नई दिल्ली: साल 2026 की शुरुआत में ही सर्राफा बाजार में महंगाई का महाविस्फोट देखने को मिला है। आज, यानी 12 जनवरी 2026 को सोने और चांदी की कीमतों (Gold-Silver Prices) में ऐतिहासिक तेजी दर्ज की गई है। बाजार खुलते ही दोनों कीमती धातुओं ने पुराने सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए और अब तक के अपने सर्वोच्च स्तर (All Time High) पर पहुंच गए हैं। खासकर चांदी की चमक ने निवेशकों को हैरान कर दिया है, जिसमें एक ही दिन में 14 हजार रुपये से अधिक की अविश्वसनीय बढ़ोतरी हुई है।READ ALSO:-UP Weather Special: यूपी में पहाड़ों जैसी बर्फबारी का अहसास, 'कोल्ड अटैक' से 2 की मौत; नोएडा-मेरठ समेत इन जिलों में स्कूल बंद, CM योगी ने लिखा प्रदेशवासियों को भावुक पत्र
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सोने-चांदी के दाम में आई इस जबरदस्त तेजी ने आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है, वहीं निवेशकों के चेहरे खिल उठे हैं। वैश्विक बाजार में मची हलचल, डॉलर की कमजोरी और इंडस्ट्रियल डिमांड के चलते यह तेजी देखने को मिल रही है। आइये विस्तार से जानते हैं आज के ताजा भाव, इस ऐतिहासिक तेजी के प्रमुख कारण और आने वाले दिनों के लिए बाजार का पूर्वानुमान।
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आज के ताजा भाव: चांदी में रिकॉर्ड तोड़ उछाल
\r\n\r\nइंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, आज सोने और चांदी दोनों ने नया इतिहास रचा है।
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सोने का भाव (Gold Price): 12 जनवरी को 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव 2,883 रुपये की जोरदार बढ़त के साथ 1,40,005 रुपये पर पहुंच गया है। यह पहली बार है जब सोना 1.40 लाख रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है।
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- \r\n कल का भाव: इससे पहले बीते कारोबारी दिन यह 1,37,122 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।\r\n \r\n
- \r\n पिछला रिकॉर्ड: सोने ने इससे पहले 29 दिसंबर 2025 को 1,38,161 रुपये प्रति 10 ग्राम का ऑल टाइम हाई बनाया था, जो आज टूट गया है।\r\n \r\n
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चांदी की कीमत (Silver Price): चांदी में आज जो तेजी देखी गई है, वह अभूतपूर्व है। एक किलोग्राम चांदी की कीमत में एक ही दिन में 14,475 रुपये का भारी उछाल आया है। इस बढ़त के साथ चांदी 2,57,283 रुपये प्रति किलोग्राम के नए शिखर पर पहुंच गई है।
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- \r\n कल का भाव: कल चांदी की कीमत 2,42,808 रुपये प्रति किलो थी।\r\n \r\n
- \r\n पिछला रिकॉर्ड: इससे पहले महज कुछ दिन पूर्व, 7 जनवरी को चांदी ने 2,48,000 रुपये प्रति किलोग्राम का ऑल टाइम हाई छुआ था।\r\n \r\n
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2025: निवेशकों के लिए स्वर्णिम साल रहा पिछला वर्ष
\r\n\r\nमौजूदा तेजी की नींव पिछले साल ही पड़ गई थी। साल 2025 सोने और चांदी के निवेशकों के लिए किसी लॉटरी से कम नहीं रहा। आंकड़ों पर नजर डालें तो:
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- \r\n सोना (Gold): पिछले साल 2025 में सोने की कीमतों में 75% की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई। 31 दिसंबर 2024 को जो सोना 76,162 रुपये प्रति 10 ग्राम था, वह साल के अंत तक 57,033 रुपये महंगा होकर 31 दिसंबर 2025 को 1,33,195 रुपये पर पहुंच गया।\r\n \r\n
- \r\n चांदी (Silver): चांदी ने तो रिटर्न के मामले में सोने को भी बहुत पीछे छोड़ दिया। 2025 में चांदी 167% महंगी हुई। 31 दिसंबर 2024 को एक किलो चांदी की कीमत 86,017 रुपये थी, जो साल के आखिरी दिन तक 1,44,403 रुपये बढ़कर 2,30,420 रुपये प्रति किलो हो गई।\r\n \r\n
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सोने में ऐतिहासिक तेजी के 3 प्रमुख कारण
\r\n\r\nबाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की कीमतों (Gold Prices) में इस लगातार जारी तेजी के पीछे तीन मुख्य वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं:
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- \r\n डॉलर की कमजोरी और अमेरिकी ब्याज दरें: अमेरिका में ब्याज दरें घटाने के फैसले के बाद से डॉलर इंडेक्स में कमजोरी आई है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो अन्य मुद्राओं धारकों के लिए सोना खरीदना सस्ता हो जाता है, जिससे मांग बढ़ती है। इसके अलावा, ब्याज दरें कम होने से सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्ति की 'होल्डिंग कॉस्ट' कम हो जाती है, जिससे निवेशक इसकी ओर आकर्षित होते हैं।\r\n \r\n
- \r\n जियोपॉलिटिकल तनाव (भू-राजनीतिक संकट): रूस-यूक्रेन युद्ध का लंबा खींचना और दुनिया के अन्य हिस्सों में जारी तनाव ने अनिश्चितता का माहौल पैदा किया है। ऐसे संकट के समय में, निवेशक शेयर बाजार जैसे जोखिम भरे विकल्पों के बजाय सोने को सबसे सुरक्षित निवेश (Safe Haven) मानते हैं। इस सुरक्षित निवेश की मांग ने कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है।\r\n \r\n
- \r\n केंद्रीय बैंकों द्वारा भारी खरीदारी: दुनिया भर के केंद्रीय बैंक, विशेषकर चीन, डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए आक्रामक रूप से सोना खरीद रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्रीय बैंक सालभर में 900 टन से ज्यादा की खरीदारी कर रहे हैं। जब बड़े देश अपने रिजर्व में सोना भरते हैं, तो इससे बाजार में सकारात्मक संकेत जाता है और दाम ऊपर चढ़ते हैं।\r\n \r\n
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चांदी क्यों बन रही है 'नया सोना'? तेजी के 3 बड़े कारण
\r\n\r\nचांदी सिर्फ एक कीमती धातु नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण औद्योगिक धातु भी है। चांदी की कीमतों में सोने से भी ज्यादा तेजी के पीछे ये कारण हैं:
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- \r\n जबरदस्त इंडस्ट्रियल डिमांड: आज के दौर में चांदी का इस्तेमाल सिर्फ ज्वेलरी तक सीमित नहीं है। यह सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) उद्योग के लिए एक अनिवार्य कच्चा माल बन गई है। जैसे-जैसे दुनिया ग्रीन एनर्जी और ईवी की तरफ बढ़ रही है, चांदी की औद्योगिक मांग में विस्फोटक वृद्धि हो रही है।\r\n \r\n
- \r\n ट्रंप का टैरिफ डर और स्टॉकपाइलिंग: अमेरिकी राजनीति में टैरिफ को लेकर मचे घमासान का असर भी दिख रहा है। इस डर से कि भविष्य में टैरिफ लगने से आयात महंगा हो सकता है, अमेरिकी कंपनियां पहले से ही चांदी का भारी स्टॉक जमा कर रही हैं। इस 'पैनिक बाइंग' ने ग्लोबल सप्लाई चेन पर दबाव डाला है और कीमतें ऊपर चढ़ी हैं।\r\n \r\n
- \r\n मैन्युफैक्चरर्स के बीच होड़: इंडस्ट्रियल डिमांड इतनी ज्यादा है कि मैन्युफैक्चरर्स को प्रोडक्शन रुकने का डर सता रहा है। इस डर से वे भविष्य की जरूरतों के लिए अभी से चांदी खरीदकर रख रहे हैं। मांग और आपूर्ति का यह असंतुलन आने वाले महीनों में भी तेजी बरकरार रख सकता है।\r\n \r\n
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भविष्य का अनुमान: क्या 2.75 लाख तक जाएगी चांदी?
\r\n\r\nबाजार में चल रही इस तूफानी तेजी को देखते हुए विशेषज्ञों ने अपने भविष्य के लक्ष्य बढ़ा दिए हैं। केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया का मानना है कि सोने-चांदी के दाम में यह तेजी अभी थमने वाली नहीं है।
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केडिया के अनुसार, "चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड में अभी जबरदस्त तेजी है और इसके आगे भी बने रहने का पूरा अनुमान है। मौजूदा परिदृश्य को देखते हुए, चांदी इस साल 2.75 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक जा सकती है।"
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वहीं, सोने के बारे में उनका कहना है, "सोने की मांग में भी सुरक्षित निवेश के तौर पर तेजी बनी हुई है। ऐसे में इस साल के आखिर तक सोना 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को आसानी से पार कर सकता है।"
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भारत का 'गोल्ड प्रेम': जीडीपी से ज्यादा का सोना घरों में
\r\n\r\nभारत में सोने के प्रति लोगों का आकर्षण जगजाहिर है। बढ़ती कीमतों ने भारतीय परिवारों के पास मौजूद सोने की वैल्यू को आसमान पर पहुंचा दिया है। एक अनुमान के मुताबिक, भारतीय परिवारों के पास मौजूद कुल सोने की वैल्यू 5 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 450 लाख करोड़ रुपये) के पार निकल गई है।
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यह आंकड़ा कितना बड़ा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह भारत की कुल जीडीपी (4.1 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 370 लाख करोड़ रुपये) से भी ज्यादा है। मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय घरों में लगभग 34,600 टन सोना जमा है।
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अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस (करीब 28 ग्राम) के पार ट्रेड कर रहा है, जो रुपये में बदलने पर 1.30 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के करीब बैठता है।
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जरूरी जानकारी: शहर-दर-शहर रेट अलग क्यों होते हैं?
\r\n\r\nअक्सर लोग भ्रमित होते हैं कि समाचारों में बताए गए रेट और उनके शहर के ज्वेलर्स के रेट में अंतर क्यों होता है। आपको बता दें कि ऊपर बताए गए रेट इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी किए गए हैं।
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IBJA के इन रेट्स में 3% माल और सेवा कर (GST), मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स का मार्जिन शामिल नहीं होता है। जब आप ज्वेलरी खरीदने जाते हैं, तो ये सभी शुल्क जुड़ जाते हैं, इसलिए अंतिम कीमत अधिक होती है। IBJA के रेट्स का इस्तेमाल मुख्य रूप से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा सोवरेन गोल्ड बॉन्ड के रेट तय करने और बैंकों द्वारा गोल्ड लोन के रेट निर्धारित करने के लिए किया जाता है।
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सोने-चांदी के दाम (Gold-Silver Prices) में आई यह ऐतिहासिक तेजी वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियों का परिणाम है। जहां एक ओर यह निवेशकों के लिए खुशी का कारण है, वहीं दूसरी ओर यह शादी-ब्याह या त्योहारों के लिए खरीदारी करने वाले आम उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय है। विशेषज्ञों की मानें तो निकट भविष्य में कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना कम ही दिख रही है, बल्कि यह तेजी का दौर अभी कुछ और समय तक जारी रह सकता है।
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Sabse pehle comment karne wale banein.