नई दिल्ली (New Delhi): शादियों के सीजन और बजट 2026 (Budget 2026) की गहमागहमी के बीच आम आदमी के लिए एक राहत भरी खबर आई है। आसमान छूते सोने और चांदी के दामों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। सरकार ने सोने और चांदी के 'बेस इंपोर्ट प्राइस' (Base Import Price) यानी टैरिफ वैल्यू में बड़ी कटौती कर दी है।READ ALSO:-Gold-Silver Price Blast: गिरावट के 'सन्नाटे' के बाद सोने में आया 'तूफान'! एक दिन में ₹6,600 की छलांग, चांदी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड; निवेशकों की चांदी, खरीदारों के पसीने छूटे
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इस फैसले का सीधा असर यह होगा कि विदेशों से सोना-चांदी मंगाना अब सस्ता हो जाएगा, जिससे घरेलू बाजार में भी कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (CBIC) ने इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब सोने और चांदी के भाव अपने रिकॉर्ड स्तर (Record Highs) पर चल रहे थे और खरीदारों की जेब पर भारी बोझ पड़ रहा था।
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क्या है सरकार का नया फैसला?
\r\n\r\nवित्त मंत्रालय के अधीन आने वाले CBIC ने सोने और चांदी की इंपोर्ट कीमतों (Tariff Value) को रिवाइज किया है। आसान भाषा में समझें तो सरकार जिस 'तय कीमत' पर विदेशों से आने वाले सोने-चांदी पर टैक्स (Customs Duty) लगाती है, उस कीमत को घटा दिया गया है।
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- \r\n सोना (Gold): सोने की बेस इंपोर्ट कीमत में लगभग 50 डॉलर की कटौती की गई है। अब नई कीमत 1,518 डॉलर प्रति 10 ग्राम तय की गई है।\r\n \r\n
- \r\n चांदी (Silver): चांदी को लेकर सरकार ने ज्यादा बड़ी राहत दी है। इसकी बेस कीमत में 800 डॉलर से ज्यादा की कटौती हुई है और अब यह 2,657 डॉलर प्रति किलोग्राम निर्धारित की गई है।\r\n \r\n
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यह बदला हुआ नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इसका मतलब यह है कि आज से जो भी इम्पोर्टर (आयात) विदेशों से सोना या चांदी मंगवाएगा, उसे कम डॉलर कीमत के आधार पर टैक्स चुकाना होगा।
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क्यों घटेंगे सोने-चांदी के दाम? (Impact on Prices)
\r\n\r\nबहुत से लोग 'इंपोर्ट ड्यूटी रेट' (Tax Rate) और 'टैरिफ वैल्यू' (Tariff Value) में कंफ्यूज हो जाते हैं। सरकार ने टैक्स का प्रतिशत (Percentage) नहीं बदला है, बल्कि जिस कीमत पर टैक्स लगता है, उसे कम कर दिया है।
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गणित को ऐसे समझें: मान लीजिए पहले इंपोर्ट ड्यूटी 10% थी और 10 ग्राम सोने की बेस कीमत 1568 डॉलर थी। तो इम्पोर्टर को $156.8 टैक्स देना पड़ता था। अब बेस कीमत घटकर 1518 डॉलर हो गई है। तो उसी 10% के हिसाब से टैक्स $151.8 बनेगा। यानी इम्पोर्टर को टैक्स कम देना पड़ेगा। जब इम्पोर्टर की लागत (Landed Cost) कम होगी, तो वह घरेलू बाजार में भी सोना सस्ता बेचेगा।
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विशेषज्ञों का मानना है कि इस कटौती का सबसे ज्यादा असर चांदी की कीमतों पर दिखेगा क्योंकि चांदी की बेस वैल्यू में भारी (800 डॉलर/किग्रा) गिरावट की गई है।
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किन चीजों पर लागू होगी नई दरें?
\r\n\r\nCBIC के नोटिफिकेशन के मुताबिक, यह छूट या कमी कुछ खास कैटेगरी पर ही लागू होगी:
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- \r\n गोल्ड बार और सिक्के: हाई-प्योरिटी वाली सोने की छड़ों (Gold Bars) और सिक्कों पर।\r\n \r\n
- \r\n सिल्वर बुलियन: चांदी की ईंटों और मेडल्स पर।\r\n \r\n
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क्या शामिल नहीं है? यह कटौती विदेशों से बनकर आने वाली ज्वैलरी (Jewelry), कीमती धातुओं से बनी अन्य सजावटी चीजों और विदेश यात्रा से लौटते वक्त बैग में (Baggage) लाए गए सोने-चांदी पर लागू नहीं होगी। साथ ही, पोस्ट या कूरियर से मंगाए गए सामान पर भी पुरानी दरें ही प्रभावी रह सकती हैं।
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कब और क्यों बदलती है सरकार कीमतें?
\r\n\r\nसोना और चांदी ऐसे कमोडिटी हैं जिनके दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार (Global Market) में हर पल बदलते रहते हैं। चूंकि भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर सोना विदेश से खरीदता है, इसलिए वहां के दामों का असर यहां सीधा पड़ता है।
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सरकार हर 15 दिन में (पाक्षिक आधार पर) इंपोर्ट कीमतों की समीक्षा करती है:
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- \r\n इससे पहले 22 जनवरी को सोने की कीमतों में बदलाव किया गया था।\r\n \r\n
- \r\n चांदी की कीमतों में आखिरी बदलाव 27 जनवरी को हुआ था।\r\n \r\n
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फरवरी 2026 की शुरुआत में ग्लोबल मार्केट में सोने-चांदी में थोड़ी नरमी आई है, जिसे देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है ताकि घरेलू बाजार में कीमतें अंतरराष्ट्रीय रुझानों के मुताबिक रहें।
\r\n\r\nअर्थव्यवस्था और रुपये पर असर
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भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार (Consumer) है और चांदी का सबसे बड़ा बाजार है। हम अपनी जरूरत का लगभग पूरा सोना और 80% चांदी आयात करते हैं।
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- \r\n व्यापार घाटा (Trade Deficit): जब सोने के दाम बढ़ते हैं, तो भारत का इंपोर्ट बिल (Import Bill) बढ़ जाता है। इससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) खाली होता है और व्यापार घाटा बढ़ता है।\r\n \r\n
- \r\n रुपये पर दबाव: ज्यादा डॉलर बाहर जाने से भारतीय रुपये की वैल्यू डॉलर के मुकाबले कमजोर होती है।\r\n \r\n
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2026 में सोने-चांदी के दाम आसमान छू रहे हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे थे कि सरकार इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ा सकती है ताकि लोग सोना कम खरीदें। लेकिन सरकार ने इसके उलट बेस प्राइस घटाने का फैसला किया है। इसके पीछे एक तर्क यह भी है कि जब टैक्स बहुत ज्यादा होता है, तो 'स्मगलिंग' (तस्करी) बढ़ जाती है। टैक्स का बोझ कम करके सरकार स्मगलिंग पर चोट करना चाहती है और लीगल इंपोर्ट को बढ़ावा देना चाहती है।
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चांदी क्यों है खास? (Silver specific context)
\r\n\r\nचांदी की कीमतों में 800 डॉलर की कटौती बहुत मायने रखती है। चांदी अब सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं है।
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- \r\n इंडस्ट्रियल डिमांड: 2026 में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), सोलर पैनल्स और 5G टेक्नोलॉजी में चांदी का इस्तेमाल बहुत बढ़ गया है।\r\n \r\n
- \r\n कीमतों में उछाल: पिछले कुछ महीनों में चांदी के दाम सोने से भी ज्यादा तेजी से भागे थे।\r\n \r\n
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सरकार के इस कदम से सोलर और ईवी इंडस्ट्री को भी थोड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि उनके लिए कच्चा माल (Raw Material) सस्ता होगा।
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एक्सपर्ट्स की राय
\r\n\r\nकमोडिटी बाजार के जानकारों का कहना है, "यह फैसला तकनीकी है लेकिन इसका असर मनोवैज्ञानिक (Psychological) रूप से सकारात्मक होगा। जो ग्राहक बजट के बाद दाम गिरने का इंतजार कर रहे थे, वे अब खरीदारी के लिए बाजार का रुख कर सकते हैं। हालांकि, डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल और अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) के ब्याज दरों पर फैसले भी आगे की दिशा तय करेंगे।"
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सरकार द्वारा सोने और चांदी की बेस इंपोर्ट प्राइस में कटौती करना आम जनता और ज्वैलर्स दोनों के लिए एक स्वागत योग्य कदम है। इससे शादियों के सीजन में थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार अभी भी बहुत अस्थिर (Volatile) है। अगर वहां कीमतें फिर बढ़ीं, तो यह राहत थोड़े समय के लिए ही हो सकती है। इसलिए, अगर आप सोना-चांदी खरीदने का मन बना रहे हैं, तो यह समय आपके लिए अच्छा साबित हो सकता है।
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केंद्र सरकार ने सोने की बेस इंपोर्ट कीमत $1,518/10g और चांदी की $2,657/kg कर दी है। चांदी की कीमत में $800 की बड़ी कटौती हुई है। यह फैसला CBIC द्वारा लिया गया है। इससे इंपोर्ट ड्यूटी का बोझ कम होगा और घरेलू बाजार में सोना-चांदी सस्ता होगा। यह कटौती ज्वैलरी पर नहीं, बल्कि बुलियन (ईंटों/सिक्कों) पर लागू होगी।
Sabse pehle comment karne wale banein.