सोशल मीडिया पर इन दिनों एक हैरान करने वाला वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें मोबाइल ऐप के जरिए एटीएम (ATM) मशीन को हैक करने का दावा किया जा रहा है। इन दावों ने लोगों और बैंकों की सुरक्षा चिंताओं को काफी बढ़ा दिया है। ऐसे में यह जानना बहुत जरूरी हो जाता है कि एटीएम जैकपॉटिंग क्या है और यह कैसे काम करता है? आइए जानते हैं इस साइबर अपराध की पूरी सच्चाई और इसके तरीके।READ ALSO:-रक्षक की वर्दी में छिपा था भेड़िया: 'तुम बेहद खूबसूरत हो, पत्नी को छोड़ दूंगा...' कहकर दरोगा ने एक साल तक किया महिला का शारीरिक शोषण, 8 लाख के जेवर भी लूटे
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वायरल वीडियो का दावा: क्या सच में हैक हो सकता है ATM?

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हाल ही में इंटरनेट पर ई-रिक्शा को मोबाइल ऐप से हैक करने के दावों के बाद, अब वीडियो में एटीएम मशीन को भी हैक करने की बात कही जा रही है। वीडियो में दावा किया गया है कि मोबाइल ऐप के जरिए एटीएम को आसानी से बंद और ऑन किया जा सकता है।
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यह वायरल वीडियो हम सभी को सोचने पर मजबूर करता है कि क्या इतनी सुरक्षित मशीन को हैक किया जा सकता है। आम तौर पर एटीएम की भौतिक और तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी होती है, इसलिए यह नामुमकिन सा लगता है, लेकिन तकनीक के दौर में हैकर्स ने इसके भी तरीके निकाल लिए हैं।
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अमेरिका में हो चुकी हैं घटनाएं, भारत में क्या है स्थिति?

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भले ही भारत में अभी तक सीधे तौर पर मोबाइल ऐप से एटीएम हैक करके पैसे निकालने का कोई बड़ा मामला सामने नहीं आया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह एक बहुत गंभीर समस्या है।
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अमेरिका (US) में ऐसे कई मामले दर्ज किए गए हैं, जहां हैकर्स ने एटीएम सिस्टम में सेंध लगाकर मशीन से सारा पैसा निकाला है। अमेरिका में हुई इन घटनाओं को तकनीकी भाषा में 'ATM Jackpotting' का नाम दिया गया है, जिसने साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है।
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जानिए एटीएम जैकपॉटिंग क्या है और यह कैसे काम करता है?

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जब भी कोई नई साइबर धोखाधड़ी सामने आती है, तो सबसे पहला सवाल यही होता है कि एटीएम जैकपॉटिंग क्या है। फ़ेडरल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (FBI) के अनुसार, एटीएम जैकपॉटिंग एक बेहद खतरनाक साइबर क्राइम है, जिसमें हैकर्स मशीन के पूरे सिस्टम को अपने कब्जे में ले लेते हैं।
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इस प्रक्रिया में हैकर्स मशीन के सर्वर को बाईपास कर देते हैं। आसान भाषा में समझें तो मैलवेयर (Malware) का इस्तेमाल करके हैकर्स मशीनों को पूरी तरह से कंट्रोल करते हैं। इसके बाद वे बिना किसी बैंक कार्ड या अकाउंट डिटेल के ही सारा कैश निकाल लेते हैं।
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हैकर्स कैसे करते हैं खतरनाक मैलवेयर का इस्तेमाल?

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इकनॉमिक टाइम्स की विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, हैकर्स एटीएम मशीन में एक विशेष और खतरनाक मैलवेयर डाल देते हैं। यह मैलवेयर एटीएम के उस सॉफ्टवेयर को पूरी तरह से संक्रमित करता है, जो उसके फिजिकल ऑपरेशन (Physical Operation) को कंट्रोल करता है।
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सामान्य प्रक्रिया में, जब कोई ग्राहक पैसे निकालता है, तो एटीएम कैश देने से पहले बैंक सर्वर से मंजूरी (Approval) लेता है। लेकिन जैकपॉटिंग में हैकर्स बैंक की मंजूरी के बिना ही अपनी कमांड भेजकर सीधे मशीन से कैश प्राप्त कर लेते हैं।
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मशीन पर होता है सीधा हमला, ग्राहकों के खाते रहते हैं सुरक्षित

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इस साइबर हमले की सबसे खास बात यह है कि यह हमला किसी ग्राहक के बैंक खाते पर नहीं, बल्कि सीधे एटीएम मशीन के सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर पर होता है। इसमें आम ग्राहकों का पैसा उनके खातों में सुरक्षित रहता है, लेकिन बैंक का वह पैसा चोरी हो जाता है जो मशीन के अंदर रखा होता है।
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हार्ड ड्राइव बदलकर मशीन पर करते हैं सीधा नियंत्रण

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मशीन में मैलवेयर डालने के लिए हैकर्स बेहद शातिर तरीके अपनाते हैं। USA टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, हैकर्स इसके लिए मुख्य रूप से मशीन की हार्ड ड्राइव (Hard Drive) का इस्तेमाल करते हैं।
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हमले का पहला तरीका यह है कि वे एटीएम की हार्ड ड्राइव को निकालकर उसे अपने कंप्यूटर से जोड़ते हैं, उसमें मैलवेयर कॉपी करते हैं और फिर उसे वापस उसी जगह लगा देते हैं।
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दूसरा तरीका इससे भी ज्यादा खतरनाक है। इसमें हैकर्स एटीएम की असली हार्ड ड्राइव को हटाकर उसकी जगह एक नई संक्रमित (Infected) हार्ड ड्राइव लगा देते हैं और फिर मशीन को रीस्टार्ट कर देते हैं। मशीन के चालू होते ही पूरा कंट्रोल हैकर्स के हाथ में आ जाता है।
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निष्कर्ष के तौर पर, यह समझना कि एटीएम जैकपॉटिंग क्या है, आज के डिजिटल युग में बहुत जरूरी है। यह सीधे बैंक की एटीएम मशीन पर एक बड़ा तकनीकी हमला है, जिसमें हैकर्स मैलवेयर के जरिए सारा कैश निकाल लेते हैं। हालांकि भारत में फिलहाल इसके मामले नहीं हैं, लेकिन बैंकों, सुरक्षा एजेंसियों और आम जनता को ऐसे उन्नत साइबर खतरों को लेकर हमेशा सतर्क और जागरूक रहने की सख्त आवश्यकता है।
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