नई दिल्ली/लखनऊ: उत्तर प्रदेश में दिवाली पर हुई जमकर आतिशबाजी का असर अब सीधे हवा में दिख रहा है। पटाखों के धुएं और पहले से मौजूद प्रदूषकों ने मिलकर एनसीआर समेत प्रदेश के कई बड़े शहरों की हवा को 'रेड ज़ोन' में पहुंचा दिया है। स्थिति यह है कि हवा अब सांस लेने लायक नहीं रह गई है, और सुबह कई इलाकों में धुंध (स्मॉग) छाई रही।Read also:-Bijnor News: साथ जीने की उम्मीद टूटी, प्रेमी युगल ने जहर खाकर दी जान, दो बच्चों की माँ थी महिला; क्षेत्र में पसरा सन्नाटा
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

नोएडा-गाजियाबाद देश के सबसे प्रदूषित शहरों में

\r\n\r\n
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, सोमवार रात 10 बजे नोएडा का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 313 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है। इसी के साथ नोएडा देश के पांच सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हो गया। गाजियाबाद की स्थिति भी बेहद चिंताजनक रही, जहां AQI 310 दर्ज किया गया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

मेरठ में भी AQI 300 पार, प्रशासन के दावे फेल

\r\n\r\n
मेरठ में भी लोगों ने दिवाली धूमधाम से मनाई, लेकिन आतिशबाजी ने शहर की हवा को और अधिक दूषित कर दिया। प्रदूषण विभाग के अनुसार, शहर का AQI फिर से 300 के पार पहुंच गया, जिसका मुख्य कारण पटाखों का धुआं ही रहा। शाम होते ही जैसे ही पटाखे जलने शुरू हुए, आसमान में धुएं की मोटी चादर दिखाई देने लगी, जिससे हवा का स्तर 'गंभीर' श्रेणी के करीब पहुंच गया।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
    \r\n
  • प्रशासन द्वारा अवैध पटाखों पर रोक और ग्रीन पटाखों की बिक्री की अनुमति के बावजूद, धुआं करने वाले पटाखों की खूब बिक्री हुई और लोगों ने इन्हें जमकर फोड़ा।
  • \r\n
\r\n\r\n

 

खबरों के लिए ज्वाइन करें हमारा Whatsapp Channel
\r\n\r\n

अन्य शहरों का हाल भी बेहाल

\r\n\r\n
एनसीआर के अन्य शहरों में भी हवा की गुणवत्ता खराब रही, जिसमें हापुड़ (294), मेरठ (266 - नोट: लेख में मेरठ का AQI 300 पार और 266 दोनों बताया गया है, यहां CPCB का डेटा 266 दिया गया है) और बागपत (256) का AQI 'खराब' श्रेणी के उच्चतम स्तर पर रिकॉर्ड किया गया।
\r\n\r\n
क्या हैं ग्रैप (GRAP) के स्टेज? प्रदूषण की गंभीरता को समझने के लिए इन चरणों को जानना जरूरी है:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    स्टेज I: 'खराब' (AQI 201-300)
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    स्टेज II: 'बहुत खराब' (AQI 301-400) - नोएडा और गाजियाबाद वर्तमान में इस स्टेज में हैं।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    स्टेज III: 'गंभीर' (AQI 401-450)
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    स्टेज IV: 'गंभीर प्लस' (AQI >450)
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

अगले 2 दिन और भी खतरनाक

\r\n\r\n
CPCB का पूर्वानुमान है कि अगले 2 दिनों में हवा की गुणवत्ता और भी खराब हो सकती है। यह स्थिति विशेष रूप से सांस संबंधी रोगियों, बच्चों और बुजुर्गों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश और अस्वस्थता जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

डॉक्टरों की चेतावनी: N95 मास्क जरूरी

\r\n\r\n
गाजियाबाद के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. शरद जोशी ने मौजूदा हालात पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बचाव के लिए सभी को, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों को, बाहरी गतिविधियों के दौरान N95 या कम से कम डबल सर्जिकल मास्क पहनने की सख्त सलाह दी है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

पटाखों के अलावा ये भी हैं प्रदूषण के 'विलेन'

\r\n\r\n
आतिशबाजी के अलावा भी प्रदूषण के कई बड़े कारण हैं। मेरठ जैसे शहरों में टूटी सड़कों से उड़ती धूल, देहात क्षेत्र में चलते कोल्हू और फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं भी प्रदूषण के स्तर को लगातार बढ़ा रहा है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    सड़कों की धूल: वायु प्रदूषण में पीएम-10 का 86% और पीएम-2.5 का 72% हिस्सा सड़कों की धूल से आ रहा है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    वाहनों का धुआं: पीएम-2.5 में 20% हिस्सेदारी वाहनों से निकलने वाले धुएं की है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    उद्योग: सल्फर डाइऑक्साइड (58%) का सबसे बड़ा स्रोत इंडस्ट्री हैं।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

पराली का संकट भी शुरू

\r\n\r\n
उत्तर और मध्य भारत में दिवाली के बाद पराली (फसलों के अवशेष) जलाने का सिलसिला शुरू हो जाता है, जिससे प्रदूषण की रफ्तार तेज हो जाती है। हालांकि, 2015 में NGT ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया था और CAQM अधिनियम 2021 के तहत पराली जलाने पर 30,000 रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन यह समस्या अभी भी बनी हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें