राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में, बिजनौर जनपद न्यायालय परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन किया गया। लोक अदालत का शुभारंभ माननीय जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष, श्री संजय कुमार सप्तम द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए अधिक से अधिक मामलों के त्वरित निस्तारण पर जोर दिया।
विभिन्न न्यायिक अधिकारियों की रही उपस्थिति कार्यक्रम के दौरान प्रधान न्यायाधीश (परिवार न्यायालय) श्री सुधीर कुमार, पीठासीन अधिकारी (मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण) श्री ज्ञान प्रकाश सिंह, स्थायी लोक अदालत की अध्यक्ष श्रीमती किरन बाला, और अपर जनपद न्यायाधीश-प्रथम श्री प्रशांत मित्तल सहित अन्य सभी सम्मानित न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, अधिवक्तागण और चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल के सदस्य भी उपस्थित रहे। जनपद न्यायाधीश ने लोक अदालत में लगे विभिन्न बैंकों के स्टॉलों और प्रदर्शनी का निरीक्षण भी किया।

75 हजार से ज्यादा मुकदमों का हुआ निपटारा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती स्वाति चन्द्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि इस राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 75,530 वादों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया। इस दौरान 11,77,91,935 रुपये (ग्यारह करोड़ सतहत्तर लाख इक्यानवे हजार नौ सौ पैंतीस रुपये) की भारी भरकम समझौता धनराशि दिलाई गई। इसके साथ ही विभिन्न मामलों में 11,91,571 रुपये जुर्माने के रूप में वसूले गए। प्री-लिटिगेशन स्तर पर भी 57,203 वादों का निस्तारण करते हुए 7,42,18,835 रुपये की समझौता धनराशि दिलवाई गई।

विभिन्न न्यायालयों में हुआ मामलों का निस्तारण इस लोक अदालत में माननीय जनपद न्यायाधीश श्री संजय कुमार सप्तम ने स्वयं 4 वादों का निस्तारण किया, जबकि परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश श्री सुधीर कुमार ने 36 मामलों को निपटाया। पीठासीन अधिकारी मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण श्री ज्ञान प्रकाश सिंह ने 35 मामलों का निस्तारण करते हुए 3 करोड़ 15 लाख से अधिक की समझौता राशि दिलवाई। वहीं अतिरिक्त न्यायालय (138 एनआई एक्ट) के श्री सुन्दर लाल ने 34 वादों में 1 करोड़ 8 लाख से अधिक का समझौता कराया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) सुश्री प्रीति चौधरी ने सर्वाधिक 3420 वादों का निस्तारण करते हुए 4,46,360 रुपये का जुर्माना वसूला। इसके अलावा जिले के अन्य सभी अपर जनपद न्यायाधीशों, सिविल जजों और न्यायिक मजिस्ट्रेटों ने भी बड़ी संख्या में वादों का निपटारा कर न्याय प्रक्रिया में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
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