मौसम डेस्क (Weather Update): मई का महीना... यह नाम सुनते ही जहन में सबसे पहले चिलचिलाती धूप, पसीने से तरबतर कर देने वाली उमस, लू के थपेड़े और एसी-कूलर की याद आने लगती है। भारतीय जनमानस में मई और जून भीषण गर्मी के पर्याय माने जाते हैं। लेकिन साल 2026 का मई महीना पिछले कई वर्षों के मौसम के मिजाज से बिल्कुल अलग कहानी बयां कर रहा है।READ ALSO:-जंग की आहट से बेकाबू हुईं सोने चांदी की कीमतें: सोना ₹1.52 लाख के करीब, चांदी ने पार किया ₹2.60 लाख का ऐतिहासिक आंकड़ा
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मई के पहले सप्ताह में जहां आमतौर पर गर्मी से लोगों का बुरा हाल हो जाना चाहिए था, पारा 40 से 45 डिग्री के बीच झूलना चाहिए था, वहीं दूसरी ओर इस वर्ष नजारा बिल्कुल उलट है। लोगों को रात में एसी या कूलर चलाने की जरूरत महसूस नहीं हो रही है; उनकी रातें सिर्फ पंखे की सामान्य हवा में आराम से बीत रही हैं। सुबह-शाम गुलाबी ठंडक का एहसास हो रहा है। ऐसे में हर किसी के मन में यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर इस बार गर्मी कहां गायब हो गई और इस सुखद मौसम की असली वजह क्या है?
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कब तक रहेगी राहत? उत्तर से लेकर मध्य भारत तक गिरा पारा मई 2026 की शुरुआत में उत्तर, पूर्वी और मध्य भारत के बड़े हिस्सों को भीषण गर्मी से भारी राहत मिली हुई है। मौसम विज्ञानियों के ताजा आंकड़ों पर गौर करें तो आपको जानकर हैरानी होगी कि देश के कई प्रमुख स्थानों पर अधिकतम तापमान सामान्य से 8 से 13 डिग्री सेल्सियस तक कम दर्ज किया जा रहा है।
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बंगाल की खाड़ी और अन्य मौसमी प्रणालियों से उठने वाली पूर्वी हवाओं और आसमान में छाई बादलों की चादर ने चिलचिलाती धूप को धरती तक पहुंचने से रोक दिया है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और आसपास के राज्यों में यह राहत साफ तौर पर महसूस की जा रही है। लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या यह मौसम ऐसे ही मेहरबान रहेगा या यह किसी बड़े मौसमी तूफान या भीषण लू से पहले की शांति है?
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मई में ठंडक का अद्भुत रिकॉर्ड: हरदोई में दर्ज हुआ इतिहास इस अनोखे मौसम का सबसे बड़ा उदाहरण उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में देखने को मिला। 7 मई 2026 को हरदोई में अधिकतम तापमान लुढ़ककर महज 26 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। मौसम विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, यह हरदोई में अब तक का सबसे ठंडा 'मई का दिन' साबित हुआ है।
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सिर्फ हरदोई ही नहीं, बल्कि बिजनौर, मेरठ, मुरादाबाद और पश्चिमी यूपी के अन्य कई हिस्सों में भी पूर्वी दिशा से लगातार आ रही ठंडी हवाओं ने सुबह और शाम के समय एक अजीब सी ठंडक बनाए रखी है। हालांकि दोपहर के समय हल्की धूप निकलने पर थोड़ी गर्माहट जरूर महसूस होती है, लेकिन चुभने वाली वह भयानक गर्मी फिलहाल पूरी तरह से नदारद है।
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गर्मी की शुरुआती चेतावनी और फिर मौसम का यू-टर्न यह मौसम इसलिए भी ज्यादा हैरान कर रहा है क्योंकि मौसम विभाग (IMD) ने इस साल गर्मियों की शुरुआत में कुछ और ही भविष्यवाणी की थी। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, इस साल गर्मियों की शुरुआत मार्च-अप्रैल के महीने में ही गर्म लहरों (Heatwaves) के साथ हो गई थी। उस दौरान मध्य और पश्चिमी भारत के कई इलाकों में तापमान 45 डिग्री के खतरनाक स्तर के करीब पहुंच गया था।
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शुरुआती पूर्वानुमान में स्पष्ट रूप से बताया गया था कि मार्च से लेकर मई तक सामान्य से अधिक गर्मी के दिन (Heatwave days) देखने को मिलेंगे। लेकिन जैसे ही मई का महीना करीब आया, लगातार सक्रिय हुए 'पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbances) और बारिश की अप्रत्याशित गतिविधियों ने मौसम के इस भयानक रूप को पूरी तरह से ठंडा कर दिया और पूर्वानुमानों को पलट कर रख दिया।
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बारिश का ठंडक पर असर: बादलों ने बिछाई सुरक्षा की चादर मई के महीने में जो यह सुकून भरी ठंडक महसूस हो रही है, उसका सीधा श्रेय देश के कई हिस्सों में हुई बेमौसम बारिश को जाता है। मई की शुरुआत में ही सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इस बारिश ने वायुमंडल में मौजूद अतिरिक्त गर्मी को सोख लिया और आसमान में बादलों की एक घनी चादर बिछा दी।
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इन बादलों के कारण सूर्य की सीधी और तेज किरणें धरती तक नहीं पहुंच पा रही हैं, जिससे तेज गर्मी रुक गई। इस पूर्वानुमानित और कुछ जगहों पर अप्रत्याशित वर्षा ने तापमान को पूरी तरह से नियंत्रित रखा है और गर्मी के उस चरम बिंदु (Peak Heat) को फिलहाल टाल दिया है, जो अमूमन इस समय तक लोगों को बेहाल कर देता है। हालांकि मौसम में यह उतार-चढ़ाव भारतीय जलवायु की एक पुरानी प्रवृत्ति रही है, लेकिन इस बार राहत की अवधि और इसका दायरा काफी ज्यादा दिखाई दे रहा है।
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जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का गहरा और लंबा प्रभाव अगर हम सिर्फ आज के सुखद मौसम को देखकर खुश हो रहे हैं, तो हमें लंबी अवधि के मौसमी रुझानों पर भी नजर डालनी होगी। पर्यावरण और जलवायु विशेषज्ञों के लंबे अध्ययन से यह पता चलता है कि भारत की गर्मियां जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण साल-दर-साल तेज, अप्रत्याशित और चरम (Extreme) होती जा रही हैं।
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गर्म लहरों (Heatwaves) की संख्या, उनकी तीव्रता और उनका भौगोलिक दायरा पिछले कुछ दशकों में तेजी से बढ़ा है। सबसे बड़ी और चिंताजनक बात यह है कि रात्रिकालीन तापमान (Night-time Temperature) में भारी उछाल दर्ज किया जा रहा है, जिसने गर्मी की मार को और भी भयानक बना दिया है। रात में तापमान कम न होने से इंसानी शरीर को आराम नहीं मिल पाता। ठीक ऐसा ही नजारा अप्रैल महीने में देखा गया था, जब दिन के साथ-साथ रातें भी सामान्य से कहीं अधिक गर्म रही थीं।
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कैसा रहेगा मई के बाकी दिनों का मौसम? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मई के बाकी दिन कैसे बीतेंगे? भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अपना नया और अपडेटेड अनुमान जताया है कि मई के मध्य तक अधिकांश स्थानों पर दिन का तापमान सामान्य या उससे थोड़ा कम ही बना रहेगा।
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हालांकि, राहत की यह बारिश पूरे देश में एक समान नहीं है। दक्षिणी भारत, पूर्वोत्तर के राज्यों और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में आने वाले दिनों में कुछ गर्मी और गर्म हवाओं की लहरें (Heatwaves) चलने की प्रबल संभावना है। इसके अलावा, एक बात जो परेशान कर सकती है, वह यह है कि दिन भले ही ठंडे रहें, लेकिन पूरे देश में रातें धीरे-धीरे सामान्य से अधिक गर्म बनी रह सकती हैं।
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अल नीनो का साया: कब पड़ेगी भीषण गर्मी? अगर आप सोच रहे हैं कि इस साल गर्मी से पूरी तरह बच गए हैं, तो यह एक भूल हो सकती है। मौसमी ट्रेंड्स और वैश्विक वेदर मॉडल्स यह स्पष्ट चेतावनी देते हैं कि अगले कुछ हफ्तों में ग्रीष्म काल का 'चरम' (Summer Peak) आ सकता है, और यह काफी कठोर होने वाला है।
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प्रशांत महासागर में 'अल नीनो' (El Nino) की स्थिति बनी हुई है। अल नीनो के प्रभाव के कारण इस साल भारतीय मानसून (Monsoon) के आने में भी थोड़ी देरी हो सकती है। मानसून में देरी का सीधा मतलब यह है कि इस बार गर्मी का मौसम लंबा खिंचेगा। अभी जो पूर्वी हवाएं और सक्रिय मौसमी प्रणालियां (Weather Systems) हम देख रहे हैं, वे केवल गर्मी के इस 'पीक' को कुछ समय के लिए टाल रही हैं। जैसे ही आसमान से बादल छंटेंगे और हवाओं का रुख बदलेगा, चिलचिलाती धूप और लू का वह भयानक दौर वापस लौटेगा, जो जून के अंत या जुलाई की शुरुआत तक लोगों को सता सकता है। इसलिए, अभी मिले इस सुखद मौसम का आनंद लें, लेकिन आने वाली भीषण गर्मी से बचाव के लिए भी अपनी तैयारियां पूरी रखें।
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