हमारे शरीर में खून का सही संतुलन बनाए रखना बेहद ज़रूरी है, और इसमें प्लेटलेट्स की अहम भूमिका होती है। चोट लगने पर खून का बहाव रोकने से लेकर घाव भरने तक, ये छोटे-छोटे सेल्स कई बड़े काम करते हैं। आमतौर पर एक स्वस्थ व्यक्ति के खून में इनका स्तर 1.5 लाख से 4.5 लाख प्रति माइक्रो लीटर के बीच होता है। लेकिन, कुछ लोगों में यह स्तर हमेशा 1 लाख से 1.5 लाख के बीच ही रहता है। ऐसे में कई बार लोग घबरा जाते हैं। इस विषय पर मीडिया से बातचीत में मैक्स अस्पताल में हेमेटोलॉजिस्ट और ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. रोहित कपूर और आरएमएल हॉस्पिटल में मेडिसिन विभाग के डॉ. सुभाष गिरि से बात की।READ ALSO:-बेंगलुरु में ट्रैफिक जाम से जंग जीतकर मेट्रो से दौड़ा 'जीवन': डॉक्टरों ने हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए अपनाया अनूठा तरीका
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प्लेटलेट्स क्या होते हैं और इनका काम क्या है?
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प्लेटलेट्स शरीर की बोन मैरो (अस्थि मज्जा) में बनने वाले छोटे-छोटे सेल्स होते हैं। इनका मुख्य काम खून का थक्का बनाना होता है। जब भी शरीर में कोई चोट लगती है, तो प्लेटलेट्स एक साथ मिलकर खून के बहाव को रोकते हैं। इनका काम इतना महत्वपूर्ण है कि इनकी संख्या अगर तय मानक से बहुत कम (20 से 30 हजार से भी कम) हो जाए तो व्यक्ति की जान को खतरा हो सकता है।
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शरीर में प्लेटलेट्स क्यों कम हो जाती हैं?
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डॉ. रोहित कपूर बताते हैं कि प्लेटलेट्स के कम होने के कई कारण हो सकते हैं:
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    बोन मैरो की बीमारियां: अप्लास्टिक एनीमिया, ल्यूकेमिया और मायलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम जैसी स्थितियां बोन मैरो को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
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    विटामिन की कमी: फोलेट और विटामिन B12 जैसे विटामिन की कमी भी प्लेटलेट्स के निर्माण पर असर डाल सकती है।
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    संक्रमण: हेपेटाइटिस C और HIV जैसे कुछ वायरल संक्रमण भी बोन मैरो के काम को सीधे प्रभावित करते हैं। डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां भी प्लेटलेट्स को तेजी से कम कर सकती हैं।
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प्लेटलेट्स का लेवल: कम होने पर क्या करें?
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डॉ. रोहित के अनुसार, प्लेटलेट्स के लेवल के आधार पर ही इलाज किया जाता है:
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    हल्की कमी (1,01,000 - 1,50,000): इस स्थिति में आमतौर पर इलाज की जरूरत नहीं होती। अगर यह स्तर हमेशा बना रहता है तो कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन हर तीन महीने में जांच कराना उचित होता है।
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    गंभीर स्थिति (50,000 से कम): यह एक गंभीर स्थिति है और तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता होती है। अगर काउंट 10,000 से कम हो जाए तो यह जानलेवा हो सकता है और ब्लीडिंग का खतरा रहता है।
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क्यों कुछ लोगों में 1 से 1.5 लाख का लेवल ही रहता है?
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डॉ. रोहित बताते हैं कि कुछ लोगों में जन्म से ही प्लेटलेट्स की संख्या एक से डेढ़ लाख के बीच हो सकती है। मेडिकल भाषा में इसे 'Constitutional Thrombocytopenia' कहा जाता है। ऐसे लोगों में यह काउंट सालों तक स्थिर रहता है और यह किसी बीमारी का संकेत नहीं होता है। हालांकि, अगर किसी का प्लेटलेट्स लेवल 1 लाख से नीचे चला जाए और इसके साथ ही हीमोग्लोबिन और टीएलसी भी कम हो तो यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है, जिसके लिए तुरंत जांच करानी चाहिए।
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कब कराएं प्लेटलेट्स की जांच और कौन सा टेस्ट है जरूरी?
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डॉ. सुभाष गिरि बताते हैं कि प्लेटलेट्स कम होना हमेशा डरने की बात नहीं है, लेकिन इसे हल्के में भी नहीं लेना चाहिए। सही समय पर टेस्ट और डॉक्टर की सलाह से स्थिति संभाली जा सकती है।
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    सबसे आम टेस्ट: शरीर में प्लेटलेट्स काउंट की जांच के लिए सबसे आम टेस्ट CBC (Complete Blood Count) है। अगर शरीर में हमेशा थकावट या कमजोरी जैसे लक्षण महसूस होते हैं तो यह टेस्ट करा लेना चाहिए। यह एक बेसिक और सस्ता टेस्ट है जो स्वास्थ्य की कई जानकारी दे देता है।
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    बोन मैरो टेस्ट की जरूरत: यह जांच आमतौर पर तब की जाती है जब प्लेटलेट्स की संख्या 50,000 से भी कम हो जाए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं ब्लड कैंसर तो नहीं है। हालांकि, कम काउंट होने का मतलब यह कतई नहीं है कि कैंसर ही हो।
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क्या घरेलू नुस्खों से बढ़ जाते हैं प्लेटलेट्स?
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डॉ. सुभाष इस पर कहते हैं कि न तो बकरी का दूध और न ही पपीते के पत्तों से प्लेटलेट्स बढ़ने का मेडिकल साइंस में कोई प्रमाण है। ऐसे में इन पर भरोसा न करें। यदि प्लेटलेट्स का स्तर 1 लाख से नीचे है तो डॉक्टर से सलाह लें और सही इलाज कराएं। सही समय पर टेस्ट और ट्रीटमेंट से बीमारी को काबू में किया जा सकता है।
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