भारत जैसे कृषि प्रधान देश में डेयरी सेक्टर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। समय के साथ-साथ इस सेक्टर में भी आधुनिकीकरण (Modernization) की सख्त जरूरत महसूस की जा रही थी। इसी दिशा में तेजी से कदम बढ़ाते हुए महाराष्ट्र की जानी-मानी महानंद डेयरी (Mahanand Dairy) ने अपना नया ‘मॉडर्न मिल्क मिशन’ शुरू कर दिया है।READ ALSO:-उम्र नहीं, जुनून मायने रखता है: 45 के बाद टीवी की दुनिया से सीधे खेल के मैदान में उतरीं निवेदिता बसु, रचा नया इतिहास
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इस मिशन का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं तक शुद्ध और सुरक्षित दूध पहुंचाना तथा राज्य के लाखों दुग्ध उत्पादक किसानों की आर्थिक स्थिति को और अधिक मजबूत करना है। इसी कड़ी में मुंबई के गोरेगांव स्थित महानंद डेयरी प्लांट में एक भव्य उद्घाटन समारोह का आयोजन किया गया, जिसने डेयरी सेक्टर में एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया है।
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'सिग्नेचर मिल्क पार्लर' और नई पैकेजिंग तकनीक का उद्घाटन
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इस विशेष कार्यक्रम में महाराष्ट्र सरकार के दुग्ध विकास एवं गैर-पारंपरिक ऊर्जा मंत्री श्री अतुल मोरेश्वर सावे ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उनके कर कमलों द्वारा दो प्रमुख सुविधाओं का उद्घाटन किया गया:
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    महानंद सिग्नेचर मिल्क पार्लर: यह एक अत्याधुनिक और प्रीमियम मिल्क पार्लर है, जहाँ उपभोक्ताओं को महानंद डेयरी के सभी ताजे और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद एक ही छत के नीचे बेहतरीन माहौल में उपलब्ध होंगे।
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    नया कैप एप्लिकेटर (Cap Applicator): एक लीटर वाले 'टेट्रा ब्रिक एसेप्टिक यूएचटी दूध पैक्स' (Tetra Brik Aseptic UHT Milk Packs) के लिए एक नई और आधुनिक कैपिंग तकनीक की शुरुआत की गई है।
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उपभोक्ताओं को क्या होगा फायदा? यह नई पैकेजिंग तकनीक उपभोक्ताओं की सुविधा बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है। यूएचटी (UHT - Ultra High Temperature) तकनीक से दूध लंबे समय तक सुरक्षित और कीटाणुमुक्त रहता है। नए कैप एप्लिकेटर के लग जाने से एक लीटर के दूध के पैकेट को खोलना, इस्तेमाल करना और उसे दोबारा सुरक्षित तरीके से बंद करके फ्रिज में रखना ग्राहकों के लिए बेहद आसान और हाइजीनिक (स्वच्छ) हो जाएगा।
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किसानों की आय दोगुनी करने का विजन

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इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह और मीडिया को संबोधित करते हुए मंत्री अतुल मोरेश्वर सावे ने किसानों की प्रगति पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा, "खेती के साथ-साथ पशुपालन और डेयरी जैसे सहायक व्यवसाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सच्ची ताकत हैं। अगर किसान इन व्यवसायों को आधुनिक तकनीक के साथ तेजी से अपनाते हैं, तो उनकी आय में निश्चित रूप से भारी वृद्धि होगी।"
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मंत्री सावे ने इस बात पर प्रकाश डाला कि एक मजबूत और पारदर्शी डेयरी ढांचा किसानों को वित्तीय संकटों से उबारने और उन्हें आर्थिक स्थिरता (Economic Stability) प्रदान करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि किसानों द्वारा उत्पादित दूध का उन्हें सही और लाभकारी मूल्य मिले।
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एनडीडीबी (NDDB) की भूमिका: बाजार से सीधा जुड़ाव

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महानंद डेयरी का संचालन वर्तमान में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) द्वारा प्रबंधित किया जा रहा है, जो देश में डेयरी विकास की सर्वोच्च संस्था है।
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एनडीडीबी के प्रबंधन के तहत, महानंद डेयरी ने अपने लक्ष्यों को और भी स्पष्ट तथा व्यापक कर लिया है। अब डेयरी का मुख्य लक्ष्य राज्य के सुदूर गांवों में बैठे दुग्ध उत्पादक किसानों को मुंबई और अन्य बड़े शहरी क्षेत्रों के विशाल बाजार (Market) से सीधे जोड़ना है। इसके माध्यम से बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और शहर के उपभोक्ताओं को निर्बाध रूप से उच्च गुणवत्ता वाले दूध और दुग्ध उत्पादों की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।
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कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य हस्तियां

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इस ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत के मौके पर डेयरी और प्रशासनिक क्षेत्र के कई बड़े अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में मुख्य रूप से:
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    डॉ. वी. श्रीधर (कार्यकारी निदेशक, एनडीडीबी)
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    श्री प्रशांत मोहोड (डेयरी विकास आयुक्त, महाराष्ट्र)
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    श्री अनिल हातेकर (प्रबंध निदेशक, महानंद डेयरी) सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और इस नई तकनीकी शुरुआत की सराहना की।
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महानंद डेयरी का यह नया कदम स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि जब सरकारी नीतियां, तकनीकी नवाचार (Technological Innovation) और किसानों की मेहनत एक साथ मिलती है, तो सफलता के नए आयाम गढ़े जाते हैं। गोरेगांव प्लांट में शुरू हुई यह नई तकनीक न केवल मुंबईकरों की सुबह की चाय और दूध को अधिक सुरक्षित बनाएगी, बल्कि यह महाराष्ट्र के दुग्ध उत्पादकों के जीवन में भी समृद्धि की नई सुबह लेकर आएगी।
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