नई दिल्ली/मुंबई: साल 2026 की शुरुआत से ही कीमती धातुओं (Precious Metals) के बाजार में मची उथल-पुथल थमने का नाम नहीं ले रही है। पिछले साल यानी 2025 में ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाने वाला सोना अब फरवरी के मध्य में दबाव महसूस कर रहा है। वैश्विक और घरेलू बाजारों में आज लगातार दूसरे सत्र में सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की मांग में कमी और अमेरिकी डॉलर (US Dollar) में आई मजबूती ने बुलियन मार्केट की चमक फीकी कर दी है।Read also:-BHU CHS Admission 2026: अभिभावकों का इंतजार खत्म! 20 फरवरी से शुरू होगी 'मिनी बीएचयू' में दाखिले की रेस, जानें हर एक डिटेल
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ताजा आंकड़ों के मुताबिक, एमसीएक्स (MCX) पर सोने का भाव गिरकर ₹1,53,889 प्रति 10 ग्राम पर आ गया है, जबकि चांदी लुढ़ककर ₹2,37,064 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही है। यह गिरावट उन निवेशकों के लिए चिंता का विषय है जिन्होंने हाल ही में ₹1.80 लाख के उच्चतम स्तर पर खरीदारी की थी।
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बाजार का ताजा हाल: एमसीएक्स और अंतरराष्ट्रीय बाजार
\r\n\r\nमंगलवार, 17 फरवरी 2026 को भारतीय वायदा बाजार (MCX) में अप्रैल डिलीवरी वाला सोना 0.56 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,53,889 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला और इसी स्तर के आसपास कारोबार करता दिखा। पिछले कारोबारी सत्र में सोना ₹1,56,000 के स्तर के करीब था, लेकिन बिकवाली के दबाव ने इसे नीचे धकेल दिया।
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वहीं, चांदी (Silver) की कीमतों में सोने के मुकाबले ज्यादा बड़ी गिरावट देखने को मिली है। मार्च वायदा की चांदी 1.18 प्रतिशत टूटकर 2,37,064 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है। इससे पहले चांदी ने 2025 में और जनवरी 2026 की शुरुआत में जबरदस्त प्रदर्शन किया था, लेकिन अब औद्योगिक मांग में स्थिरता और मुनाफावसूली (Profit Booking) के चलते इसमें करेक्शन देखने को मिल रहा है।
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अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) की बात करें तो वहां भी मंदी का दौर जारी है। हाजिर सोना (Spot Gold), जो कुछ समय पहले $5,600 प्रति औंस के पार चला गया था, अब मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण $5,000 के स्तर से नीचे फिसलकर $4,992 प्रति औंस पर आ गया है। यह गिरावट संकेत देती है कि वैश्विक निवेशक अब अपना पैसा सोने से निकालकर बॉन्ड्स या इक्विटी जैसे अन्य विकल्पों में लगा रहे हैं।
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सोना-चांदी गिरने के 5 बड़े कारण
\r\n\r\nबाजार विश्लेषकों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कोई एक वजह नहीं बल्कि कई वैश्विक और आर्थिक कारकों का मिश्रण है। आइए विस्तार से समझते हैं:
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1. सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की मांग में कमी
\r\n\r\nसोने को हमेशा से संकट का साथी माना जाता है। जब भी दुनिया में युद्ध या अस्थिरता होती है, सोने के दाम बढ़ते हैं। हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते (Nuclear Deal) को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। कूटनीतिक बातचीत शुरू होने की खबरों ने मध्य-पूर्व (Middle East) में तनाव कम किया है, जिससे निवेशकों का डर कम हुआ है और उन्होंने 'सेफ हेवन' यानी सोने से पैसा निकालना शुरू कर दिया है। इसके अलावा, ऐसी खबरें भी आ रही हैं कि रूस, जो अब तक डॉलर का विरोध कर रहा था, अमेरिका के साथ आर्थिक साझेदारी पर विचार कर सकता है। इस भू-राजनीतिक नरमी ने सोने की कीमतों पर दबाव डाला है।
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2. डॉलर इंडेक्स में मजबूती
\r\n\r\nकरेंसी मार्केट में अमेरिकी डॉलर की वापसी ने भी कमोडिटी बाजार को प्रभावित किया है। डॉलर इंडेक्स (Dollar Index) 0.21 प्रतिशत की बढ़त के साथ 97.12 के स्तर पर पहुंच गया है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत डॉलर में तय होती है, इसलिए जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य मुद्राओं (जैसे भारतीय रुपया) वाले खरीदारों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है। इससे मांग में कमी आती है और कीमतें गिरती हैं।
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3. अमेरिकी फेडरल रिजर्व और ब्याज दरें
\r\n\r\nअमेरिका से आए आर्थिक आंकड़ों ने निवेशकों को असमंजस में डाल दिया है। जनवरी 2026 के लिए जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़े उम्मीद से थोड़े कम रहे, जिससे महंगाई काबू में आने के संकेत मिले। लेकिन दूसरी तरफ, रोजगार (Jobs Data) के आंकड़े बेहद मजबूत रहे हैं। इस मिश्रित डेटा (Mixed Data) के कारण यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक (Federal Reserve) ब्याज दरों में कटौती करेगा या नहीं। ऊंची ब्याज दरें सोने के लिए नकारात्मक होती हैं क्योंकि सोने पर कोई ब्याज (Interest) नहीं मिलता।
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4. मुनाफावसूली (Profit Booking)
\r\n\r\nसाल 2025 में सोने ने निवेशकों को 60% से अधिक का बंपर रिटर्न दिया था। जिन निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी की थी, वे अब ऊंचे दामों पर अपना मुनाफा वसूल रहे हैं। यह बिकवाली का दबाव कीमतों को नीचे ला रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह एक स्वाभाविक 'करेक्शन' है जो बाजार को संतुलित करने के लिए जरूरी है।
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5. चांदी में औद्योगिक मांग की चिंता
\r\n\r\nचांदी की कीमतों में गिरावट का एक कारण सौर ऊर्जा (Solar Energy) और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) सेक्टर से जुड़ी खबरें भी हैं। हालांकि लंबी अवधि में मांग मजबूत है, लेकिन हाल ही में सौर पैनल उद्योग में सुस्ती के संकेतों ने चांदी की शॉर्ट-टर्म मांग को प्रभावित किया है। इसके अलावा, सोने के मुकाबले चांदी का प्रदर्शन (Gold-Silver Ratio) भी अस्थिर बना हुआ है।
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2025 की ऐतिहासिक रैली और 2026 का परिदृश्य
\r\n\r\nमौजूदा गिरावट को समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे मुड़कर देखना होगा। साल 2025 सोने और चांदी के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। केंद्रीय बैंकों, विशेषकर चीन और भारत के केंद्रीय बैंकों द्वारा रिकॉर्ड खरीदारी और भू-राजनीतिक तनावों के चलते सोने की कीमतें आसमान छू गई थीं।
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- \r\n 2025 का पीक: एमसीएक्स पर सोना ₹1,80,000 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह $5,626 प्रति औंस का स्तर छू चुका था।\r\n \r\n
- \r\n चांदी की चमक: चांदी ने तो सोने को भी पीछे छोड़ दिया था और 2025 में 130% से अधिक का रिटर्न दिया था। चांदी का भाव ₹3.50 लाख प्रति किलो तक पहुंचने के कयास लगाए जा रहे थे।\r\n \r\n
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लेकिन 2026 की शुरुआत के साथ ही बाजार में 'मीन रिवर्जन' (Mean Reversion) देखने को मिल रहा है। यानी कीमतें अपने औसत स्तर की ओर वापस आ रही हैं। जेपी मॉर्गन और गोल्डमैन सैक्स जैसे वैश्विक संस्थानों का मानना है कि 2026 में भी सोने का रुझान सकारात्मक रहेगा, लेकिन राह में उतार-चढ़ाव (Volatility) बना रहेगा। उनका अनुमान है कि साल के अंत तक सोना $5,000-$5,400 के दायरे में स्थिर हो सकता है।
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निवेशकों के लिए तकनीकी राय (Technical Analysis)
\r\n\r\nट्रेडर्स और शॉर्ट-टर्म निवेशकों के लिए बाजार के तकनीकी स्तरों (Technical Levels) को समझना बेहद जरूरी है। कमोडिटी विशेषज्ञों के अनुसार:
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- \r\n सोना (Gold): एमसीएक्स पर सोने के लिए ₹1,45,000 और ₹1,50,000 का स्तर एक बेहद मजबूत सपोर्ट (Support) यानी आधार का काम करेगा। अगर कीमतें इससे नीचे जाती हैं, तो और गिरावट आ सकती है। वहीं, ऊपर की ओर ₹1,60,800 का स्तर एक बड़ा प्रतिरोध (Resistance) है, जिसे पार करने के बाद ही नई तेजी संभव होगी।\r\n \r\n
- \r\n चांदी (Silver): चांदी के लिए ₹2,25,000 का स्तर महत्वपूर्ण है। अगर यह स्तर टूटता है, तो कीमतें ₹2 लाख की ओर जा सकती हैं। हालांकि, ₹2.37 लाख के मौजूदा स्तर पर खरीदारी की थोड़ी बहुत रुचि देखी जा सकती है।\r\n \r\n
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क्या यह खरीदने का सही समय है? (Investment Advice)
\r\n\r\nकीमतों में आई इस भारी गिरावट ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या यह निवेश करने का सही मौका है या अभी और गिरावट का इंतजार करना चाहिए?
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विशेषज्ञों की राय: बाजार के दिग्गज मानते हैं कि लंबी अवधि के निवेशकों (Long-term Investors) के लिए यह गिरावट एक सुनहरा अवसर हो सकती है। आईसीआईसीआई डायरेक्ट (ICICI Direct) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में भी सोने के लिए संरचनात्मक मांग (Structural Demand) मजबूत बनी हुई है। केंद्रीय बैंक अभी भी सोना खरीद रहे हैं और वैश्विक कर्ज (Global Debt) की स्थिति को देखते हुए सोने का महत्व कम नहीं हुआ है।
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- \r\n किश्तों में निवेश करें (SIP): एक मुश्त बड़ी रकम लगाने के बजाय, निवेशकों को गिरावट पर धीरे-धीरे खरीदारी (Staggered Buying) करनी चाहिए।\r\n \r\n
- \r\n डायवर्सिफिकेशन: अपने पोर्टफोलियो का 10-15% हिस्सा ही सोने-चांदी में रखें।\r\n \r\n
- \r\n सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB): यदि आप लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं, तो फिजिकल गोल्ड के बजाय सरकारी बॉन्ड या गोल्ड ईटीएफ (Gold ETFs) बेहतर विकल्प हैं, क्योंकि इनमें मेकिंग चार्ज नहीं लगता और सुरक्षा की चिंता भी नहीं होती।\r\n \r\n
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चांदी का भविष्य: क्या ₹3 लाख का स्तर फिर आएगा?
\r\n\r\nचांदी को लेकर विश्लेषकों की राय अभी भी बुलिश (Bullish) बनी हुई है। भले ही अभी कीमतें गिरी हों, लेकिन औद्योगिक उपयोग में चांदी की मांग कम नहीं होने वाली है। 2026 में 5G तकनीक, सोलर पैनल्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के विस्तार के साथ चांदी की खपत बढ़ने का अनुमान है। ग्रिप इन्वेस्ट (Grip Invest) की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 के अंत तक चांदी ₹2.75 लाख से ₹3 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर को फिर से छू सकती है।
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हालांकि, निवेशकों को चांदी की उच्च अस्थिरता (High Volatility) से सावधान रहने की सलाह दी जाती है। सोने के मुकाबले चांदी की कीमतें बहुत तेजी से ऊपर-नीचे होती हैं।
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सोने और चांदी की कीमतों में आई मौजूदा गिरावट (Gold Silver Price Today) बाजार के सामान्य चक्र का हिस्सा है। डॉलर की मजबूती और भू-राजनीतिक तनाव में कमी ने अस्थाई रूप से कीमतों को नीचे धकेला है। ₹1,53,889 का सोने का भाव और ₹2,37,064 का चांदी का भाव उन लोगों के लिए राहत की खबर हो सकती है जो शादियों के सीजन के लिए खरीदारी करना चाहते थे।
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लेकिन याद रखें, 2026 का साल आर्थिक अनिश्चितताओं से भरा है। अमेरिकी फेड के फैसले और वैश्विक कूटनीति बाजार की दिशा तय करेंगे। इसलिए, निवेश का कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें और बाजार के रुझानों पर पैनी नजर बनाए रखें।
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17 फरवरी 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। एमसीएक्स पर सोना ₹1,53,889 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,37,064 प्रति किलो पर आ गई। डॉलर की मजबूती, अमेरिकी फेड की नीतियों पर संशय और ईरान-अमेरिका तनाव में कमी इस गिरावट के मुख्य कारण रहे। विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए खरीदारी का मौका हो सकती है, हालांकि बाजार में अभी उतार-चढ़ाव जारी रहने की उम्मीद है।
Sabse pehle comment karne wale banein.