बिजनौर (Bijnor News): उत्तर प्रदेश का बिजनौर जिला इन दिनों इंसानों और वन्यजीवों के बीच खूनी संघर्ष का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। गन्ने के लहलहाते खेत अब किसानों के लिए आजीविका का साधन कम और मौत का जाल ज्यादा नजर आने लगे हैं। जिले में 'गुलदार' (Leopard/तेंदुए) का खौफ इस कदर हावी है कि किसानों ने अपने ही खेतों में जाना छोड़ दिया है। ताजा और दिल दहला देने वाला मामला बिजनौर के थाना हीमपुर दीपा क्षेत्र से सामने आया है, जहाँ दिनदहाड़े खेत में काम कर रहे दो किसानों पर घात लगाए बैठे एक विशालकाय गुलदार ने जानलेवा हमला कर दिया।READ ALSO:-मेरठ में इंटरनेशनल 'क्रिप्टो-साइबर' ठगों का भंडाफोड़: गरीबों के 100 खातों से करोड़ों की हेराफेरी, विदेश तक फैले हैं तार
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इस अचानक हुए खौफनाक हमले में दोनों किसान बुरी तरह से जख्मी हो गए हैं और उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दिन के उजाले में हुई इस दुस्साहसिक घटना ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। ग्रामीण अब समूह में और लाठी-डंडे लेकर ही घरों से बाहर निकलने को मजबूर हैं।
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क्या है पूरी घटना? कैसे गुलदार ने बनाया शिकार
\r\n\r\nप्राप्त जानकारी के अनुसार, यह रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना थाना हीमपुर दीपा (Heempur Deepa) क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम अजुपुरा (Gram Ajupura) की है। गांवों में इन दिनों खेतों में कृषि कार्य जोरों पर चल रहा है।
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- \r\n खेत में रोजमर्रा का काम: मंगलवार की सुबह गांव के ही रहने वाले दो मेहनतकश किसान— संदीप और मुनीश, अपने रोजमर्रा के कृषि कार्यों को निपटाने के लिए अपने खेतों की ओर गए थे। दोनों किसान अपने खेत में निराई-गुड़ाई और फसल की देखरेख के काम में व्यस्त थे।\r\n \r\n
- \r\n घात लगाए बैठा था 'शिकारी': उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि पास ही खड़ी गन्ने की घनी फसल के बीच एक आदमखोर गुलदार घात लगाए बैठा है। गन्ने के खेत गुलदारों के लिए सबसे सुरक्षित छिपने की जगह (Safe Haven) माने जाते हैं, क्योंकि इनकी सघनता में उन्हें आसानी से देखा नहीं जा सकता।\r\n \r\n
- \r\n अचानक और खौफनाक हमला: प्रत्यक्षदर्शियों और घायल किसानों के मुताबिक, जब वे दोनों खेत की मेड़ के पास काम कर रहे थे, तभी गन्ने के खेत से अचानक एक विशालकाय गुलदार बिजली की फुर्ती से बाहर निकला। इससे पहले कि संदीप और मुनीश कुछ समझ पाते या वहां से भागने का प्रयास करते, गुलदार ने उन पर सीधा और जानलेवा हमला बोल दिया।\r\n \r\n
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खेत में मचा मौत का तांडव, लहूलुहान हुए संदीप और मुनीश
\r\n\r\nगुलदार का हमला बेहद आक्रामक था। उसने अपने नुकीले पंजों और दांतों से किसानों पर ताबड़तोड़ वार करने शुरू कर दिए।
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- \r\n जिंदगी और मौत की जंग: अपनी जान बचाने के लिए संदीप और मुनीश ने निहत्थे ही उस खूंखार जानवर से मुकाबला करने की कोशिश की। इस खूनी संघर्ष में गुलदार ने दोनों किसानों के हाथ, पैर और शरीर के अन्य हिस्सों पर गहरे घाव कर दिए।\r\n \r\n
- \r\n चीख-पुकार और ग्रामीणों की दौड़: मौत को सामने देखकर दोनों किसानों ने पूरी ताकत से शोर मचाना शुरू कर दिया। उनकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के खेतों में काम कर रहे अन्य किसान तुरंत लाठी-डंडे, फावड़े और दरांती लेकर उनकी मदद के लिए दौड़ पड़े।\r\n \r\n
- \r\n गुलदार का जंगल में भागना: ग्रामीणों की भारी भीड़ को अपनी ओर आता देख और शोर-शराबा सुनकर गुलदार घबरा गया। वह दोनों किसानों को लहूलुहान हालत में छोड़कर वापस गन्ने के घने खेतों में ओझल हो गया।\r\n \r\n
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घायल अस्पताल में भर्ती, हालत स्थिर लेकिन गहरा सदमा
\r\n\r\nगुलदार के हमले से संदीप और मुनीश पूरी तरह से खून से लथपथ हो चुके थे। ग्रामीणों ने बिना कोई समय गंवाए तुरंत दोनों घायलों को संभाला और आनन-फानन में उन्हें इलाज के लिए नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाया गया।
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प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया है। अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, दोनों किसानों के शरीर पर गुलदार के पंजों और दांतों के गहरे निशान हैं। फिलहाल उनका इलाज चल रहा है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन इस खौफनाक अनुभव के कारण दोनों गहरे मानसिक सदमे (Trauma) में हैं।
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वन विभाग की 'कुंभकर्णी नींद' और ग्रामीणों में भारी आक्रोश
\r\n\r\nइस घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई, लेकिन ग्रामीणों का सबसे ज्यादा गुस्सा वन विभाग (Forest Department) की कार्यप्रणाली पर है।
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- \r\n लापरवाही का आरोप: अजुपुरा और आसपास के ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पिछले कई दिनों से इलाके में गुलदार की चहलकदमी देखी थी और कई बार वन विभाग के अधिकारियों को इसकी सूचना भी दी थी। इसके बावजूद वन विभाग ने न तो इलाके में कोई कॉम्बिंग (गश्त) की और न ही गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया।\r\n \r\n
- \r\n रोजी-रोटी पर संकट: दिनदहाड़े हुए इस हमले के बाद किसानों के सामने रोजी-रोटी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। अगर किसान डर के मारे खेतों में काम करने नहीं जाएंगे, तो उनकी फसल बर्बाद हो जाएगी और उनके परिवारों के सामने भूखों मरने की नौबत आ जाएगी।\r\n \r\n
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ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:
\r\n\r\nगुस्साए ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग के सामने कुछ सख्त मांगें रखी हैं:
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- \r\n पिंजरा और कैमरा ट्रैप: अजुपुरा और आसपास के खेतों में तुरंत पिंजरे (Cages) और नाइट विजन कैमरे लगाए जाएं ताकि इस खूंखार गुलदार को जल्द से जल्द पकड़ा जा सके।\r\n \r\n
- \r\n वन विभाग की गश्त: इलाके में वन विभाग की टीम लगातार गश्त करे और किसानों को सुरक्षा का भरोसा दिलाए।\r\n \r\n
- \r\n मुआवजा: घायल किसानों संदीप और मुनीश के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाए और उन्हें उचित आर्थिक मुआवजा प्रदान किया जाए।\r\n \r\n
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बिजनौर क्यों बन रहा है गुलदारों का 'हॉटस्पॉट'?
\r\n\r\nबिजनौर जिले का एक बड़ा हिस्सा जंगलों और अमानगढ़ टाइगर रिजर्व (Amangarh Tiger Reserve) से सटा हुआ है। इसके अलावा, यहाँ गन्ने की खेती बहुत बड़े पैमाने पर होती है। लगातार घटते जंगलों और भोजन की तलाश में गुलदार और तेंदुए अब इंसानी बस्तियों और गन्ने के खेतों को अपना स्थायी ठिकाना बना रहे हैं। गन्ने के खेतों में उन्हें छिपने के लिए सुरक्षित जगह और शिकार के रूप में आवारा कुत्ते या मवेशी आसानी से मिल जाते हैं। यही कारण है कि बिजनौर में मानव-वन्यजीव संघर्ष (Man-Animal Conflict) की घटनाएं हर दिन का हिस्सा बन गई हैं।
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थाना हीमपुर दीपा के अजुपुरा गांव की यह घटना एक सख्त चेतावनी है। प्रशासन और वन विभाग को अब कागजी कार्रवाई से बाहर निकलकर जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाने होंगे। यदि समय रहते इस गुलदार को नहीं पकड़ा गया, तो यह किसी बड़े और जानलेवा हादसे का कारण बन सकता है। फिलहाल, गांव के लोग खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं और प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं कि कब उन्हें इस दहशत से मुक्ति मिलेगी।
Sabse pehle comment karne wale banein.