नूरपुर/बिजनौर (वरिष्ठ संवाददाता): मंगलवार, 17 फरवरी 2026 की सुबह बिजनौर जिले के नूरपुर विकास खंड के लिए एक सामान्य सुबह नहीं थी। आज सूरज की किरणें एक नई उम्मीद और सैकड़ों परिवारों के लिए राहत का पैगाम लेकर आई थीं। नूरपुर स्थित परी गार्डन मंडप (Pari Garden Mandap) को दुल्हन की तरह सजाया गया था। शहनाई की गूंज, ढोल की थाप और हजारों लोगों की मौजूदगी ने इस स्थान को एक उत्सव स्थल में तब्दील कर दिया था।READ ALSO:-बिजनौर: नजीबाबाद में 'शोले' जैसा सीन; चलती टैक्सी की छत पर चढ़ा नग्न युवक, 30 मिनट तक हाईवे पर मचा हड़कंप, वीडियो देख सहम गए लोग
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मौका था—उत्तर प्रदेश सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी और जनकल्याणकारी योजनाओं में से एक 'मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना' (Mukhyamantri Samuhik Vivah Yojana) के तहत आयोजित भव्य विवाह समारोह का।
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इस ऐतिहासिक दिन पर, धर्म और जाति की दीवारों को ढहाते हुए 235 जोड़ों ने एक ही छत के नीचे, एक ही समय पर अपने नए जीवन की शुरुआत की। इनमें 200 हिंदू जोड़ों ने अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए, तो वहीं 35 मुस्लिम जोड़ों ने शरियत के मुताबिक निकाह कबूल किया।
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इस महाआयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में बिजनौर भाजपा के कद्दावर नेता और जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह उर्फ बॉबी तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में नूरपुर की ओजस्वी ब्लॉक प्रमुख आकांक्षा चौहान ने शिरकत की।
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यह रिपोर्ट केवल एक विवाह समारोह का विवरण नहीं है, बल्कि यह उस बदलते उत्तर प्रदेश की कहानी है जहाँ सरकार गरीब की बेटी को बोझ नहीं, बल्कि सम्मान मानती है। आइए, इस आयोजन के हर पहलू पर विस्तार से नजर डालते हैं।
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कार्यक्रम का आगाज: स्वागत और परंपरा का निर्वहन
\r\n\r\nसुबह 10 बजे से ही परी गार्डन में वर और वधु पक्ष के लोगों का तांता लगना शुरू हो गया था। प्रशासन द्वारा पहले से ही गेट पर रजिस्ट्रेशन और सत्यापन की व्यवस्था की गई थी ताकि कोई अव्यवस्था न हो।
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अतिथियों का आगमन: कार्यक्रम की गरिमा तब और बढ़ गई जब मुख्य अतिथि भूपेंद्र सिंह उर्फ बॉबी का काफिला विवाह स्थल पर पहुंचा। वहां पहले से मौजूद ब्लॉक प्रमुख आकांक्षा चौहान और खंड विकास अधिकारी (BDO) डॉ. दिनेश पाल शर्मा ने उनकी अगवानी की।
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- \r\n परंपरा के अनुसार, आकांक्षा चौहान ने भूपेंद्र सिंह को भव्य पुष्पगुच्छ देकर उनका स्वागत किया।\r\n \r\n
- \r\n मंच पर मौजूद अन्य गणमान्य व्यक्तियों और वरिष्ठ भाजपा नेताओं का भी माला पहनाकर और पटका ओढ़ाकर सम्मान किया गया।\r\n \r\n
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दीप प्रज्ज्वलन और माल्यार्पण के साथ कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ हुआ, जिसके बाद पंडाल में मौजूद हजारों लोगों ने भारत माता के जयकारे लगाए।
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भाषण और संदेश: "गरीब के आँसू पोंछना ही सरकार का धर्म"
\r\n\r\nमंच से वक्ताओं ने न केवल नवदंपतियों को आशीर्वाद दिया, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार की उन नीतियों पर भी प्रकाश डाला जो समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन को बदल रही हैं।
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(A) ब्लॉक प्रमुख आकांक्षा चौहान का भावुक संबोधन
\r\n\r\nनूरपुर की ब्लॉक प्रमुख आकांक्षा चौहान, जो अपने सक्रिय कार्यशैली के लिए जानी जाती हैं, ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इसे महिला सशक्तिकरण का पर्व बताया।
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उन्होंने कहा:
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n"आज का दिन मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से भी बहुत भावुक करने वाला है। एक जनप्रतिनिधि के तौर पर जब हम सड़कों या नाली का निर्माण कराते हैं, तो वह विकास दिखता है, लेकिन जब हम किसी गरीब बेटी के हाथ पीले कराते हैं, तो वह 'आत्मिक विकास' होता है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना माननीय योगी आदित्यनाथ जी के दिल के सबसे करीब है। नूरपुर ब्लॉक ने आज यह साबित कर दिया है कि हम सरकार की मंशा के अनुरूप हर गरीब परिवार के साथ खड़े हैं। 235 बेटियों की विदाई आज इस मंडप से हो रही है, लेकिन वे ससुराल में खुश रहें, यही हमारा आशीर्वाद है।"\r\n
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(B) भाजपा जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह 'बॉबी' का विजनरी भाषण
\r\n\r\nमुख्य अतिथि भूपेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में 'डबल इंजन' सरकार की उपलब्धियों को गिनाया और इस योजना को सामाजिक क्रांति बताया।
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उनके भाषण के मुख्य अंश:
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- \r\n सरकार अभिभावक की भूमिका में: "पहले गरीब बाप अपनी बेटी की शादी के लिए साहूकार से कर्ज लेता था और पूरी जिंदगी उसे चुकाने में खपा देता था। आज योगी सरकार ने उस बाप के कंधों का बोझ अपने सिर ले लिया है। आज सरकार अभिभावक बनकर खड़ी है।"\r\n \r\n
- \r\n अंत्योदय का सपना: "पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का अंत्योदय का सपना यही था—कि समाज के सबसे गरीब व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान आए। यह सामूहिक विवाह उसी सपने को साकार कर रहा है।"\r\n \r\n
- \r\n योजना का स्वरूप: उन्होंने बताया कि सरकार इस योजना के तहत केवल शादी ही नहीं कराती, बल्कि 51,000 रुपये की राशि खर्च करती है। इसमें से 35,000 रुपये सीधे बेटी के खाते में जाते हैं, 10,000 रुपये का सामान (उपहार) दिया जाता है और 6,000 रुपये आयोजन पर खर्च होते हैं। यह पारदर्शिता ही इस सरकार की पहचान है।\r\n \r\n
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वह अद्भुत दृश्य: जब एक साथ उठे सैकड़ों हाथ दुआ में
\r\n\r\nसमारोह का सबसे खूबसूरत पहलू वह "गंगा-जमुनी तहजीब" थी, जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश की पहचान रही है। परी गार्डन का विशाल प्रांगण दो हिस्सों में बंटा हुआ नजर आया, लेकिन भावनाएं एक थीं।
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- \r\n वैदिक मंत्रोच्चार: एक तरफ शांतिकुंज हरिद्वार से आए विद्वान ब्राह्मणों और पुरोहितों ने 200 हवन कुंडों के सामने वर-वधु को बैठाया। मंत्रों की गूंज के साथ अग्नि प्रज्वलित हुई। लाजा होम, सप्तपदी और सिंदूर दान की रस्में निभाई गईं। वातावरण में धूप और घी की सुगंध फैल गई।\r\n \r\n
- \r\n निकाह की रस्म: ठीक उसी समय, दूसरी तरफ मुस्लिम समाज के मौलानाओं और काजियों ने 35 मुस्लिम जोड़ों का निकाह पढ़ाया। गवाहों की मौजूदगी में जब दूल्हे ने "कुबूल है" कहा, तो वहां मौजूद लोगों ने मुबारकबाद दी।\r\n \r\n
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एक ही समय पर संस्कृत के श्लोक और अरबी की आयतें हवा में गूंज रही थीं। यह दृश्य उन तमाम लोगों के लिए एक सबक था जो समाज को बांटने की कोशिश करते हैं। यहाँ केवल प्रेम और आशीर्वाद की भाषा बोली जा रही थी।
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कन्यादान और उपहार: खुशियों की सौगात
\r\n\r\nहिंदू धर्म में 'कन्यादान' को महादान कहा जाता है। इस सामूहिक विवाह में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने मिलकर कन्यादान की रस्म निभाई। विवाह संपन्न होने के बाद उपहार वितरण का कार्यक्रम शुरू हुआ।
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मुख्य अतिथि भूपेंद्र सिंह और ब्लॉक प्रमुख आकांक्षा चौहान ने अपने हाथों से नवदंपतियों को उपहार भेंट किए। उपहारों में क्या मिला? योजना के अंतर्गत प्रत्येक जोड़े को गृहस्थी शुरू करने के लिए आवश्यक सामग्री दी गई, जिसमें शामिल थे:
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- \r\n बर्तन (स्टील का सेट)\r\n \r\n
- \r\n कपड़े (वधु के लिए साड़ी/सूट और वर के लिए कपड़े)\r\n \r\n
- \r\n बिछिया और पायल (चांदी के आभूषण)\r\n \r\n
- \r\n मोबाइल फोन (कुछ विशेष मामलों में या स्थानीय सहयोग से)\r\n \r\n
- \r\n अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएं।\r\n \r\n
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इसके अलावा, वधु के बैंक खाते में 35,000 रुपये की धनराशि सीधे ट्रांसफर (DBT) की प्रक्रिया शुरू की गई, ताकि वे अपनी नई जिंदगी की शुरुआत में आर्थिक तंगी महसूस न करें।
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शाही दावत: हजारों लोगों का सहभोज
\r\n\r\nकिसी भी भारतीय शादी की जान उसका भोजन होता है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में भी इसका विशेष ध्यान रखा गया था। परी गार्डन में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया था।
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- \r\n वर और वधु पक्ष के साथ आए लगभग 2000-3000 लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था थी।\r\n \r\n
- \r\n भोजन में पूड़ी, सब्जी, पुलाव, दाल, और मिठाई का प्रबंध था।\r\n \r\n
- \r\n सबसे खास बात यह थी कि अधिकारियों, नेताओं और आम जनता ने एक साथ बैठकर भोजन किया, जिससे सामाजिक समानता का संदेश गया।\r\n \r\n
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प्रशासनिक मशीनरी का योगदान: पर्दे के पीछे के नायक
\r\n\r\nइतने विशाल आयोजन को सफल बनाना आसान नहीं होता। इसके पीछे नूरपुर विकास खंड के अधिकारियों और कर्मचारियों की हफ्तों की मेहनत थी। कार्यक्रम का मंच संचालन सहायक विकास अधिकारी (ग्राम विकास) सलीम अहमद ने बेहद सधे हुए अंदाज में किया।
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प्रमुख अधिकारियों की भूमिका:
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- \r\n डॉ. दिनेश पाल शर्मा (BDO): खंड विकास अधिकारी के रूप में उन्होंने पूरी व्यवस्था की निगरानी की। टेंट, भोजन और सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा उन्हीं के कंधों पर था।\r\n \r\n
- \r\n जागेश्वर सिंह (जिला समाज कल्याण अधिकारी): इन्होंने पात्र लाभार्थियों के चयन और सत्यापन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया, ताकि योजना का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे।\r\n \r\n
- \r\n करुणा चौहान (ADO पंचायत) & योगेश कुमार (ADO समाज कल्याण): इन्होंने ग्राम पंचायत स्तर पर सचिवों के साथ समन्वय स्थापित किया और जोड़ों को कार्यक्रम स्थल तक लाने-ले जाने की व्यवस्था देखी।\r\n \r\n
- \r\n अन्य अधिकारी: एकेश्वर सुंदरियाल (ADO कॉपरेटिव), सोमपाल सिंह (ADO कृषि), और एकाउंटेंट गिरीश चंद ने वित्तीय और लॉजिस्टिक प्रबंधन संभाला।\r\n \r\n
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ग्राम सचिवों की फौज: धरातल पर काम करने वाले ग्राम पंचायत सचिवों—नीरज कुमार, सलमान खान, लोकेश, राजकुमार, सोहित, पप्पन, रंजीता, रेखा, विपिन सैनी और विपिन कुमार—ने अपने-अपने क्षेत्र के जोड़ों का पंजीकरण कराया और उन्हें ससम्मान विवाह स्थल तक पहुंचाया।
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राजनीतिक उपस्थिति और सामाजिक सहयोग
\r\n\r\nकार्यक्रम में केवल प्रशासनिक अधिकारी ही नहीं, बल्कि भाजपा संगठन और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी भारी भीड़ रही। यह आयोजन राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन से ज्यादा सामाजिक दायित्व का निर्वहन लग रहा था।
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- \r\n राशु चौहान (समाजसेवी): इन्होंने व्यवस्था में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।\r\n \r\n
- \r\n रवि चौधरी (पूर्व जिलाध्यक्ष युवा मोर्चा): युवाओं की टीम के साथ व्यवस्था संभालते नजर आए।\r\n \r\n
- \r\n धर्मेंद्र सैनी (मंडल अध्यक्ष): स्थानीय संगठन की ओर से अतिथियों का स्वागत किया।\r\n \r\n
- \r\n निशांत कर्णवाल & विनय चौहान: इन नेताओं ने भी अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।\r\n \r\n
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योजना का विश्लेषण: क्यों महत्वपूर्ण है 'मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह'?
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में, जहाँ एक बड़ी आबादी गरीबी रेखा के आसपास जीवन यापन करती है, वहाँ बेटियों की शादी एक बड़ी आर्थिक चुनौती होती है। कई बार कर्ज के जाल में फंसकर किसान आत्महत्या तक कर लेते हैं।
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आंकड़े बोलते हैं:
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- \r\n योजना के तहत 51,000 रुपये प्रति जोड़ा खर्च किया जाता है।\r\n \r\n
- \r\n बिचौलियों की भूमिका खत्म करने के लिए पैसा सीधा बैंक खाते में जाता है।\r\n \r\n
- \r\n विधवा, परित्यक्ता या तलाकशुदा महिलाएं भी इस योजना के तहत पुनर्विवाह कर सकती हैं।\r\n \r\n
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नूरपुर का यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि जब सरकार की नीति और प्रशासन की नियत साफ हो, तो समाज में कितना बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
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विदाई की बेला: नम आँखें और उज्ज्वल भविष्य की कामना
\r\n\r\nदोपहर बाद जब विवाह की रस्में पूरी हुईं और भोजन संपन्न हुआ, तो विदाई का भावुक क्षण आया। एक तरफ माता-पिता की आंखों में बेटी को विदा करने का दुख था, तो दूसरी तरफ इस बात का सुकून था कि उनकी बेटी की शादी बिना किसी कर्ज के, इतने सम्मान के साथ हुई।
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ब्लॉक प्रमुख आकांक्षा चौहान और भाजपा जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने खुद खड़े होकर बेटियों को विदा किया। उन्होंने हर जोड़े को विश्वास दिलाया कि सरकार और प्रशासन भविष्य में भी उनकी मदद के लिए तत्पर रहेगा।
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17 फरवरी 2026 का दिन नूरपुर के इतिहास में दर्ज हो गया। परी गार्डन में आयोजित यह समारोह केवल 235 शादियों का गवाह नहीं बना, बल्कि इसने नए भारत की उस तस्वीर को पेश किया जहाँ सरकार जनता के सुख-दुख की साथी है।
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भूपेंद्र सिंह 'बॉबी' का नेतृत्व और आकांक्षा चौहान की सक्रियता ने यह सुनिश्चित किया कि शासन की मंशा धरातल पर शत-प्रतिशत उतरे। अंततः, 235 नए जोड़े अपने नए जीवन की यात्रा पर निकल पड़े, अपनी झोली में सरकार के उपहार और बड़ों का आशीर्वाद समेटे हुए।
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[विशेष नोट: यह विस्तृत रिपोर्ट नूरपुर में आयोजित वास्तविक कार्यक्रम के विवरणों, उपलब्ध अतिथियों की सूची और मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के मानक प्रावधानों पर आधारित है।]
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