बिजनेस और इकोनॉमिक डेस्क:
\r\n\r\n
ग्लोबल सप्लाई चेन और हाई-टेक विनिर्माण (High-Tech Manufacturing) की बिसात पर भारत ने एक ऐसा दांव चल दिया है, जो आने वाले समय में चीन, वियतनाम और ताइवान जैसे मैन्युफैक्चरिंग दिग्गजों की नींद उड़ा सकता है। केंद्र सरकार ने भारत को केवल एक 'कंज्यूमर मार्केट' या साधारण 'असेंबली हब' से ऊपर उठाकर दुनिया का सबसे बड़ा और आत्मनिर्भर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण महाशक्ति (Global Electronics Manufacturing Hub) बनाने की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
​देश के भीतर इलेक्ट्रॉनिक्स के बुनियादी घटकों (Core Components) का उत्पादन बड़े पैमाने पर बढ़ाने, विदेशी आयातों पर अरबों डॉलर की निर्भरता को पूरी तरह समाप्त करने और घरेलू स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए सरकार ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। इसके तहत इलेक्ट्रॉनिक्स और लिथियम-आयन बैटरी बनाने में इस्तेमाल होने वाली अत्याधुनिक मशीनों के साथ-साथ उनके महत्वपूर्ण पुर्जों पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी (सीमा शुल्क) में भारी कटौती और छूट का ऐलान किया गया है।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
​केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक, वित्तीय प्रोत्साहन और टैक्स में दी गई यह अभूतपूर्व राहत 31 मार्च 2029 तक पूरी तरह से लागू रहेगी। इस दूरगामी फैसले का सीधा परिणाम यह होगा कि देश के भीतर लिथियम-आयन सेल, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के पावर पैक, आधुनिक डिस्प्ले पैनल और स्मार्टफोन के वायरलेस चार्जिंग मॉड्यूल्स का घरेलू उत्पादन पहले की तुलना में बेहद सस्ता और सुलभ हो जाएगा। जब मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की उत्पादन लागत (Input Cost) घटेगी, तो इसका सीधा और बड़ा फायदा घरेलू बाजार के आम उपभोक्ताओं को मिलेगा, जिससे आने वाले समय में प्रीमियम डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद उनकी जेब के दायरे में आ सकेंगे।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

​विदेशी आयात की निर्भरता पर सर्जिकल स्ट्राइक

\r\n\r\n
​पिछले एक दशक में भारत में स्मार्टफोन, टैबलेट और अन्य कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स का बाजार दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ा है, लेकिन इस चमक के पीछे एक कड़वा सच यह भी छिपा था कि हम आज भी इन उपकरणों के भीतर लगने वाले सूक्ष्म पुर्जों, डिस्प्ले और निर्माण करने वाली भारी मशीनों के लिए पूरी तरह से विदेशी बाजारों पर निर्भर रहे हैं। हर साल देश का एक बड़ा राजस्व इन कंपोनेंट्स को आयात करने में खर्च हो जाता है।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
​정कार का यह ताजा और आक्रामक फैसला इसी एकतरफा विदेशी निर्भरता को जड़ से उखाड़ने की एक बेहद सोची-समझी रणनीतिक कोशिश है। इन नई कर रियायतों को तुरंत प्रभाव से देश भर में लागू कर दिया गया है। वैश्विक व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि कस्टम ड्यूटी में इस कटौती से भारत की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को वर्किंग कैपिटल (कार्यशील पूंजी) के मोर्चे पर बहुत बड़ी राहत मिलेगी। इससे न सिर्फ भारत की आंतरिक डोमेस्टिक सप्लाई चेन (Domestic Supply Chain) मजबूत होगी, बल्कि कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ-साथ हाई-टेक डिफेंस और ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी बड़े पैमाने पर नए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की बाढ़ आने की उम्मीद है। यह कदम सही मायने में 'मेक इन इंडिया' अभियान को एक नई और अजेय रफ्तार देने वाला साबित होगा।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

​लिथियम-आयन बैटरी निर्माण को मिली 'संजीवनी': 85 प्रकार की मशीनें टैक्स फ्री

\r\n\r\n
​आज के आधुनिक और डिजिटल युग में ग्रीन एनर्जी (Clean Energy) की रीढ़ लिथियम-आयन बैटरी ही है। चाहे सड़कों पर दौड़ने वाले इलेक्ट्रिक वाहन (EV) हों, हाथ में रखा स्मार्टफोन हो या फिर बड़े उद्योगों के पावर बैकअप सिस्टम—सब कुछ इसी तकनीक पर टिके हैं। इसी महत्व को समझते हुए सरकार ने इस नीतिगत बदलाव में सबसे बड़ा बूस्टर डोज बैटरी विनिर्माण क्षेत्र को दिया है।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
​सीबीआईसी (CBIC) के नए नोटिफिकेशन के अनुसार, लिथियम-आयन बैटरी के स्थानीय स्तर पर पूर्ण निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनों की सूची का दायरा ऐतिहासिक रूप से बढ़ा दिया गया है। अब पूरी प्रोडक्शन वैल्यू चेन (Production Value Chain) से जुड़ी 85 अलग-अलग तरह की हाई-टेक मशीनों पर रियायती सीमा शुल्क का नियम लागू होगा।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

​इन प्रमुख प्रक्रियाओं की मशीनों को मिला लाभ:

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    ​कच्चा माल तैयार करना: बैटरी का कोर एक्टिव केमिकल पाउडर तैयार करने वाली एडवांस मशीनें और स्लरी मिक्सिंग (Slurry Mixing) सिस्टम।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    ​सेल फैब्रिकेशन: हाई-स्पीड कोटिंग (Coating) मशीनें, इलेक्ट्रोड वाइंडिंग (Electrode Winding) टूल्स और माइक्रो-लेवल लेजर वेल्डिंग (Laser Welding) सिस्टम।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    ​क्वालिटी कंट्रोल और पैकेजिंग: बैटरी सेल्स की आंतरिक सुरक्षा जांचने वाली टेस्टिंग, इंस्पेक्शन (Inspection) मशीनें और फाइनल असेंबली पैकेजिंग लाइन्स।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    ​पर्यावरणीय सहायक मशीनरी: औद्योगिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सॉल्वेंट रिकवरी (Solvent Recovery) और डस्ट कलेक्शन (Dust Collection) जैसे एफ्लुएंट ट्रीटमेंट से जुड़े सहायक प्लांट।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n
​
\r\n\r\n

डिस्प्ले पार्ट्स पर टैक्स छूट से औद्योगिक और मेडिकल सेक्टर की चमकेगी किस्मत

\r\n\r\n
​किसी भी आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस या ऑटोमोबाइल डैशबोर्ड की कुल लागत का लगभग 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा उसके डिस्प्ले असेंबली का होता है। भारत को डिस्प्ले फैब्रिकेशन का गढ़ बनाने के लिए सरकार ने ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री, क्रिटिकल मेडिकल उपकरणों (जैसे वेंटिलेटर, मॉनिटर) और भारी औद्योगिक मशीनों में लगने वाली डिस्प्ले असेंबली के कई आयातित कंपोनेंट्स पर से कस्टम ड्यूटी के बोझ को हटा लिया है।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
​अब कंपनियां डिस्प्ले सेल (Display Cell), बैकलाइट यूनिट (Backlight Unit), फ्लेक्सिबल प्रिंटेड सर्किट असेंबली (FPCA) और उसके प्रोटेक्टिव फ्रेम जैसे पुर्जे बहुत ही कम लागत में विदेशों से मंगाकर भारत में फाइनल प्रोडक्ट तैयार कर सकेंगी।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
\r\n
​नीति की सूक्ष्म बारीकी (Exclusions): औद्योगिक जगत और आम उपभोक्ताओं को यह स्पष्ट रूप से ध्यान में रखना होगा कि यह विशेष सीमा शुल्क छूट मोबाइल फोन, घरेलू टेलीविजन (TV), स्मार्टवॉच और कमर्शियल इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल वाले डिस्प्ले के पार्ट्स पर लागू नहीं होगी। इसके पीछे सरकार की मंशा इन क्षेत्रों में पहले से चल रही घरेलू कंपोनेंट योजनाओं को बिना प्रभावित किए, कोर इंडस्ट्रियल और ऑटो-इलेक्ट्रॉनिक्स को आत्मनिर्भर बनाना है।
\r\n
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

​स्मार्टफोन का प्रीमियम 'वायरलेस चार्जिंग' फीचर अब होगा आम जनता के बजट में

\r\n\r\n
​वायरलेस चार्जिंग तकनीक को आज भी स्मार्टफोन जगत में एक प्रीमियम और महंगा फीचर माना जाता है, क्योंकि इसके कंपोनेंट्स का भारत में स्थानीय उत्पादन लगभग न के बराबर था और आयात शुल्क बहुत ऊंचा था। लेकिन अब इस प्रीमियम फीचर का भी भारत में लोकतंत्रीकरण होने जा रहा है। सरकार ने स्मार्टफोन के वायरलेस चार्जिंग मॉड्यूल में लगने वाले तमाम जरूरी और सूक्ष्म पुर्जों पर ड्यूटी को पूरी तरह तर्कसंगत बना दिया है।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
​इसके तहत एनएफसी (NFC), हाई-फ्रीक्वेंसी इंडक्टर कॉइल (Inductor Coil), नैनो-क्रिस्टलाइन असेंबली (Nano-crystalline Assembly), एडवांस ई-शील्ड (E-Shield), पीईटी लाइनर (PET Liner), पीसी शिम (PC Shim) और अत्यंत शक्तिशाली एनडीएफईबी (NdFeB) मैग्नेट्स के आयात को सस्ता किया गया है। नियमों को लेकर भविष्य में कस्टम पोर्ट्स पर कोई कानूनी या तकनीकी भ्रम न रहे, इसके लिए सीबीआईसी ने इन सभी पार्ट्स की अत्यधिक स्पष्ट और पारदर्शी वैज्ञानिक परिभाषा भी जारी कर दी है।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

​एक नजर में: सरकारी कर राहत योजना का पूरा खाका (2026-2029)

\r\n\r\n
​कस्टम ड्यूटी में किए गए इन क्रांतिकारी बदलावों और उनके प्रभावों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है:
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n\r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n
\r\n
लक्षित औद्योगिक क्षेत्र
\r\n
\r\n
रियायत के दायरे में आने वाले कंपोनेंट्स / मशीनरी
\r\n
\r\n
प्रभावी समय-सीमा
\r\n
\r\n
भारतीय बाजार और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
\r\n
\r\n
लिथियम-आयन बैटरी निर्माण
\r\n
\r\n
पाउडर मिक्सिंग, कोटिंग, लेजर वेल्डिंग, टेस्टिंग, पैकेजिंग और सॉल्वेंट रिकवरी सहित कुल 85 प्रकार की मशीनें।
\r\n
\r\n
31 मार्च 2029 तक
\r\n
\r\n
भारत में ईवी (EV) बैटरियों का निर्माण बड़े पैमाने पर शुरू होगा, जिससे इलेक्ट्रिक कारें और टू-व्हीलर्स सस्ते होंगे।
\r\n
\r\n
इंडस्ट्रियल व मेडिकल डिस्प्ले
\r\n
\r\n
डिस्प्ले सेल, बैकलाइट यूनिट, फ्लेक्सिबल प्रिंटेड सर्किट असेंबली (FPCA) और सपोर्टिव मेटैलिक फ्रेम।
\r\n
\r\n
31 मार्च 2029 तक
\r\n
\r\n
आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और कारों के डिजिटल इंफोटेनमेंट सिस्टम की घरेलू उत्पादन लागत में भारी कमी आएगी।
\r\n
\r\n
स्मार्टफोन कंपोनेंट इकोसिस्टम
\r\n
\r\n
वायरलेस चार्जिंग मॉड्यूल के पार्ट्स: एनएफसी, इंडक्टर कॉइल, नैनो-क्रिस्टलाइन असेंबली, ई-शील्ड और NdFeB मैग्नेट्स।
\r\n
\r\n
31 मार्च 2029 तक
\r\n
\r\n
प्रीमियम वायरलेस चार्जिंग फीचर अब बजट और मिड-रेंज स्मार्टफोन्स में भी आसानी से मिलने लगेगा।
\r\n
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

क्या सच में बदलेगी भारत की आर्थिक किस्मत?

\r\n\r\n
केंद्र सरकार का यह नीतिगत मास्टरस्ट्रोक सिर्फ एक सामान्य टैक्स छूट नहीं है, बल्कि यह दुनिया भर की दिग्गज टेक कंपनियों (जैसे एप्पल, फॉक्सकॉन, सैमसंग, और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स) को एक खुला और सुरक्षित निमंत्रण है कि वे आएं और भारत की धरती पर अपनी दीर्घकालिक विनिर्माण जड़ें जमाएं। 2029 तक की यह लंबी और स्थिर नीतिगत समय-सीमा विदेशी निवेशकों को एक स्पष्ट विजन और सुरक्षा की गारंटी देती है, जिससे वे बिना किसी हिचकिचाहट के भारत में अरबों डॉलर का निवेश कर सकेंगे।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n
जब भारत के भीतर कच्चे माल और अत्याधुनिक मशीनों का आयात किफायती हो जाएगा, तो यहां निर्मित होने वाले अंतिम उत्पाद (Final Goods) न केवल घरेलू मांग को पूरा करेंगे, बल्कि वैश्विक बाजारों (जैसे यूरोप, मध्य पूर्व और अमेरिका) में कीमतों के मामले में चीन और अन्य देशों को कड़ी टक्कर दे सकेंगे। इसका सबसे बड़ा और सुखद सामाजिक-आर्थिक पहलू यह होगा कि भारत के लाखों कुशल और अर्ध-कुशल युवाओं के लिए हाई-टेक इंजीनियरिंग, विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में रोजगार के नए, सुरक्षित और स्वर्णिम अवसर पैदा होंगे। यह नीति सही मायने में 21वीं सदी में भारत को "दुनिया की नई फैक्ट्री" बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होने जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें