अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को अपनी चपेट में ले लिया है। इस विनाशकारी युद्ध का सीधा असर अब भारतीय रसोई और व्यापार पर पड़ रहा है। मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्तों में से एक, 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (हॉर्मुज जलमार्ग) के रास्ते होने वाली गैस सप्लाई पूरी तरह से ठप हो गई है। इसके परिणामस्वरूप, भारत में गैस संकट एक गंभीर रूप ले चुका है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों ने कॉमर्शियल गैस की सप्लाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।READ ALSO:-महा-संकट की आहट! ईरान युद्ध के डर से भारत में LPG की किल्लत; सरकार ने लागू किया 'आवश्यक वस्तु अधिनियम', जानें आम आदमी पर क्या होगा असर
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गैस सप्लाई बंद होने की वजह से कई शहरों में रेस्टोरेंट्स, होटल और छोटे भोजनालय बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। कालाबाजारी और जमाखोरी को रोकने के लिए, केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए देशभर में 'आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955' (Essential Commodities Act) लागू कर दिया है। (Internal link to related article: मध्य पूर्व के युद्ध का भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा?)
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इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि आखिर यह संकट क्यों पैदा हुआ, आवश्यक वस्तु अधिनियम क्या है, राज्यों में इसके क्या हालात हैं, और सरकार इस आपात स्थिति से निपटने के लिए क्या रणनीतियां अपना रही है।
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सप्लाई संकट की 2 मुख्य वजहें: हॉर्मुज जलमार्ग और कतर प्लांट
\r\n\r\nभारत में गैस संकट कोई एक दिन में पैदा हुई समस्या नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिगड़े हालातों का सीधा नतीजा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, और इसी आयात श्रृंखला के टूटने से यह संकट खड़ा हुआ है।
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1. 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का लगभग बंद होना
\r\n\r\nभारत के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का बंद होना है। यह करीब 167 किलोमीटर लंबा एक बेहद संकरा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को अरब सागर और ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। ईरान युद्ध के कारण यह रूट अब वाणिज्यिक जहाजों के लिए सुरक्षित नहीं रह गया है। खतरे को देखते हुए कोई भी अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा है।
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आपको बता दें कि दुनिया के कुल पेट्रोलियम का लगभग 20% हिस्सा और भारी मात्रा में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) यहीं से गुजरती है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी (LNG) इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान खुद इसी रूट से अपना तेल एक्सपोर्ट करता है। जहाजों की आवाजाही रुकने से भारत पहुंचने वाली गैस की खेप बीच में ही फंस गई है।
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2. प्लांट पर ड्रोन हमले से LNG का प्रोडक्शन रुका
\r\n\r\nस्थिति तब और बिगड़ गई जब पिछले हफ्ते अमेरिका-इजराइल ने ईरान पर एयर स्ट्राइक की। इसके जवाब में ईरान ने UAE, कतर, कुवैत और सऊदी अरब जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को ड्रोन से निशाना बनाया। इस सैन्य कार्रवाई का खामियाजा गैस उत्पादन को भुगतना पड़ा।
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ईरान के ड्रोन हमले के डर और सुरक्षा कारणों से, भारत को गैस सप्लाई करने वाले सबसे बड़े देश कतर ने अपने प्रमुख LNG प्लांट का प्रोडक्शन अस्थाई रूप से रोक दिया है। इससे भारत में गैस की सप्लाई अचानक से घट गई। गौरतलब है कि भारत अपनी कुल जरूरत की 40% LNG (करीब 2.7 करोड़ टन सालाना) केवल कतर से ही आयात करता है।
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क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 (Essential Commodities Act)?
\r\n\r\nजब पूरे देश में अचानक किसी जरूरी चीज की कमी होने लगती है, तो बाजार में हाहाकार मच जाता है। ऐसे में कुछ व्यापारी स्थिति का फायदा उठाकर जमाखोरी करने लगते हैं, जिससे कीमतें आसमान छूने लगती हैं। इसी को रोकने के लिए सरकार ने अपना सबसे बड़ा कानूनी हथियार इस्तेमाल किया है।
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एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 एक ऐसा केंद्रीय कानून है, जो सरकार को यह असीमित ताकत देता है कि वह किसी भी जरूरी चीज जैसे- अनाज, दालें, खाने का तेल, दवाइयां, फर्टिलाइजर या ईंधन (पेट्रोलियम और गैस) की सप्लाई और कीमतों को अपने कंट्रोल में ले सके। इसे आसान भाषा में 'जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने वाला कानून' कहा जा सकता है।
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हालिया संकट में, सरकार ने इस कानून को लागू करके व्यापारियों और गैस एजेंसियों के लिए स्टॉक की एक सख्त लिमिट तय कर दी है। अब कोई भी एजेंसी या व्यापारी एक तय सीमा से ज्यादा गैस सिलेंडर अपने गोदामों में नहीं भर सकता। इस एक्ट के तहत सरकार ने सभी तेल रिफाइनरियों को स्पष्ट आदेश दिया है कि वे अपने प्रोपेन और ब्यूटेन (Propane and Butane) के स्टॉक का इस्तेमाल केवल घरेलू रसोई गैस (LPG) बनाने के लिए करें और इसे प्लास्टिक या अन्य पेट्रोकेमिकल उत्पाद बनाने के लिए डाइवर्ट न करें।
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कमोडिटी एक्ट लागू होने के बाद 4 कैटेगरी में गैस का बंटवारा
\r\n\r\nचूंकि इस समय देश में जरूरत के हिसाब से पर्याप्त गैस उपलब्ध नहीं है, इसलिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने उपलब्ध गैस को प्राथमिकता के आधार पर बांटने का फैसला किया है। 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' के तहत नेशनल गैस ग्रिड की सप्लाई को 4 मुख्य कैटेगरी में बांटा गया है:
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पहली कैटेगरी (पूरी सप्लाई): घरेलू उपयोग और ट्रांसपोर्ट
\r\n\r\nसरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता आम जनता को राहत देना है। इस कैटेगरी में घर की रसोई गैस (Piped Natural Gas - PNG), सिलेंडर वाली LPG और गाड़ियों में डलने वाली CNG आती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम घरों की रसोई नहीं रुकनी चाहिए और पब्लिक ट्रांसपोर्ट चलता रहना चाहिए। इसलिए इन्हें पहले की तरह उनकी जरूरत की 100% गैस मिलती रहेगी।
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दूसरी कैटेगरी (खाद कारखाने): कृषि सुरक्षा के लिए 70% गैस
\r\n\r\nखाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खाद (Fertilizer) का उत्पादन जरूरी है, और यूरिया बनाने के लिए प्राकृतिक गैस एक प्रमुख कच्चा माल है। खाद बनाने वाली फैक्ट्रियों को उनके पिछले 6 महीने की औसत खपत के आधार पर करीब 70% गैस दी जाएगी। हालांकि, उन्हें कड़ाई से यह साबित करना होगा कि दी गई गैस का इस्तेमाल केवल खाद बनाने में ही हुआ है, किसी अन्य काम में नहीं।
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तीसरी कैटेगरी (बड़े उद्योग): 80% गैस की आपूर्ति
\r\n\r\nनेशनल ग्रिड से जुड़ी बड़ी चाय की फैक्ट्रियों, मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स और दूसरे बड़े उद्योगों को इस संकट काल में उनकी जरूरत की लगभग 80% गैस मिलेगी। बाकी 20% की कटौती उन्हें अपनी उत्पादन क्षमता को एडजस्ट करके पूरी करनी होगी।
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चौथी कैटेगरी (छोटे बिजनेस और होटल): 80% गैस का प्रावधान
\r\n\r\nशहरों के सिटी गैस नेटवर्क (CGD) से जुड़े छोटे कारखानों, होटल और रेस्टोरेंट को भी उनकी पुरानी खपत के हिसाब से लगभग 80% गैस दी जाएगी। हालांकि, कॉमर्शियल सिलेंडर की कमी के कारण इस सेक्टर पर जमीन पर सबसे ज्यादा और नकारात्मक असर पड़ रहा है।
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इन राज्यों में सप्लाई पर सबसे ज्यादा असर
\r\n\r\nभले ही कागजों पर चौथी कैटेगरी के लिए 80% गैस का प्रावधान है, लेकिन असल में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर बाजार से लगभग गायब हो चुके हैं। अलग-अलग राज्यों में स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है:
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उत्तर प्रदेश: बुकिंग के 4-5 दिन बाद भी डिलीवरी नहीं कॉमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई पर अघोषित रोक से यूपी में होटल-रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। तेल कंपनियों ने गैस एजेंसियों को पूरा फोकस सिर्फ घरेलू गैस (LPG) की डिलीवरी पर रखने को कहा है। इसके बावजूद आम लोगों में घबराहट (Panic Buying) का माहौल है। लखनऊ, कानपुर, नोएडा और वाराणसी जैसे बड़े शहरों में कमर्शियल बुकिंग के 4-5 दिन बाद भी गैस डिलीवरी नहीं हो पा रही है।
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महाराष्ट्र: मुंबई में करीब 20% होटल और रेस्टोरेंट बंद महाराष्ट्र के मुंबई, पुणे और नागपुर में कॉमर्शियल गैस की भारी कटौती की गई है। पुणे में तो हालात इतने खराब हो गए कि नगर निगम को गैस आधारित शवदाह गृह भी अस्थायी रूप से बंद करने पड़े। राज्य के करीब 9,000 रेस्टोरेंट्स और बार पर बंद होने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। मुंबई में कॉमर्शियल गैस सप्लाई की किल्लत की वजह से अब तक करीब 20% होटल और रेस्टोरेंट काम बंद कर चुके हैं। मुंबई के प्रमुख होटल एसोसिएशन 'आहार' (AHAR) ने चेतावनी दी है कि अगर सप्लाई तुरंत नहीं सुधरी, तो अगले 48 घंटों में 50% से ज्यादा होटलों के शटर गिर सकते हैं।
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मध्य प्रदेश: कीमत बढ़ने के बाद भी सिलेंडर नदारद मध्य प्रदेश में शादियों का सीजन चल रहा है और ऐसे में गैस न मिलना एक बड़ी त्रासदी बन गया है। होटल और मैरिज गार्डन संचालकों का कहना है कि वे बढ़ी हुई कीमत देने को तैयार हैं, फिर भी सिलेंडर नहीं मिल रहा है। भोपाल में करीब 2000 से ज्यादा मझोले और बड़े होटल-रेस्त्रां हैं, जहां कॉमर्शियल सिलेंडर का इस्तेमाल होता है, और वे सभी ठप होने की कगार पर हैं।
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राजस्थान: होटल-रेस्टोरेंट और टूरिज्म इंडस्ट्री परेशान राजस्थान, जो अपनी टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री के लिए जाना जाता है, वहां होटल संचालकों का कहना है कि गैस का उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। कोयले या लकड़ी पर बड़े पैमाने पर खाना बनाना संभव नहीं है। ऐसे में हर तरह के होटल, मैरिज गार्डन और ढाबों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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कर्नाटक: होटल भी 'जरूरी सेवा', बंद होने से त्राहिमाम बेंगलुरु होटल एसोसिएशन ने सरकार से कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि अगर सप्लाई बहाल नहीं हुई तो शहर के हजारों होटल बंद करने पड़ेंगे। एसोसिएशन ने तर्क दिया है कि होटल इंडस्ट्री भी 'जरूरी सेवाओं' (Essential Services) में आती है, क्योंकि शहर में रहने वाले लाखों छात्र, कामकाजी युवा, सीनियर सिटीजन और मरीज पूरी तरह से होटलों के खाने पर निर्भर रहते हैं।
\r\n\r\nसंकट से निपटने सरकार ने उठाए 5 जरूरी कदम
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भारत में गैस संकट को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं:
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- \r\n हाई-लेवल कमेटी बनाई: संकट की गंभीरता को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL), और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के कार्यकारी निदेशकों की एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है, जो हर दिन देश में सप्लाई की समीक्षा करेगी।\r\n \r\n
- \r\n एसेंशियल कमोडिटी एक्ट लागू: गैस की जमाखोरी और डायवर्जन को पूरी तरह से कंट्रोल करने के लिए केंद्र सरकार ने देशभर में 'एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955' लागू कर दिया है।\r\n \r\n
- \r\n 25 दिन बाद होगी LPG बुकिंग: पैनिक बुकिंग से बचने के लिए घरेलू सिलेंडर के नियमों में बदलाव किया गया है। अब उपभोक्ता के घर एक सिलेंडर डिलीवर होने के बाद, दूसरा सिलेंडर कम से कम 25 दिन बाद ही बुक हो सकेगा।\r\n \r\n
- \r\n OTP और बायोमेट्रिक अनिवार्य: गैस की कालाबाजारी रोकने के लिए डिलीवरी के समय अब एजेंट OTP या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन का सख्ती से इस्तेमाल कर रहे हैं। बिना पहचान के सिलेंडर नहीं दिया जा रहा है।\r\n \r\n
- \r\n LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश: सरकार ने सभी ऑयल रिफाइनरीज को निर्देश दिया है कि वे पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स (जैसे प्लास्टिक निर्माण) की जगह अपना पूरा फोकस LPG उत्पादन बढ़ाने पर लगाएं। इस एक्स्ट्रा गैस का इस्तेमाल सिर्फ घरेलू उपयोग के लिए होगा।\r\n \r\n
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सरकार ने बढ़ाए घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम
\r\n\r\nग्लोबल मार्केट में सप्लाई चेन बाधित होने के कारण गैस के दामों में भी उछाल आया है। सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में 60 रुपए का इजाफा कर दिया है। इसके बाद राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम का घरेलू LPG गैस सिलेंडर अब 913 रुपए में मिल रहा है, जो पहले 853 रुपए का था। बढ़ी हुई कीमतें 7 मार्च से लागू हो चुकी हैं।
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वहीं, कॉमर्शियल सिलेंडरों (19 किग्रा) की बात करें तो, उनके दाम 1 फरवरी को ही 115 रुपए बढ़ा दिए गए थे, जिसके बाद इसका दाम 1883 रुपए हो गया है। सप्लाई शॉर्टेज के बीच इन बढ़ी कीमतों ने व्यापारियों की कमर तोड़ दी है।
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भारत में गैस संकट: कब तक सुधरेंगे हालात?
\r\n\r\nइंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के मुख्य महाप्रबंधक (LPG) के.एम. ठाकुर ने देशवासियों से अपील की है कि "ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है। कृपया पैनिक बुकिंग न करें, देश के पास घरेलू इस्तेमाल के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।" सरकार 'भारत में गैस संकट' को दूर करने के लिए अब कतर और मध्य पूर्व के अलावा अमेरिका (US Gulf Coast) और रूस जैसे देशों से वैकल्पिक LNG कार्गो मंगाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। (Internal link to related article: भारत के ऊर्जा आयात विकल्प और भविष्य की नीतियां)
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वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर G7 देश अपने इमरजेंसी तेल और गैस भंडार (Strategic Reserves) से सप्लाई जारी करने पर चर्चा कर रहे हैं, ताकि ग्लोबल मार्केट में इस अचानक आए ऊर्जा संकट को थोड़ा कम किया जा सके। अल्जीरिया और अन्य गैर-हॉर्मुज रास्तों से भी अतिरिक्त कच्चा तेल और गैस आने की उम्मीद है।
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अंतरराष्ट्रीय युद्ध ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भू-राजनीतिक तनावों का असर सीधे आम आदमी की रसोई तक पहुंचता है। हॉर्मुज जलमार्ग के बंद होने से उपजा भारत में गैस संकट फिलहाल एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। 'आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955' के लागू होने से घरेलू रसोई तो सुरक्षित है, लेकिन व्यापारिक और औद्योगिक क्षेत्र को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। उम्मीद है कि सरकार द्वारा उठाए गए कड़े कदम और वैकल्पिक मार्गों से गैस आयात की रणनीतियां जल्द ही देश को इस अभूतपूर्व संकट से उबारने में सफल होंगी।
Sabse pehle comment karne wale banein.