसपास रहने वाले सैकड़ों लोगों की जान के लिए एक बड़ा खतरा (Ticking Time Bomb) भी था।
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उत्तर प्रदेश में डीजल-पेट्रोल की कोई कमी नहीं है। रसोई गैस की कमी से संबंधित अफवाहों से बचें। \r\n \r\nयदि कोई वितरक एजेंसी अथवा निजी व्यक्ति कालाबाजारी या जमाखोरी करते हुए पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज कर कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। \r\n \r\nआपकी सरकार हर परिस्थिति…
हापुड़ में गैस की जमाखोरी: कानूनी कार्रवाई और थाने से जमानत का खेल
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इतनी बड़ी बरामदगी के बाद पुलिस ने तुरंत सिलेंडरों को जब्त कर लिया और आरोपी नेता अब्दुल रेहान को हिरासत में ले लिया। हापुड़ देहात थाना प्रभारी निरीक्षक नीरज के अनुसार, आरोपी के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) और विस्फोटक अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा (FIR) दर्ज कर लिया गया है।
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लेकिन इस पूरी कानूनी प्रक्रिया में एक ऐसा पेंच सामने आया जिसने आम जनता को और भी ज्यादा निराश कर दिया है। पुलिस के मुताबिक, जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है, उनमें सजा का प्रावधान 7 साल से कम है। भारतीय दंड संहिता (अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) के नियमों के अनुसार, 7 साल से कम सजा वाले अपराधों में पुलिस अधिकारी को थाने से ही जमानत (Station Bail) देने का अधिकार होता है। इसी नियम का फायदा उठाते हुए आरोपी नेता को चंद घंटों के भीतर थाने से ही जमानत मिल गई। इस घटनाक्रम ने लोगों के मन में यह सवाल पैदा कर दिया है कि क्या इतने बड़े पैमाने पर कालाबाजारी करने वालों के लिए मौजूदा कानून बहुत लचीले हैं?
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गैस एजेंसियों के नेटवर्क और मिलीभगत की जांच शुरू
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प्रारंभिक जांच में यह पूरी तरह से स्पष्ट हो गया है कि यह अवैध जमाखोरी का एक सुनियोजित मामला है। अब सबसे बड़ा सवाल जो जांच एजेंसियों के सामने खड़ा है, वह यह है कि जब आम आदमी को 25 दिन में एक सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है, तो एक ही व्यक्ति के घर 55 भरे हुए सिलेंडर कहां से और कैसे पहुंच गए?
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एजेंसियों का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा: पुलिस और जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) की टीमें अब इलाके की सभी गैस एजेंसियों के स्टॉक रजिस्टर और डिलीवरी लॉग्स खंगाल रही हैं।
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हॉकरों से पूछताछ: बिना किसी बड़े डीलर या हॉकर की मिलीभगत के इतनी बड़ी खेप किसी एक घर में नहीं उतारी जा सकती। उन कर्मचारियों की पहचान की जा रही है जिन्होंने इन सिलेंडरों की डिलीवरी की।
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फर्जी पासबुक का शक: अंदेशा जताया जा रहा है कि कई आम उपभोक्ताओं के फर्जी नाम या पुरानी पासबुकों का इस्तेमाल करके इन सिलेंडरों को सिस्टम से निकाला गया और फिर उन्हें ब्लैक मार्केट में 2000 से 2500 रुपये प्रति सिलेंडर के हिसाब से बेचने के लिए डंप कर दिया गया।
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आम जनता में भारी आक्रोश: "हम लाइन में, नेता के घर गोदाम"
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इस खुलासे के बाद हापुड़ और आसपास के क्षेत्रों के स्थानीय लोगों में भारी रोष और आक्रोश फैल गया है। जिन उपभोक्ताओं को चिलचिलाती धूप में अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है, वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
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स्थानीय महिलाओं का कहना है कि वे अपने छोटे-छोटे बच्चों को घर पर छोड़कर गैस के लिए धक्के खा रही हैं। कई लोगों ने शिकायत की कि मोबाइल ऐप या आईवीआरएस (IVRS) के जरिए बुकिंग कराने के बावजूद 20 से 25 दिनों तक सिलेंडर की डिलीवरी नहीं हो रही है। गैस एजेंसी के चक्कर काटने पर उन्हें "पीछे से सप्लाई नहीं आ रही" का रटा-रटाया जवाब मिलता है। लेकिन रेहान के घर हुई इस छापेमारी ने गैस एजेंसियों के इस झूठ की पोल खोल दी है। जनता अब सड़कों पर उतरने की चेतावनी दे रही है और मांग कर रही है कि इस पूरे नेक्सस (Nexus) में शामिल गैस एजेंसी का लाइसेंस तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए।
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In the month of Ramzan, Uttar Pradesh Police recover 55 filled & several empty LPG cylinders from Samajwadi Party leader Abdul Rehman's residence in Hapur during a nighttime raid. \r\n \r\nAllegations surface of black-marketing & conspiracy to defame Yogi Adityanath govt. Probe… pic.twitter.com/yPDGkwA8vi
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में एलपीजी संकट की समीक्षा बैठक में जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति अपनाने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। सीएम ने कहा था कि जो भी व्यक्ति समाज में कृत्रिम कमी (Artificial Shortage) पैदा करके घबराहट फैलाएगा, उसके खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।
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हापुड़ प्रशासन की यह कार्रवाई उसी निर्देश का हिस्सा मानी जा रही है। जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि आरोपी को भले ही तकनीकी आधार पर थाने से जमानत मिल गई हो, लेकिन मामले की गहन जांच जारी है। यदि इस सिंडिकेट में कोई बड़ा नेटवर्क या कोई अन्य सफेदपोश शामिल पाया गया, तो उस पर गैंगस्टर एक्ट या राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाने पर भी विचार किया जा सकता है।
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सिस्टम की खामियों को दूर करने की दरकार
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कुल मिलाकर, हापुड़ में गैस की जमाखोरी का यह प्रकरण हमारी वितरण प्रणाली की उन गहरी खामियों को उजागर करता है, जिनका सीधा खामियाजा एक आम और ईमानदार उपभोक्ता को भुगतना पड़ता है। एक ओर जहां डिजिटल इंडिया और पारदर्शी वितरण (OTP आधारित डिलीवरी) के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर एक नेता के घर 55 सिलेंडरों का मिलना इन सभी दावों को खोखला साबित करता है। प्रशासन को केवल एक छापेमारी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि गैस एजेंसियों के ऑडिट की एक पारदर्शी व्यवस्था लागू करनी चाहिए। जब तक इस पूरे काले कारोबार की जड़ पर प्रहार नहीं होगा और दोषियों को सख्त सजा नहीं मिलेगी, तब तक आम आदमी को गैस के लिए ऐसे ही संघर्ष करना पड़ेगा।
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एलपीजी संकट के बीच यूपी के हापुड़ जिले में प्रशासन ने जमाखोरी का एक बड़ा पर्दाफाश करते हुए स्थानीय नेता अब्दुल रेहान के घर से 55 भरे हुए एलपीजी सिलेंडर बरामद किए हैं। जहां आम नागरिक एक सिलेंडर के लिए 20-25 दिन इंतजार कर रहे हैं, वहीं इस बड़े पैमाने पर हुई जमाखोरी ने जनता में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। आरोपी के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है, हालांकि 7 साल से कम सजा के प्रावधान के कारण उसे थाने से जमानत मिल गई है। पुलिस अब गैस एजेंसियों के रिकॉर्ड खंगाल रही है ताकि इस पूरे काले नेटवर्क और मिलीभगत का भंडाफोड़ किया जा सके।
Sabse pehle comment karne wale banein.