नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। अगर आप भी सिगरेट पीने के शौकीन हैं, तो आपके लिए एक बुरी खबर है। अगले महीने यानी मई 2026 से सिगरेट का कश लगाना आपकी जेब पर काफी भारी पड़ने वाला है। एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत की प्रमुख सिगरेट निर्माता कंपनियां—जिनमें बाजार की दिग्गज कंपनी ITC और गॉडफ्रे फिलिप्स (Godfrey Phillips) शामिल हैं—मई महीने से सिगरेट की कीमतों में 17% तक की भारी बढ़ोतरी करने की तैयारी में हैं।READ ALSO:-फैक्ट चेक: क्या रातों-रात 10 रुपये महंगा हो गया पेट्रोल और 12.50 रुपये बढ़ा डीजल? PIB ने किया 'सरकारी आदेश' का पर्दाफाश, जानें पूरा सच!
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जैसे ही यह खबर बाजार में आई, सिगरेट का सेवन करने वालों में जहां मायूसी दिखी, वहीं शेयर बाजार में इन कंपनियों के निवेशकों की बांछें खिल गईं। आइए, इस विस्तृत रिपोर्ट में समझते हैं कि सिगरेट के दाम क्यों बढ़ रहे हैं, किस ब्रांड का पैकेट कितना महंगा होगा, और इसका शेयर बाजार पर क्या असर हुआ है।
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शेयर बाजार में धूम: कंपनियों के शेयरों में आया भारी उछाल

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सिगरेट के दाम बढ़ने की खबर का सबसे पहला और सकारात्मक असर शेयर बाजार पर देखने को मिला। सोमवार यानी 29 अप्रैल को, जैसे ही यह खबर फैली, सिगरेट कंपनियों के शेयरों में जोरदार खरीदारी शुरू हो गई।
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    ITC का शेयर कारोबारी सत्र के दौरान करीब 4% की मजबूत तेजी के साथ बंद हुआ।
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    वहीं, गॉडफ्रे फिलिप्स के शेयरों में तो लगभग 7% की शानदार छलांग दर्ज की गई।
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    इन दोनों दिग्गजों के प्रदर्शन के दम पर 'निफ्टी FMCG इंडेक्स' में भी 2% की तेजी देखी गई, जिसमें ITC का योगदान सबसे अधिक रहा।
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मई से कितने बढ़ेंगे दाम? सस्ते ब्रांड्स पर भी पड़ेगी मार

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डिस्ट्रीब्यूटर्स के फीडबैक और चैनल चेक (Channel Checks) के आधार पर आई 'एनडीटीवी प्रॉफिट' की एक रिपोर्ट के अनुसार, कीमतों में यह बढ़ोतरी केवल महंगे (Premium) प्रोडक्ट्स तक ही सीमित नहीं रहेगी।
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कंपनियां अपने मार्जिन को बनाए रखने के लिए 'वैल्यू-एंड ब्रांड्स' यानी सस्ते सिगरेट के दामों में भी इजाफा करने जा रही हैं। एक उदाहरण से समझें: अनुमान है कि ITC के लोकप्रिय ब्रांड गोल्डफ्लेक प्रीमियम (Gold Flake Premium) के एक पैकेट की कीमत मई 2026 में ₹115 से बढ़कर ₹135 के करीब पहुंच सकती है। यानी एक ही पैकेट पर सीधा ₹20 का इजाफा। इसी अनुपात में अन्य ब्रांड्स की कीमतों में भी भारी उछाल देखने को मिलेगा।
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आखिर क्यों बढ़ रही हैं कीमतें? (एक्साइज ड्यूटी का खेल)

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कंपनियों द्वारा अचानक कीमतें बढ़ाने के पीछे मुख्य कारण सरकार द्वारा टैक्स (Tax) में की गई भारी वृद्धि है।
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इस साल की शुरुआत में, संसद ने 'सेंट्रल एक्साइज (अमेंडमेंट) बिल, 2025' को मंजूरी दी थी। इस बिल के तहत सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर लगने वाली ड्यूटी को काफी बढ़ा दिया गया है। 1 फरवरी से प्रभावी हुए इस नए नियम के अनुसार:
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    सिगरेट की लंबाई (Length of stick) के आधार पर अब ₹2,050 से लेकर ₹8,500 प्रति 1,000 स्टिक की एक्साइज ड्यूटी लगाई गई है।
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    ध्यान देने वाली बात यह है कि यह भारी-भरकम ड्यूटी सिगरेट पर पहले से लग रहे 40% GST (Goods and Services Tax) के 'अतिरिक्त' (Extra) है।
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लंबी सिगरेट पीने वालों की जेब ज्यादा कटेगी

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ICICI सिक्योरिटीज के वित्तीय विश्लेषकों (Analysts) के अनुसार, नई एक्साइज ड्यूटी का सबसे ज्यादा असर लंबी सिगरेट (किंग साइज) पर पड़ेगा।
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    रिपोर्ट के मुताबिक, 75 से 85 mm लंबी सिगरेट के निर्माण की कुल लागत (Cost of Production) में 22-28% की भारी बढ़ोतरी हुई है।
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    बाजार की लीडर ITC की कुल बिक्री में 75 mm से लंबी सिगरेट का हिस्सा लगभग 16% है।
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    इस नई 'लेवी' (Levy) के कारण, ऐसी लंबी सिगरेट के दाम खुदरा बाजार में प्रति स्टिक (यानी एक सिगरेट) ₹2 से ₹3 तक बढ़ सकते हैं।
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कंपनियों के मुनाफे पर क्या होगा असर?

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अक्सर यह माना जाता है कि दाम बढ़ने से बिक्री (Sales Volume) कम हो जाती है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि कीमतों में 17% तक के इस भारी इजाफे से कुछ समय के लिए सिगरेट की बिक्री पर नकारात्मक (अस्थायी) असर जरूर पड़ सकता है।
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हालांकि, 'जियोजित इन्वेस्टमेंट्स' के रिसर्च हेड विनोद नायर के मुताबिक, "सिगरेट कंपनियों के पास कीमतों को कंट्रोल करने की (Pricing Power) एक बेहतरीन ताकत होती है।" सिगरेट की लत (Addiction) के कारण ग्राहक बढ़े हुए दाम देने को भी तैयार रहते हैं। यही वजह है कि टैक्स बढ़ने के बावजूद ये कंपनियां अतिरिक्त लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर डाल देती हैं और लंबी अवधि में अपना मुनाफा (Profit Margins) सुरक्षित रखने में सफल रहती हैं।
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क्या होती है एक्साइज ड्यूटी और लेवी? (सरल भाषा में)

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    एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty): इसे हिंदी में 'उत्पाद शुल्क' कहा जाता है। यह एक इनडायरेक्ट टैक्स (अप्रत्यक्ष कर) है जो देश के भीतर बनने वाले (Manufactured) सामानों पर लगाया जाता है। सिगरेट और शराब जैसे 'सिन गुड्स' (Sin Goods) पर सरकार समय-समय पर यह ड्यूटी बढ़ाती रहती है, ताकि इनकी खपत को कम किया जा सके और सरकारी राजस्व (Revenue) में भी बढ़ोतरी हो।
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    लेवी (Levy): जब सरकार किसी विशेष उद्देश्य, नीति या कानूनी अधिकार के तहत कोई टैक्स या शुल्क अनिवार्य रूप से लगाती है या वसूलती है, तो उस प्रक्रिया को 'लेवी' कहा जाता है। सिगरेट के मामले में, इस नई ड्यूटी (लेवी) ने सिगरेट की कुल उत्पादन लागत को बढ़ा दिया है, जिसे अब कंपनियां मई महीने से आम ग्राहकों से वसूलने जा रही हैं।
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मई 2026 से सिगरेट की बढ़ी हुई कीमतें न केवल सरकार के खजाने को भरेंगी, बल्कि सिगरेट कंपनियों के मुनाफे को भी बरकरार रखेंगी। हालांकि, इसका पूरा आर्थिक बोझ उन उपभोक्ताओं पर पड़ेगा जो इस आदत के शिकार हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों को उम्मीद है कि कीमतों में इस भारी उछाल से शायद कुछ लोग धूम्रपान छोड़ने के लिए प्रेरित हों।
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