जबलपुर/बिजनौर (8 अप्रैल 2026): आपने हॉलीवुड या बॉलीवुड की थ्रिलर फिल्मों में अक्सर देखा होगा कि पुलिस से बचने के लिए मुजरिम पानी के अंदर छिप जाते हैं और सांस लेने के लिए पाइप का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन मंगलवार की शाम मध्य प्रदेश के जबलपुर में जो हुआ, उसने पुलिस के भी होश उड़ा दिए। यह कोई फिल्मी सीन नहीं, बल्कि असल जिंदगी का एक ऐसा रोंगटे खड़े कर देने वाला ड्रामा था, जिसका मुख्य किरदार उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले का एक पूर्व 'माननीय' (पार्षद) निकला।READ ALSO:-बिजनौर में विजिलेंस का 'ऑपरेशन क्लीन': विकास भवन में DPRO 20 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार, भ्रष्ट अधिकारियों में मचा हड़कंप!
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पुलिस की आंखों में धूल झोंककर 5 घंटे तक पानी के भीतर 'कमल की डंठल' (कमल-नाल) के सहारे जिंदा रहने वाले इस शातिर सुपरचोर को जब आरपीएफ (RPF) और गोताखोरों की टीम ने पानी से बाहर निकाला, तो जो खुलासे हुए, उन्होंने 8 राज्यों की पुलिस की नींद उड़ा दी। यह शख्स देशभर में 400 से ज्यादा चोरियों को अंजाम दे चुका है।
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कैसे शुरू हुआ यह हाई-वोल्टेज ड्रामा? ट्रेन के AC कोच से तालाब तक की दौड़

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इस खौफनाक ड्रामे की शुरुआत मंगलवार शाम को मध्य प्रदेश के रेल खंड पर दौड़ रही 'रीवा-इतवारी एक्सप्रेस' (Rewa-Itwari Express) से हुई।
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आरोपी हमेशा की तरह एक वीआईपी (VIP) यात्री बनकर ट्रेन के एसी (AC) कोच में घुसा था। उसका निशाना कोच में बैठी एक महिला यात्री का कीमती पर्स था। लेकिन इस बार उसकी किस्मत खराब थी। चोरी की कोशिश करते समय वह रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवानों की नजर में आ गया। जवानों ने उसे पकड़ने की कोशिश की, लेकिन यह शातिर चोर बेहद फुर्तीला निकला।
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 आरोपी को आरपीएफ के हवाले कर दिया गया।

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जैसे ही ट्रेन सिहोरा रोड रेलवे स्टेशन के पास पहुंची और उसकी रफ्तार थोड़ी धीमी हुई, आरोपी ने पुलिस को चकमा देकर चलती ट्रेन से छलांग लगा दी। RPF के जवानों ने भी हार नहीं मानी और उसका पीछा करना शुरू कर दिया। भागते-भागते आरोपी खितौला इलाके के एक बेहद गहरे और काई (Algae) से भरे तालाब के पास पहुंचा और बचने का कोई रास्ता न देख, सीधे उस गंदे तालाब में कूद गया।
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5 घंटे तक पानी के अंदर 'समाधि': कमल-नाल (Lotus Stem) बनी ऑक्सीजन पाइप!

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रात का अंधेरा घिरने लगा था और तालाब पूरी तरह से शैवाल (काई) से ढका हुआ था। पुलिस ने तालाब के चारों ओर घेराबंदी कर ली, लेकिन आरोपी पानी की सतह पर कहीं नजर नहीं आ रहा था। खितौला थाना पुलिस और गोताखोरों की विशेष टीम को मौके पर बुलाया गया।
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जब गोताखोरों ने पानी में उतरकर रेस्क्यू और सर्च ऑपरेशन शुरू किया, तो उन्हें जो दिखा, उस पर यकीन करना मुश्किल था। शातिर चोर ने खुद को पानी में पूरी तरह से डुबो लिया था और काई के नीचे छिपा हुआ था। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह थी कि वह पानी के अंदर जिंदा रहने के लिए एक खोखली कमल की डंठल (कमल-नाल) का इस्तेमाल कर रहा था। उसने डंठल का एक सिरा मुंह में दबा रखा था और दूसरा सिरा पानी की सतह से जरा सा बाहर था, जिसके जरिए वह बाहर से ऑक्सीजन खींच रहा था।
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करीब 5 घंटे की भारी मशक्कत और लुका-छिपी के खेल के बाद आखिरकार गोताखोरों ने उसे काई के बीच से ढूंढ निकाला और गिरफ्तार कर लिया।
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जब एक पुरानी तस्वीर और "सनी" नाम ने चटखा दिया झूठ का तिलिस्म

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गिरफ्तारी के बाद भी यह शातिर चोर पुलिस को गुमराह करता रहा। जब उसे थाने लाया गया तो उसने बेहद मासूमियत से अपना नाम 'बबलू' और अपना पता 'चंडीगढ़' बताया। पुलिस लगभग उसकी बात पर यकीन करने ही वाली थी कि तभी आरपीएफ थाना प्रभारी राजीव खरब की तेज नजर और शानदार याददाश्त ने खेल पलट दिया।
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इंस्पेक्टर राजीव खरब को अचानक याद आया कि उन्होंने साल 2018 में एक बेहद वांटेड और हाई-प्रोफाइल चोर की तस्वीर अपने मोबाइल फोन में सेव की थी। उन्होंने फोन निकाला और तस्वीर का मिलान किया— चेहरा हूबहू मिल रहा था।
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थाना प्रभारी धीरे से उसके पास गए और अचानक उसे उसके पुराने उपनाम "सनी" कहकर पुकारा। 'सनी' नाम सुनते ही आरोपी सन्न रह गया। उसके चेहरे का रंग उड़ गया और वह समझ गया कि अब उसका खेल खत्म हो चुका है। पुलिस की सख्ती के आगे उसने तुरंत अपना असली नाम और बिजनौर का पूरा राज उगल दिया।
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पार्षद की कुर्सी से जुर्म की दुनिया तक: कौन है बिजनौर का हरविंदर सिंह?

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जांच में जब इस 'सुपरचोर' की असली कुंडली खुली, तो पुलिस के आला अधिकारी भी दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो गए।
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    असली पहचान: आरोपी का असली नाम हरविंदर सिंह (उम्र 32 वर्ष) है। वह उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के हल्दौर इलाके का रहने वाला है।
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    सफेदपोश अपराधी: सबसे बड़ा और सनसनीखेज खुलासा यह है कि हरविंदर कोई सड़क छाप चोर नहीं है, बल्कि वह साल 2017 में बिजनौर के 'हल्दौर नगर निकाय' से निर्दलीय पार्षद (Parshad) का चुनाव जीतकर जनप्रतिनिधि भी रह चुका है! पार्षद की कुर्सी पर बैठने वाला यह शख्स रातों-रात अमीर बनने की चाहत में देश का सबसे बड़ा ट्रेन चोर बन गया।
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    400 चोरियों का रिकॉर्ड: पुलिस पूछताछ में हरविंदर ने कबूल किया है कि वह अब तक देशभर में 400 से ज्यादा चोरियों को अंजाम दे चुका है।
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70 लाख के हीरे और लाइसेंसी पिस्तौल का भी रहा है शौकीन

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हरविंदर सिंह का आपराधिक इतिहास बेहद 'रंगीन' और हाई-प्रोफाइल रहा है:
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    2018 का बड़ा धमाका: साल 2018 में जब पुलिस ने इसे गिरफ्तार किया था, तब इसके पास से 70 लाख रुपये के बेशकीमती हीरे-जवाहरात बरामद हुए थे।
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    हथियारों की चोरी: इसने 'अवंतिका एक्सप्रेस' (Avantika Express) ट्रेन में एक वीआईपी यात्री का सामान उड़ाया था, जिसमें कैश के साथ-साथ एक 'लाइसेंसी पिस्तौल' भी शामिल थी।
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    मॉडस ऑपरेंडी (अपराध का तरीका): हरविंदर हमेशा ट्रेनों के फर्स्ट और सेकेंड क्लास AC कोच को ही अपना निशाना बनाता था। वह बिना टिकट, अच्छे कपड़े पहनकर सफर करता था। टीसी (Ticket Checker) से बचने के लिए वह घंटों ट्रेन के बाथरूम में छिप जाता था।
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8 राज्यों की पुलिस कर रही थी तलाश

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इस पूर्व पार्षद और 'शातिर चोर' हरविंदर सिंह के खिलाफ मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, मुंबई (जीआरपी) समेत 8 अलग-अलग राज्यों में चोरी और डकैती के दर्जनों केस दर्ज हैं। वह इतना शातिर है कि पुलिस ट्रैकिंग से बचने के लिए हर वारदात के बाद अपना सिम कार्ड और मोबाइल फोन बदल देता था। यहां तक कि सफर के दौरान वह कभी भी अपना कोई असली पहचान-पत्र (ID Proof) साथ नहीं रखता था।
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आगे क्या? फिलहाल, जबलपुर की खितौला थाना पुलिस और आरपीएफ की संयुक्त टीम हरविंदर सिंह से पूछताछ कर रही है। पुलिस को उम्मीद है कि उसके कबूलनामे से देशभर में हुई कई बड़ी और अनसुलझी ट्रेन चोरियों का खुलासा हो सकता है। बिजनौर पुलिस को भी उसकी गिरफ्तारी की सूचना दे दी गई है। एक जनप्रतिनिधि से 400 चोरियों के मास्टरमाइंड बनने तक का उसका यह सफर पूरे बिजनौर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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