लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से संबद्ध क्वीन मेरी अस्पताल में कार्यरत एक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर ने अपने सीनियर डॉक्टर पर गंभीर छेड़छाड़ के आरोप लगाए हैं। यह घटना अस्पताल जैसे सुरक्षित माने जाने वाले कार्यस्थल की मर्यादा पर सवाल खड़े करती है।READ ALSO:-बिजनौर के लिए 'समृद्धि सूत्र': किसान, व्यापारी और युवाओं के लिए उन्नति के 5 स्तंभ
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घटना का विवरण और आरोप
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    पीड़िता: क्वीन मेरी अस्पताल की जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर (द्वितीय वर्ष की छात्रा), कश्मीर की रहने वाली और शेड्यूल ट्राइब (ST कम्युनिटी) से ताल्लुक रखती है।
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    आरोपी: ICU इंचार्ज (पुरुष डॉक्टर)।
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    घटना की तिथि: 17 सितंबर।
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    आरोप: रेजिडेंट डॉक्टर एचडीयू से मरीज को ICU में शिफ्ट कराने की जानकारी देने ICU इंचार्ज के चैंबर में गई थी। आरोप है कि सीनियर डॉक्टर ने उनका हाथ पकड़ा और कहा, "तुम मुझे अच्छी लगती हो।" पीड़िता ने यह भी बताया कि इससे पहले सीनियर डॉक्टर उसे फोन भी करता था।
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शिकायत और कार्रवाई में देरी
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    प्रारंभिक सूचना: घटना के तुरंत बाद, घबराई हुई पीड़िता ने अपनी आपबीती विभाग की चार सीनियर फैकल्टी और रेजिडेंट इंचार्ज को सुनाई।
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    लिखित शिकायत: शुरूआती सूचना के बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर, पीड़िता ने 19 सितंबर को क्वीन मेरी प्रशासन को पाँच पेज की लिखित शिकायत सौंपी।
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    पलायन: कार्रवाई न होने से निराश होकर जूनियर डॉक्टर उसी दिन लखनऊ से अपने घर वापस लौट गईं। बाद में उन्होंने KGMU को लीगल नोटिस भी भिजवाया।
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    आश्चर्यजनक तथ्य: पीड़िता ने इस बात पर आपत्ति जताई है कि क्वीन मेरी, जो पूरी तरह महिलाओं को समर्पित अस्पताल है, उसके ICU का प्रमुख एक पुरुष डॉक्टर को बनाया गया है।
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KGMU प्रशासन की कार्रवाई
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    जाँच: पीड़िता की लिखित शिकायत मिलने के बाद KGMU प्रशासन ने तुरंत मामले की जाँच विशाखा कमेटी (कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों की जांच करने वाली कमेटी) को सौंप दी।
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    वर्तमान स्थिति: KGMU के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि विशाखा कमेटी ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपनी जाँच पूरी कर ली है। कमेटी ने आरोपी सीनियर डॉक्टर पर क्या कार्रवाई की जानी चाहिए, इसकी सिफारिशें कुलसचिव के समक्ष भेज दी हैं।
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प्रशासन का कहना है कि कमेटी की सिफारिशों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह मामला KGMU में महिला सुरक्षा और कार्यस्थल पर उत्पीड़न की रोकथाम के नियमों पर गंभीर सवाल उठाता है।
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