नई दिल्ली: देश भर के बैंक ग्राहकों के लिए एक जरूरी खबर है। यदि आपने कल यानी 12 फरवरी 2026 (गुरुवार) के लिए कोई महत्वपूर्ण बैंकिंग कार्य निर्धारित किया है, तो आपको अपनी योजनाओं में बदलाव करना पड़ सकता है। प्रमुख बैंक यूनियनों ने कल देशव्यापी हड़ताल (Bank Strike) का आह्वान किया है, जिससे सरकारी बैंकों के कामकाज पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है।READ ALSO:-यूपी विधानसभा में 'विक्ट्री साइन' और 2027 की हुंकार: योगी सरकार ने पेश किया 9 लाख करोड़ का ऐतिहासिक 'संकल्प-पत्र', बेटियों की डोली के लिए अब मिलेंगे 1 लाख रुपये
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अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (AIBEA), अखिल भारतीय बैंक अधिकारी संघ (AIBOA) और बैंक कर्मचारी फेडरेशन ऑफ इंडिया (BEFI) जैसे बड़े संगठनों ने इस हड़ताल का नेतृत्व किया है। इनका साथ देश के 10 बड़े केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भी दिया है।
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इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि हड़ताल क्यों हो रही है, इसका आपकी बैंकिंग जरूरतों पर क्या असर होगा, और आप इस दौरान अपने वित्तीय लेन-देन कैसे संभाल सकते हैं।
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SBI और IDBI ने जारी किया अलर्ट

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देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने अपने ग्राहकों को पहले ही सचेत कर दिया है। एसबीआई ने स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई जानकारी में कहा है कि हालांकि बैंक ने अपनी शाखाओं में कामकाज सुचारू रखने के लिए आवश्यक प्रबंध किए हैं, लेकिन हड़ताल के कारण सेवाएं "सीमित रूप से प्रभावित" हो सकती हैं।
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इसी तरह, IDBI बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा को भी यूनियनों की ओर से हड़ताल का नोटिस मिला है। इन बैंकों ने भी स्वीकार किया है कि कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण शाखाओं में चेक क्लीयरेंस, नकद जमा और निकासी जैसी सेवाएं बाधित हो सकती हैं।
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हड़ताल का कारण: नए लेबर कोड और '5-डे वर्क वीक' की मांग

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इस हड़ताल के पीछे दो प्रमुख कारण हैं जो सीधा बैंक कर्मचारियों और उनके भविष्य से जुड़े हैं।
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1. नए लेबर कोड (New Labour Codes) का विरोध: केंद्र सरकार द्वारा लाए गए 4 नए लेबर कोड (श्रम संहिता) इस हड़ताल का मुख्य केंद्र बिंदु हैं। यूनियनों का आरोप है कि ये नए नियम कर्मचारी विरोधी हैं।
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    पुराने कानूनों का अंत: ये 4 नए कोड पुराने 29 श्रम कानूनों की जगह लेंगे।
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    अधिकारों में कटौती: यूनियनों का कहना है कि नए नियमों से 'हायर एंड फायर' (नौकरी से निकालने की प्रक्रिया) आसान हो जाएगी। साथ ही, ट्रेड यूनियनों का रजिस्ट्रेशन कराना और अपनी मांगों के लिए हड़ताल करना कानूनी रूप से अधिक जटिल हो जाएगा।
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    निजीकरण का डर: बैंक यूनियनों को डर है कि ये सुधार अंततः सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के निजीकरण की ओर ले जाएंगे।
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2. हफ्ते में 5 दिन काम (5-Day Work Week): लंबे समय से बैंक कर्मचारी मांग कर रहे हैं कि बैंकिंग सेक्टर में भी '5-डे वर्क वीक' लागू किया जाए।
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    वर्तमान स्थिति: अभी बैंकों में हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी होती है, जबकि पहले और तीसरे शनिवार को पूरा दिन काम होता है।
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    वर्क-लाइफ बैलेंस: यूनियनों का तर्क है कि डिजिटल बैंकिंग के दौर में काम का दबाव बहुत बढ़ गया है, जिससे कर्मचारियों का मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन प्रभावित हो रहा है। मार्च 2024 में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) के साथ समझौते के बावजूद, सरकार ने अभी तक इसे आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की है, जिससे कर्मचारियों में रोष है।
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आम आदमी पर हड़ताल का सीधा असर

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भले ही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने 12 फरवरी को आधिकारिक छुट्टी घोषित नहीं की है, लेकिन जब कर्मचारी ही सीट पर नहीं होंगे, तो बैंक खुले होने का भी कोई खास फायदा ग्राहकों को नहीं मिलेगा। यहाँ जानिए किन सेवाओं पर ताला लग सकता है:
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    कैश ट्रांजेक्शन (नकद लेन-देन): बैंक शाखाओं में कैश जमा करना या निकालना सबसे मुश्किल काम होगा। कैश काउंटर पर स्टाफ की कमी के कारण लंबी लाइनें लग सकती हैं या काउंटर बंद भी मिल सकते हैं।
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    चेक क्लीयरेंस: चेक क्लियरिंग हाउस का काम सरकारी बैंकों के नेटवर्क पर बहुत निर्भर करता है। 12 फरवरी को जमा किए गए चेक को क्लियर होने में सामान्य से 2-3 दिन अधिक का समय लग सकता है।
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    केवाईसी और खाता खुलवाना: पासबुक अपडेट, केवाईसी (KYC) अपडेशन, नया खाता खुलवाना या एफडी (FD) रिन्यू कराने जैसे गैर-वित्तीय कार्य कल के लिए टाल देना ही बेहतर होगा।
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    लोन प्रोसेसिंग: यदि आपका कोई होम लोन या कार लोन प्रोसेस में है और आपको 12 तारीख को डिस्बर्समेंट (भुगतान) की उम्मीद थी, तो इसमें देरी होना तय है।
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एटीएम सेवा: क्या कैश मिलेगा?

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तकनीकी रूप से एटीएम सेवा हड़ताल से सीधे प्रभावित नहीं होती क्योंकि इनका प्रबंधन अक्सर निजी थर्ड-पार्टी एजेंसियों द्वारा किया जाता है। हालांकि, समस्या कैश रिफिलिंग (पैसा डालने) की हो सकती है। यदि हड़ताल लंबी खिंचती है या पिछले दिन कैश नहीं डाला गया है, तो रिहायशी इलाकों और छोटे शहरों के एटीएम 12 फरवरी की दोपहर तक खाली हो सकते हैं।
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सुझाव: किसी भी असुविधा से बचने के लिए आज ही (11 फरवरी) अपनी जरूरत का कैश निकाल कर रख लें।
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राहत की खबर: ये सेवाएं रहेंगी चालू

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हड़ताल के बीच ग्राहकों के लिए राहत की बात यह है कि डिजिटल इंडिया के दौर में बैंक बंद होने का मतलब 'काम ठप होना' नहीं है। निम्नलिखित सेवाएं पूरी तरह चालू रहेंगी:
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    इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल ऐप: आप अपने बैंक के ऐप (YONO SBI, PNB One आदि) के जरिए फंड ट्रांसफर (IMPS, NEFT, RTGS) कर सकते हैं।
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    UPI सेवाएं: गूगल पे (Google Pay), फोनपे (PhonePe), पेटीएम (Paytm) और भीम यूपीआई (BHIM UPI) बिना किसी रुकावट के काम करेंगे। सब्जी वाले से लेकर मॉल तक, हर जगह भुगतान संभव होगा।
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    प्राइवेट बैंक: एचडीएफसी (HDFC), आईसीआईसीआई (ICICI), एक्सिस (Axis) और कोटक महिंद्रा जैसे निजी क्षेत्र के बैंकों पर इस हड़ताल का न्यूनतम असर होगा। इनकी शाखाएं और कामकाज सामान्य रूप से चलते रहेंगे क्योंकि इनकी यूनियनें अक्सर केंद्रीय हड़ताल में शामिल नहीं होती हैं।
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लेबर कोड पर सरकार का पक्ष

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जहाँ एक ओर यूनियनें इसका विरोध कर रही हैं, वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि नए लेबर कोड भारत में व्यापार करने की सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ाएंगे। सरकार के अनुसार, पुराने 29 कानून जटिल थे और आज के डिजिटल युग के अनुकूल नहीं थे। नए कोड से श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा (Social Security) का लाभ संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों में मिलेगा। सरकार का दावा है कि इससे निवेश बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
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ग्राहक क्या करें?

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12 फरवरी की बैंक हड़ताल निश्चित रूप से बैंकिंग सेवाओं में व्यवधान पैदा करेगी। विशेषकर सरकारी बैंकों (PSBs) के ग्राहकों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
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यूनियनों की '5-डे वर्क वीक' और नए लेबर कोड को रद्द करने की मांग कितनी जल्दी पूरी होती है, यह भविष्य के गर्भ में है। लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए, समझदारी इसी में है कि आप डिजिटल बैंकिंग का अधिकतम उपयोग करें। चेक या डिमांड ड्राफ्ट (DD) जैसे कार्यों को शुक्रवार (13 फरवरी) तक के लिए टाल दें। निजी बैंकों के ग्राहक निश्चिंत रह सकते हैं, लेकिन सरकारी बैंक के ग्राहकों को थोड़ा धैर्य रखना होगा।
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सारांश: 12 फरवरी 2026 को AIBEA और अन्य यूनियनों द्वारा बुलाई गई बैंक हड़ताल के कारण SBI और IDBI समेत कई सरकारी बैंकों में कामकाज प्रभावित रहेगा। यह हड़ताल नए लेबर कोड और 5-डे वर्क वीक की मांग को लेकर है। डिजिटल सेवाएं (UPI, Net Banking) और प्राइवेट बैंक चालू रहेंगे, लेकिन शाखाओं में नकद निकासी और चेक क्लीयरेंस में दिक्कत आ सकती है।
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