बिजनौर (ब्यूरो रिपोर्ट): उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग (UPPCL) द्वारा लगाए जा रहे प्रीपेड स्मार्ट मीटरों (Prepaid Smart Meters) को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। सरकार इसे बिजली चोरी रोकने और बिलिंग प्रणाली को पारदर्शी बनाने का एक बड़ा कदम बता रही है, लेकिन जमीनी हकीकत पर यह आम जनता, विशेषकर दिहाड़ी मजदूरों और गरीब परिवारों के लिए एक बड़ा 'आर्थिक झटका' साबित हो रहा है।READ ALSO:-यूपी में मौसम का रौद्र रूप: आंधी-बारिश और ओलावृष्टि से कांपा प्रदेश, 3 बच्चों की मौत; बाल-बाल बचे दोनों डिप्टी सीएम
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बिजनौर जिला मुख्यालय (कलेक्ट्रेट) पर उस समय भारी हंगामा और गहमागहमी का माहौल बन गया, जब शहर की दर्जनों आक्रोशित महिलाएं अपने हाथों में बिजली के बिल और ज्ञापन लेकर प्रदर्शन करने पहुंच गईं। इन महिलाओं का सीधा आरोप था कि स्मार्ट मीटर उनके लिए 'सुविधा' कम और 'मुसीबत' ज्यादा बन गए हैं।
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क्या है महिलाओं का मुख्य आरोप और परेशानी?

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कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने मीडिया और प्रशासनिक अधिकारियों के सामने अपना दर्द साझा किया। महिलाओं का कहना था कि जब से उनके घरों में पुराने (पोस्टपेड) मीटर हटाकर नए स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, तब से उनका मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न शुरू हो गया है।
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मुख्य शिकायतें इस प्रकार हैं:

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    तेजी से कटता है बैलेंस: महिलाओं का आरोप है कि स्मार्ट मीटर बहुत तेज चलते हैं। मजदूर वर्ग के लोग जो बमुश्किल 100 या 200 रुपये का रिचार्ज कराते हैं, उनका बैलेंस महज दो से तीन दिन में ही 'शून्य' (Zero) हो जाता है।
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    बिना सूचना के कट जाती है बिजली: जैसे ही मीटर का बैलेंस खत्म होता है, घर की बिजली अपने आप कट जाती है। भीषण गर्मी और उमस के बीच अचानक पंखे बंद हो जाने से छोटे-छोटे बच्चों और घर के बुजुर्गों का गर्मी से बुरा हाल हो जाता है।
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    आर्थिक तंगी: रोज कमाने और रोज खाने वाले परिवारों के लिए यह संभव नहीं है कि वे हर दूसरे या तीसरे दिन बिजली का रिचार्ज करवा सकें। पुराने मीटरों में महीने के अंत में बिल आता था, जिसे चुकाने के लिए उन्हें कुछ मोहलत मिल जाती थी।
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पूर्व सांसद कुंवर भारतेंद्र सिंह का मिला समर्थन

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महिलाओं का यह प्रदर्शन तब और भी ज्यादा प्रभावी और चर्चा का विषय बन गया, जब बिजनौर के पूर्व सांसद कुंवर भारतेंद्र सिंह (Former MP Kunwar Bhartendra Singh) मौके पर पहुंच गए। महिलाओं की परेशानी और उनकी बेबसी को देखते हुए पूर्व सांसद ने उनकी आवाज में अपनी आवाज मिलाई।
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भारतेंद्र सिंह ने खुद नेतृत्व करते हुए आक्रोशित महिलाओं के जत्थे को साथ लिया और सीधे जिलाधिकारी (DM) कार्यालय की ओर कूच किया। पूर्व सांसद का कहना था कि सरकारी योजनाएं जनता की भलाई के लिए होनी चाहिए, न कि उन्हें प्रताड़ित करने के लिए। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से स्पष्ट रूप से कहा कि इस भीषण गर्मी में गरीब परिवारों की बिजली इस तरह से काटना पूरी तरह से अमानवीय है और इस तकनीकी खामी का तुरंत कोई व्यावहारिक समाधान निकाला जाना चाहिए।
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एसडीएम सदर रितु रानी ने लिया ज्ञापन, दिया आश्वासन

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कलेक्ट्रेट पर चल रहे इस उग्र प्रदर्शन और पूर्व सांसद की मौजूदगी को देखते हुए जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आया। प्रशासन की तरफ से उप जिलाधिकारी (SDM Sadar) रितु रानी ने अपने कार्यालय से बाहर आकर प्रदर्शनकारी महिलाओं और पूर्व सांसद से मुलाकात की।
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महिलाओं ने एसडीएम रितु रानी को अपनी समस्याओं से अवगत कराते हुए जिलाधिकारी को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन (Memorandum) सौंपा। इस ज्ञापन में मुख्य रूप से स्मार्ट मीटरों को उखाड़कर दोबारा से पुराने मीटर लगाने या फिर टैरिफ की दरों में सुधार करने की मांग की गई है।
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एसडीएम रितु रानी का आधिकारिक बयान: इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए एसडीएम सदर रितु रानी ने बताया, "कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन करने आई महिलाओं के सामने वास्तव में स्मार्ट मीटरों को लेकर कुछ गंभीर व्यावहारिक समस्याएं हैं। महिलाओं ने मुझे एक लिखित ज्ञापन सौंपा है, जिसमें उन्होंने बार-बार बिजली कटने और ज्यादा बिल आने की शिकायत की है। हमने उनकी बातों को बहुत ध्यान से सुना है। इस ज्ञापन को बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों (XEN/SE) और शासन स्तर के सक्षम अधिकारियों तक तुरंत पहुंचा दिया जाएगा, ताकि मामले की तकनीकी जांच कराकर नियमानुसार उचित कार्रवाई की जा सके।"
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स्मार्ट मीटर बनाम पुराना मीटर: क्यों हो रहा है इतना बवाल?

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जनता के इस आक्रोश को समझने के लिए नए और पुराने सिस्टम के बीच के अंतर को समझना बेहद जरूरी है:
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आगे क्या? प्रशासन और बिजली विभाग के सामने बड़ी चुनौती
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बिजनौर कलेक्ट्रेट का यह प्रदर्शन सिर्फ एक झांकी है; सच्चाई यह है कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों से स्मार्ट मीटरों को लेकर इसी तरह की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। एक तरफ सरकार प्रदेश को 'स्मार्ट' बनाने की दिशा में काम कर रही है, लेकिन दूसरी तरफ तकनीकी खामियों और उपभोक्ता जागरूकता की कमी के कारण यह योजना विवादों में घिरती जा रही है।
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अब गेंद बिजनौर जिला प्रशासन और बिजली विभाग (ऊर्जा निगम) के पाले में है। यह देखना दिलचस्प होगा कि एसडीएम रितु रानी के माध्यम से उच्चाधिकारियों तक पहुंचा यह ज्ञापन क्या कोई सकारात्मक परिणाम ला पाता है? क्या बिजली विभाग इन स्मार्ट मीटरों की कैलिब्रेशन (Calibration) और तेज रीडिंग की जांच कराएगा? या फिर इन गरीब महिलाओं को गर्मी के इस मौसम में यूं ही अंधेरे में अपने दिन गुजारने पड़ेंगे?
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फिलहाल, पूर्व सांसद कुंवर भारतेंद्र सिंह के हस्तक्षेप से महिलाओं को न्याय की एक उम्मीद जरूर बंधी है। पूरे शहर की नजरें अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
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