नजीबाबाद (बिजनौर): उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नजीबाबाद इलाके में आवारा कुत्तों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ जहां सरकारें स्मार्ट सिटी और बेहतर नागरिक सुविधाओं के दावे करती हैं, वहीं नजीबाबाद की कच्ची गढ़ी में एक दिल दहला देने वाली घटना ने प्रशासन की पोल खोलकर रख दी है। यहाँ स्कूल से घर लौट रहे एक 10 वर्षीय मासूम छात्र पर आवारा कुत्तों के एक खूनी झुंड ने जानलेवा हमला कर उसे लहूलुहान कर दिया। कुत्तों ने मासूम को इस कदर घेरकर काटा कि उसके हाथ और पैरों में गहरे जख्म हो गए हैं। यह घटना नजीबाबाद के मौजमपुर तुलसी के कच्ची गढ़ी क्षेत्र की है, जहाँ अब दहशत इस कदर फैल गई है कि लोग अपने बच्चों को स्कूल भेजने से भी डर रहे हैं।READ ALSO:-बिजनौर में खौफनाक हादसा: शेरकोट में बंदर का शिकार करने पेड़ पर चढ़ा गुलदार, हाईटेंशन लाइन ने ली जान; सड़क किनारे मिला 5 साल के 'जंगल के राजा' का शव
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घटना का विवरण: खौफ का वो मंजर जब मासूम की चीखें गूंजी

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स्थानीय सूत्रों और परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, कच्ची गढ़ी निवासी 10 वर्षीय हादी स्कूल से छुट्टी होने के बाद पैदल ही घर लौट रहा था। वह अपने घर के करीब पहुंचने ही वाला था कि तभी कच्ची गढ़ी क्षेत्र में अचानक चार-पांच आवारा कुत्तों के झुंड ने उसे घेर लिया। हादी अभी कुछ समझ पाता, उससे पहले ही कुत्तों ने उस पर हमला बोल दिया।
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कुत्तों के खूनी झुंड ने मासूम को जमीन पर गिरा दिया और उसके हाथ व पैरों पर बुरी तरह काटना शुरू कर दिया। मासूम अपनी जान बचाने के लिए चीखने-चिल्लाने लगा, लेकिन कुत्ते उसे छोड़ने को तैयार नहीं थे। हादी की चीखें सुनकर आसपास के घरों से लोग दौड़कर बाहर आए। लोगों ने डंडों और पत्थरों से कुत्तों को खदेड़कर मासूम को उनकी गिरफ्त से छुड़ाया। तब तक हादी कुत्तों के गहरे जख्मों के कारण पूरी तरह लहूलुहान हो चुका था और बेहोशी की हालत में था।
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तुरंत सरकारी अस्पताल में भर्ती: हालत नाजुक, चल रहा इलाज

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जैसे ही कुत्तों को खदेड़ा गया, लहूलुहान हादी को देखकर परिजनों में कोहराम मच गया। स्थानीय लोगों की मदद से परिजन घायल छात्र को तुरंत उपचार के लिए नजीबाबाद के सरकारी अस्पताल लेकर भागे। अस्पताल में आपातकालीन इकाई के डॉक्टरों ने हादी की गंभीर हालत को देखते हुए उसे तुरंत भर्ती कर लिया।
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डॉक्टरों के अनुसार, हादी के दोनों पैरों और एक हाथ पर कुत्तों ने गहरे जख्म किए हैं, जिसके लिए उसे एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) और एंटी-रेबीज सिरम (ARS) दिया जा रहा है। जख्म गहरे होने के कारण उसकी रिकवरी में समय लग सकता है। मासूम इस वक्त गहरे सदमे में है।
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इलाके में भारी दहशत: माँ-बाप लॉक कर रहे दरवाजे, बच्चे स्कूल जाने से कतरा रहे

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इस खौफनाक वारदात के बाद कच्ची गढ़ी और आसपास के मौजमपुर तुलसी क्षेत्र में दहशत का माहौल है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है जब कुत्तों ने किसी बच्चे या राहगीर को निशाना बनाया है। कच्ची गढ़ी में आवारा कुत्तों के कई झुंड लगातार घूम रहे हैं, जिससे लोगों का घर से निकलना दुभर हो गया है।
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सबसे ज्यादा डर बच्चों के अभिभावकों में है। हादी पर हुए हमले के बाद कई माँ-बाप ने अपने बच्चों को स्कूल न भेजने का फैसला किया है। कच्ची गढ़ी की रहने वाली सुशीला देवी ने बताया, "हादी की हालत देखकर हमारी रूह कांप गई है। हमारे बच्चे भी उसी रास्ते से स्कूल जाते हैं। जब तक कुत्तों को पकड़ा नहीं जाता, हम अपने बच्चों को बाहर नहीं भेजेंगे।"
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शाम ढलते ही इलाके में गलियां सूनी हो जाती हैं, क्योंकि कुत्तों के झुंड अंधेरे में और भी ज्यादा खूंखार हो जाते हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने कई बार इस समस्या के बारे में संबंधित पार्षदों और पालिका अधिकारियों को सूचित किया है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
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प्रशासन की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल: क्या मासूमों की जान इतनी सस्ती है? 

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हादी पर हुए इस हमले के बाद नजीबाबाद नगर पालिका और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कच्ची गढ़ी के लोगों में भारी आक्रोश है। उनका आरोप है कि नजीबाबाद नगर पालिका प्रशासन आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए पशु जन्म नियंत्रण (ABC - Animal Birth Control) कार्यक्रम को लागू करने में पूरी तरह विफल रहा है।
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स्थानीय निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद अरशद ने कहा, "यह प्रशासन की घोर लापरवाही है। जब बार-बार ऐसी घटनाएं हो रही हैं, तो पालिका प्रशासन कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का अभियान क्यों नहीं चलाता? क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? अगर हादी की जान चली जाती, तो उसका जिम्मेदार कौन होता?"
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गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के कड़े दिशा-निर्देशों के बावजूद, ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में आवारा कुत्तों के प्रबंधन का काम भगवान भरोसे है। नजीबाबाद पालिका के रिकॉर्ड में भी शायद ही कोई समर्पित ABC इकाई हो, जो इस समस्या का वैज्ञानिक और मानवीय समाधान कर सके।
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नजीबाबाद में कुत्तों का आतंक नया नहीं: क्या प्रशासन को याद है पुरानी घटनाएं?

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नजीबाबाद के स्थानीय लोगों के अनुसार, इससे पहले भी कई घटनाएं हो चुकी हैं। कुछ महीने पहले मौजमपुर तुलसी में ही एक बुजुर्ग महिला को कुत्तों ने काट लिया था। उस समय भी प्रशासन ने कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन कुछ दिन बाद समस्या जस की तस हो गई।
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प्रशासन की यह चुप्पी स्थानीय लोगों को और भी ज्यादा भयभीत कर रही है। उनका मानना है कि जब तक कोई अधिकारी इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकालता, तब तक कच्ची गढ़ी के बच्चे सुरक्षित नहीं हैं।
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राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय context: एक गंभीर राष्ट्रीय समस्या का हिस्सा

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नजीबाबाद की यह घटना कोई इकलौती घटना नहीं है। यह भारत भर में और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में गहराते आवारा कुत्ते (Stray Dog Menace) संकट का एक और लक्षण है। भारत में आवारा कुत्तों की आबादी दुनिया में सबसे ज्यादा है, एक अनुमान के मुताबिक भारत में करीब 6.2 करोड़ आवारा कुत्ते हैं।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में रेबीज से होने वाली मौतों में से लगभग 36% भारत में होती हैं, जो सालाना 18,000 से 20,000 के बीच है। इनमें से अधिकांश पीड़ित 15 साल से कम उम्र के बच्चे होते हैं, क्योंकि वे आसानी से कुत्तों के हमले का शिकार बन जाते हैं।
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उत्तर प्रदेश में भी लगातार बढ़ रहे हमले:

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नजीबाबाद की घटना ने उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों में हुई हालिया खौफनाक वारदातों की याद दिला दी है:
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    नोएडा की सोसाइटी: कुछ समय पहले नोएडा वेस्ट की एक हाई-राइज़ सोसाइटी में एक लिफ्ट के अंदर और फेज-2 पार्क में एक रेजिडेंट पर आवारा कुत्तों ने हमला कर दिया था, जिसका CCTV वीडियो वायरल हुआ था।
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    मेरठ की घटना: मेरठ के कंकरखेड़ा क्षेत्र में कुत्तों ने एक बच्चे को बुरी तरह नोंच डाला था।
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    कानपुर गोशाला: कानपुर के सरवनखेड़ा में आवारा कुत्तों ने गोशाला में घुसकर बछड़ों पर हमला किया था, जिससे दो बछड़ों की मौत हो गई थी।
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ये सभी घटनाएं दर्शाती हैं कि यह समस्या केवल नजीबाबाद तक सीमित नहीं है, बल्कि एक व्यापक प्रणालीगत विफलता (systemic failure) है।
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कानूनी पेंच: क्या कहता है कानून और क्यों प्रशासन है पंगु?

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नजीबाबाद में हादी पर हुए हमले के बाद कई लोग कुत्तों को मारने की मांग कर रहे हैं, लेकिन भारतीय कानून ऐसा करने की इजाजत नहीं देता। आवारा कुत्तों का मुद्दा दो परस्पर विरोधी विचारधाराओं—सार्वजनिक सुरक्षा और पशु कल्याण—के बीच फंसा हुआ है।
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    पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960: यह कानून जानवरों के प्रति क्रूरता को अपराध मानता है। इस अधिनियम के तहत आवारा कुत्तों को मारना, उन्हें जहर देना या उन्हें एक जगह से दूसरी जगह विस्थापित करना अवैध है।
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    ABC Rules, 2023: केंद्र सरकार ने पशु जन्म नियंत्रण (ABC - Animal Birth Control) नियम, 2023 अधिसूचित किए हैं, जिसके तहत नगर पालिकाओं और नगर निगमों की यह जिम्मेदारी है कि वे आवारा कुत्तों की आबादी को केवल नसबंदी (Sterilization) और टीकाकरण (Vaccination) के माध्यम से नियंत्रित करें। कानून के अनुसार, नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को उसी इलाके में छोड़ना अनिवार्य है जहाँ से उन्हें पकड़ा गया था।
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नजीबाबाद पालिका इसी कानूनी ढांचे का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बचती रही है। अधिकारियों का तर्क है कि वे कुत्तों को नहीं मार सकते और न ही उन्हें विस्थापित कर सकते हैं, और नसबंदी कार्यक्रम के लिए उनके पास न तो फंड है और न ही विशेषज्ञता। इस प्रशासनिक पंगुपन का खामियाजा हादी जैसे मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।
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वैज्ञानिक समाधान: 'पशु जन्म नियंत्रण' (ABC) कार्यक्रम ही एकमात्र रास्ता

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आवारा कुत्तों की समस्या का कोई जादुई समाधान नहीं है। दुनिया भर में यह साबित हो चुका है कि कुत्तों को मारने या विस्थापित करने से समस्या हल नहीं होती, बल्कि वे और भी ज्यादा आक्रामक हो जाते हैं। वैज्ञानिक और मानवीय समाधान केवल बड़े पैमाने पर और वैज्ञानिक तरीके से ABC (Animal Birth Control) कार्यक्रम को लागू करना है।
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ABC कार्यक्रम के चरण:

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    Catch-Neuter-Vaccinate-Release (CNVR): कुत्तों को मानवीय तरीके से पकड़ना, उनकी नसबंदी करना, उन्हें रेबीज के खिलाफ टीका लगाना और ठीक होने के बाद उन्हें उसी स्थान पर वापस छोड़ना।
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    प्रभावी कचरा प्रबंधन: आवारा कुत्तों की आबादी उन जगहों पर तेजी से बढ़ती है जहाँ कचरा खुले में पड़ा रहता है, जिससे उन्हें भोजन मिलता है। नजीबाबाद में प्रभावी कचरा प्रबंधन से कुत्तों की आबादी को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
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    सार्वजनिक जागरूकता: स्थानीय निवासियों को जागरूक करना कि वे कुत्तों के प्रति कैसा व्यवहार करें और रेबीज से कैसे बचें।
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नजीबाबाद प्रशासन को एक समर्पित ABC इकाई स्थापित करनी होगी और इस कार्यक्रम को प्राथमिकता देनी होगी।
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रेबीज और डॉग बाइट: मिथक, सच और उपाय (नागरिकों के लिए विशेष)

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नजीबाबाद में हादी पर हुए हमले के बाद लोगों में रेबीज को लेकर भी भारी खौफ है। रेबीज एक 100% घातक लेकिन 100%预防 करने योग्य बीमारी है। नागरिकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण जानकारी यहाँ दी गई है:
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  • मिथक: केवल पागल कुत्ते के काटने से रेबीज होता है। सच: कोई भी आवारा या पालतू कुत्ता जो रेबीज से संक्रमित है, वह काट कर या खरोंच कर रेबीज फैला सकता है। सभी डॉग बाइट मामलों को गंभीर माना जाना चाहिए। 
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  • मिथक: कुत्ते के काटने पर हल्दी, तेल या चूना लगाने से जहर उतर जाता है। सच: ये सब मिथक हैं। ऐसा करने से संक्रमण और भी ज्यादा फैल सकता है और डॉक्टर को जख्म की गंभीरता का अंदाजा नहीं मिल पाता।
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कुत्ते के काटने के तुरंत बाद क्या करें (What to do immediately after a Dog Bite):

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    जख्म को धोएं: कुत्ते के काटते ही सबसे पहले जख्म को बहते पानी के नीचे कम से कम 10-15 मिनट तक साबुन के साथ अच्छी तरह धोएं। इससे कुत्तों की लार में मौजूद 80% वायरस खत्म हो जाता है।
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  2. \r\n
  3. \r\n
    एंटीसेप्टिक लगाएं: धोने के बाद जख्म पर पॉविडोन आयोडीन या कोई अन्य एंटीसेप्टिक लगाएं।
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  5. \r\n
    जख्म को न बांधें: डॉग बाइट के जख्म को खुला रखना चाहिए, उसे बांधना नहीं चाहिए, क्योंकि वायरस हवा के संपर्क में आने से जल्दी खत्म होता है।
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  6. \r\n
  7. \r\n
    तुरंत डॉक्टर से मिलें: बिना समय बर्बाद किए अस्पताल जाएं और डॉक्टरों से मिलें। डॉक्टर आपको एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) और एंटी-रेबीज सिरम (ARS) देंगे।
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    वैक्सीन का कोर्स पूरा करें: ARV के कुल 5 इंजेक्शन होते हैं (0, 3, 7, 14, 28 दिन)। पूरा कोर्स पूरा करना अनिवार्य है।
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प्रशासन के लिए Call for Action: कब जागेगा नजीबाबाद प्रशासन?

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कच्ची गढ़ी की घटना ने नजीबाबाद के लोगों के धैर्य का इम्तिहान ले लिया है। अब प्रशासन को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई करनी होगी।
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    Dedicated ABC Team: बिजनौर के जिलाधिकारी और नगर पालिका आयुक्त को नजीबाबाद के लिए एक समर्पित ABC टीम और एम्बुलेंस की व्यवस्था करनी चाहिए, जो तुरंत कुत्तों को पकड़ने और नसबंदी का अभियान शुरू करे।
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    हॉटस्पॉट की पहचान: कच्ची गढ़ी, मौजमपुर तुलसी और अन्य हॉटस्पॉट इलाकों की पहचान कर वहाँ तुरंत अभियान चलाया जाना चाहिए।
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    सरकारी अस्पताल में सुविधाएं: नजीबाबाद के सरकारी अस्पताल में एंटी-रेबीज वैक्सीन और सिरम का पर्याप्त स्टॉक हमेशा उपलब्ध रहना चाहिए, ताकि हादी जैसे बच्चों को इलाज में देरी न हो।
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नजीबाबाद के कच्ची गढ़ी में 10 वर्षीय हादी पर हुआ कुत्तों का हमला एक गंभीर मानवीय संकट है। यह घटना प्रशासन के लिए एक वेक-अप कॉल है। जब तक प्रशासन इस समस्या का वैज्ञानिक और स्थायी समाधान नहीं निकालता, तब तक नजीबाबाद के बच्चे सुरक्षित नहीं हैं। लोगों में फैला खौफ और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश तब तक शांत नहीं होगा, जब तक कि गलियां मासूम बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं हो जातीं। पूरा बिजनौर और विशेष रूप से नजीबाबाद प्रशासन अब इस घटना के बाद की कार्रवाई के लिए जवाबदेह है।
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