आज के डिजिटल और भागदौड़ भरे युग में, हर व्यक्ति अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए बैंकिंग प्रणाली का सहारा लेता है। नौकरी बदलने, नए शहर में शिफ्ट होने, या किसी बैंक द्वारा दिए जा रहे आकर्षक ऑफर्स (जैसे जीरो बैलेंस खाता या मुफ्त क्रेडिट कार्ड) के कारण एक ही व्यक्ति के पास कई बैंक खाते होना अब एक आम बात हो गई है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मल्टीपल बैंक अकाउंट (Multiple Bank Accounts) रखना आपके लिए फायदे का सौदा है या भविष्य की किसी बड़ी मुसीबत का निमंत्रण?READ ALSO:-मेरठ के मेहरमती गांव में 'रक्तचरित्र': ईद की शाम जुए के फड़ पर खूनी खेल, नमाज पढ़कर लौट रहे प्रधान के दो भाइयों को चाकुओं से गोदा; गांव में भारी तनाव
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ज्यादातर लोग अपनी पुरानी नौकरी का सैलरी अकाउंट, किसी विशेष ऑफर में खुलवाया गया जीरो बैलेंस खाता, या परिवार के साथ खोला गया पुराना जॉइंट अकाउंट इस्तेमाल करना बंद कर देते हैं। समय के साथ हम इन खातों को भूल जाते हैं और इन्हें औपचारिक रूप से बंद (Close) नहीं करवाते। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, यह छोटी सी लापरवाही आगे चलकर एक बड़ी परेशानी बन सकती है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम मल्टीपल बैंक अकाउंट रखने से होने वाले आर्थिक नुकसान, आपके क्रेडिट स्कोर (CIBIL) पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव, साइबर सुरक्षा के खतरों और इन निष्क्रिय (Inactive) खातों को सही तरीके से बंद करने की संपूर्ण प्रक्रिया का गहराई से विश्लेषण करेंगे।
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मल्टीपल बैंक अकाउंट: एक छोटा खाता, लेकिन नुकसान बहुत बड़ा
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अक्सर लोगों को यह गलतफहमी होती है कि अगर उनके किसी पुराने बैंक खाते में कोई रकम नहीं है और वह खाली पड़ा है, तो उससे उन्हें कोई नुकसान नहीं होगा। यह सोच पूरी तरह से भ्रामक और वित्तीय रूप से खतरनाक है।
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1. मिनिमम बैलेंस (Minimum Balance) पेनल्टी का जाल: भारत में अधिकांश निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में बचत खातों (Savings Accounts) के लिए एक 'औसत मासिक न्यूनतम बैलेंस' (Average Monthly Balance - AMB) बनाए रखना अनिवार्य होता है। शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के लिए यह सीमा आमतौर पर 3,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक होती है। जब आप मल्टीपल बैंक अकाउंट रखते हैं और किसी पुराने खाते में लेन-देन बंद कर देते हैं, तो उसमें रखा पैसा धीरे-धीरे मिनिमम बैलेंस की सीमा से नीचे चला जाता है। इसके बाद बैंक हर महीने पेनल्टी (Penalty) और उस पर जीएसटी (GST) काटना शुरू कर देता है।
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2. खाते का नेगेटिव बैलेंस (Negative Balance) में जाना: अगर आपके खाते में सिर्फ 500 रुपये बचे हैं और बैंक की पेनल्टी 600 रुपये है, तो क्या होगा? भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार, बैंक मिनिमम बैलेंस पेनल्टी काटकर आपके खाते के बैलेंस को नेगेटिव (Negative) नहीं कर सकते। लेकिन, बैंक खाते से जुड़े अन्य चार्ज (जैसे SMS अलर्ट चार्ज, सालाना डेबिट कार्ड मेंटेनेंस चार्ज) लगाकर आपके बैलेंस को नेगेटिव में डाल सकते हैं। जब भी आप भविष्य में उस खाते में कोई रकम जमा करेंगे, तो बैंक सबसे पहले अपनी पेनल्टी और नेगेटिव बैलेंस की रिकवरी करेगा। यह सीधे तौर पर आपकी गाढ़ी कमाई का नुकसान है।
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3. इनएक्टिव (Inactive) और डोरमेंट (Dormant) अकाउंट की समस्या: यदि किसी बैंक खाते में लगातार 12 महीने (1 साल) तक ग्राहक की ओर से कोई लेन-देन (क्रेडिट या डेबिट) नहीं होता है, तो बैंक सुरक्षा कारणों से उस खाते को 'इनएक्टिव' (Inactive) श्रेणी में डाल देता है। अगर यह अवधि 24 महीने (2 साल) को पार कर जाती है, तो खाता 'डोरमेंट' (Dormant) या निष्क्रिय हो जाता है। डोरमेंट खाते से आप न तो एटीएम से पैसे निकाल सकते हैं, न ही नेट बैंकिंग का इस्तेमाल कर सकते हैं और न ही चेक जारी कर सकते हैं। ऐसे खाते को दोबारा चालू (Reactivate) कराने के लिए आपको व्यक्तिगत रूप से बैंक शाखा जाना पड़ता है, केवाईसी (KYC) दस्तावेज दोबारा जमा करने पड़ते हैं और एक लिखित प्रार्थना पत्र देना पड़ता है। मल्टीपल बैंक अकाउंट होने पर यह प्रक्रिया बहुत ही समय लेने वाली और झंझट भरी हो जाती है।
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क्रेडिट स्कोर (CIBIL Score) पर पड़ सकता है गंभीर असर

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एक आम धारणा यह है कि साधारण सेविंग अकाउंट का सीधा संबंध आपके लोन या क्रेडिट स्कोर (Credit Score) से नहीं होता है। तकनीकी रूप से यह सही है कि सिबिल (CIBIL) जैसी क्रेडिट ब्यूरो एजेंसियां आपके सेविंग अकाउंट के बैलेंस को ट्रैक नहीं करती हैं। लेकिन, मल्टीपल बैंक अकाउंट से जुड़ी अन्य सुविधाएं आपके सिबिल स्कोर को बुरी तरह प्रभावित कर सकती हैं।
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ओवरड्राफ्ट (Overdraft - OD) सुविधा का फंदा: कई बैंक सैलरी अकाउंट या प्रीमियम सेविंग अकाउंट के साथ ग्राहकों को 'ओवरड्राफ्ट' (OD) की सुविधा देते हैं। इसका मतलब है कि खाते में जीरो बैलेंस होने पर भी आप एक निश्चित सीमा तक पैसे निकाल सकते हैं। यदि आपके पुराने खाते के साथ ओवरड्राफ्ट सुविधा जुड़ी है और बैंक के विभिन्न शुल्कों (SMS चार्ज, कार्ड चार्ज) के कारण आपका खाता नेगेटिव में चला जाता है, तो बैंक इसे आपके द्वारा इस्तेमाल किया गया 'अनपेड लोन' (Unpaid Loan) मान लेता है। जब लंबे समय तक यह बकाया नहीं चुकाया जाता, तो बैंक इसकी रिपोर्ट क्रेडिट ब्यूरो को कर देते हैं। इससे आपका शानदार CIBIL स्कोर अचानक से गिर सकता है, जिससे भविष्य में आपको होम लोन, कार लोन या क्रेडिट कार्ड मिलने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
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ऑटो-डेबिट (Auto-Debit) और बाउंसिंग चार्ज: कई बार हम अपने पुराने खातों से इंश्योरेंस का प्रीमियम, म्यूचुअल फंड की एसआईपी (SIP), या किसी लोन की ईएमआई (EMI) लिंक कर देते हैं। बाद में हम नया खाता खोल लेते हैं और पुराने खाते में फंड डालना भूल जाते हैं। जब उस पुराने खाते से ईएमआई या प्रीमियम कटने का समय आता है, तो पर्याप्त फंड न होने के कारण ट्रांजैक्शन बाउंस (Bounce) हो जाता है। चेक या ईसीएस (ECS) बाउंस होने पर बैंक भारी जुर्माना (Bouncing Charges) लगाते हैं। इसके अलावा, ईएमआई मिस होने की रिपोर्ट सीधे सिबिल को जाती है, जिससे आपकी क्रेडिट हिस्ट्री (Credit History) खराब होती है। इसलिए, मल्टीपल बैंक अकाउंट रखने से बेहतर है कि आप अपने सभी जरूरी भुगतान केवल एक या दो मुख्य खातों से ही लिंक रखें।
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साइबर फ्रॉड (Cyber Fraud) का बढ़ता खतरा और निष्क्रिय खाते

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भारत में साइबर अपराध बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। जामताड़ा (Jamtara) और मेवात जैसे साइबर ठगी के गढ़ों से रोज नए-नए तरीके ईजाद किए जा रहे हैं। ऐसे में आपके पुराने और निष्क्रिय बैंक खाते साइबर ठगों के लिए सबसे आसान और पसंदीदा शिकार (Target) बन जाते हैं।
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1. म्यूल अकाउंट (Mule Accounts) के रूप में इस्तेमाल: साइबर अपराधी अक्सर लोगों के निष्क्रिय खातों की तलाश में रहते हैं। अगर आपके पुराने खाते में आपका वर्तमान मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी अपडेट नहीं है, तो बैंक द्वारा भेजे गए किसी भी संदिग्ध ट्रांजैक्शन के अलर्ट (SMS) आपको नहीं मिलेंगे। साइबर ठग ऐसे खातों को हैक कर लेते हैं या बैंक के किसी भ्रष्ट कर्मचारी की मिलीभगत से इन खातों का नियंत्रण अपने हाथ में ले लेते हैं। इसके बाद, वे इन खातों का इस्तेमाल दूसरों से ठगी गई रकम को मंगाने और ट्रांसफर करने (Money Laundering) के लिए करते हैं। जब पुलिस साइबर क्राइम की जांच करती है, तो एफआईआर (FIR) में उस व्यक्ति का नाम आता है जिसके नाम पर खाता होता है। ऐसे में बिना कोई अपराध किए आप कानूनी पचड़े में फंस सकते हैं।
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2. केवाईसी (KYC) मिसमैच और पहचान की चोरी: मल्टीपल बैंक अकाउंट होने पर हम अक्सर अपने सभी खातों में पता (Address), पैन कार्ड और आधार कार्ड की जानकारी अपडेट करना भूल जाते हैं। इसका फायदा उठाकर जालसाज आपके पुराने खाते का एक्सेस प्राप्त कर सकते हैं और आपकी पहचान (Identity Theft) का दुरुपयोग कर सकते हैं।
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आयकर रिटर्न (Income Tax Return - ITR) दाखिल करने में परेशानी 

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आयकर विभाग (Income Tax Department) के नियमों के अनुसार, भारत के किसी भी नागरिक को अपना आईटीआर (ITR) दाखिल करते समय अपने देश में मौजूद सभी सक्रिय और निष्क्रिय बैंक खातों की जानकारी (Bank Account Numbers और IFSC) अनिवार्य रूप से देनी होती है।
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अगर आपके पास 4 या 5 मल्टीपल बैंक अकाउंट हैं, तो हर साल उन सभी खातों का स्टेटमेंट निकालना, उनमें मिले ब्याज (Interest) की गणना करना और उसे आईटीआर में दिखाना एक बेहद जटिल काम बन जाता है। यदि आप गलती से भी किसी खाते की जानकारी आईटीआर में देना भूल जाते हैं, तो आयकर विभाग इसे आय छिपाने (Concealment of Income) का मामला मानकर आपको नोटिस भेज सकता है। इसके अलावा, सभी खातों का स्टेटमेंट न होने पर आपके सीए (CA) को भी आपकी सही वित्तीय स्थिति का आकलन करने में दिक्कत होती है।
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मल्टीपल बैंक अकाउंट को बंद करने से पहले ये काम जरूर करें (Pre-Closure Checklist)

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अगर आप इस रिपोर्ट को पढ़ने के बाद अपने पुराने और गैर-जरूरी बैंक खातों को बंद करने का मन बना चुके हैं, तो जल्दबाजी न करें। किसी भी खाते को बंद करने से पहले कुछ जरूरी कदम उठाना अनिवार्य है, ताकि बाद में आपको किसी तकनीकी या वित्तीय समस्या का सामना न करना पड़े।
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1. पिछले 2-3 साल का बैंक स्टेटमेंट डाउनलोड करें: खाता बंद होने के बाद आप उस खाते की नेट बैंकिंग (Net Banking) या मोबाइल ऐप का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। इसलिए, खाता बंद करने से पहले पिछले 2 से 3 वर्षों का पूरा बैंक स्टेटमेंट (Bank Statement) पीडीएफ (PDF) फॉर्मेट में डाउनलोड कर लें और उसे सुरक्षित रख लें। यह स्टेटमेंट भविष्य में आयकर रिटर्न, किसी विवाद या वित्तीय ऑडिट के समय आपके बहुत काम आएगा।
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2. ऑटो-डेबिट और ईएमआई (EMI) को डी-लिंक करें: यह सबसे महत्वपूर्ण कदम है। जांच लें कि उस पुराने खाते से आपकी कोई पॉलिसी प्रीमियम, म्यूचुअल फंड एसआईपी (SIP), क्रेडिट कार्ड का बिल, या किसी प्रकार का ऑटो-डेबिट (NACH mandate) तो जुड़ा हुआ नहीं है। यदि ऐसा है, तो खाता बंद करने से पहले उन सभी भुगतानों को अपने नए और सक्रिय बैंक खाते (Active Bank Account) से लिंक करवाएं।
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3. डिमैट (Demat) और ट्रेडिंग अकाउंट की जांच: अगर आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं, तो सुनिश्चित करें कि आपका वह पुराना खाता आपके डिमैट अकाउंट से लिंक न हो। जब कंपनियां डिविडेंड (Dividend) देती हैं, तो वह सीधा आपके लिंक किए गए बैंक खाते में आता है। खाता बंद होने पर आपका डिविडेंड वापस लौट जाएगा।
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4. सरकारी सब्सिडी और ईपीएफओ (EPFO): यदि आपके उस पुराने खाते में रसोई गैस (LPG) की सब्सिडी, पीएम किसान सम्मान निधि, या किसी अन्य सरकारी योजना का पैसा आता है, तो उसे तुरंत अपने नए खाते में ट्रांसफर करवाएं। साथ ही, अगर वह खाता आपके पीएफ (PF) या ईपीएफओ (EPFO) पोर्टल पर दर्ज है, तो खाता बंद करने से पहले ईपीएफओ पोर्टल पर अपना नया बैंक खाता अपडेट कर लें।
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बैंक खाता बंद करने की सही और पूरी प्रक्रिया (Step-by-Step Account Closure Process)

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सिर्फ खाते से सारा पैसा निकाल लेना (Zero Balance करना) ही खाता बंद होना नहीं कहलाता है। जब तक आप बैंक को लिखित में सूचना नहीं देते, तब तक खाता सिस्टम में चालू (Active) या डोरमेंट (Dormant) अवस्था में रहता है। इसे पूरी तरह से बंद (Account Closure) करने के लिए आपको निम्नलिखित प्रक्रिया अपनानी होगी:
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चरण 1: बैंक शाखा में व्यक्तिगत रूप से जाएं सुरक्षा कारणों से, ज्यादातर बैंक ऑनलाइन खाता बंद करने की अनुमति नहीं देते हैं। इसके लिए आपको अपनी होम ब्रांच (Home Branch) या बैंक की किसी भी नजदीकी शाखा में व्यक्तिगत रूप से जाना होगा।
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चरण 2: अकाउंट क्लोजर फॉर्म (Account Closure Form) भरें बैंक शाखा में जाकर 'खाता बंद करने का फॉर्म' मांगें। इस फॉर्म में आपको अपना खाता नंबर, नाम, मोबाइल नंबर और खाता बंद करने का कारण (Reason for closure) स्पष्ट रूप से लिखना होगा। यदि यह एक जॉइंट अकाउंट (Joint Account) है, तो सभी खाताधारकों के हस्ताक्षर होना अनिवार्य है।
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चरण 3: बकाया शुल्क (Pending Dues) का भुगतान फॉर्म जमा करते समय, बैंक अधिकारी यह जांच करेगा कि आपके खाते पर कोई नेगेटिव बैलेंस, कार्ड चार्ज या अन्य कोई शुल्क बकाया तो नहीं है। यदि कोई बकाया है, तो आपको पहले उसे नकद (Cash) जमा करके क्लियर करना होगा।
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चरण 4: बची हुई रकम को ट्रांसफर करना अगर आपके खाते में कोई रकम शेष (Balance) है, तो फॉर्म में आपको यह बताना होगा कि आप वह पैसा कैसे चाहते हैं। आप उसे नकद ले सकते हैं, डिमांड ड्राफ्ट (DD) बनवा सकते हैं, या अपने किसी दूसरे बैंक खाते में एनईएफटी/आरटीजीएस (NEFT/RTGS) के जरिए ट्रांसफर करवा सकते हैं।
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चरण 5: डेबिट कार्ड और चेकबुक सरेंडर करना यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण सुरक्षा कदम है। बैंक खाता बंद करते समय आपको उस खाते से जुड़ा अपना डेबिट कार्ड (ATM Card), अप्रयुक्त चेकबुक (Unused Cheque Book) और पासबुक बैंक को वापस सौंपनी होती है। अधिकारी के सामने ही अपने डेबिट कार्ड की मैग्नेटिक स्ट्रिप (Magnetic Strip) और चिप (Chip) को कैंची से काटकर नष्ट (Destroy) कर दें, ताकि कोई उसका गलत इस्तेमाल न कर सके।
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चरण 6: क्लोजर कन्फर्मेशन (Closure Confirmation) लेना प्रक्रिया पूरी होने के बाद, बैंक से एक लिखित पावती (Acknowledgement) या क्लोजर कन्फर्मेशन रसीद जरूर लें। साथ ही, बैंक आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी पर भी खाता बंद होने का मैसेज भेजेगा। इस रसीद और मैसेज को भविष्य के लिए सुरक्षित रखें।
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निष्कर्ष के तौर पर यह स्पष्ट है कि आज के दौर में मल्टीपल बैंक अकाउंट रखना कोई स्टेटस सिंबल (Status Symbol) नहीं, बल्कि एक अनावश्यक वित्तीय बोझ और सुरक्षा जोखिम है। कम और एक्टिव बैंक अकाउंट रखना ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और समझदारी भरा कदम है। एक व्यक्ति के लिए एक सैलरी/मुख्य खाता, एक सेविंग/इमरजेंसी खाता और निवेश के लिए एक डिमैट लिंक्ड खाता पर्याप्त होता है। जिन खातों का आप इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, उन पर मिनिमम बैलेंस पेनल्टी लगाकर अपनी मेहनत की कमाई को व्यर्थ न जाने दें। साथ ही, साइबर ठगों को किसी भी प्रकार की सेंधमारी का मौका न दें। आज ही अपने वित्तीय पोर्टफोलियो की समीक्षा करें, गैर-जरूरी और पुराने खातों की पहचान करें और ऊपर बताई गई सुरक्षित प्रक्रिया का पालन करते हुए उन्हें औपचारिक रूप से बंद करवाएं। वित्तीय अनुशासन और सही समय पर पुराने खातों को बंद करना आपकी वित्तीय सेहत (Financial Health) को सुरक्षित रखने का सबसे आसान और प्रभावी तरीका है।
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Summary: आजकल पुरानी नौकरी या ऑफर्स के चलते लोगों के पास कई बैंक खाते (Multiple Bank Accounts) हो जाते हैं, जिन्हें वे इस्तेमाल करना बंद कर देते हैं। ऐसे निष्क्रिय खातों में मिनिमम बैलेंस मेंटेन न करने पर बैंक भारी पेनल्टी लगाते हैं, जिससे बैलेंस नेगेटिव हो सकता है। इसके अलावा, ओवरड्राफ्ट सुविधा या बाउंस हुए भुगतानों के कारण आपका CIBIL स्कोर भी खराब हो सकता है। सबसे बड़ा खतरा साइबर ठगी का है, क्योंकि जालसाज इन लावारिस खातों का इस्तेमाल 'म्यूल अकाउंट' के रूप में अवैध लेन-देन के लिए कर सकते हैं। इसलिए, पुराने खातों को खुला छोड़ने के बजाय, ऑटो-डेबिट डी-लिंक करके, स्टेटमेंट डाउनलोड करके और बैंक शाखा में जाकर चेकबुक/एटीएम सरेंडर करते हुए इन्हें विधिवत बंद करवाना ही सबसे सुरक्षित और समझदारी भरा वित्तीय कदम है।
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