क्या कभी आपने सोचा है कि दिल्ली से निकलते ही हरियाणा या उत्तर प्रदेश में घुसते ही पेट्रोल पंप पर रेट क्यों बदल जाते हैं? यह कोई मामूली अंतर नहीं है। आज, 28 सितंबर 2025 को, जब देश की राजधानी दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल ₹94.77 में मिल रहा है, तो वहीं आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में उसी एक लीटर पेट्रोल के लिए आपको ₹109.04 चुकाने पड़ रहे हैं। यानी एक ही देश में करीब ₹14 प्रति लीटर का सीधा अंतर।READ ALSO:-पटना को मिलेगी वाटर मेट्रो की सौगात: मुंबई-गोवा जैसा गंगा की लहरों पर सफर, ट्रैफिक जाम से मिलेगी निजात
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यह सिर्फ दो शहरों की कहानी नहीं है। कोलकाता में पेट्रोल ₹105.41 है तो हैदराबाद में ₹107 से ऊपर। आखिर इस भारी अंतर की वजह क्या है? क्या तेल अलग-अलग आता है? जवाब है- नहीं। इसका सारा खेल टैक्स, टैक्स और सिर्फ टैक्स का है।
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कीमत का गणित: समझिए आपकी जेब पर किसका कितना बोझ
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जब आप पेट्रोल के लिए भुगतान करते हैं, तो आप सिर्फ तेल की कीमत नहीं देते। उस कीमत में कई हिस्से जुड़े होते हैं। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं:
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    बेस प्राइस (कच्चा तेल + रिफाइनिंग): तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चा तेल खरीदती हैं। इसे रिफाइन करने, ढुलाई और अपना मुनाफा जोड़ने के बाद एक 'बेस प्राइस' तय होता है। यह लगभग आधी कीमत होती है।
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    केंद्र सरकार का हिस्सा (एक्साइज ड्यूटी): इस बेस प्राइस पर केंद्र सरकार अपनी एक्साइज ड्यूटी लगाती है, जो पूरे देश में एक समान होती है।
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    असली खेल - राज्यों का टैक्स (VAT): इसके बाद असली खेल शुरू होता है। हर राज्य अपनी कमाई के लिए इस पर वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) और अन्य सेस लगाता है। यही वो सबसे बड़ा कारण है जिससे कीमतों में भारी अंतर आता है। जिस राज्य में VAT की दर ज्यादा होती है, वहां पेट्रोल उतना ही महंगा हो जाता है। उदाहरण के लिए, दिल्ली में VAT की दर कम है, जबकि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना जैसे राज्यों में यह बहुत अधिक है।
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    डीलर का कमीशन: आखिर में पेट्रोल पंप मालिक का कमीशन जोड़ा जाता है, और फिर फाइनल रेट तय होता है जो आप चुकाते हैं।
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दुनिया के मुकाबले भारत में पेट्रोल इतना महंगा क्यों?
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अगर हम वैश्विक स्तर पर देखें तो कीमतों में जमीन-आसमान का फर्क है।
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    ईरान: यहां पेट्रोल लगभग ₹2.4 प्रति लीटर है क्योंकि यह दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों में से एक है।
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    अमेरिका: यहां पेट्रोल करीब ₹80 प्रति लीटर है, जो भारत से काफी सस्ता है।
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    हॉन्ग कॉन्ग: यहां दुनिया का सबसे महंगा पेट्रोल ₹304 प्रति लीटर तक है, जिसका कारण भारी टैक्स और इम्पोर्ट ड्यूटी है।
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भारत में पेट्रोल महंगा होने की सबसे बड़ी वजह डबल टैक्स का ढांचा है। यहां पेट्रोल की मूल कीमत पर पहले केंद्र सरकार और फिर राज्य सरकारें भारी टैक्स वसूलती हैं। इसलिए जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम घटते भी हैं, तो उसका पूरा फायदा आम आदमी तक नहीं पहुंच पाता। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये का कमजोर होना भी तेल के आयात को महंगा बनाता है, जिसका बोझ अंततः जनता पर ही पड़ता है।
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