नई दिल्ली/मुंबई। भारत का एफएमसीजी (FMCG - Fast Moving Consumer Goods) सेक्टर इस समय भारी बदलाव के दौर से गुजर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में स्थानीय और क्षेत्रीय (Regional) ब्रांड्स ने बड़ी-बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की नाक में दम कर दिया है। इसी कड़ी में, देश की सबसे पुरानी और दिग्गज एफएमसीजी कंपनियों में शुमार ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज (Britannia Industries) ने बाजार में अपनी बादशाहत कायम रखने के लिए एक बड़ा रणनीतिक बदलाव किया है।READ ALSO:-फिर डराने लगा कोरोना! भारत में ओमिक्रॉन के नए 'RF.5' वेरिएंट की दस्तक, जानिए शरीर को कैसे खोखला कर रहा है यह वायरस
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अब तक पूरे देश में 'एक उत्पाद, एक रणनीति' (One Size Fits All) के फॉर्मूले पर चलने वाली ब्रिटानिया ने अब क्षेत्रीय ब्रांड्स से सीधा मुकाबला करने के लिए अपनी रणनीति को पूरी तरह से 'लोकल' (Local) कर दिया है। कंपनी का मानना है कि अलग-अलग राज्यों में स्थानीय कंपनियां तेजी से मजबूत हुई हैं और उपभोक्ताओं की पसंद भी उनके क्षेत्र के अनुसार बदल रही है। ऐसे में कंपनी अब हर क्षेत्र की जरूरत और स्वाद के हिसाब से अपने उत्पाद बाजार में उतारेगी। आइए विस्तार से समझते हैं ब्रिटानिया के इस नए मास्टरप्लान को।
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'एक देश, एक रणनीति' का फॉर्मूला हुआ पुराना

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भारत विविधताओं का देश है। यहां हर सौ किलोमीटर पर भाषा, संस्कृति और सबसे महत्वपूर्ण—खान-पान का स्वाद बदल जाता है। एफएमसीजी सेक्टर की बड़ी कंपनियों ने लंबे समय तक पूरे देश में एक ही तरह के उत्पाद बेचे। लेकिन, अब यह फॉर्मूला काम नहीं कर रहा है।
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दक्षिण भारत के ग्राहकों को जो स्नैक्स या बिस्कुट पसंद आते हैं, जरूरी नहीं कि वे उत्तर भारत या पूर्वोत्तर के लोगों को भी पसंद आएं। इसी अंतर को समझते हुए ब्रिटानिया ने यह स्वीकार किया है कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक एक ही मार्केटिंग और प्रोडक्ट स्ट्रेटजी लागू करना अब मुनाफे का सौदा नहीं है। इसके बजाय, अब कंपनी की पूरी मार्केटिंग और उत्पाद निर्माण प्रक्रिया क्षेत्र-केंद्रित (Region-Centric) होगी।
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क्षेत्रीय ब्रांड्स की बढ़ती ताकत और ब्रिटानिया की चुनौती

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पिछले कुछ वर्षों में, विशेषकर कोविड महामारी के बाद, स्थानीय एफएमसीजी ब्रांड्स ने जबरदस्त वापसी की है। इन क्षेत्रीय कंपनियों के पास कुछ खास फायदे होते हैं:
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    कम लागत: इनका सप्लाई चेन छोटा होता है, जिससे लागत कम आती है।
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    सस्ते उत्पाद: बड़ी कंपनियों के मुकाबले ये अपने उत्पाद 10 से 20 प्रतिशत तक सस्ते बेचते हैं।
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    स्थानीय स्वाद की गहरी समझ: ये अपने क्षेत्र के लोगों के स्वाद और पसंद को बहुत बारीकी से समझते हैं।
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    मजबूत नेटवर्क: इनका अपने क्षेत्र के छोटे दुकानदारों (Kirana Stores) के साथ सीधा और मजबूत संपर्क होता है।
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इन्हीं खूबियों के दम पर क्षेत्रीय कंपनियों ने कई बाजारों में ब्रिटानिया जैसी बड़ी कंपनियों के मार्केट शेयर (Market Share) में सेंध लगाई है। इसी चुनौती से निपटने के लिए अब ब्रिटानिया ने अपनी कार्यप्रणाली को अधिक लचीला (Flexible) बनाने का फैसला किया है।
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एमडी और सीईओ रक्षित हरगावे का विजन: टीमों को मिली आजादी

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ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज के रणनीतिक बदलावों पर बात करते हुए कंपनी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (MD & CEO) रक्षित हरगावे ने स्पष्ट किया कि बाजार में बने रहने के लिए विकेंद्रीकरण (Decentralization) बहुत जरूरी है।
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उन्होंने कहा, "क्षेत्रीय कंपनियों ने कई बाजारों में अपनी बहुत मजबूत पकड़ बना ली है। इसलिए ब्रिटानिया अब स्थानीय प्रतिस्पर्धियों से मुकाबला करने के लिए अधिक लचीली और क्षेत्र-केंद्रित रणनीति अपना रही है।"
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इस नई रणनीति का सबसे बड़ा पहलू यह है कि अब ब्रिटानिया के फैसले सिर्फ हेडक्वार्टर (केंद्रीय स्तर) में बैठकर नहीं लिए जाएंगे। कंपनी ने अपनी 'क्षेत्रीय टीमों' (Regional Teams) को ज्यादा अधिकार और शक्तियां सौंप दी हैं। अब हर राज्य की टीम वहां की डिमांड, प्रतिस्पर्धियों की रणनीति और ग्राहकों की पसंद के आधार पर तुरंत फैसले ले सकेगी। इससे कंपनी बाजार में किसी भी नए ट्रेंड पर तेजी से प्रतिक्रिया (Quick Response) दे पाएगी।
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लोकल स्वाद और ग्रामीण बाजारों पर खास नजर

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रक्षित हरगावे के मुताबिक, स्थानीय स्वाद, खान-पान की आदतों और ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही नए उत्पादों की योजना तैयार की जाएगी। उदाहरण के लिए, अगर किसी राज्य में तीखे या मसालेदार स्नैक्स ज्यादा पसंद किए जाते हैं, तो वहां उसी फ्लेवर को प्रमुखता से लॉन्च किया जाएगा। वहीं, जहां मीठे की खपत ज्यादा है, वहां बेकरी और बिस्कुट के नए वेरिएंट्स पेश किए जाएंगे। यह रणनीति विशेष रूप से छोटे शहरों (Tier 2 और Tier 3) तथा ग्रामीण बाजारों में ब्रिटानिया की पैठ को और मजबूत करने में मदद करेगी, जहां अभी भी स्थानीय ब्रांड्स का दबदबा है।
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क्विक कॉमर्स (Quick Commerce): बिक्री का नया और तेज हथियार

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सिर्फ उत्पाद ही नहीं, बल्कि उत्पादों को ग्राहकों तक पहुंचाने के तरीके में भी भारी बदलाव आ रहा है। ब्रिटानिया ने भांप लिया है कि 'क्विक कॉमर्स' (जैसे- Blinkit, Zepto, Swiggy Instamart) अब केवल भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान है।
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शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ता अब किराने का सामान खरीदने के लिए हफ्तों का इंतजार नहीं करते, उन्हें 10 मिनट में डिलीवरी चाहिए। ब्रिटानिया इस प्लेटफॉर्म को एक बड़े अवसर के रूप में देख रही है।
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    प्रीमियम उत्पादों की बिक्री: क्विक कॉमर्स के जरिए कंपनी अपने नए, महंगे और प्रीमियम उत्पादों को ग्राहकों तक सबसे पहले पहुंचाना चाहती है।
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    डिजिटल विस्तार: बदलती उपभोक्ता आदतों को देखते हुए कंपनी डिजिटल और ऑनलाइन बिक्री (E-commerce) चैनलों पर भी अपना निवेश और विज्ञापन बजट काफी बढ़ा रही है।
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नवाचार और विस्तार

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ब्रिटानिया का यह कदम बताता है कि एफएमसीजी बाजार में अब केवल एक बड़े 'ब्रांड नेम' के सहारे जिंदा नहीं रहा जा सकता। कंपनी का स्पष्ट कहना है कि आने वाले समय में उसका पूरा फोकस उत्पादों में नवाचार (Innovation), बेहतर वितरण नेटवर्क (Distribution Network) और क्षेत्रीय बाजारों में अपनी उपस्थिति को मजबूत करने पर रहेगा।
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ब्रिटानिया की यह नई और आक्रामक रणनीति इस बात का संकेत है कि भारतीय बाजार में असली लड़ाई अब 'लोकल बनाम ग्लोबल' की है। स्थानीय जरूरतों के अनुसार ढाली गई यह रणनीति, तेज निर्णय प्रक्रिया और क्विक कॉमर्स पर फोकस, ब्रिटानिया को न केवल क्षेत्रीय ब्रांड्स से एक कदम आगे रखने में मदद करेगा, बल्कि देशभर में उसकी बाजार हिस्सेदारी (Market Share) को भी नए शिखर पर ले जाएगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि स्थानीय ब्रांड्स ब्रिटानिया के इस बड़े दांव का जवाब कैसे देते हैं।
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