नई दिल्ली/मुंबई (विश्व/संस्कृति डेस्क): योग—जो कभी प्राचीन भारत के साधु-संतों की तपस्या का हिस्सा हुआ करता था—आज पूरी दुनिया की जीवनशैली और स्वास्थ्य का सबसे बड़ा मंत्र बन चुका है। 21 जून 2026 को दुनिया भर में 12वां 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' (International Yoga Day) अभूतपूर्व उत्साह, ऊर्जा और एकजुटता के साथ मनाया गया।READ ALSO:-सोने-चांदी के दामों में भूचाल: सर्राफा बाजार में लौटी बंपर तेजी, एक ही दिन में चांदी ₹5,826 उछली, सोना ₹1.46 लाख के पार!
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जहां एक ओर भारत में इस वर्ष का मुख्य कार्यक्रम पश्चिम बंगाल के कोलकाता में आयोजित किया गया, वहीं दूसरी ओर सरहदों के पार विदेशी धरती पर भी भारतीय संस्कृति की इस अनमोल धरोहर की गूंज बहुत गहराई तक सुनाई दी। इस बार योग दिवस को 'स्वस्थ आयु के लिए योग' (Yoga for Healthy Ageing) की विशेष थीम पर मनाया गया, जिसने युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक, हर उम्र के लोगों को एक्टिव और निरोगी जीवन जीने की दिशा दिखाई।
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आइए, एक नजर डालते हैं कि दुनिया के अलग-अलग कोनों में 'भारत के योग' का परचम कैसे लहराया:-

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210 मिशन, 2500 स्थान: भारतीय दूतावासों की ऐतिहासिक पहल

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भारत के विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के साझा प्रयासों से इस वर्ष का आयोजन अपने आप में एक विश्व रिकॉर्ड जैसा था। दुनिया भर में फैले 210 से अधिक भारतीय मिशनों और दूतावासों ने एकजुट होकर वैश्विक स्तर पर करीब 2,500 से अधिक ऐतिहासिक व सार्वजनिक स्थानों पर भव्य योग शिविरों का आयोजन किया।
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अमेरिका में योग का जलवा: 'लिंकन मेमोरियल' और 'टाइम्स स्क्वायर' पर भारी भीड़

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संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) में योग का जादू सिर चढ़कर बोला। अमेरिका में भारत के नवनियुक्त राजदूत विनय क्वात्रा की गरिमामयी उपस्थिति में वाशिंगटन डीसी के प्रतिष्ठित 'लिंकन मेमोरियल' (Lincoln Memorial) पर एक बहुत ही भव्य योग शिविर का आयोजन किया गया।
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'आयुर्वेद कॉर्नर' बना आकर्षण का केंद्र: इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि यहां केवल आसन और प्राणायाम ही नहीं सिखाए गए, बल्कि अमेरिका के लोगों को पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति से जोड़ने के लिए एक विशेष 'आयुर्वेद कॉर्नर' (Ayurveda Corner) भी स्थापित किया गया था। इस स्टॉल पर लोगों को जड़ी-बूटियों और स्वस्थ जीवनशैली की जानकारी दी गई।
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अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर इस भव्य आयोजन की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा:
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"आईडीवाई 2026 (IDY 2026) सिर्फ़ योग तक ही सीमित नहीं था! पारंपरिक वेलनेस तरीकों को दिखाने वाले आयुर्वेद कॉर्नर से लेकर डुपॉन्ट सर्कल, वर्ल्ड बैंक और स्थानीय समुदायों के साथ हुए शुरुआती कार्यक्रमों तक—भारतीय दूतावास ने वॉशिंगटन डी.सी. के हर कोने में योग की भावना को पहुंचाया।"
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टाइम्स स्क्वायर पर प्रधानमंत्री के गुरु ने किया नेतृत्व: वहीं, दुनिया के सबसे व्यस्त और प्रसिद्ध चौराहों में से एक, न्यूयॉर्क के 'टाइम्स स्क्वायर' (Times Square) पर भी एक विशाल योग सभा का समन्वय भारतीय महावाणिज्य दूतावास द्वारा किया गया। इस ऐतिहासिक सत्र का नेतृत्व स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योग गुरु माने जाने वाले एच. आर. नागेंद्र ने किया, जहां हजारों विदेशी नागरिकों ने पूरे अनुशासन के साथ 'ओम' का उच्चारण किया।
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चीन, कनाडा और यूरोप में लहराया भारतीय संस्कृति का परचम

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    चीन (China): योग की लोकप्रियता चीन में भी बहुत तेजी से बढ़ रही है। शंघाई स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास द्वारा वहां के प्रसिद्ध व्यावसायिक केंद्र 'बंड फाइनेंस सेंटर' (BFC) में एक विशाल योग सत्र आयोजित किया गया। चीनी नागरिकों ने बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासियों के साथ मिलकर योग मुद्राओं का अभ्यास किया।
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    कनाडा (Canada): कनाडा के टोरंटो में स्थित 'ओंटारियो विधानसभा' की ऐतिहासिक इमारत के ठीक सामने सामूहिक योग शिविर लगाया गया। यहां प्रवासी भारतीयों के साथ-साथ कनाडाई नागरिकों की भी भारी भीड़ देखी गई।
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    यूरोप (Europe): यूरोपियन देशों में भी योग का क्रेज साफ नजर आया। ब्रिटेन के बर्मिंघम स्थित 'विक्टोरिया स्क्वायर' के साथ-साथ जर्मनी और स्वीडन के दूतावासों ने बड़े और खुले मैदानों में योग शिविर आयोजित कर जन-जन को निरोग रहने का संदेश दिया।
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अर्जेंटीना में पहली बार: दिव्यांगजनों के लिए विशेष सत्र

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दक्षिण अमेरिका में योग का विस्तार करते हुए, अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स स्थित 'ओलंपिक पार्क' में बड़े स्तर पर योग उत्सव आयोजित किया गया। इस वर्ष के आयोजन की सबसे खूबसूरत और समावेशी (Inclusive) बात यह रही कि यहां पहली बार दिव्यांगजनों के लिए एक 'विशेष योग सत्र' आयोजित किया गया। इसके साथ ही, वहां भारत के पारंपरिक व्यंजनों (Food) और वस्त्रों (Textiles) की एक शानदार प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसने विदेशी मेहमानों का मन मोह लिया।
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6 संयुक्त राष्ट्र भाषाओं में 'कॉमन योग प्रोटोकॉल' (CYP)

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विभिन्न संस्कृतियों, धर्मों और भाषाओं के अंतर को पाटते हुए, इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र (UN) की छह आधिकारिक भाषाओं—अरबी, चीनी, अंग्रेजी, फ्रांसीसी, रूसी और स्पेनिश—में अनुवादित 'कॉमन योग प्रोटोकॉल' (CYP) का उपयोग किया गया। इसके जरिए दुनिया के अलग-अलग कोनों में बैठे लोगों ने एक ही समय, एक ही सुर और एक ही तरीके से योग व प्राणायाम का अभ्यास किया। यह भाषा और संस्कृति से परे जाकर मानवता को जोड़ने की दिशा में भारत की एक बहुत बड़ी कूटनीतिक और सांस्कृतिक जीत है।
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विदेशी धरती पर योग के लिए उमड़ी हजारों लोगों की यह भीड़ इस बात की स्पष्ट गवाही दे रही है कि ‘भारत का योग’ अब केवल 21 जून का एक दिवसीय उत्सव या सरकारी आयोजन नहीं रह गया है। यह अब दुनिया भर के कार्यस्थलों, स्कूलों और लोगों की रोजमर्रा की जीवनशैली का अभिन्न अंग बनकर एक बहुत बड़े वैश्विक 'आरोग्य आंदोलन' (Wellness Movement) का रूप ले चुका है। योग ने साबित कर दिया है कि भारत केवल अपनी अर्थव्यवस्था और तकनीक से नहीं, बल्कि अपनी 'सॉफ्ट पावर' और सांस्कृतिक विरासत से भी विश्व गुरु बनने की क्षमता रखता है।
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