भारतीय सर्राफा बाजार में आज सोने-चांदी के दाम (Gold Silver Price Today) में एक बार फिर तेजी देखने को मिली है। 26 फरवरी 2026 को सोने और चांदी की कीमतों ने निवेशकों और खरीदारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में सोने की मांग लगातार बढ़ रही है। इस लेख में हम आज सोने-चांदी के दाम, 2025 और 2026 के ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव, इन्वेस्टमेंट बैंकिंग कंपनी UBS की भविष्यवाणियों और 2026 में सोने-चांदी में निवेश करने की सही रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।READ ALSO:-मेरठ का खूनी पारिवारिक संघर्ष: पुश्तैनी मकान के लालच में 'खून' बना पानी, बड़े भाई ने छोटे भाई को उतारा मौत के घाट, आरोपी फरार
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26 फरवरी 2026: आज सोने-चांदी के दाम का विस्तृत विश्लेषण 

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इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, आज सोने-चांदी के दाम में बढ़त दर्ज की गई है।
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सोने की कीमत (Gold Price Today): 10 ग्राम 24 कैरेट सोने (99.9% शुद्धता) का भाव आज 35 रुपये की मामूली लेकिन महत्वपूर्ण बढ़त के साथ 1,59,043 रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। इससे पिछले कारोबारी दिन यह कीमत 1,59,008 रुपये पर बंद हुई थी। सोने की कीमतों में यह स्थिरता और हल्की बढ़त दर्शाती है कि बाजार में उच्च स्तर पर भी मांग बनी हुई है।
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चांदी की कीमत (Silver Price Today): दूसरी ओर, चांदी की कीमतों में भी तेजी का रुख है। आज एक किलो चांदी की कीमत 233 रुपये बढ़कर 2,65,650 रुपये पर पहुंच गई है। कल यानी 25 फरवरी को बाजार बंद होने पर चांदी की कीमत 2,65,417 रुपये प्रति किलोग्राम थी।
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2026 में सोने और चांदी का ऐतिहासिक सफर
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साल 2026 की शुरुआत से ही आज सोने-चांदी के दाम में भारी उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी है। इस साल के मात्र दो महीनों में ही इन कीमती धातुओं ने निवेशकों को हैरत में डाल दिया है।
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आंकड़ों पर नजर डालें तो 2026 में अब तक (1 जनवरी से 26 फरवरी के बीच) सोना 26,000 रुपये प्रति 10 ग्राम महंगा हो चुका है। वहीं, चांदी की कीमत में 35,000 रुपये प्रति किलोग्राम का भारी उछाल आया है।
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ऑल-टाइम हाई (All-Time High): इस वर्ष का सबसे ऐतिहासिक दिन 29 जनवरी 2026 रहा। इस दिन सोने और चांदी ने भारतीय बाजार में अपने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का सर्वोच्च स्तर छुआ था। इसी दिन चांदी ने भी 3.86 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का ऑल-टाइम हाई बनाया था। हालांकि, इसके बाद मुनाफावसूली (Profit booking) के कारण कीमतों में कुछ करेक्शन (Correction) देखा गया, लेकिन आज सोने-चांदी के दाम फिर से मजबूती की ओर बढ़ रहे हैं।
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2025 का फ्लैशबैक: जब सोने ने दिया 75% का बंपर रिटर्न

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आज सोने-चांदी के दाम की वर्तमान स्थिति को समझने के लिए साल 2025 के प्रदर्शन को देखना बहुत जरूरी है। 2025 कमोडिटी बाजार के लिए एक 'ब्लॉकबस्टर' साल साबित हुआ था।
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    सोने की छलांग: 2025 में सोने की कीमत में कुल 57,000 रुपये (लगभग 75%) की भारी वृद्धि दर्ज की गई थी। 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव 76,000 रुपये था, जो 31 दिसंबर 2025 को साल के आखिरी दिन बढ़कर 1.33 लाख रुपये हो गया था।
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    चांदी का महा-उछाल: चांदी ने तो 2025 में सोने को भी पीछे छोड़ दिया। इस दौरान चांदी की कीमत में 1.44 लाख रुपये (लगभग 167%) की अविश्वसनीय वृद्धि हुई। 31 दिसंबर 2024 को एक किलो चांदी 86,000 रुपये की थी, जो 2025 के अंत में 2.30 लाख रुपये प्रति किलो पर बंद हुई।
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सोने-चांदी की कीमतों में इस अभूतपूर्व तेजी के मुख्य कारण

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आखिर आज सोने-चांदी के दाम आसमान क्यों छू रहे हैं? इसके पीछे कई मजबूत वैश्विक और आर्थिक कारण (Macroeconomic factors) जिम्मेदार हैं:
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    केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीदारी: दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी कम कर रहे हैं (De-dollarization) और सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। 2025 में दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने 863 टन सोना खरीदा था। अनुमान है कि 2026 में यह खरीदारी बढ़कर 950 टन तक पहुंच सकती है। चीन के केंद्रीय बैंक ने लगातार 15 महीनों तक सोने की खरीदारी की है।
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    भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions): अमेरिका की नई टैरिफ नीतियों को लेकर अनिश्चितता और ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों में घबराहट पैदा कर दी है। जब भी युद्ध या वैश्विक अस्थिरता का डर होता है, निवेशक शेयरों से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर भागते हैं।
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    ईटीएफ (ETF) में निवेश की बाढ़: संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) द्वारा गोल्ड ईटीएफ में भारी निवेश किया जा रहा है। 2026 में गोल्ड ईटीएफ में निवेश बढ़कर 825 टन होने की उम्मीद है।
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    चांदी की औद्योगिक मांग: चांदी केवल एक कीमती धातु नहीं है, बल्कि एक महत्वपूर्ण औद्योगिक धातु भी है। सौर ऊर्जा (Solar panels), इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के निर्माण में चांदी का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है। कई वर्षों से चांदी की आपूर्ति में कमी (Supply deficit) और बढ़ती औद्योगिक मांग के कारण आज सोने-चांदी के दाम में विशेषकर चांदी में भारी उछाल आया है।
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UBS की भविष्यवाणी: 2026 में 1.80 लाख तक जा सकता है सोना

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दुनिया की जानी-मानी इन्वेस्टमेंट बैंकिंग कंपनी UBS ने अपनी ताजा रिपोर्ट में सोने के भविष्य को लेकर बेहद बुलिश (Bullish) अनुमान जताया है। UBS के अनुसार, सोने की मांग में अभी भी तेजी बनी हुई है और आगे भी यह जारी रहने की प्रबल संभावना है।
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UBS को पूरा भरोसा है कि 2026 में सोने की कीमतें और ऊपर जाएंगी। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 के मध्य तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 6,200 डॉलर प्रति औंस के ऊंचे स्तर को छू सकता है। अगर इसे भारतीय रुपये और आयात शुल्क (Import Duty) के हिसाब से आंका जाए, तो भारतीय बाजार में 10 ग्राम सोने का भाव 1.80 लाख रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर तक जा सकता है।
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2026 के लिए सोने-चांदी में निवेश की रणनीति (Investment Strategy)

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जब आज सोने-चांदी के दाम अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर के करीब कारोबार कर रहे हैं, तो आम निवेशकों के मन में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या इन स्तरों पर निवेश करना सुरक्षित है? वित्तीय विशेषज्ञों और वेल्थ मैनेजरों (Wealth Managers) ने 2026 के लिए कुछ महत्वपूर्ण रणनीतियां सुझाई हैं:
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    पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन (Portfolio Diversification): विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को अपने कुल निवेश पोर्टफोलियो का लगभग 5% से 15% हिस्सा कीमती धातुओं (सोना और चांदी मिलाकर) में आवंटित करना चाहिए। यह शेयर बाजार के जोखिमों (Volatility) से पोर्टफोलियो को बचाता है। रूढ़िवादी निवेशकों (Conservative investors) को मुख्य रूप से सोने पर ध्यान देना चाहिए, जबकि आक्रामक निवेशक (Aggressive investors) चांदी में अधिक एक्सपोजर ले सकते हैं।
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    लंपसम के बजाय एसआईपी (SIP) चुनें: आज सोने-चांदी के दाम इतने ऊंचे हैं कि एक साथ बड़ी रकम (Lump sum) लगाना जोखिम भरा हो सकता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशकों को 'सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान' (SIP) या 'बाय-ऑन-डिप्स' (Buy on dips) रणनीति अपनानी चाहिए। जब भी बाजार में थोड़ा करेक्शन (Correction) आए, तब चरणों में खरीदारी करें।
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    पेपर गोल्ड (Paper Gold) को प्राथमिकता दें: भौतिक सोना (गहने या सिक्के) खरीदने में मेकिंग चार्ज, जीएसटी और सुरक्षा का जोखिम होता है। निवेश के उद्देश्य से गोल्ड ईटीएफ (Gold ETFs), गोल्ड म्यूचुअल फंड (Gold Mutual Funds) या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGBs) बेहतरीन विकल्प हैं। इनमें तरलता (Liquidity) अधिक होती है और भौतिक रखरखाव का खर्च नहीं होता।
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सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें विशेष ध्यान

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भारत में सोने की खरीदारी अक्सर शादियों, त्योहारों और पारिवारिक निवेश के लिए की जाती है। आज सोने-चांदी के दाम इतने महंगे हो चुके हैं कि जरा सी चूक से आपको हजारों रुपये का नुकसान हो सकता है। इसलिए, आभूषण खरीदते समय इन बातों का ध्यान जरूर रखें:
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1. सर्टिफाइड गोल्ड (BIS Hallmark) ही खरीदें: कभी भी बिना हॉलमार्क वाला सोना न खरीदें। भारत सरकार के नियमों के अनुसार, हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। हॉलमार्क वाले गहनों पर 6 अंकों का एक खास अल्फान्यूमेरिक कोड (HUID Code) होता है, जो कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। इस कोड को 'BIS Care' मोबाइल ऐप पर डालकर आप उस आभूषण की शुद्धता, निर्माता और हॉलमार्किंग सेंटर की पूरी जानकारी सेकंडों में प्राप्त कर सकते हैं। हॉलमार्किंग इस बात की कानूनी गारंटी है कि सोना उतने ही कैरेट का है, जितने के पैसे आप चुका रहे हैं।
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2. आज सोने-चांदी के दाम क्रॉस चेक करें: हर सुनार के पास सोने का भाव अलग-अलग हो सकता है। इसलिए, घर से निकलने से पहले सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई प्रामाणिक सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन - IBJA की आधिकारिक वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। यह बात हमेशा याद रखें कि सोने का भाव उसकी शुद्धता (24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट) के हिसाब से अलग-अलग होता है। गहने आमतौर पर 22 कैरेट (91.6% शुद्धता) या 18 कैरेट (75% शुद्धता) सोने से बनाए जाते हैं, इसलिए 24 कैरेट (1.59 लाख) के भाव पर 22 कैरेट का भुगतान न करें।
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चांदी में निवेश: अवसर और जोखिम

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आज सोने-चांदी के दाम की चर्चा में चांदी की बात करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। चांदी को 'गरीबों का सोना' कहा जाता था, लेकिन 2.65 लाख रुपये प्रति किलो के भाव पर यह अब सच नहीं है। चांदी एक हाइब्रिड धातु है; यह सोने की तरह निवेश का सुरक्षित ठिकाना भी है और एक अहम औद्योगिक कच्चा माल भी है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी में सोने की तुलना में अधिक अस्थिरता (Volatility) देखने को मिलती है। इसलिए, शॉर्ट टर्म (Short term) के निवेशकों को चांदी में पैसा लगाने से पहले सावधान रहना चाहिए। हालांकि, अगर आपका नजरिया 5 से 10 साल का है, तो ग्रीन एनर्जी (Green Energy) और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (Electric Mobility) में भारी औद्योगिक मांग के कारण चांदी शानदार रिटर्न देने की क्षमता रखती है।
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आज सोने-चांदी के दाम जिस ऊंचाई पर हैं, वह वैश्विक अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति का स्पष्ट प्रतिबिंब है। 26 फरवरी 2026 को 24 कैरेट सोने का 1,59,043 रुपये और चांदी का 2,65,650 रुपये पर पहुंचना निवेशकों के लिए एक साफ संकेत है कि कीमती धातुओं का युग अभी समाप्त नहीं हुआ है। UBS जैसी वैश्विक संस्थाओं द्वारा 1.80 लाख रुपये के लक्ष्य की भविष्यवाणी इस बात की पुष्टि करती है कि लंबी अवधि में सोने में तेजी का रुझान (Bull run) बरकरार रह सकता है।
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हालांकि, निवेशकों को 2025 के 75% और 167% रिटर्न की अंधी दौड़ में शामिल होने के बजाय एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। अपने पोर्टफोलियो में 10% से 15% का सोने-चांदी का हिस्सा बनाकर आप खुद को आर्थिक झटकों से बचा सकते हैं। खरीदारी करते समय BIS हॉलमार्क की जांच करना और IBJA से आज सोने-चांदी के दाम को क्रॉस चेक करना आपकी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने का सबसे पहला और जरूरी कदम है।
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26 फरवरी 2026 को भारतीय सर्राफा बाजार में बढ़त दर्ज की गई है। 24 कैरेट सोने का भाव 35 रुपये बढ़कर 1,59,043 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया है, जबकि चांदी 233 रुपये उछलकर 2,65,650 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है। वर्ष 2025 में सोने और चांदी ने भारी रिटर्न दिया था, और 2026 के शुरुआती महीनों में भी यही रुझान जारी है। UBS की एक रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत वैश्विक मांग और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी के चलते सोना जल्द ही 1.80 लाख रुपये का आंकड़ा छू सकता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशकों को भौतिक सोने के बजाय हॉलमार्क सर्टिफाइड गहनों या गोल्ड ईटीएफ में निवेश करना चाहिए, और बाजार की मौजूदा कीमतों की हमेशा क्रॉस चेकिंग करनी चाहिए।
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