आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल हमारे मोबाइल फोन या कंप्यूटर तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह मेडिकल साइंस और हेल्थकेयर के क्षेत्र में ऐसे चमत्कार कर रहा है, जिसकी कुछ दशक पहले कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। महिलाओं के स्वास्थ्य, विशेषकर प्रिवेंटिव हेल्थकेयर (Preventive Healthcare) को एक नई और सुरक्षित दिशा देने के उद्देश्य से देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में एक ऐतिहासिक पहल की गई है।READ ALSO:-क्रिकेट की दुनिया का सबसे बड़ा तकनीकी 'विस्फोट': अब गांव की पगडंडियों से लेकर गली-मोहल्लों तक पहुंचेगी 'दादा' और 'मिस्टर 360' की वर्ल्ड-क्लास कोचिंग; लॉन्च हुआ Kabuni AI
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
भारत में पहली बार एक ऐसी मैमोग्राफी मशीन (Mammography Machine) इंस्टॉल की गई है, जो खुद सोचने-समझने और बीमारी को उसके सबसे शुरुआती (Zero Stage) चरण में पकड़ने की क्षमता रखती है। फूजीफिल्म इंडिया द्वारा एनएम मेडिकल में स्थापित की गई इस मशीन का नाम ‘एमुलेट सोफिनिटी’ (Amulet Sophinity) है। यह केवल एक मशीन नहीं, बल्कि महिलाओं की जान बचाने वाला एक अत्याधुनिक 'डिजिटल रक्षा कवच' है। आइए, इस तकनीक और इसके फायदों को विस्तार से समझते हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

ब्रेस्ट कैंसर: भारत में एक 'साइलेंट किलर'

\r\n\r\n
इस नई मशीन की अहमियत समझने के लिए पहले हमें भारत में ब्रेस्ट कैंसर की भयावह स्थिति को समझना होगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में महिलाओं में होने वाले सभी तरह के कैंसर में ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) के मामले सबसे अधिक हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    देरी से पहचान: भारत में ब्रेस्ट कैंसर से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण यह है कि 60% से अधिक मामले एडवांस स्टेज (तीसरे या चौथे चरण) में सामने आते हैं, जब कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में फैल चुका होता है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    जांच से परहेज: महिलाएं अक्सर शर्म, जागरूकता के अभाव और मैमोग्राफी टेस्ट के दौरान होने वाले शारीरिक दर्द के कारण नियमित जांच (Regular Screening) नहीं कराती हैं।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
इन्हीं सभी चुनौतियों को दूर करने के लिए एआई-पावर्ड मैमोग्राफी को एक 'गेम चेंजर' (Game Changer) माना जा रहा है। अगर पहले या दूसरे चरण में ब्रेस्ट कैंसर का पता चल जाए, तो मरीज के पूरी तरह से ठीक होने की संभावना 90% से अधिक होती है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

'एमुलेट सोफिनिटी': क्या है यह AI-पावर्ड तकनीक?

\r\n\r\n
फूजीफिल्म द्वारा विकसित 'एमुलेट सोफिनिटी' कोई साधारण एक्स-रे या पुरानी मैमोग्राफी मशीन नहीं है। यह एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और एडवांस इमेजिंग टेक्नोलॉजी का एक बेजोड़ संगम है। इस मशीन में कई ऐसे आधुनिक फीचर्स जोड़े गए हैं, जो इसे दुनिया की सबसे बेहतरीन ब्रेस्ट इमेजिंग तकनीकों में से एक बनाते हैं:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    आधुनिक टोमोसिंथेसिस (3D Imaging):
    \r\n\r\n
    पारंपरिक मैमोग्राफी मशीनें स्तन की केवल 2D (फ्लैट) तस्वीर लेती हैं, जिसमें कई बार सघन (Dense) टिश्यू के पीछे छिपे छोटे ट्यूमर नजर नहीं आते। लेकिन यह नई मशीन 3D टोमोसिंथेसिस तकनीक का इस्तेमाल करती है। यह स्तन की अलग-अलग एंगल से कई तस्वीरें लेती है और फिर एआई उन्हें जोड़कर एक स्पष्ट 3D मॉडल तैयार करता है। इससे रेडियोलॉजिस्ट को एक मिलीमीटर आकार की गांठ (Tumor/Microcalcification) भी साफ-साफ दिख जाती है।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    लो रेडिएशन (Low Dose Radiation):
    \r\n\r\n
    एक्स-रे जांच में महिलाओं को हमेशा रेडिएशन (विकिरण) का डर सताता है। इस एआई मशीन का सॉफ्टवेयर इतना उन्नत है कि यह बेहद कम रेडिएशन में भी हाई-डेफिनिशन (High-Definition) और उच्च गुणवत्ता वाली इमेजिंग (Quality Imaging) उपलब्ध कराता है।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    स्वचालित डिकंप्रेशन (Automatic Decompression) से दर्द से मुक्ति:
    \r\n\r\n
    मैमोग्राफी के दौरान स्तन को मशीन की दो प्लेटों के बीच दबाया (Compress) जाता है, जो महिलाओं के लिए बहुत दर्दनाक होता है। 'एमुलेट सोफिनिटी' में एआई आधारित सेंसर लगे हैं। जैसे ही मशीन को लगता है कि इमेज के लिए पर्याप्त दबाव बन गया है, यह ऑटोमैटिक डिकंप्रेशन फीचर के जरिए तुरंत दबाव को हटा लेती है, जिससे मरीज को दर्द का अहसास नहीं होता और अनुभव अधिक आरामदायक बन जाता है।
    \r\n
  6. \r\n
  7. \r\n
    स्मार्ट पोजीशनिंग (Smart Positioning):
    \r\n\r\n
    एआई तकनीक मरीज की शारीरिक संरचना के अनुसार खुद ही कैमरे और प्लेट की पोजीशन को एडजस्ट कर लेती है। इससे जांच जल्दी पूरी होती है और गलती (Human Error) की गुंजाइश खत्म हो जाती है।
    \r\n
  8. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

तुलनात्मक विश्लेषण: पुरानी मशीन बनाम नई AI मशीन

\r\n\r\n\r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n
\r\n
मुख्य फीचर (Features)
\r\n
\r\n
पारंपरिक मैमोग्राफी
\r\n
\r\n
एआई 'एमुलेट सोफिनिटी' मैमोग्राफी
\r\n
\r\n
इमेजिंग तकनीक
\r\n
\r\n
2D फ्लैट इमेज (छुपे ट्यूमर छूटने का डर)
\r\n
\r\n
3D टोमोसिंथेसिस (गहराई के साथ 100% स्पष्ट तस्वीर)
\r\n
\r\n
रेडिएशन का स्तर
\r\n
\r\n
सामान्य से अधिक
\r\n
\r\n
बेहद कम (Low Dose)
\r\n
\r\n
दर्द/शारीरिक दबाव
\r\n
\r\n
अधिक (मैनुअल कम्प्रेशन के कारण दर्द)
\r\n
\r\n
बेहद कम (ऑटोमैटिक डिकंप्रेशन तकनीक)
\r\n
\r\n
सटीकता दर
\r\n
\r\n
रेडियोलॉजिस्ट के अनुभव पर निर्भर
\r\n
\r\n
AI विश्लेषण से 'फॉल्स पॉजिटिव' की दर में भारी कमी
\r\n
\r\n
जांच का समय
\r\n
\r\n
अधिक समय लगता है
\r\n
\r\n
स्मार्ट पोजीशनिंग से कुछ ही मिनटों में जांच पूरी
\r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

विशेषज्ञों की राय: स्वास्थ्य जगत के दिग्गजों ने क्या कहा?

\r\n\r\n
इस ऐतिहासिक इंस्टॉलेशन के मौके पर फूजीफिल्म इंडिया और एनएम मेडिकल के शीर्ष अधिकारियों व डॉक्टरों ने अपने विचार साझा किए:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

कोजी वाडा (Koji Wada), प्रबंध निदेशक, फूजीफिल्म इंडिया:

\r\n\r\n
\r\n
"एनएम मेडिकल में 'एमुलेट सोफिनिटी' की यह पहली इंस्टॉलेशन भारत में उन्नत और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में हमारी गहरी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। हमारा प्राथमिक लक्ष्य यही है कि आधुनिक एआई तकनीक के जरिए समय रहते बीमारी की सटीक पहचान हो सके, ताकि मरीजों को जल्द से जल्द और बेहतर उपचार का लाभ मिल सके। हम 'मेक फॉर इंडिया' और 'हेल्दी इंडिया' के विजन के साथ काम कर रहे हैं।"
\r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

डॉ. नीलेश शाह (Dr. Nilesh Shah), चेयरमैन, एनएम मेडिकल:

\r\n\r\n
\r\n
"ब्रेस्ट इमेजिंग और रेडियोलॉजी के क्षेत्र में यह तकनीकी प्रगति (Technological Advancement) शुरुआती चरण में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की पहचान करने में अहम भूमिका निभाएगी। यह मशीन न केवल डॉक्टरों के लिए मददगार है, बल्कि यह मरीजों के भरोसे को भी मजबूत करती है। मुंबई में शुरू हुई यह नई डिजिटल मैमोग्राफी सुविधा महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सशक्त तथा सुलभ बनाएगी।"
\r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

डॉ. शिल्पा लाड (Dr. Shilpa Lad), कंसल्टेंट, ब्रेस्ट इमेजिंग एंड इंटरवेंशंस, एनएम मेडिकल:

\r\n\r\n
\r\n
"एक रेडियोलॉजिस्ट और चिकित्सक के तौर पर हम जानते हैं कि साफ इमेज, कम रेडिएशन और मरीज का आराम— ये तीनों ही बेहतर ब्रेस्ट इमेजिंग के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। एआई आधारित यह 'एमुलेट सोफिनिटी' तकनीक जांच की गुणवत्ता को कई गुना बढ़ाने के साथ-साथ महिलाओं के लिए इस पूरी प्रक्रिया को अधिक सहज, दर्द-रहित और भरोसेमंद बनाती है। अब महिलाएं बिना किसी डर के अपनी स्क्रीनिंग करा सकेंगी।"
\r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

एआई (AI) का 'सेकंड ओपिनियन': डॉक्टरों के लिए एक वरदान

\r\n\r\n
कैंसर की जांच में कई बार इंसानी आंखों से छोटी चीजें छूट जाने की संभावना रहती है। ऐसे में 'एमुलेट सोफिनिटी' का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक बेहद कुशल असिस्टेंट या 'सेकंड ओपिनियन' (Second Opinion) देने वाले विशेषज्ञ की तरह काम करता है। यह मशीन तस्वीर लेने के बाद एआई एल्गोरिदम के जरिए उन संदिग्ध हिस्सों (Suspected Areas) को मार्क कर देती है, जहां कैंसर के सेल्स पनप रहे हो सकते हैं। इससे डॉक्टरों (Radiologists) को डायग्नोसिस (Diagnosis) करने में असीम मदद मिलती है और किसी भी मरीज की रिपोर्ट गलत आने की संभावना लगभग शून्य हो जाती है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

महिलाओं के स्वस्थ भविष्य की ओर एक बड़ा कदम

\r\n\r\n
मुंबई के एनएम मेडिकल में देश की पहली एआई मैमोग्राफी मशीन का लगना भारतीय स्वास्थ्य सेवा (Indian Healthcare Sector) के लिए मील का पत्थर है। यह तकनीक इस बात का प्रमाण है कि जब विज्ञान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सही दिशा में इस्तेमाल होता है, तो वह इंसानी जिंदगियों को बचाने का सबसे बड़ा हथियार बन जाता है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
चिकित्सकों की सलाह है कि 40 वर्ष से अधिक उम्र की हर महिला को साल में कम से कम एक बार अपनी ब्रेस्ट स्क्रीनिंग अवश्य करानी चाहिए। अब जबकि एआई तकनीक ने इस जांच को सुरक्षित, सटीक और दर्द-रहित बना दिया है, तो उम्मीद की जानी चाहिए कि अधिक से अधिक महिलाएं जागरूक होकर नियमित मैमोग्राफी के लिए आगे आएंगी और देश में ब्रेस्ट कैंसर से होने वाली मौतों के ग्राफ में भारी कमी देखने को मिलेगी। एआई के इस युग में 'रोकथाम ही सबसे अच्छा इलाज है' (Prevention is better than cure) की कहावत अब 100 प्रतिशत सच साबित हो रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें