नई दिल्ली: देश में आम नागरिकों के स्वास्थ्य को लेकर एक गंभीर चिंता खड़ी हो गई है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने अक्टूबर महीने में जारी अपनी नवीनतम रिपोर्ट में खुलासा किया है कि कुल 211 दवाएं मानक गुणवत्ता (Not of Standard Quality - NSQ) से कमतर पाई गई हैं। इन दवाओं में पेट के कीड़ों की दवा, रोज़मर्रा ली जाने वाली कैल्शियम-विटामिन D3 टैबलेट, आम बुखार में इस्तेमाल होने वाली पैरासिटामोल और गंभीर संक्रमण में दी जाने वाली एंटीबायोटिक्स तक शामिल हैं।READ ALSO:-आयुष्मान कार्ड: 1 साल में कितनी बार करा सकते हैं फ्री इलाज? अगर 5 लाख की लिमिट हो गई खत्म, तो क्या होगा?
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
CDSCO द्वारा जारी इस लिस्ट से यह स्पष्ट है कि दवा NSQ की समस्या केवल छोटे स्तर पर नहीं है, बल्कि यह देशव्यापी है और इसमें कई नामी दवा कंपनियों के उत्पाद शामिल हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
NSQ दवाओं की संख्या में चौंकाने वाली वृद्धि
\r\n\r\n
ईटीवी भारत के पास मौजूद CDSCO की लिस्ट के अनुसार, अक्टूबर में सेंट्रल ड्रग्स लैबोरेटरीज ने 63 और स्टेट ड्रग्स टेस्टिंग लैबोरेटरीज ने 148 दवा सैंपल को NSQ के तौर पर पहचाना। यह आंकड़ा पिछले महीनों की तुलना में काफी अधिक है:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n\r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n
\r\n
महीना
\r\n
\r\n
NSQ पाई गई दवाएं
\r\n
\r\n
जुलाई
\r\n
\r\n
143
\r\n
\r\n
अगस्त
\r\n
\r\n
94
\r\n
\r\n
सितंबर
\r\n
\r\n
112
\r\n
\r\n
अक्टूबर
\r\n
\r\n
211
\r\n
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
जुलाई से अक्टूबर तक कुल 560 दवाएं (143+94+112+211) मानक गुणवत्ता की नहीं पाई गई हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

किसानों से लेकर नकली दवाओं तक का जाल

\r\n\r\n
NSQ पाई गई दवाएं देश भर की विभिन्न दवा कंपनियों द्वारा तैयार की गई हैं, जिनके विनिर्माण केंद्र पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और गाजियाबाद जैसे राज्यों में स्थित हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इससे भी अधिक गंभीर बात यह है कि अक्टूबर में बिहार से तीन और दिल्ली से दो दवाओं के सैंपल नकली दवाओं (Counterfeit) के तौर पर पहचाने गए। ये नकली दवाएं दूसरी कंपनियों के ब्रांड नामों का इस्तेमाल करके बिना इजाजत बनाने वालों द्वारा तैयार की गई थीं। नकली और दवा NSQ की पहचान करने का काम राज्य रेगुलेटर के साथ मिलकर रेगुलर तौर पर किया जाता है, ताकि इन्हें तुरंत मार्केट से हटाया जा सके।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

CDSCO की कार्रवाई और जिम्मेदारी

\r\n\r\n
CDSCO के अधिकारियों ने बताया कि ऐसे मामलों की जांच चल रही है और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और रूल्स 1945 के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    कार्रवाई के मानक: जो मैन्युफैक्चरर मानक गुणवत्ता की नहीं दवाएं बनाते हुए पाए जाते हैं, उन्हें उत्पादन रोकने के आदेश, टेस्टिंग रोकने के आदेश, लाइसेंस सस्पेंड/कैंसिल करने, वॉर्निंग लेटर और नॉन-कम्प्लायंस की गंभीरता के आधार पर कारण बताओ नोटिस दिए जाते हैं।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    रेगुलेटरी फ्रेमवर्क: CDSCO स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत भारत का राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण (NRA) है। इसका मुख्य उद्देश्य देश में बनाए, इंपोर्ट किए और बांटे जाने वाले मेडिकल प्रोडक्ट की सुरक्षा, असर और क्वालिटी सुनिश्चित करना है।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
एसोसिएशन ऑफ हेल्थ केयर प्रोवाइडर्स-इंडिया के डायरेक्टर जनरल डॉ. गिरिधर ज्ञानी ने ईटीवी भारत से बात करते हुए कहा कि मिलावटी और खराब क्वालिटी की दवाओं पर रोक लगाने के लिए ड्रग रेगुलेटर की हर महीने की पहल बहुत जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी विशेष बैच की दवा NSQ के तौर पर पहचान तब की जाती है जब वह किसी एक या दूसरे बताए गए क्वालिटी पैरामीटर में विफल हो जाता है। 
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

संरचित सैंपलिंग प्लान की आवश्यकता

\r\n\r\n
पिछले साल, CDSCO ने सेंट्रल और स्टेट ड्रग अथॉरिटीज़ के ड्रग्स इंस्पेक्टर्स द्वारा दवाओं की सैंपलिंग के लिए रेगुलेटरी गाइडलाइंस पब्लिश की थीं। ये गाइडलाइंस एक संरचित सैंपलिंग प्लान, रिस्क-बेस्ड सैंपल सिलेक्शन और ग्रामीण इलाकों सहित अलग-अलग जगहों को कवर करने के महत्व पर जोर देती हैं, ताकि मार्केट में मौजूद प्रोडक्ट्स की क्वालिटी और असर सुनिश्चित किया जा सके।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
CDSCO द्वारा अक्टूबर में 211 दवाओं को NSQ पाया जाना स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक चेतावनी है। रोजमर्रा की दवाओं में खराब गुणवत्ता सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा करती है। दवा NSQ के बढ़ते मामलों को देखते हुए, दवा निर्माताओं और रेगुलेटरी अथॉरिटीज दोनों को अपने क्वालिटी कंट्रोल और सैंपलिंग मेथड्स को और सख्त करने की आवश्यकता है, ताकि नागरिकों को सुरक्षित दवाएं उपलब्ध हो सकें।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें