नई दिल्ली/मुंबई: जलवायु परिवर्तन (Climate Change) आज दुनिया के सामने सबसे बड़ा संकट है। ऐसे में वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं को कार्बन-मुक्त बनाने की जिम्मेदारी सिर्फ सरकारों की नहीं, बल्कि बड़े वित्तीय संस्थानों की भी है। इसी दिशा में एक ऐतिहासिक और युगांतरकारी कदम उठाते हुए, भारत के सबसे बड़े ऋणदाता और सार्वजनिक क्षेत्र के दिग्गज बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India - SBI) ने देश के बैंकिंग क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी 'सस्टेनेबिलिटी पहल' (Sustainability Initiative) का शंखनाद कर दिया है।READ ALSO:-जिंदगी से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं! एंबुलेंस का रास्ता रोकने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ मेरठ में कल शोषित क्रांति दल का बड़ा धरना प्रदर्शन
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यह केवल एक घोषणा नहीं है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के 'ग्रीन ट्रांजिशन' (Green Transition) का एक पूरा ब्लूप्रिंट है। SBI ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य का बैंकिंग ढांचा केवल मुनाफे पर नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण (Environmental Conservation) की बुनियाद पर टिका होगा। बैंक ने अपने ग्रीन पोर्टफोलियो को कई गुना बढ़ाने, नए उभरते सेक्टर्स के लिए 'चक्र' (CHAKRA) नाम से एक नया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने और 2055 तक पूरी तरह से 'नेट जीरो' (Net Zero) बनने का संकल्प लिया है।
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आइए इस विस्तृत और एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में गहराई से समझते हैं कि SBI का यह मास्टरप्लान क्या है, इसके वित्तीय मायने क्या हैं, और भारत की आम जनता से लेकर बड़े कॉरपोरेट्स तक, इसका क्या सीधा असर पड़ने वाला है।
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1. 'ग्रीन एडवांस' (Green Advances) का महा-लक्ष्य: 1.56% से 10% की लंबी छलांग

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इस पूरी पहल का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा SBI का वह लक्ष्य है, जो उसने अपने ऋण पोर्टफोलियो (Loan Portfolio) के लिए निर्धारित किया है। बैंक ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वर्ष 2030 तक वह अपने कुल घरेलू ऋण (Domestic Loan Advances) का 7.5% से लेकर 10 प्रतिशत हिस्सा केवल 'ग्रीन एडवांस' यानी पर्यावरण के अनुकूल परियोजनाओं के लिए समर्पित करेगा।
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आंकड़ों के आईने में इस लक्ष्य की विशालता को समझें:

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स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का कुल लोन बुक कई लाख करोड़ रुपये का है।
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    वर्तमान स्थिति (मार्च 2025 तक): SBI के हालिया और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक बैंक के कुल ऋणों में ग्रीन पोर्टफोलियो की हिस्सेदारी मात्र 1.56 प्रतिशत थी।
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    भविष्य का लक्ष्य (2030 तक): महज पांच सालों के भीतर इस 1.56% के आंकड़े को 10% तक ले जाना कोई सामान्य बात नहीं है। इसके लिए SBI को अपनी फंडिंग रणनीति में आक्रामक बदलाव करने होंगे और हजारों करोड़ रुपये ग्रीन प्रोजेक्ट्स में झोंकने होंगे।
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क्या होते हैं 'ग्रीन एडवांस' (What are Green Advances)?

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सरल भाषा में समझें तो, ग्रीन एडवांस वे लोन या क्रेडिट सुविधाएं हैं जो विशेष रूप से उन परियोजनाओं, उद्योगों या व्यवसायों को दी जाती हैं जिनका पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसमें प्रदूषण कम करने वाली मशीनरी लगाना, ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency) बढ़ाना, वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाना, या क्लीन एनर्जी से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं।
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2. वित्तीय ढांचा: कैसे जुटाया जाएगा इतना पैसा? ('Green Lines of Credit' का कॉन्सेप्ट)

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अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि इतने बड़े पैमाने पर ग्रीन लोन बांटने के लिए SBI पैसा कहाँ से लाएगा? बैंक ने इसके लिए एक बेहद सधी हुई 'रणनीति और वित्तीय ढांचा' (Strategic Financial Framework) तैयार किया है।
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SBI ने स्पष्ट किया है कि इन कुल ग्रीन एडवांस का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा विशेष 'ग्रीन लाइन्स ऑफ क्रेडिट' (Green Lines of Credit) के माध्यम से वित्तपोषित किया जाएगा।
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ग्रीन लाइन्स ऑफ क्रेडिट क्या है?
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    अंतरराष्ट्रीय और घरेलू फंडिंग: इसका सीधा अर्थ यह है कि बैंक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों (जैसे World Bank, Asian Development Bank), ग्लोबल ग्रीन बॉन्ड्स (Global Green Bonds) और घरेलू स्तर पर विशेष रूप से हरित परियोजनाओं के लिए जुटाई गई पूंजी का उपयोग करेगा।
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    सस्ती दरें (Cheaper Interest Rates): दुनिया भर में ग्रीन प्रोजेक्ट्स के लिए जो फंड मिलता है, वह आमतौर पर सामान्य कमर्शियल फंड्स के मुकाबले थोड़ा सस्ता होता है। इसका फायदा यह होगा कि SBI भारत में कंपनियों को भी थोड़े आकर्षक और किफायती ब्याज दरों पर ग्रीन लोन उपलब्ध करा सकेगा।
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3. गेमचेंजर पहल: 'चक्र' (CHAKRA) - उभरते हुए 'सनराइज सेक्टर्स' का नया पावरहाउस

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अपनी इस महत्वाकांक्षी ग्रीन रणनीति को जमीन पर उतारने और उसे एक मजबूत संस्थागत ढांचा (Institutional Framework) देने के लिए SBI ने एक विशेष केंद्र की स्थापना की है, जिसे 'चक्र' (CHAKRA) नाम दिया गया है।
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यह 'चक्र' असल में एक अत्याधुनिक 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' (Centre of Excellence) है। इसका मुख्य काम उन सेक्टर्स की पहचान करना, उनकी रिसर्च करना और उनकी वित्तीय जरूरतों को पूरा करना होगा जिन्हें अर्थव्यवस्था की भाषा में 'सनराइज सेक्टर्स' (Sunrise Sectors) कहा जाता है। यानी वे उद्योग जो अभी अपने शुरुआती चरण में हैं, लेकिन भविष्य में सबसे ज्यादा विकास करेंगे।
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SBI के इस 'चक्र' केंद्र के रडार पर मुख्य रूप से तीन बड़े सनराइज सेक्टर्स हैं:
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A. अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy)

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भारत सरकार ने 2030 तक 500 गीगावाट (GW) रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। 'चक्र' के जरिए SBI विशाल सौर ऊर्जा (Solar Power) और पवन ऊर्जा (Wind Power) परियोजनाओं को फंड करेगा। इसमें न सिर्फ बड़े सोलर पार्क शामिल होंगे, बल्कि रूफटॉप सोलर लगाने वाली MSMEs और आम ग्राहकों को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
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B. इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (Electric Mobility - EV)

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पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता खत्म करने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) ही भविष्य हैं। लेकिन EV क्रांति तब तक सफल नहीं हो सकती जब तक कि देश में मजबूत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर न हो।
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    'चक्र' का फोकस ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर (EV Infrastructure) के निर्माण, बैटरी मैन्युफैक्चरिंग (Giga-factories) और हाईवे से लेकर शहरों तक चार्जिंग स्टेशनों (Charging Stations) का जाल बिछाने के लिए आसान फाइनेंसिंग उपलब्ध कराने पर होगा।
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C. ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen)

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ग्रीन हाइड्रोजन को 'भविष्य का स्वच्छ ईंधन' (Fuel of the Future) माना जा रहा है। इसका उपयोग भारी उद्योगों (जैसे स्टील, सीमेंट और फर्टिलाइजर) को डी-कार्बोनाइज करने में किया जाएगा। यह एक कैपिटल-इंटेंसिव (अधिक पूंजी वाला) सेक्टर है। 'चक्र' के माध्यम से SBI इन हाई-टेक ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स के लिए वित्तीय संजीवनी का काम करेगा।
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4. चैरिटी बिगिन्स एट होम: 2055 तक पूर्ण 'नेट जीरो' (Net Zero) का ऐतिहासिक संकल्प

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SBI का यह विजन केवल दूसरों (ग्राहकों और कंपनियों) को ऋण देने तक ही सीमित नहीं है। बैंक का मानना है कि बदलाव की शुरुआत खुद अपने घर से होनी चाहिए। इसलिए, बैंक ने अपनी स्वयं की कार्यप्रणाली (Internal Operations) को भी पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल बनाने का एक कड़ा संकल्प लिया है।
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2030 का लक्ष्य: कार्बन न्यूट्रल (Scope 1 & 2)

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बैंक ने घोषणा की है कि वह 2030 तक पूरी तरह से 'कार्बन न्यूट्रल' (Carbon Neutral) बन जाएगा। यह लक्ष्य 'स्कोप 1' (Scope 1) और 'स्कोप 2' (Scope 2) एमिशन्स के लिए निर्धारित किया गया है।
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    Scope 1 (Direct Emissions): इसमें बैंक की अपनी शाखाओं, जेनरेटरों या बैंक के अपने वाहनों से निकलने वाला सीधा धुआं और प्रदूषण शामिल है।
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    Scope 2 (Indirect Emissions): इसमें बैंक द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली बिजली के उत्पादन से होने वाला कार्बन उत्सर्जन शामिल है। SBI अपनी सभी शाखाओं और ATM को धीरे-धीरे 100% रिन्यूएबल एनर्जी (सौर/पवन) पर शिफ्ट करने का प्रयास करेगा।
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2055 का विजन: पूर्ण नेट जीरो (Absolute Net Zero)

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सबसे बड़ी बात यह है कि बैंक ने अपनी स्थापना के शताब्दी वर्ष (Centenary Year) यानी 2055 तक पूर्ण रूप से 'नेट जीरो' (Net Zero) बनने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इसका मतलब है कि 2055 तक SBI प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पर्यावरण में जितना कार्बन छोड़ेगा, उतना ही कार्बन वह वायुमंडल से हटाने (Carbon Offset) का भी प्रबंध करेगा, जिससे उसका नेट कार्बन फुटप्रिंट 'शून्य' हो जाएगा। भारत सरकार का राष्ट्रीय लक्ष्य 2070 तक नेट जीरो बनने का है, जबकि देश का सबसे बड़ा बैंक 15 साल पहले ही यह मुकाम हासिल करना चाहता है।
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5. SBI ग्रीन मैराथन: जन जागरूकता और 'मिशन लाइफ' (Mission LiFE) की ओर बड़ा कदम

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नीतियों और फाइनेंसिंग के अलावा, पर्यावरण के प्रति आम जनता को जागरूक करना भी SBI की इस रणनीति का अहम हिस्सा है। इसी कड़ी में, रविवार को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 'SBI ग्रीन मैराथन' (SBI Green Marathon) के छठे संस्करण का बेहद भव्य और सफल आयोजन किया गया।
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इस मैराथन में समाज के हर वर्ग के 10,000 से अधिक लोगों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया।
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'रन फॉर ए ग्रीनर इंडिया' (Run for a Greener India)

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इस साल की मैराथन की थीम 'रन फॉर ए ग्रीनर इंडिया' रखी गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वैश्विक स्तर पर शुरू किए गए 'मिशन लाइफ' (Mission LiFE - Lifestyle for Environment) के प्रति जागरूक करना था। मिशन लाइफ हमें सिखाता है कि कैसे हम अपनी रोजमर्रा की जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करके पर्यावरण को बचा सकते हैं।
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एमडी रामा मोहन राव अमारा का महत्वपूर्ण बयान

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इस ऐतिहासिक मैराथन के अवसर पर उपस्थित SBI के प्रबंध निदेशक (MD) रामा मोहन राव अमारा ने एक बेहद प्रेरक संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सस्टेनेबिलिटी अब बैंक के लिए कोई 'ऑप्शनल' काम नहीं रह गया है। उन्होंने कहा, "स्थिरता (Sustainability) अब हमारे बैंक के मूल उद्देश्य और हमारे डीएनए का एक अटूट हिस्सा बन चुकी है। यह ग्रीन मैराथन केवल एक दौड़ नहीं है, बल्कि यह सामूहिक जलवायु कार्रवाई (Collective Climate Action) का एक शक्तिशाली प्रतीक है।"
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भारतीय अर्थव्यवस्था पर इस पहल का क्या प्रभाव (Impact) पड़ेगा?

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SBI भारत का सबसे बड़ा बैंक है। बैंकिंग सेक्टर में एक पुरानी कहावत है कि 'जब SBI छींकता है, तो पूरे बैंकिंग सेक्टर को जुकाम हो जाता है।' यानी SBI जो भी दिशा तय करता है, पूरा भारतीय बैंकिंग और वित्तीय ढांचा उसी का अनुसरण करता है।
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    अन्य बैंकों पर दबाव: SBI के इस 10% ग्रीन एडवांस के लक्ष्य के बाद, अब HDFC, ICICI, PNB और BoB जैसे अन्य दिग्गज बैंकों पर भी दबाव बनेगा कि वे भी अपनी मजबूत ग्रीन पॉलिसी लेकर आएं। इससे देश में 'ग्रीन फाइनेंसिंग' की बाढ़ आ जाएगी।
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    ग्रीन स्टार्टअप्स की चांदी: 'चक्र' पहल के जरिए अब उन युवाओं और स्टार्टअप्स को आसानी से पैसा मिलेगा जो EV, बैटरी रीसाइक्लिंग, या सोलर टेक में काम कर रहे हैं। इससे लाखों नई 'ग्रीन जॉब्स' (Green Collar Jobs) पैदा होंगी।
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    आम आदमी को फायदा: भविष्य में ग्राहकों को पेट्रोल-डीजल कार के मुकाबले इलेक्ट्रिक कार (EV) खरीदने पर या अपने घर पर सोलर पैनल लगवाने पर आम लोन की तुलना में कम ब्याज दर (Lower Interest Rates) और जीरो प्रोसेसिंग फीस जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs - Frequently Asked Questions)

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Q1: 'ग्रीन एडवांस' (Green Advance) का क्या मतलब होता है? Ans: ग्रीन एडवांस बैंक द्वारा दिए जाने वाले वे लोन हैं जो विशेष रूप से पर्यावरण को फायदा पहुंचाने वाले कामों, जैसे सोलर पावर प्लांट, इलेक्ट्रिक गाड़ियां, या प्रदूषण कम करने वाली फैक्ट्रियों के लिए दिए जाते हैं।
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Q2: SBI ने 2030 तक ग्रीन लोन का क्या लक्ष्य रखा है? Ans: SBI ने लक्ष्य रखा है कि 2030 तक उसके कुल घरेलू लोन का 7.5% से 10% हिस्सा केवल ग्रीन परियोजनाओं के लिए होगा। मार्च 2025 तक यह आंकड़ा सिर्फ 1.56% था।
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Q3: SBI का 'चक्र' (CHAKRA) क्या है? Ans: 'चक्र' SBI द्वारा स्थापित एक नया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस है, जो मुख्य रूप से सनराइज सेक्टर्स जैसे- अक्षय ऊर्जा (सौर/पवन), इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (EV इंफ्रास्ट्रक्चर) और ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स को फंडिंग और रिसर्च में मदद करेगा।
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Q4: SBI ने 'नेट जीरो' बनने का लक्ष्य कब तक रखा है? Ans: SBI ने अपनी स्थापना के शताब्दी वर्ष यानी 2055 तक पूरी तरह से 'नेट जीरो' (Net Zero) बनने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। साथ ही, 2030 तक स्कोप 1 और स्कोप 2 एमिशन्स में कार्बन न्यूट्रल होने का संकल्प लिया है।
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Q5: 'SBI ग्रीन मैराथन' का मुख्य उद्देश्य क्या था? Ans: मुंबई में आयोजित छठे SBI ग्रीन मैराथन (जिसमें 10,000+ लोगों ने भाग लिया) का उद्देश्य आम नागरिकों को 'मिशन लाइफ' (Mission LiFE) के प्रति जागरूक करना और सामूहिक जलवायु कार्रवाई को बढ़ावा देना था।
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भारतीय स्टेट बैंक (SBI) का यह 'ग्रीन महा-प्लान' इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि भारत का वित्तीय क्षेत्र अब जलवायु परिवर्तन की गंभीरता को सिर्फ समझ ही नहीं रहा है, बल्कि उस पर आक्रामक रूप से काम भी कर रहा है। 'चक्र' जैसी संस्थाएं और 'ग्रीन लाइन्स ऑफ क्रेडिट' जैसी वित्तीय रणनीतियां आने वाले दशक में भारत को एक 'ग्रीन सुपरपावर' बनाने में मील का पत्थर साबित होंगी। 2055 तक नेट जीरो का संकल्प यह दर्शाता है कि विकास और पर्यावरण दोनों एक साथ, एक ही पटरी पर दौड़ सकते हैं।
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