देश में खाने-पीने का व्यापार करने वाले छोटे और मध्यम दर्जे के दुकानदारों, रिटेलर्स और किराना स्टोर संचालकों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों में ऐतिहासिक और बड़े बदलाव किए हैं। इन FSSAI नए नियम के लागू होने से फूड बिजनेस से जुड़े लाखों लोगों की किस्मत खुल गई है। इस नए बदलाव का सीधा और मुख्य उद्देश्य देश में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (Ease of Doing Business) यानी व्यापार करने को अधिक सुगम और आसान बनाना है। इसके साथ ही छोटे दुकानदारों पर से गैर-जरूरी सरकारी कागजी कार्रवाई (Paperwork) के भारी बोझ को भी कम करना है, ताकि वे बिना किसी मानसिक दबाव के अपना व्यापार बढ़ा सकें।READ ALSO:-मेरठ सुसाइड केस: ब्रह्मपुरी की लवकुश कॉलोनी में डेयरी कर्मचारी का फंदे से लटका मिला शव, इलाके में सनसनी, पुलिस हर एंगल से कर रही जांच
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
लंबे समय से व्यापारी वर्ग सरकार से मांग कर रहा था कि खाद्य सुरक्षा के नियमों को व्यावहारिक बनाया जाए। अब सरकार ने उनकी सुन ली है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा जारी इन FSSAI नए नियम के तहत कई ऐसी शर्तें हटा ली गई हैं, जो छोटे स्तर पर व्यापार करने वालों के लिए किसी सिरदर्द से कम नहीं थीं। आइए इस लेख में विस्तार से समझते हैं कि किन व्यापारियों को क्या छूट मिली है और नियमों में क्या-क्या महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

FSSAI नए नियम: दैनिक स्टॉक रिकॉर्ड रखने की बाध्यता खत्म

\r\n\r\n
सरकार द्वारा जारी किए गए इन FSSAI नए नियम के अनुसार, अब उन सभी खाद्य व्यापारियों को अपनी दुकान या गोदाम का दैनिक लिखित रिकॉर्ड रखने से पूरी तरह छूट दे दी गई है जो खुद किसी भी प्रकार के खाने-पीने के सामान का निर्माण (Manufacturing) नहीं करते हैं। इसका सीधा सा मतलब यह है कि गली-मोहल्लों में किराने की दुकान चलाने वाले, रिटेलर्स (फुटकर विक्रेता), थोक व्यापारी (Wholesalers) और डिस्ट्रीब्यूटर्स को अब अपनी दुकान में रखे हुए हर छोटे-बड़े सामान का रोज-रोज का लिखित हिसाब-किताब नहीं रखना होगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इससे पहले के सख्त नियमों के मुताबिक, सभी लाइसेंसधारी दुकानदारों को 'फर्स्ट इन फर्स्ट आउट' (FIFO - जो सामान पहले आया है, उसे पहले बेचना) या 'फर्स्ट एक्सपायरी फर्स्ट आउट' (FEFO - जिसकी एक्सपायरी डेट नजदीक है, उसे पहले बेचना) के कड़े सिद्धांत पर अनिवार्य रूप से चलना पड़ता था। इसके तहत व्यापारी को हर दिन का पूरा लिखित रिकॉर्ड एक मोटी डायरी या कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज करना जरूरी था। छोटे दुकानदारों के पास न तो इतना समय होता था और न ही संसाधन। लेकिन अब, FSSAI नए नियम लागू होने से दुकानदारों को इस रोजमर्रा के झंझट से पूरी तरह मुक्ति मिल गई है, जिससे वे अपने ग्राहकों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पाएंगे।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

लाइसेंस रिन्यूअल का झंझट हमेशा के लिए खत्म

\r\n\r\n
नीति आयोग (NITI Aayog) की अहम सिफारिशों के आधार पर किए गए इस ऐतिहासिक सुधार के तहत सरकार ने कागजी कार्रवाई को खत्म करने के लिए कुछ और बड़े कदम भी उठाए हैं। इनमें सबसे बड़ी राहत फूड लाइसेंस (Food License) की वैधता को लेकर दी गई है। पहले खाद्य व्यापारियों को हर एक साल या अधिकतम पांच साल की अवधि के बाद अपना फूड लाइसेंस रिन्यू (नवीनीकरण) कराने के लिए सरकारी दफ्तरों के कई चक्कर काटने पड़ते थे। इसमें समय और पैसा दोनों बर्बाद होता था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
लेकिन अब, FSSAI नए नियम के अंतर्गत इस प्रक्रिया को बेहद सरल कर दिया गया है। नए दिशानिर्देशों के अनुसार, अब व्यापारियों को बार-बार रिन्यूअल की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। एक बार जारी होने के बाद लाइसेंस अब हमेशा के लिए मान्य (Lifetime Valid) होंगे। बशर्ते व्यापारी तय समय पर अपनी वार्षिक रिटर्न या मामूली फीस (यदि लागू हो) ऑनलाइन जमा करते रहें। इससे इंस्पेक्टर राज और भ्रष्टाचार पर भी काफी हद तक लगाम लगेगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

बढ़ी टर्नओवर सीमा और रेहड़ी-पटरी वालों को बड़ी राहत

\r\n\r\n
छोटे उद्योगों और असंगठित क्षेत्र को आर्थिक राहत देने के लिए रजिस्ट्रेशन की सालाना कमाई (Annual Turnover) की न्यूनतम सीमा को भी बढ़ा दिया गया है। टर्नओवर लिमिट बढ़ने का अर्थ है कि बहुत छोटे स्तर पर काम करने वाले व्यापारियों को अब महंगे लाइसेंस लेने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि वे सिर्फ एक बेसिक रजिस्ट्रेशन के आधार पर अपना व्यवसाय चला सकेंगे।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इसके अलावा, सड़क किनारे ठेला लगाने वाले, गोलगप्पे या चाट बेचने वाले और अन्य स्ट्रीट फूड वेंडर्स (Street Vendors) के लिए भी FSSAI नए नियम वरदान साबित हुए हैं। इन छोटे वेंडर्स के लिए नगर निगम और FSSAI के दोहरे नियमों की मार को खत्म कर दिया गया है। अब उन्हें केवल एक ही जगह पंजीकृत होना पड़ेगा, जिससे उन्हें बेवजह पुलिस या अधिकारियों के उत्पीड़न का शिकार नहीं होना पड़ेगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

मैन्युफैक्चरर्स और फैक्ट्री मालिकों के लिए नियम रहेंगे सख्त

\r\n\r\n
जहां एक ओर सरकार ने छोटे दुकानदारों और विक्रेताओं पर से कागजी बोझ कम किया है, वहीं यह भी बिल्कुल साफ कर दिया है कि यह राहत सिर्फ और सिर्फ 'बनी-बनाई चीजें बेचने वालों' के लिए है, 'सामान बनाने वालों' के लिए नहीं। FSSAI नए नियम स्पष्ट करते हैं कि जो कंपनियां, फैक्ट्रियां या कुटीर उद्योग खाने-पीने की चीजें खुद बनाते हैं (जैसे बेकरी, नमकीन फैक्ट्री, दुग्ध उत्पादक आदि), उन्हें पहले की तरह ही अपने हर एक उत्पाद का पूरा कच्चा और पक्का रिकॉर्ड रखना होगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
सरकार का यह निर्णय आम जनता के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए लिया गया है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि बाजार में बिकने वाले भोजन की शुद्धता, हाइजीन, सुरक्षा और क्वालिटी स्टैंडर्ड्स से किसी भी कीमत पर कोई समझौता न हो। मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को कच्चे माल की खरीद से लेकर उत्पाद की पैकेजिंग तक का हर डेटा FSSAI की गाइडलाइंस के अनुसार मेंटेन करना होगा। यदि कोई निर्माता मिलावट या नियमों की अनदेखी करता पाया गया, तो उस पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान यथावत रहेगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
कुल मिलाकर देखा जाए तो, केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए ये FSSAI नए नियम भारतीय खाद्य खुदरा बाजार (Food Retail Market) के लिए एक मील का पत्थर साबित होंगे। दैनिक स्टॉक मेंटेन करने की छूट, स्थायी लाइसेंस की सुविधा और दोहरे नियमों से आजादी मिलने से छोटे व्यापारियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा। ये FSSAI नए नियम न सिर्फ 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे, बल्कि देश के आर्थिक विकास में छोटे दुकानदारों की भागीदारी को भी और अधिक मजबूत करेंगे।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
स्वास्थ्य मंत्रालय और FSSAI ने छोटे खाद्य व्यापारियों, किराना दुकानदारों और रिटेलर्स को बड़ी राहत देते हुए दैनिक स्टॉक रिकॉर्ड (FIFO/FEFO) रखने की अनिवार्यता खत्म कर दी है। नीति आयोग की सिफारिशों पर फूड लाइसेंस के बार-बार रिन्यूअल की प्रक्रिया को भी समाप्त कर इसे स्थायी मान्यता दे दी गई है। साथ ही, स्ट्रीट वेंडर्स को दोहरे नियमों से मुक्त किया गया है। हालांकि, खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए फूड मैन्युफैक्चरर्स और फैक्टरियों के लिए पुराने सख्त नियम पहले की तरह ही लागू रहेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें