इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण (Child Sexual Abuse Material) से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों को लेकर भारत सरकार ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। IT मिनिस्ट्री (Ministry of Electronics and Information Technology) ने Meta (इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी) को प्लेटफॉर्म पर चल रहे Instagram CSAM Ads मामले में एक सख्त नोटिस जारी किया है। न्यूज़ एजेंसी PTI और अन्य हालिया मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार ने कंपनी को 7 दिनों के भीतर इस नोटिस का विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह आधिकारिक नोटिस 4 जुलाई 2026 को जारी किया गया है, जिसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही पर एक नई बहस छेड़ दी है।Read also:-पुणे केतन अग्रवाल हत्याकांड: मंगेतर के खौफनाक धोखे ने पूरे देश को झकझोरा, संसद से उठी 'राष्ट्रीय पुरुष आयोग' बनाने की हुंकार!
\r\n\r\n\r\n\r\n
BBC की इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
\r\n\r\nयह पूरा विवाद तब सामने आया जब ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (BBC) ने अपनी एक विस्तृत इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट पब्लिश की। रिपोर्ट में चौंकाने वाला दावा किया गया था कि भारत में इंस्टाग्राम का एल्गोरिदम और विज्ञापन सिस्टम बच्चों के यौन शोषण से जुड़े विज्ञापनों को खुलेआम प्रदर्शित कर रहा है। इन Instagram CSAM Ads में कथित तौर पर 'रेप वीडियो' (Rape Video) और 'चाइल्ड वीडियो' (Child Video) जैसे आपत्तिजनक और गैर-कानूनी शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा था।
\r\n\r\n\r\n\r\n
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि जब यूजर्स इन पेड विज्ञापनों पर क्लिक करते थे, तो उन्हें सीधे बाहरी मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम (Telegram) के प्राइवेट चैनलों पर रीडायरेक्ट कर दिया जाता था। वहां बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा यह अवैध कंटेंट महज 99 रुपये की बेहद कम कीमत पर खुलेआम बेचा जा रहा था। इस खुलासे के बाद से ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
Instagram CSAM Ads को लेकर Meta की सफाई और एक्शन
\r\n\r\nBBC की रिपोर्ट पब्लिश होने के बाद, शुरुआत में जब ऐसे ही एक विज्ञापन की शिकायत इंस्टाग्राम की टीम से की गई, तो कंपनी ने लगभग 24 घंटे बाद चौंकाने वाला जवाब दिया कि "यह पोस्ट उनकी कम्युनिटी गाइडलाइन का उल्लंघन नहीं है।" हालांकि, जब मीडिया और जांच एजेंसियों का दबाव बढ़ा, तब मेटा (Meta) ने अपनी गलती मानी।
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
मेटा के प्रवक्ता ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि कंपनी की CSAM (Child Sexual Abuse Material) को लेकर 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति है। विवादित Instagram CSAM Ads सामने आने के बाद कंपनी ने तुरंत कई विज्ञापनों को हटा दिया, संबंधित अकाउंट्स को सस्पेंड कर दिया और उन सभी खतरनाक URL को ब्लॉक कर दिया है। Meta ने यह भी स्वीकार किया कि उनका आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मॉडरेशन सिस्टम पूरी तरह से परफेक्ट नहीं है, और रिव्यू प्रोसेस कई बार नियमों के उल्लंघन की सटीक पहचान करने में चूक जाता है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
IT मिनिस्ट्री का कड़ा निर्देश: Ashwini Vaishnaw का सख्त एक्शन
\r\n\r\nइस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए, केंद्रीय IT मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने अधिकारियों को Meta इंडिया के शीर्ष अधिकारियों को तलब करने और सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया। IT मिनिस्ट्री ने अपने नोटिस में इंस्टाग्राम को निर्देश दिया है कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण को बढ़ावा देने वाले या ऐसे कंटेंट तक पहुंच बनाने वाले सभी Instagram CSAM Ads और विज्ञापनों को तुरंत ब्लॉक करे।
\r\n\r\n\r\n\r\n
मंत्रालय ने मेटा से पूछा है कि उनके सख्त एडवरटाइजिंग मानकों (Advertising Standards) और एआई मॉडरेशन सिस्टम के बावजूद, ऐसे Instagram CSAM Ads लाइव कैसे हो गए? इसके अलावा, सरकार ने कंपनी से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उनके द्वारा उठाए जा रहे तकनीकी और सुरक्षा उपायों की पूरी रिपोर्ट 7 दिन के भीतर सौंपने को कहा है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
WhatsApp Username फीचर पर भी सरकार का मेटा पर शिकंजा
\r\n\r\nगौरतलब है कि यह एक हफ्ते के भीतर मेटा को मिला दूसरा सरकारी नोटिस है। इससे ठीक पहले 1 जुलाई को, IT मिनिस्ट्री ने मेटा को WhatsApp के प्रपोज़्ड 'यूजरनेम फीचर' (Username Feature) को लेकर भी एक नोटिस भेजा था। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि बिना फोन नंबर शेयर किए यूजरनेम के जरिए चैट करने की सुविधा से ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग (Phishing), डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) और इम्पर्सोनेशन (Impersonation) जैसे साइबर अपराधों में भारी वृद्धि हो सकती है। सरकार ने इस फीचर के रोलआउट पर तब तक रोक लगाने को कहा है, जब तक सुरक्षा संबंधी चिंताएं पूरी तरह दूर नहीं हो जातीं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
भारत में CSAM से जुड़े सख्त कानून (IT Act Section 67B)
\r\n\r\nभारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को बनाना, देखना या फैलाना एक गंभीर कानूनी अपराध है। भास्कर नॉलेज और कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस मामले में देश में सख्त प्रावधान लागू हैं:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n सजा का प्रावधान: IT Act की धारा 67B के तहत बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को पब्लिश करने, शेयर करने या प्रसारित करने पर पहली बार दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।\r\n \r\n
- \r\n दोबारा अपराध करने पर: यदि कोई व्यक्ति दोबारा इस अपराध में लिप्त पाया जाता है, तो उसे 7 साल तक की जेल और भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है।\r\n \r\n
- \r\n प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी: Information Technology Rules, 2021 के तहत सोशल मीडिया कंपनियों (जैसे Instagram, Facebook) को अवैध और आपत्तिजनक कंटेंट की पहचान कर उसे तुरंत हटाने के लिए उचित तकनीकी उपाय (Technical Safeguards) करने होते हैं।\r\n \r\n
\r\n\r\n
यदि कोई आम यूजर जानबूझकर ऐसे Instagram CSAM Ads पर क्लिक करके सामग्री खरीदता है, डाउनलोड करता है, या आगे शेयर करता है, तो वह भी भारतीय कानून के तहत सीधे तौर पर आपराधिक कार्रवाई के दायरे में आता है। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि ऐसा कंटेंट दिखने पर उसे तुरंत संबंधित प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
Instagram CSAM Ads पर आगे क्या होगा?
\r\n\r\nबच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा आज के डिजिटल युग की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। मेटा को भेजा गया यह नोटिस स्पष्ट करता है कि भारत सरकार अब बिग टेक कंपनियों की किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। यदि मेटा 7 दिनों के भीतर Instagram CSAM Ads पर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाती है, तो सरकार IT Act के कड़े नियमों के तहत दंडात्मक कार्रवाई कर सकती है, जिसमें अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करना भी शामिल हो सकता है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
BBC की इन्वेस्टिगेशन के बाद सामने आया कि इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को बेचने वाले पेड विज्ञापन दिखाए जा रहे थे। इन Instagram CSAM Ads के सामने आने के बाद IT मिनिस्ट्री ने तुरंत कार्रवाई करते हुए Meta को नोटिस जारी किया है। सरकार ने इन सभी विज्ञापनों को तुरंत हटाने का निर्देश देते हुए 7 दिन में कंपनी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। भारत में ऐसे कंटेंट को बनाना, देखना या बेचना IT Act की धारा 67B के तहत गंभीर अपराध है। मेटा ने फिलहाल संबंधित अकाउंट्स को हटा दिया है, लेकिन यह घटना सोशल मीडिया मॉडरेशन सिस्टम की एक बड़ी विफलता को उजागर करती है।
Sabse pehle comment karne wale banein.