मंगलवार की शाम ढल रही है और मुंबई के मिंट स्ट्रीट पर बने रिजर्व बैंक के मुख्यालय में देश की आर्थिक तकदीर पर आखिरी दौर का मंथन चल रहा है। बंद कमरे के अंदर गवर्नर शक्तिकांत दास और मौद्रिक नीति समिति (MPC) के सदस्य आंकड़ों, चार्ट्स और वैश्विक रिपोर्टों के बीच माथापच्ची कर रहे हैं। और बाहर... करोड़ों घर खरीदार, कारोबारी, निवेशक और आम नागरिक सांसें थामे इंतजार कर रहे हैं। इंतजार है कल सुबह 10 बजे का, जब RBI का पिटारा खुलेगा और यह तय होगा कि आपके लोन की EMI सस्ती होगी या त्योहारों का बजट और कस जाएगा।READ ALSO:-कल से बदलने वाली है आपकी जिंदगी! LPG सिलेंडर, UPI पेमेंट, ट्रेन टिकट से जुड़े 8 बड़े नियम, जो आपकी जेब पर डालेंगे सीधा असर
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RBI के तरकश में 'राहत' के तीर: क्यों घट सकती हैं दरें?
\r\n\r\nअगर सिर्फ घरेलू आंकड़ों को देखें, तो RBI के पास त्योहारी तोहफा देने के कई कारण मौजूद हैं।
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- \r\n महंगाई मुट्ठी में: उपभोक्ता महंगाई दर सिर्फ 2.07% पर है, जो RBI के 4% के लक्ष्य से काफी नीचे है। Care Ratings जैसी संस्थाओं का मानना है कि GST सुधारों के बाद कीमतें और नरम होंगी।\r\n \r\n
- \r\n दमदार विकास दर: अर्थव्यवस्था ने पहली तिमाही में 7.8% की शानदार ग्रोथ दर्ज की है, जो दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज है।\r\n \r\n
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इन मजबूत आंकड़ों के दम पर RBI के पास ब्याज दरों में कटौती कर लोगों को सस्ती EMI का तोहफा देने और बाजार में और पैसा झोंकने का सुनहरा मौका है।
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तो फिर हिचक क्यों? 'विदेशी विलेन' ने रोकी है RBI की राह!
\r\n\r\nकहानी में असली पेंच विदेशी मोर्चे पर है। एक 'विदेशी विलेन' ने RBI की राहत की राह में कांटे बिछा दिए हैं।
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- \r\n अमेरिकी टैरिफ: अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यातों पर लगाए गए टैरिफ भारत के ग्रोथ इंजन पर ब्रेक लगा सकते हैं।\r\n \r\n
- \r\n H1B वीजा: महंगे वीजा नियम भारत के शक्तिशाली सर्विस सेक्टर के लिए एक बड़ी चुनौती बन गए हैं।\r\n \r\n
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इन वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण, अगर RBI आज दरें घटाता है और कल वैश्विक मंदी गहरा जाती है, तो उसके पास भविष्य में अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए सीमित हथियार बचेंगे।
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बीच का रास्ता अपनाएगा RBI? विशेषज्ञ बोले- 'अभी देखो और इंतजार करो'
\r\n\r\nइस महंगाई बनाम मंदी की 'रस्साकशी' के बीच, अधिकांश विशेषज्ञों का मानना है कि RBI बीच का रास्ता अपनाएगा, यानी 'यथास्थिति'। Bajaj Broking समेत कई जानकारों का मानना है कि रेपो रेट को 5.50% पर स्थिर रखा जाएगा। यह एक सोची-समझी रणनीति होगी:
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- \r\n कोई झटका नहीं: दरें न बढ़ाकर RBI यह संकेत देगा कि वह अर्थव्यवस्था पर बोझ नहीं डालना चाहता।\r\n \r\n
- \r\n भविष्य के लिए हथियार सुरक्षित: दरें न घटाकर वह भविष्य की किसी भी अनिश्चितता से लड़ने के लिए अपने हथियार बचाकर रखेगा।\r\n \r\n
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निवेशकों की सांसें अटकीं, कल के संकेतों पर रहेगी नजर
\r\n\r\nइसलिए, कल सुबह 10 बजे जब गवर्नर शक्तिकांत दास बोलेंगे, तो देश सिर्फ रेपो रेट का आंकड़ा नहीं सुनेगा। बाजार और आम लोग उनके शब्दों के बीच छिपे संकेतों को पकड़ने की कोशिश करेंगे। उनका रुख नरम रहता है या सख्त? वह भविष्य के लिए क्या संकेत देते हैं? यही बातें तय करेंगी कि देश की अर्थव्यवस्था त्योहारी सीजन में किस दिशा में आगे बढ़ेगी। हो सकता है कि EMI पर सीधी राहत के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़े, लेकिन अनिश्चितता के इस दौर में स्थिरता का भरोसा भी किसी राहत से कम नहीं है।
Sabse pehle comment karne wale banein.