अगर आप भी घर बैठे ऑनलाइन खाना मंगाने के शौकीन हैं, तो आपके लिए एक बेहद महत्वपूर्ण खबर है। देश की दिग्गज फूड डिलीवरी कंपनी जोमैटो (Zomato) ने अपने ग्राहकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डालते हुए शुक्रवार से एक बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने Zomato Platform Fee Hike का ऐलान किया है, जिसके तहत अब हर ऑर्डर पर लगने वाली प्लेटफॉर्म फीस में करीब 19 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। पहले जहां ग्राहकों को हर ऑर्डर के लिए 12.50 रुपये का प्लेटफॉर्म शुल्क देना पड़ता था, वहीं अब इस नए बदलाव के बाद ग्राहकों को 14.90 रुपये (यानी 2.40 रुपये ज्यादा) चुकाने होंगे। यह ध्यान देने वाली बात है कि यह राशि प्री-जीएसटी (Pre-GST) है, जिसका सीधा मतलब है कि इसमें वस्तु एवं सेवा कर (GST) जुड़ने के बाद अंतिम बिल में यह राशि और भी बढ़ जाएगी।READ ALSO:-RLD प्रमुख जयंत चौधरी को 'MP5' से भूनने की धमकी: सरकारी टूर लीक कर रची गई हत्या की साजिश, कोठी के बाहर दिखी संदिग्ध काली फिल्म वाली गाड़ी
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यह Zomato Platform Fee Hike ऐसे समय में हुआ है जब देश में महंगाई दर और रोजमर्रा की चीजों के दाम लगातार ऊपर जा रहे हैं। चूंकि जोमैटो रोजाना भारत भर में लगभग 20 से 25 लाख फूड ऑर्डर्स की डिलीवरी करता है, इस छोटी सी 2.40 रुपये की बढ़ोतरी से भी कंपनी के कुल राजस्व (Revenue) में हर दिन लाखों रुपये का इजाफा होगा। इस विस्तृत लेख में हम इस बढ़ोतरी के कारणों, जोमैटो के व्यावसायिक मॉडल, इसके प्रतिद्वंदियों की रणनीतियों और कंपनी के उस दिलचस्प सफर के बारे में विस्तार से जानेंगे, जो 2008 में एक छोटी सी वेबसाइट से शुरू होकर आज देश के सबसे बड़े फूड-टेक यूनिकॉर्न तक पहुंच गया है।
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क्या होती है प्लेटफॉर्म फीस और यह कैसे काम करती है?
\r\n\r\nअक्सर ग्राहक जब खाना ऑर्डर करते हैं, तो वे भ्रमित हो जाते हैं कि फूड बिल के अलावा इतने सारे अतिरिक्त चार्ज क्यों लिए जा रहे हैं। प्लेटफॉर्म फीस (Platform Fee) वास्तव में हर एक फूड ऑर्डर पर लागू होने वाला एक अतिरिक्त (Additional) चार्ज है। आपको यह समझना होगा कि यह फीस रेस्टोरेंट चार्ज (Restaurant Charge), वस्तु एवं सेवा कर (GST), और डिलीवरी पार्टनर फीस (Delivery Fee) से बिल्कुल अलग है।
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प्लेटफॉर्म फीस सीधे जोमैटो के खाते में जाती है। इस फीस का मुख्य उद्देश्य कंपनी के ऐप के रखरखाव (App Maintenance), सर्वर कॉस्ट, कस्टमर सपोर्ट सिस्टम को सुचारू रूप से चलाने और प्लेटफॉर्म को तकनीकी रूप से अपग्रेड करने के खर्चों को कवर करना होता है। जब भी आप जोमैटो से कोई ऑर्डर करते हैं, चाहे आप जोमैटो गोल्ड (Zomato Gold) के सदस्य ही क्यों न हों और आपको फ्री डिलीवरी मिल रही हो, फिर भी आपको यह प्लेटफॉर्म फीस चुकानी ही पड़ती है।
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स्विगी (Swiggy) और जोमैटो की कड़ी टक्कर
\r\n\r\nभारतीय फूड डिलीवरी मार्केट में मुख्य रूप से दो ही कंपनियों का दबदबा (Duopoly) है - जोमैटो (Zomato) और स्विगी (Swiggy)। जब बात कीमतों को तय करने की आती है, तो ये दोनों कंपनियां एक-दूसरे की रणनीतियों पर बहुत पैनी नजर रखती हैं।
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वर्तमान में, जोमैटो की मुख्य प्रतिद्वंदी कंपनी स्विगी (Swiggy) अपने यूजर्स से टैक्स सहित लगभग 14.99 रुपये की प्लेटफॉर्म फीस वसूल रही है। बाजार विश्लेषकों ने आमतौर पर यह देखा है कि जब भी इन दोनों में से कोई एक कंपनी अपनी फीस बढ़ाती है, तो दूसरी कंपनी भी जल्द ही अपने दाम बढ़ा देती है। इसे 'प्राइस मैचिंग' (Price Matching) रणनीति कहा जाता है। चूंकि स्विगी पहले से ही 15 रुपये के करीब प्लेटफॉर्म फीस ले रही थी, इसलिए जोमैटो ने भी अपने मार्जिन को संतुलित करने के लिए अपनी फीस को बढ़ाकर 14.90 रुपये कर दिया है।
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Zomato Platform Fee Hike: 2 रुपये से शुरू होकर 14.90 रुपये तक का सफर
\r\n\r\nजोमैटो द्वारा प्लेटफॉर्म फीस लगाने की शुरुआत बहुत पुरानी नहीं है। कंपनी ने अपने बिजनेस मॉडल को अधिक मुनाफे वाला (Profitable) बनाने के लिए बहुत ही छोटे स्तर से इसकी शुरुआत की थी:
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- \r\n अगस्त 2023: जोमैटो ने पहली बार अपने ग्राहकों से प्रति ऑर्डर मात्र 2 रुपये का प्लेटफॉर्म शुल्क लेना शुरू किया था। इसका उद्देश्य ग्राहकों की प्रतिक्रिया को समझना था।\r\n \r\n
- \r\n साल 2023 के अंत तक: ग्राहकों द्वारा इस 2 रुपये के शुल्क को आसानी से स्वीकार कर लेने के बाद, कंपनी ने इसे बढ़ाकर 3 रुपये कर दिया।\r\n \r\n
- \r\n 1 जनवरी 2024: नए साल की शुरुआत के साथ ही इस शुल्क को और बढ़ाकर 4 रुपये प्रति ऑर्डर कर दिया गया।\r\n \r\n
- \r\n त्योहारी सीजन और उसके बाद: त्योहारी सीजन और भारी मांग के दौरान इस फीस को धीरे-धीरे बढ़ाकर 7 रुपये तक ले जाया गया।\r\n \r\n
- \r\n सितंबर 2025: कंपनी ने एक बड़ा कदम उठाते हुए इसमें 20% का इजाफा किया और इसे 12.50 रुपये कर दिया था।\r\n \r\n
- \r\n मार्च 2026 (वर्तमान स्थिति): मात्र 7 महीने के भीतर ही कंपनी ने दूसरी बार Zomato Platform Fee Hike लागू किया है और अब यह शुल्क 14.90 रुपये (प्री-जीएसटी) हो गया है।\r\n \r\n
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कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और ऑपरेशनल कॉस्ट: दाम बढ़ने की असली वजह
\r\n\r\nआखिर महज कुछ ही महीनों के अंतराल पर जोमैटो को अपनी प्लेटफॉर्म फीस क्यों बढ़ानी पड़ी? बाजार और कंपनी के जानकारों के मुताबिक, इस बढ़ोतरी के पीछे दो सबसे बड़ी वजहें हैं:
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1. कच्चे तेल (Crude Oil) की आसमान छूती कीमतें: वैश्विक बाजार में भू-राजनीतिक तनावों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल देखा जा रहा है। तेल महंगा होने का सीधा असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ता है। जोमैटो के लाखों डिलीवरी पार्टनर्स अपनी बाइक्स और स्कूटर्स पर डिलीवरी करते हैं। पेट्रोल महंगा होने से इन डिलीवरी पार्टनर्स का खर्च बढ़ता है, जिसके परिणामस्वरूप कंपनी के पूरे लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन्स (Logistics Operations) की लागत बढ़ जाती है। डिलीवरी नेटवर्क को सुचारू बनाए रखने और पार्टनर्स को उचित भुगतान सुनिश्चित करने के लिए कंपनी को अतिरिक्त धन की आवश्यकता होती है।
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2. मुनाफे (Profitability) पर फोकस: शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने (IPO आने) के बाद से ही जोमैटो पर अपने निवेशकों को लगातार मुनाफा कमा कर देने का भारी दबाव है। जोमैटो अपनी प्रॉफिटेबिलिटी को सुधारने और बनाए रखने के लिए समय-समय पर प्लेटफॉर्म फीस में बदलाव करती रहती है। यह अतिरिक्त 2.40 रुपये प्रति ऑर्डर कंपनी के बॉटम लाइन (शुद्ध मुनाफे) में सीधा योगदान देता है, क्योंकि 25 लाख डेली ऑर्डर्स के हिसाब से यह एक बहुत बड़ी रकम बन जाती है।
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दीपिंदर गोयल और 'फूडीबे' (FoodieBay) की दिलचस्प कहानी
\r\n\r\nजोमैटो आज जिस मुकाम पर है, उसकी शुरुआत एक बहुत ही साधारण से विचार से हुई थी। जोमैटो के संस्थापक और सीईओ दीपिंदर गोयल (Deepinder Goyal) और उनके सहयोगी पंकज चड्ढा ने मिलकर साल 2008 में 'फूडीबे' (FoodieBay) नाम से अपनी एक फूड डायरेक्टरी वेबसाइट लॉन्च की थी।
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शुरुआती दिनों में, दीपिंदर गोयल और पंकज चड्ढा दिल्ली की एक कंसल्टिंग फर्म (Bain & Company) में काम करते थे। उन्होंने देखा कि उनके ऑफिस के लोग अक्सर लंच के समय अलग-अलग रेस्टोरेंट्स के मेन्यू कार्ड (Menu Cards) ढूंढने के लिए परेशान रहते थे। इसी समस्या को सुलझाने के लिए उन्होंने आस-पास के रेस्टोरेंट्स के मेन्यू स्कैन करके एक इंट्रानेट वेबसाइट पर अपलोड कर दिए। यह आईडिया इतना हिट हुआ कि उन्होंने इसे 'FoodieBay.com' के रूप में पब्लिक कर दिया। केवल नौ महीनों के भीतर ही, FoodieBay दिल्ली एनसीआर (Delhi NCR) में सबसे बड़ी ऑनलाइन रेस्टोरेंट डायरेक्टरी बन गई।
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FoodieBay से Zomato बनने का सफर: दो साल की शानदार सफलता के बाद, 2010 में कंपनी के संस्थापकों ने महसूस किया कि 'FoodieBay' नाम में 'eBay' शब्द शामिल है, जिससे भविष्य में ब्रांडिंग और कॉपीराइट से जुड़ी समस्या आ सकती है। इसके अलावा, वे सिर्फ 'फूड' तक सीमित नहीं रहना चाहते थे। इसलिए, उन्होंने इसका नाम बदलकर 'Zomato' कर दिया—एक ऐसा नाम जो 'टोमैटो' (Tomato) से मिलता-जुलता था, बोलने में आसान था और ब्रांडिंग के लिहाज से बेहद आकर्षक था।
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जोमैटो का विस्तार: दिल्ली-एनसीआर से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक
\r\n\r\nनाम बदलने के बाद जोमैटो ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। दिल्ली-एनसीआर में अपनी सफलता के तुरंत बाद, कंपनी ने देश के अन्य प्रमुख शहरों जैसे पुणे, अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद में अपनी ब्रांच फैलानी शुरू कर दी। हर शहर में उन्होंने रेस्टोरेंट्स की गली-गली जाकर डेटा इकट्ठा किया।
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विदेशी जमीं पर जोमैटो की दस्तक: साल 2012 आते-आते जोमैटो ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने पंख फैलाने शुरू कर दिए। कंपनी ने सबसे पहले श्रीलंका, यूएई (UAE), कतर, दक्षिण अफ्रीका, यूके (UK) और फिलीपींस जैसे देशों में अपनी सर्विसेज लॉन्च करके विदेशों में विस्तार करना शुरू किया। इसके बाद 2013 में न्यूजीलैंड, तुर्की और ब्राजील को भी इस लिस्ट में जोड़ लिया गया। यह एक भारतीय स्टार्टअप के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी जो वैश्विक स्तर पर विदेशी कंपनियों को टक्कर दे रहा था।
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भारत का पहला फूड-टेक यूनिकॉर्न और प्रॉफिटेबिलिटी का लक्ष्य
\r\n\r\nस्टार्टअप की दुनिया में 1 बिलियन डॉलर (लगभग 8300 करोड़ रुपये) से ज्यादा वैल्यूएशन वाले स्टार्टअप को 'यूनिकॉर्न' (Unicorn) कहा जाता है। अपनी शानदार ग्रोथ और निवेशकों के भरोसे के दम पर, जोमैटो देश का पहला फूड-टेक (Food-Tech) यूनिकॉर्न बनने में कामयाब रहा।
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लंबे समय तक घाटे में चलने और भारी कैश बर्न (Cash Burn) के बाद, जोमैटो ने एक ऐतिहासिक मुकाम तब हासिल किया जब उसने पहली बार फाइनेंशियल ईयर 2024 (FY24) की पहली तिमाही में 2 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा (Net Profit) दर्ज किया। यह भारतीय ई-कॉमर्स और फूड डिलीवरी सेक्टर के लिए एक बहुत बड़ी खबर थी। इस मुनाफे के पीछे मुख्य कारण प्लेटफॉर्म फीस की शुरुआत, बेहतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी और मार्केटिंग खर्चों में कटौती थी।
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ब्लिंकिट (Blinkit) का अधिग्रहण: क्विक कॉमर्स में धमाकेदार एंट्री
\r\n\r\nजोमैटो सिर्फ एक फूड डिलीवरी ऐप नहीं है, बल्कि यह एक विशाल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म है जो ग्राहकों, रेस्टोरेंट पार्टनर्स और लाखों डिलीवरी पार्टनर्स को एक साथ जोड़ता है। समय के साथ उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव को देखते हुए, जोमैटो के फाउंडर दीपिंदर गोयल ने अगस्त 2022 में 'ब्लिंकिट' (Blinkit - जिसे पहले Grofers के नाम से जाना जाता था) का 4,447 करोड़ रुपये में अधिग्रहण कर लिया।
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इस अधिग्रहण ने जोमैटो को 'क्विक कॉमर्स' (Quick Commerce) बाजार में एक मजबूत पकड़ दी। आज ब्लिंकिट ग्रॉसरी (किराना), इलेक्ट्रॉनिक्स और रोजमर्रा के सामानों की 10 मिनट में डिलीवरी कर रहा है और यह जोमैटो के कुल राजस्व में एक बहुत बड़ा योगदान दे रहा है।
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ग्राहकों पर क्या पड़ेगा इस बढ़ोतरी का असर?
\r\n\r\nनिश्चित रूप से Zomato Platform Fee Hike का सीधा असर आम ग्राहकों के मासिक बजट पर पड़ेगा। उदाहरण के लिए, यदि कोई परिवार या छात्र महीने में औसतन 10 बार जोमैटो से खाना मंगवाता है, तो उसे केवल प्लेटफॉर्म फीस के रूप में लगभग 150 रुपये (जीएसटी अलग से) चुकाने होंगे।
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हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय उपभोक्ता अब सुविधा (Convenience) के लिए अतिरिक्त शुल्क देने के अभ्यस्त हो गए हैं। भीषण गर्मी, बारिश, या रात-बिरात घर पर गर्म खाना प्राप्त करने की जो सुविधा जोमैटो या स्विगी प्रदान करते हैं, उसके एवज में 14.90 रुपये का प्लेटफॉर्म शुल्क बहुत से ग्राहकों को ज्यादा नहीं अखरेगा। फिर भी, यह मूल्य वृद्धि कुछ मूल्य-संवेदनशील (Price-sensitive) ग्राहकों को बाहर जाकर खाना खाने या सीधे रेस्टोरेंट से ऑर्डर करने के लिए प्रेरित कर सकती है।
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भारतीय ऑनलाइन फूड डिलीवरी बाजार आज एक ऐसे मुकाम पर खड़ा है जहां कंपनियां अब सिर्फ ग्रोथ नहीं, बल्कि सस्टेनेबल प्रॉफिटेबिलिटी (Sustainable Profitability) की ओर देख रही हैं। Zomato Platform Fee Hike इसी दिशा में उठाया गया एक कड़ा लेकिन व्यावसायिक रूप से जरूरी कदम है। 12.50 रुपये से 14.90 रुपये (19% की बढ़ोतरी) का यह सफर स्पष्ट करता है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और ऑपरेशंस को सुचारू रखने के लिए कंपनियों को कड़े फैसले लेने पड़ रहे हैं। 2008 में 'फूडीबे' से शुरू हुआ दीपिंदर गोयल का यह सफर ब्लिंकिट के अधिग्रहण और लगातार मुनाफे दर्ज करने तक, भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक केस स्टडी है। हालांकि ग्राहकों की जेब पर इसका थोड़ा असर जरूर पड़ेगा, लेकिन तकनीकी सुविधाओं और डोरस्टेप डिलीवरी के इस दौर में फूड डिलीवरी ऐप्स हमारी जीवनशैली का एक अभिन्न अंग बन चुके हैं।
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सारांश (Summary): फूड डिलीवरी ऐप जोमैटो (Zomato) ने शुक्रवार को अपनी प्लेटफॉर्म फीस में 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। अब ग्राहकों को प्रत्येक ऑर्डर पर 12.50 रुपये के बजाय 14.90 रुपये (जीएसटी अतिरिक्त) का शुल्क देना होगा। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण डिलीवरी खर्च बढ़ने और प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार के लक्ष्य से यह Zomato Platform Fee Hike किया गया है। 2008 में दीपिंदर गोयल द्वारा 'फूडीबे' के रूप में शुरू की गई इस कंपनी ने 2010 में जोमैटो नाम अपनाया और आज यह भारत की प्रमुख फूड-टेक यूनिकॉर्न है, जो ब्लिंकिट (Blinkit) के जरिए क्विक कॉमर्स में भी अपना दबदबा बनाए हुए है।
Sabse pehle comment karne wale banein.