नई दिल्ली/मुंबई: भारतीय सर्राफा बाजार और कमोडिटी मार्केट (Commodity Market) से सोने के निवेशकों के लिए एक बेहद चौंकाने वाली और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। मध्य पूर्व (Middle East) में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे भयंकर संघर्ष के बावजूद, सोने की कीमतों में वह तेजी देखने को नहीं मिल रही है जिसकी उम्मीद की जा रही थी। इसके विपरीत, सोने की कीमतों में एक बड़ी और ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की जा रही है।Read also:-कामकाजी वर्ग के लिए बड़ी खुशखबरी! अब 5 साल नहीं, सिर्फ 1 साल की नौकरी के बाद भी मिलेगी ग्रेच्युटी, केंद्र सरकार ने बदला दशकों पुराना नियम
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वर्तमान में सोने के दाम अपने अब तक के उच्चतम स्तर (All-Time High) से लगभग 17 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहे हैं। यह स्थिति उन निवेशकों के लिए एक बड़ा झटका है, जिन्होंने युद्ध के हालात को देखते हुए सोने में भारी निवेश किया था।
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आंकड़ों में समझिए सोने की यह भारी गिरावट

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शनिवार को समाप्त हुए कारोबारी सप्ताह में हालांकि सोने की कीमतों में निचले स्तरों से एक बहुत मामूली बढ़त जरूर दर्ज की गई थी, लेकिन अगर हम व्यापक रुझान (Broader Trend) की बात करें तो बाजार अभी भी भारी दबाव का संकेत दे रहा है।
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भारतीय वायदा बाजार यानी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का भाव 1,49,650 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ। यह आंकड़ा इसके ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर 1,80,779 रुपये से लगभग 31,000 रुपये प्रति 10 ग्राम कम है। यह कोई छोटी गिरावट नहीं है, बल्कि कमोडिटी बाजार के इतिहास की कुछ सबसे बड़ी तकनीकी गिरावटों में से एक है। वहीं, अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो कॉमेक्स (COMEX) गोल्ड 4,679.70 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर स्थिर रहा, जो ऊपरी स्तरों से भारी बिकवाली का दबाव झेल रहा है।
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आखिर 'सेफ हेवन' (सुरक्षित निवेश) की चमक क्यों हुई फीकी?

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अर्थशास्त्र का एक बुनियादी नियम है कि जब भी दुनिया में कोई युद्ध, महामारी या बड़ी अनिश्चितता आती है, तो शेयर बाजार गिरते हैं और निवेशक अपना पैसा निकालकर सोने जैसी सुरक्षित जगह (Safe Haven) पर लगाते हैं। शुरुआत में अमेरिका-ईरान संघर्ष ने इस नियम का पालन किया और सोने की कीमतों को सहारा भी दिया।
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लेकिन, बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया सख्त संबोधन के बाद वैश्विक सेंटिमेंट (Market Sentiment) पूरी तरह बदल गया है। राष्ट्रपति ट्रम्प के कड़े रुख ने जल्द युद्धविराम (Ceasefire) की सभी उम्मीदों को गहरा झटका दिया है। युद्ध के लंबा खिंचने की आशंका से निवेशकों में एक अलग तरह की अनिश्चितता बढ़ गई है, जिससे वे सोने के बजाय 'कैश' (नकद) या अमेरिकी डॉलर को अपने पास रखना ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं।
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डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल का 'डबल अटैक'

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सोने की कीमतों में आई इस तेज गिरावट का एक और सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की लगातार बढ़ती कीमतें और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत होता अमेरिकी डॉलर (US Dollar) है।
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खाड़ी देशों में युद्ध के कारण कच्चे तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे क्रूड ऑयल में भयंकर तेजी आई है। इस तेजी ने वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति (Inflation/महंगाई) की चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया है। अर्थशास्त्र के जानकारों का कहना है कि जब भी डॉलर इंडेक्स मजबूत होता है, तो भारतीय रुपये सहित अन्य मुद्रा धारकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से सोना खरीदना बेहद महंगा हो जाता है। आयात महंगा होने के कारण भौतिक सोने (Physical Gold) की मांग घट जाती है, जिसका सीधा असर कीमतों पर ब्रेक (लगाम) के रूप में दिखाई देता है।
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अमेरिकी अर्थव्यवस्था का लचीलापन और ब्याज दरें
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सोने के लिए एक और बुरी खबर अमेरिका के घरेलू आर्थिक आंकड़ों से आई है। हाल ही में अमेरिका के जारी किए गए आर्थिक आंकड़ों, विशेषकर 'नॉन-फार्म पेरोल' (NFP - Non-Farm Payroll) और रोजगार (Employment Data) के शानदार आंकड़ों ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। इन आंकड़ों ने यह साबित कर दिया है कि भारी वैश्विक दबाव के बावजूद अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी बेहद मजबूत स्थिति में है और वहां मंदी का कोई खतरा नहीं है।
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इन मजबूत आंकड़ों के चलते बाजार में यह संभावनाएं प्रबल हो गई हैं कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक 'फेडरल रिजर्व' (US Federal Reserve) निकट भविष्य में ब्याज दरों (Interest Rates) में कोई कटौती नहीं करेगा। फेड अपना सख्त (Hawkish) रुख बरकरार रखेगा। आपको बता दें कि सोना एक गैर-उपज वाला एसेट (Non-yielding Asset) है, यानी इसे रखने पर कोई ब्याज नहीं मिलता। इसलिए, जब बैंकों में ब्याज दरें उच्च (High) होती हैं, तो बड़े निवेशक सोने से पैसा निकालकर अमेरिकी सरकारी बॉन्ड्स (US Treasury Bonds) में लगा देते हैं, जहाँ उन्हें बिना किसी जोखिम के अच्छा रिटर्न मिलता है। यही कारण है कि उच्च ब्याज दरें सोने के आकर्षण को कम कर देती हैं।
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आगे क्या है विशेषज्ञों की राय? (Future Outlook)

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तकनीकी चार्ट (Technical Charts) का विश्लेषण करने वाले बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पकालिक अवधि (Short Term) में सोने को 1,48,000 रुपये के स्तर पर एक मजबूत सपोर्ट (Support Level) मिल रहा है। यदि यह स्तर टूटता है तो गिरावट और गहरा सकती है। वहीं, ऊपर की तरफ 1,55,000 रुपये के स्तर पर सोने को कड़ा प्रतिरोध (Resistance) का सामना करना पड़ रहा है।
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आने वाले दिनों में सोने की चाल पूरी तरह से कुछ प्रमुख कारकों पर निर्भर करेगी: 

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    अमेरिका के आगामी बेरोजगारी आंकड़े (Unemployment Claims)।
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  3. \r\n
    एडीपी रोजगार डेटा (ADP Employment Data)।
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  5. \r\n
    अमेरिका-ईरान युद्ध से जुड़े रोजमर्रा के भू-राजनीतिक घटनाक्रम।
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बाजार विश्लेषकों ने आम खुदरा निवेशकों को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगले कुछ हफ्तों तक सोने के बाजार में भारी उतार-चढ़ाव (Volatility) बना रह सकता है। इसलिए, बिना उचित स्टॉप-लॉस (Stop-Loss) और बिना वित्तीय सलाहकार की मदद के किसी भी बड़ी ट्रेडिंग पोजीशन को लेने से बचना चाहिए।
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