मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU) का परिसर शुक्रवार को छात्रों के आक्रोश और नारों से दहल गया। कैलाश प्रकाश हॉस्टल में रहने वाले सत्र 2024-25 के छात्रों ने अपनी महीनों से लंबित मांगों को लेकर सीधे कुलपति कार्यालय पर धावा बोल दिया और जोरदार धरना प्रदर्शन किया। छात्रों का गुस्सा दो मुख्य वजहों से फूटा - एक, पिछले साल की मेस फीस का अभी तक वापस न मिलना और दो, मेस में परोसे जा रहे बेहद घटिया गुणवत्ता वाले भोजन को लेकर।
\r\n\r\n\r\n\r\n
"बाहरी लोगों की दावत, छात्रों को खराब खाना"
\r\n\r\nछात्र नेता अक्षय बैंसला के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने विश्वविद्यालय के चीफ वार्डन और वित्त अधिकारी पर सीधे तौर पर मिलीभगत का सनसनीखेज आरोप लगाया। छात्रों ने कहा, "यह बहुत ही शर्मनाक है कि मेस ठेकेदार नियमों को ताक पर रखकर बाहर के लोगों से पैसे लेकर उन्हें प्रतिदिन अच्छा भोजन करा रहे हैं, जबकि विश्वविद्यालय के अपने छात्रों को ऐसा खाना दिया जा रहा है जिसे खाना तो दूर, देखना भी मुश्किल है।"
\r\n\r\nउन्होंने आरोप लगाया कि यह सब कुछ जानते हुए भी विश्वविद्यालय प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है, जिससे यह शक पैदा होता है कि इस धांधली में बड़े अधिकारी भी शामिल हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
प्रशासन की नींद टूटी, समझाने पहुंचे अधिकारी
\r\n\r\nसैकड़ों छात्रों को कुलपति कार्यालय के बाहर नारेबाजी करते देख विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप मच गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए चीफ वार्डन प्रो. दिनेश कुमार और अनुशासन समिति के सदस्य डॉ. विवेक त्यागी सहित हॉस्टल के अन्य वार्डन मौके पर पहुँचे। उन्होंने छात्रों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया, लेकिन छात्र अपनी मांगों पर अडिग रहे और तत्काल समाधान की मांग करते रहे।
\r\n\r\n\r\n\r\n
आश्वासन के बाद थमा आंदोलन, लेकिन आग अभी बाकी है
\r\n\r\nघंटों तक चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद आखिरकार विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों के गुस्से के आगे झुकना पड़ा। अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों को आश्वासन दिया कि पिछले सत्र की बकाया मेस फीस आज ही उनके बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाएगी। इस ठोस आश्वासन के बाद छात्रों ने अपना धरना समाप्त करने का फैसला किया।
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›
🏪 आपके शहर के ऑफर
विज्ञापन · स्थानीय दुकानों की ताज़ा स्कीम · स्वाइप करें →
सभी ऑफर देखें →
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यह केवल एक अल्पविराम है, पूर्णविराम नहीं। यदि मेस के भोजन की गुणवत्ता में सुधार और अन्य मांगों को जल्द से जल्द पूरा नहीं किया गया, तो वे इससे भी बड़ा और उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
Sabse pehle comment karne wale banein.